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आखिर शहर को 25 दिन में और गांव को 45 दिन में गैस क्यों? कब खत्म होगा ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ यह भेदभाव? 🛑 S BIHAR NEWS 12 | विशेष जन मुद्दा 🛑 आखिर शहर को 25 दिन में और गांव को 45 दिन में गैस क्यों? कब खत्म होगा ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ यह भेदभाव? नवादा/नारदीगंज से विशेष रिपोर्ट | S BIHAR NEWS 12 देश डिजिटल हो रहा है, गांव और शहर के बीच दूरी कम होने की बात कही जा रही है, सरकार हर घर तक सुविधा पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन आज भी एक ऐसा सवाल है जो लाखों ग्रामीण परिवारों के मन में उठ रहा है—आखिर शहर के लोगों को गैस सिलेंडर 25 दिन में बुक करने की सुविधा मिल जाती है, जबकि गांव के लोगों को 45 दिन का इंतजार क्यों करना पड़ता है? क्या गांव में रहने वाले लोग इंसान नहीं हैं? क्या उनकी जरूरतें कम हैं? क्या गांव के चूल्हे कम जलते हैं? या फिर ग्रामीण परिवारों की परेशानियां किसी को दिखाई नहीं देतीं? यह सवाल आज बिहार ही नहीं बल्कि देश के कई ग्रामीण इलाकों में गूंज रहा है। नवादा जिले के नारदीगंज, कहुआरा, शादीपुर, सोनसा, मियां बीघा और आसपास के गांवों में जब S BIHAR NEWS 12 की टीम ने लोगों से बात की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। गांव की महिलाओं ने बताया कि गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद उन्हें कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। बुकिंग करने पर जवाब मिलता है कि अभी समय पूरा नहीं हुआ है, 45 दिन बाद ही अगली बुकिंग संभव है। दूसरी तरफ शहरों में रहने वाले उपभोक्ता लगभग 25 दिन बाद ही दोबारा बुकिंग कर लेते हैं। ग्रामीण महिलाओं का कहना है— "हम भी पैसे देकर गैस लेते हैं, मुफ्त में नहीं मिलता। फिर हमारे साथ अलग नियम क्यों?" एक बुजुर्ग उपभोक्ता ने कहा— "हमारे पास खेती-बाड़ी नहीं है। लकड़ी खरीदनी पड़ती है, भूसा खरीदना पड़ता है, यहां तक कि जलाने के लिए गोइठा तक खरीदना पड़ता है। अगर गैस समय पर न मिले तो खाना कैसे बने?" यह बात पूरी तरह सोचने पर मजबूर करती है। अक्सर यह मान लिया जाता है कि गांव में लोग खेत से लकड़ी, उपला या अन्य ईंधन आसानी से जुटा लेते हैं, लेकिन आज का ग्रामीण जीवन बदल चुका है। बहुत से परिवार मजदूरी करते हैं, किराए पर रहते हैं, जमीन नहीं है, खेती नहीं है। उन्हें हर जरूरत की चीज बाजार से खरीदनी पड़ती है—चावल, दाल, तेल, सब्जी, यहां तक कि जलावन भी। ऐसे में गैस सिलेंडर उनके लिए सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। फिर सवाल उठता है कि वितरण व्यवस्था में यह अंतर क्यों? क्या ग्रामीण क्षेत्र में सप्लाई कम भेजी जाती है? क्या एजेंसियों की संख्या कम है? क्या परिवहन की समस्या है? या फिर सिस्टम में ऐसी व्यवस्था बनाई गई है जो गांव के उपभोक्ताओं को पीछे रखती है? विशेषज्ञों का मानना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की संख्या अधिक और वितरण संसाधन सीमित होते हैं। सड़क, दूरी, वाहन और स्टाफ की कमी भी देरी का कारण बन सकती है। लेकिन सवाल फिर वही है—जब उपभोक्ता बराबर पैसा दे रहा है तो सुविधा बराबर क्यों नहीं? महिलाओं ने मांग की है कि ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग नियम खत्म होने चाहिए और बुकिंग का समान अवसर मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन, गैस एजेंसियों और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस मामले की जांच हो और ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी समय पर गैस उपलब्ध कराया जाए। अगर गांव आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है, तो गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाओं में पीछे क्यों रखा जाए? S BIHAR NEWS 12 इस जनहित के मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा। 📢 आपके क्षेत्र में भी गैस, बिजली, पानी, सड़क या राशन से जुड़ी समस्या है? हमें बताएं। S BIHAR NEWS 12 जनता की आवाज, सच के साथ

1 hr ago
user_S BIHAR NEWS 12
S BIHAR NEWS 12
Journalist Nardiganj, Nawada•
1 hr ago
9a28ef04-32ee-490e-bfb4-8c634e221fa2

आखिर शहर को 25 दिन में और गांव को 45 दिन में गैस क्यों? कब खत्म होगा ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ यह भेदभाव? 🛑 S BIHAR NEWS 12 | विशेष जन मुद्दा 🛑 आखिर शहर को 25 दिन में और गांव को 45 दिन में गैस क्यों? कब खत्म होगा ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ यह भेदभाव? नवादा/नारदीगंज से विशेष रिपोर्ट | S BIHAR NEWS 12 देश डिजिटल हो रहा है, गांव और शहर के बीच दूरी कम होने की बात कही जा रही है, सरकार हर घर तक सुविधा पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन आज भी एक ऐसा सवाल है जो लाखों ग्रामीण परिवारों के मन में उठ रहा है—आखिर शहर के लोगों को गैस सिलेंडर 25 दिन में बुक करने की सुविधा मिल जाती है, जबकि गांव के लोगों को 45 दिन का इंतजार क्यों करना पड़ता है? क्या गांव में रहने वाले लोग इंसान नहीं हैं? क्या उनकी जरूरतें कम हैं? क्या गांव के चूल्हे कम जलते हैं? या फिर ग्रामीण परिवारों की परेशानियां किसी को दिखाई नहीं देतीं? यह सवाल आज बिहार ही नहीं बल्कि देश के कई ग्रामीण इलाकों में गूंज रहा है। नवादा जिले के नारदीगंज, कहुआरा, शादीपुर, सोनसा, मियां बीघा और आसपास के गांवों में जब S BIHAR NEWS 12 की टीम ने लोगों से बात की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। गांव की महिलाओं ने बताया कि गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद उन्हें कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। बुकिंग करने पर जवाब मिलता है कि अभी समय पूरा नहीं हुआ है, 45 दिन बाद ही अगली बुकिंग संभव है। दूसरी तरफ शहरों में रहने वाले उपभोक्ता लगभग 25 दिन बाद ही दोबारा बुकिंग कर लेते हैं। ग्रामीण महिलाओं का कहना है— "हम भी पैसे देकर गैस लेते हैं, मुफ्त में नहीं मिलता। फिर हमारे साथ अलग नियम क्यों?" एक बुजुर्ग उपभोक्ता ने कहा— "हमारे पास खेती-बाड़ी नहीं है। लकड़ी खरीदनी पड़ती है, भूसा खरीदना पड़ता है, यहां तक कि जलाने के लिए गोइठा तक खरीदना पड़ता है। अगर गैस समय पर न मिले तो खाना कैसे बने?" यह बात पूरी तरह सोचने पर मजबूर करती है। अक्सर यह मान लिया जाता है कि गांव में लोग खेत से लकड़ी, उपला या अन्य ईंधन आसानी से जुटा लेते हैं, लेकिन आज का ग्रामीण जीवन बदल चुका है। बहुत से परिवार मजदूरी करते हैं, किराए पर रहते हैं, जमीन नहीं है, खेती नहीं है। उन्हें हर जरूरत की चीज बाजार से खरीदनी पड़ती है—चावल, दाल, तेल, सब्जी, यहां तक कि जलावन भी। ऐसे में गैस सिलेंडर उनके लिए सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। फिर सवाल उठता है कि वितरण व्यवस्था में यह अंतर क्यों? क्या ग्रामीण क्षेत्र में सप्लाई कम भेजी जाती है? क्या एजेंसियों की संख्या कम है? क्या परिवहन की समस्या है? या फिर सिस्टम में ऐसी व्यवस्था बनाई गई है जो गांव के उपभोक्ताओं को पीछे रखती है? विशेषज्ञों का मानना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की संख्या अधिक और वितरण संसाधन सीमित होते हैं। सड़क, दूरी, वाहन और स्टाफ की कमी भी देरी का कारण बन सकती है। लेकिन सवाल फिर वही है—जब उपभोक्ता बराबर पैसा दे रहा है तो सुविधा बराबर क्यों नहीं? महिलाओं ने मांग की है कि ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग नियम खत्म होने चाहिए और बुकिंग का समान अवसर मिलना चाहिए। स्थानीय लोगों ने प्रशासन, गैस एजेंसियों और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस मामले की जांच हो और ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी समय पर गैस उपलब्ध कराया जाए। अगर गांव आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है, तो गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाओं में पीछे क्यों रखा जाए? S BIHAR NEWS 12 इस जनहित के मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा। 📢 आपके क्षेत्र में भी गैस, बिजली, पानी, सड़क या राशन से जुड़ी समस्या है? हमें बताएं। S BIHAR NEWS 12 जनता की आवाज, सच के साथ

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  • बिहार शरीफ के एजुजेन वर्ल्ड स्कूल में मदर्स डे धूमधाम से मनाया गया। विराट कोहली के हमशक्ल की देसी बॉयज़ स्टाइल एंट्री ने सबका दिल जीत लिया, जिससे ऑडिटोरियम में खूब धमाल मचा।
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    user_Bihar Sharif Times
    Bihar Sharif Times
    News Anchor बिहार, नालंदा, बिहार•
    20 hrs ago
  • nal jal. daimej ho gaya he Jitendra Kumar navingar. Bihar Sharif. bad n051 9137683035
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    nal jal. daimej ho gaya he
Jitendra Kumar 
navingar. Bihar Sharif. bad n051
9137683035
    user_Jitendra Kumar
    Jitendra Kumar
    बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    2 hrs ago
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    user_Avdhesh kumar raj
    Avdhesh kumar raj
    Journalist पकड़ीबरावां, नवादा, बिहार•
    4 hrs ago
  • बिहार में भाजपा सरकार पर 'जंगल राज' चलाने और बहू-बेटियों की सुरक्षा में चूक के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन दावों के साथ, राज्य की कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
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    बिहार में भाजपा सरकार पर 'जंगल राज' चलाने और बहू-बेटियों की सुरक्षा में चूक के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन दावों के साथ, राज्य की कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
    user_News Of Nawada
    News Of Nawada
    Local News Reporter सिरदला, नवादा, बिहार•
    6 hrs ago
  • गोविंदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार रात बिजली गुल होने से पूरा अस्पताल घंटों अंधेरे में डूबा रहा। हैरानी की बात यह है कि घंटों तक जनरेटर भी चालू नहीं किया गया और इलाज एक बल्ब व मोबाइल टॉर्च के सहारे चलता रहा।
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    गोविंदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार रात बिजली गुल होने से पूरा अस्पताल घंटों अंधेरे में डूबा रहा। हैरानी की बात यह है कि घंटों तक जनरेटर भी चालू नहीं किया गया और इलाज एक बल्ब व मोबाइल टॉर्च के सहारे चलता रहा।
    user_Raushan Gupta
    Raushan Gupta
    Local News Reporter गोविंदपुर, नवादा, बिहार•
    8 hrs ago
  • बिहार शरीफ में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में स्थानीय समस्याओं और उनके समाधान पर गहन विचार-विमर्श हुआ। भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा कर आगे की कार्ययोजना बनाई गई।
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    बिहार शरीफ में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में स्थानीय समस्याओं और उनके समाधान पर गहन विचार-विमर्श हुआ। भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा कर आगे की कार्ययोजना बनाई गई।
    user_Vandebharat news bihar sarif nalanda Ramendra Kumar
    Vandebharat news bihar sarif nalanda Ramendra Kumar
    Local News Reporter बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    9 hrs ago
  • #ख़बरेTv : बिहार का नजारा है थोड़ा हटकर...पटना के दानापुर में एक अनोखा 'एटीएम' लोगों के बीच चर्चा का विषय बना ... पटना के दानापुर में एक अनोखा 'एटीएम' लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, बाहर SBI का बोर्ड और पूरा एटीएम सेटअप जस का तस है, लेकिन अंदर पैसे निकालने की मशीन नहीं बल्कि हेयर कटिंग सैलून चल रहा है, पहले यहां बैंक का एटीएम था, जिसे बंद होने के बाद इस जगह को किराये पर दे दिया गया, अब लोग यहां नकदी निकालने की उम्मीद में पहुंचते हैं, लेकिन अंदर सैलून देखकर हैरान रह जाते हैं...
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    user_ख़बरें टी वी
    ख़बरें टी वी
    Journalist Nalanda, Bihar•
    2 hrs ago
  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी ने एक नया वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो में उन्होंने पीएम मोदी के कुछ 'छिपे हुए राजों' का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है।
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    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी ने एक नया वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वीडियो में उन्होंने पीएम मोदी के कुछ 'छिपे हुए राजों' का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जिससे राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है।
    user_Rajaram
    Rajaram
    Artist शेखोपुर सराय, शेखपुरा, बिहार•
    9 hrs ago
  • नालंदा के बिहारशरीफ में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक अहम बैठक की, जिसमें EVM, कॉलेजियम प्रणाली और उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव जैसे 7 बड़े मुद्दे उठाए गए। कार्यकर्ताओं ने UGC बिल 2026 लागू करने, समान शिक्षा प्रणाली अपनाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। इन मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करने के लिए अगली बैठक 17 मई, 2026 को बिहारशरीफ में होगी।
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    नालंदा के बिहारशरीफ में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक अहम बैठक की, जिसमें EVM, कॉलेजियम प्रणाली और उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव जैसे 7 बड़े मुद्दे उठाए गए। कार्यकर्ताओं ने UGC बिल 2026 लागू करने, समान शिक्षा प्रणाली अपनाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। इन मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करने के लिए अगली बैठक 17 मई, 2026 को बिहारशरीफ में होगी।
    user_Vandebharat news bihar sarif nalanda
    Vandebharat news bihar sarif nalanda
    Local News Reporter बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    11 hrs ago
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