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: कोडरमा में सनसनी: मासूम बच्चे की हत्या, शव कुएं से बरामद; ग्रामीणों का हंगामा

2 days ago
user_झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
2 days ago

: कोडरमा में सनसनी: मासूम बच्चे की हत्या, शव कुएं से बरामद; ग्रामीणों का हंगामा

More news from Hazaribagh and nearby areas
  • दीवार से गिरा मैकेनिक—मौत, अस्पताल पर सवाल हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में AC लगाते समय मैकेनिक की दर्दनाक मौत। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए किया सड़क जाम।
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    दीवार से गिरा मैकेनिक—मौत, अस्पताल पर सवाल
हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में AC लगाते समय मैकेनिक की दर्दनाक मौत। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए किया सड़क जाम।
    user_News Xpose ( Jishan Raj)
    News Xpose ( Jishan Raj)
    Press Azad Mahalla, Hazaribagh•
    12 hrs ago
  • *रात के अंधेरे में कैलूडीह खटाल एवं आकाशकिनारी खटाल के लोगों के बीच हुई हिंसक झड़प में पुलिस ने 12 नामजद सहित 15 अज्ञात व्यक्तियो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है* *धनबाद:* 14 अप्रैल की रात्रि में छाताबांध-धनबाद मुख्य मार्ग पर कैलूडीह के पास कैलूडीह खटाल एवं आकाशकिनारी खटाल के लोग लाठी डंटा से लैस होकर विधि-विरुद्ध जमावड़ा लगाकर आपस मे मारपीट किए थे। दोनों खटालो के व्यक्तियो द्वारा मुख्य मार्ग पर नजायज मजमा लगाकर बलवा किए जाने से लोक परिशांति भंग हुई, यातायात पूरी तरह अवरुद्ध हो गया जिससे आम नागरिकों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा । उक्त स्थल पर एकत्रित विधी विरुद्ध जमाव द्वारा पुलिस को उसके कर्त्तव्य निर्वहन में भी बाधा उत्पन किया गया। इस घटना के पश्चात उपस्थित पुलिस पदाधिकारी के आवेदन पर 12 नामजद सहित 15 अज्ञात व्यक्तियो के विरुद्ध BNS की सुसंगत धाराओ के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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    *रात के अंधेरे में कैलूडीह खटाल एवं आकाशकिनारी खटाल के लोगों के बीच हुई हिंसक झड़प में पुलिस ने 12 नामजद सहित 15 अज्ञात व्यक्तियो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है*
*धनबाद:* 14 अप्रैल की रात्रि  में छाताबांध-धनबाद मुख्य मार्ग पर कैलूडीह के पास कैलूडीह खटाल एवं आकाशकिनारी खटाल के लोग लाठी डंटा से लैस होकर विधि-विरुद्ध जमावड़ा लगाकर आपस मे मारपीट किए थे। दोनों खटालो के व्यक्तियो द्वारा मुख्य मार्ग पर 
नजायज मजमा लगाकर बलवा किए जाने से लोक परिशांति भंग हुई, यातायात पूरी तरह अवरुद्ध हो गया जिससे आम नागरिकों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा । उक्त स्थल पर एकत्रित विधी विरुद्ध जमाव द्वारा पुलिस को उसके कर्त्तव्य निर्वहन में भी बाधा उत्पन किया गया। इस घटना के पश्चात उपस्थित पुलिस पदाधिकारी के आवेदन पर 12 नामजद सहित 15 अज्ञात व्यक्तियो के विरुद्ध BNS की सुसंगत धाराओ के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
    user_Public News JH
    Public News JH
    Local News Reporter Chisti Nagar, Hazaribagh•
    15 hrs ago
  • -- हजारीबाग। ओम आरोह्णम संस्था की संस्थापिका एवं भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसे नए युग की शुरुआत करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी प्रदान करता है। शेफाली गुप्ता ने कहा कि इस अधिनियम के लागू होने से शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महिलाओं की प्राथमिकता और भागीदारी बढ़ेगी, जिससे समाज के समग्र विकास को गति मिलेगी। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होगा। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही समाज की एकजुटता और देश के उत्थान का आधार है। कहा कि हर घर का विकास ही देश के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हृदय से धन्यवाद दिया और उनके प्रयासों की सराहना की।
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हजारीबाग। ओम आरोह्णम संस्था की संस्थापिका एवं भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसे नए युग की शुरुआत करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी प्रदान करता है।
शेफाली गुप्ता ने कहा कि इस अधिनियम के लागू होने से शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महिलाओं की प्राथमिकता और भागीदारी बढ़ेगी, जिससे समाज के समग्र विकास को गति मिलेगी। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होगा।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण ही समाज की एकजुटता और देश के उत्थान का आधार है। कहा कि हर घर का विकास ही देश के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस महत्वपूर्ण पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हृदय से धन्यवाद दिया और उनके प्रयासों की सराहना की।
    user_Ejaj Alam
    Ejaj Alam
    Press हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    17 hrs ago
  • जल पखवाड़ा 2026 के तहत जी.एम. महाविद्यालय इचाक में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन
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    जल पखवाड़ा 2026 के तहत जी.एम. महाविद्यालय इचाक में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन
    user_झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
    हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    21 hrs ago
  • हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
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    हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में एसी मिस्त्री मो. सलीम उर्फ गुड्डू की गिरने से मौत हो गई। 
परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान कोई सेफ्टी सुविधा नहीं दी गई थी। 
घटना के विरोध में परिजनों ने सदर अस्पताल गेट के सामने जाम कर दिया और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की।
    user_Abhay Kumar Singh
    Abhay Kumar Singh
    पत्रकार हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    22 hrs ago
  • विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
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    विक्की मंडल और डॉली सिंह की शानदार अभिनय से सजी यह फिल्म समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    22 hrs ago
  • ✍रंजन चौधरी सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है। यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं। झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
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    ✍रंजन चौधरी
सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र। 
हजारीबाग। वैसे तो सभी पर्व-त्योहार आस्था व विश्वास का प्रतीक होता हैं, परंतु झारखंड के मूल वासी जाती और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में मनाया जाने वाला मंडा पर्व उत्सव में आस्था की ऐसी अविरल धारा बहती है कि भोक्ता (व्रती) फुलखुंदी (दहकते अंगारों) में ऐसे चलते हैं मानो वह अंगारा नहीं, बल्कि फूल बिछा हो। अपने शरीर में लोहे के बड़े-बड़े कील चुभोकर ऐसे हवा में झूलते हैं मानो वे सावन के महीने में झूले का आनंद ले रहे हों। इस पूजा में मुख्यतः भगवान शिव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की जाती है। फुलखुंदी (दहकते अंगारों) के नियम से कुछ दिन पहले से ही भोक्ता भगवान शिव की पूजा में जुट जाते हैं। यह पर्व झारखंड राज्य के बोकारो, धनबाद, गिरीडीह, रामगढ़, हजारीबाग, रांची, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसांवा, खूंटी सहित दर्जनों जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आस्था व विश्वास के साथ उल्लासपूर्वक वैशाख माह में मनाया जाता है। मंडा पर्व को लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम से यथा भोक्ता पर्व, चड़क पूजा, चैत पर्व, बनस पर्व आदि कई नामों से जानते हैं। इस त्यौहार में भक्ति, आस्था और लोगों के हैरतअंगेज कारनामे का संयुक्त प्रदर्शन होता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा राज्य के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में यहां की पौराणिक संस्कृति और सभ्यता की अमित झलक इस त्यौहार के माध्यम से देखने को मिलती है।
यह पर्व वैशाख माह के अक्षय तृतीया से आरंभ होता है। आमधारणा के अनुसार यह पर्व कलयुग में भी सत्य का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भगवान की आराधना एक अनोखी शैली द्वारा महादेव मंडा के समक्ष किया जाता है। यह त्योहार राज्य के सदान और आदिवासी दोनों में सामान्य रूप से प्रचलित है। त्यौहार में घर का एक सदस्य जो व्रती होता है, भगता (भोक्ता) कहलाता है। उसकी मां या बहन उपवास रखती है जिसे सोखताईन कहा जाता है। त्योहार के दौरान तीन दिन तक उपवास रखकर चौथा दिन फुलखुंदी होता है। इस दिन भोक्ता द्वारा शषटांड दंड, मशाल जुलूस, तपती दोपहर की गर्मी में आग में चलना तथा अपने पीठ, पैर व जि‌ह्वा में लोहे का कील भोंकंदा कर डांग या ख़ुट्टा (लट्ठे) की सहायता से लगभग 35-40 फीट ऊपर नाचते हुए चारों ओर झूलते रहना रोंगटे खड़ा कर देने वाला अ‌द्भुत नजारा को हजारों-लाखों लोग उपस्थित होकर देखते हैं। जहां आधुनिक युग में एक सूई या पिन चुभने पर टेटनस की सुई लेने की आवश्यकता होती है। वहीं आज भी हजारों-लाखों लोग ऐसे हैं जो वर्षों से शक्ति के इस महापर्व के माध्यम से इस रिवाज से हर वर्ष गुजर रहे हैं। लेकिन कभी बीमार नहीं पड़े और ना ही उन्हें अपने दर्द तक का एहसास होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के निर्वहन को अच्छी बारिश, फसलों के उपज और सुख समृद्धि के लिए किया जाता है। इस त्यौहार में बड़ा ही कठिन व्रत होता है और व्रत के दौरान पूरी तरह सादगी और सात्विक होकर कई कठोर नियमों का पालन भी करना होता है। चार दिनों के कठिन तपस्या में निरंतर उपवास में रहना और इस दौरान भगवत भक्ति के कई कठोरतम नियमों से गुजरना पड़ता है। पहले दिन भगवान की पूजा-अर्चना होती है, दूसरे दिन रात्रि गाजन, मशाल प्रदर्शन, दंडी यात्रा और पारंपरिक ढोल- नगाड़े और मांदर की थाप पर नृत्य- संगीत, झूमर गान और नाच होता है तीसरे दिन ईश्वर भक्ति का अद्भुत और हैरतअंगेज प्रदर्शन भोक्ता घूरा या मंडा खुट्टा प्रदर्शन के माध्यम से होता है और अंतिम दिन भागवत पूजन के साथ शरीर में तेल -हल्दी लगाकर नहाने के पश्चात शरीर को गंगा जल छिड़कर शुद्ध करते हैं और फिर रात्रि में छऊ नृत्य का आनंद उठाते हैं।
झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी प्रखण्ड निवासी अरुण राय कहते हैं कि मैं 60 वर्षों से लगातार बनस पर कील भोंकवा कर चढ़ता हूं, आज तक कुछ नहीं हुआ। एक अन्य व्यक्ति अनिल महतो कहते हैं कि मैं लगभग 30 वर्षों से लोगों के पीठ, जीभ व पैरों में पर्व के दौरान कील भोंकने का कार्य कर रहा हूं। जहां भी यह पर्व मनाया जाता है वहां तीन दिनों तक वातावरण "ॐ नमः शिवायः" "शिव शिवाय मनी पार्वती हीं" आदि नारों से गुंजायमान हो उठता है। पर्व के माध्यम से लोगों ने प्रकृक्ति का आनन्द आम, तरबूज पलास के पत्ते, गुलैची के फूल व नये गुड़ और चना का प्रयोग साथ में प्रथम बार करके लेते हैं। लोगों का मानना है कि भगवान शिव व पार्वती को प्रसन्न करने के लिए वे लोहे के कील से सुराख कर शरीर में कसवाते हैं। जलती अंगारों में नंगे पांव चलते हैं, जिससे प्रसन्न होकर प्रभु उन्हें आशीर्वाद देते हैं और भक्तगण पूरे साल बीमारियों, से कोसों दूर रहते हैं। पर्व के दौरान कहीं छऊ नृत्य, झूमर नृत्य, बुलबुली नृत्य तो कहीं बाऊल संगीत, नाटक (यात्रा) तथा आर्केस्ट्रा का भी आयोजन होता है। इस दौरान ग्रामीण इलाके में मेले का भी भव्य आयोजन होता है जहां लोग एक-दूजे से मिलकर खुशियां भी लुटाते हैं।
    user_Kashif Adib
    Kashif Adib
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    23 hrs ago
  • *नियमावली के नाम पर 10 वर्षों से लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हेमंत सरकार- जीवन कुमार* महाशय विगत कल 15 अप्रैल को राज्य कैबिनेट द्वारा JTET नियमावली को पुनः वापस कर दिए जाने के फैसले के बाद झारखंड के लाखों प्रशिक्षित छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने सरकार के इस कदम को छात्रों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक करार दिया है। छात्रों की भावना और अदालत के आदेश की अनदेखी का आरोप संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के लिए अभ्यर्थी पिछले 10 वर्षों से प्रतीक्षारत हैं। इसके लिए जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े आंदोलन किए गए। माननीय उच्च न्यायालय ने भी परीक्षा आयोजन के लिए 31 मार्च तक की समय सीमा निर्धारित की थी, परंतु राज्य सरकार ने इस पर कोई ठोस पहल नहीं की। छात्र आंदोलन के भारी दबाव में सरकार ने आनन-फानन में नियमावली और पाठ्यक्रम तो जारी किया, लेकिन अब इसे कैबिनेट से वापस लेकर छात्रों को अधर में लटका दिया गया है। हजारीबाग में पुतला दहन और विरोध मार्च सरकार की नीतियों के खिलाफ आज हजारीबाग के गांधी मैदान से डिस्ट्रिक्ट मोड़ तक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री दीपिका पांडेय और राधाकृष्ण का संयुक्त रूप से पुतला दहन किया। रविंद्र ने कहा कि सरकार और उसके मंत्री 'भाषा' को विवाद का विषय बनाकर जानबूझकर परीक्षाओं को रोकने की साजिश रच रहे हैं। छात्रों की मांग: राजनीति नहीं, परीक्षा चाहिए विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि जो लोग भाषा के आधार पर विवाद पैदा कर रहे हैं, वे केवल अपनी राजनीति कर रहे हैं। झारखंड के छात्र परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो सरकार राज्यव्यापी उग्र आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे। प्रमुख उपस्थिति आज के इस कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य रूप से जीवन यादव, रविंद्र पासवान, राधे मेहता, नीरज यादव, विनय कुमार,छोटेलाल, देव कुमार, संतोष कुमार, दीपक कुमार, घनश्याम कुमार तथा धर्मेंद्र कुमार ने किया।
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    *नियमावली के नाम पर 10 वर्षों से लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हेमंत सरकार- जीवन कुमार*
महाशय विगत कल 15 अप्रैल को राज्य कैबिनेट द्वारा JTET नियमावली को पुनः वापस कर दिए जाने के फैसले के बाद झारखंड के लाखों प्रशिक्षित छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है। झारखंड प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने सरकार के इस कदम को छात्रों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक करार दिया है।
छात्रों की भावना और अदालत के आदेश की अनदेखी का आरोप
संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के लिए अभ्यर्थी पिछले 10 वर्षों से प्रतीक्षारत हैं। इसके लिए जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बड़े आंदोलन किए गए। माननीय उच्च न्यायालय ने भी परीक्षा आयोजन के लिए 31 मार्च तक की समय सीमा निर्धारित की थी, परंतु राज्य सरकार ने इस पर कोई ठोस पहल नहीं की। छात्र आंदोलन के भारी दबाव में सरकार ने आनन-फानन में नियमावली और पाठ्यक्रम तो जारी किया, लेकिन अब इसे कैबिनेट से वापस लेकर छात्रों को अधर में लटका दिया गया है।
हजारीबाग में पुतला दहन और विरोध मार्च
सरकार की नीतियों के खिलाफ आज हजारीबाग के गांधी मैदान से डिस्ट्रिक्ट मोड़ तक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री दीपिका पांडेय और राधाकृष्ण का संयुक्त रूप से पुतला दहन किया। रविंद्र ने कहा कि सरकार और उसके मंत्री 'भाषा' को विवाद का विषय बनाकर जानबूझकर परीक्षाओं को रोकने की साजिश रच रहे हैं।
छात्रों की मांग: राजनीति नहीं, परीक्षा चाहिए
विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि जो लोग भाषा के आधार पर विवाद पैदा कर रहे हैं, वे केवल अपनी राजनीति कर रहे हैं। झारखंड के छात्र परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं और कड़ी मेहनत कर रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर परीक्षाओं का आयोजन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो सरकार राज्यव्यापी उग्र आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे।
प्रमुख उपस्थिति
आज के इस कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य रूप से जीवन यादव, रविंद्र पासवान, राधे मेहता, नीरज यादव, विनय कुमार,छोटेलाल, देव कुमार, संतोष कुमार, दीपक कुमार, घनश्याम कुमार तथा धर्मेंद्र कुमार ने किया।
    user_Public News JH
    Public News JH
    Local News Reporter Chisti Nagar, Hazaribagh•
    16 hrs ago
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