राम नगरी में 'असुरक्षित' पनाहगाह: बिना पूछताछ मिल रही एंट्री, अपराधियों के लिए 'सेफ जोन' बने लाज। अजीत मिश्रा (खोजी) 🎪अयोध्या: आस्था की आड़ में सुरक्षा से खिलवाड़ और पनपता अपराध🎪 राम नगरी में 'असुरक्षित' पनाहगाह: बिना पूछताछ मिल रही एंट्री, अपराधियों के लिए 'सेफ जोन' बने लाज। पवित्र धरा पर नशा और देह व्यापार का दाग; जिम्मेदार मौन, माफिया बेखौफ! सनसनीखेज: "अयोध्या के गेस्ट हाउसों में 'नो आईडी, नो टेंशन' – क्या यही है हमारी सुरक्षा?" खोजी रिपोर्ट: "नयाघाट की गलियों में पनपता 'पाप' – आस्था के केंद्र में अपराधियों का डेरा।" बड़ा सवाल: "पैसे बढ़ाओ, सुविधाएं पाओ... क्या सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे चल रहा है यह सब?" ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों की पावन धरा आज एक गंभीर और चिंताजनक मोड़ पर खड़ी है। अयोध्या जैसी पवित्र नगरी, जो विश्व स्तर पर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के लिए जानी जाती है, वहां के कुछ अनियंत्रित गेस्ट हाउस और लाज सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। हालिया खबरों ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के नाम पर चल रहे इन ठिकानों में न केवल अपराधियों को पनाह मिल रही है, बल्कि यह अनैतिक गतिविधियों के गढ़ भी बनते जा रहे हैं। 🎪जांच का अभाव और बढ़ता खतरा अयोध्या जैसे संवेदनशील शहर में, जो हमेशा से उपद्रवियों और आतंकी संगठनों के रडार पर रहा है, वहां बिना किसी वैध पहचान और पूछताछ के किसी को भी कमरा मिल जाना प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, नयाघाट जैसे इलाकों में मामूली सी रकम बढ़ाकर देने पर किसी भी संदिग्ध को 'हर तरह की सुविधा' उपलब्ध करा दी जाती है। यह लापरवाही कल को किसी बड़ी अनहोनी का सबब बन सकती है। 🎪समीक्षा: जब पनाहगाह बन जाए 'धर्मशाला' धार्मिक नगरियों में धर्मशालाओं और गेस्ट हाउसों का निर्माण तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए किया गया था। लेकिन आज मुनाफाखोरी की होड़ में संचालक नियमों को ताक पर रख रहे हैं। पहचान पत्र की अनदेखी: कमरों के आवंटन में आईडी कार्ड की औपचारिकता तो की जाती है, लेकिन आने वाले व्यक्ति की मंशा और उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर कोई नजर नहीं रखता। सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच से दूर: छोटे और तंग गलियों में स्थित ये १०-१५ कमरों के गेस्ट हाउस अक्सर सुरक्षा जांच के दायरे से बाहर रह जाते हैं, जिससे अपराधी यहां छिपकर रेकी करने में सफल हो जाते हैं। नशा और देह व्यापार का जाल: धार्मिक स्थलों की गरिमा को तार-तार करते हुए, चोरी-छिपे इन ठिकानों का इस्तेमाल अवैध नशा और अनैतिक देह व्यापार के लिए किया जा रहा है, जो समाज के लिए एक गहरा घाव है। 🎪सामाजिक चिंतक का दृष्टिकोण: अब जागने का समय है एक समाज के तौर पर हमें यह समझना होगा कि चंद रुपयों का लालच पूरे शहर की शांति और सुरक्षा को दांव पर लगा रहा है। प्रशासन को केवल कागजों पर नियम बनाने के बजाय धरातल पर कड़े एक्शन लेने की जरूरत है। 🎪कड़े कदम जो अनिवार्य हैं: अनिवार्य डिजिटल डेटा: हर गेस्ट हाउस और लाज का डेटा रियल-टाइम में स्थानीय पुलिस स्टेशन के पोर्टल से जुड़ा होना चाहिए। नियमित छापेमारी: बिना पंजीकरण या नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को तत्काल सील किया जाए। जन-भागीदारी: स्थानीय लोगों को भी जागरूक होना होगा कि वे अपने आसपास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें। निष्कर्ष: यदि समय रहते इन अवैध और अनियंत्रित गेस्ट हाउसों पर नकेल नहीं कसी गई, तो 'अमन-चैन' की बातें केवल फाइलों तक सीमित रह जाएंगी। अयोध्या और उत्तर प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन और नागरिक, दोनों की साझा जिम्मेदारी है। आस्था बनाम अपराध: कब तक नियमों की धज्जियां उड़ाते रहेंगे ये अवैध ठिकाने? प्रशासन की सुस्ती या मिलीभगत? धार्मिक स्थलों पर गहराता अनैतिकता का साया। सावधान! आपकी बगल वाले कमरे में कोई 'भक्त' नहीं, 'भय' भी हो सकता है। मंडल ब्यूरो प्रमुख, बस्ती मंडल
राम नगरी में 'असुरक्षित' पनाहगाह: बिना पूछताछ मिल रही एंट्री, अपराधियों के लिए 'सेफ जोन' बने लाज। अजीत मिश्रा (खोजी) 🎪अयोध्या: आस्था की आड़ में सुरक्षा से खिलवाड़ और पनपता अपराध🎪 राम नगरी में 'असुरक्षित' पनाहगाह: बिना पूछताछ मिल रही एंट्री, अपराधियों के लिए 'सेफ जोन' बने लाज। पवित्र धरा पर नशा और देह व्यापार का दाग; जिम्मेदार मौन, माफिया बेखौफ! सनसनीखेज: "अयोध्या के गेस्ट हाउसों में 'नो आईडी, नो टेंशन' – क्या यही है हमारी सुरक्षा?" खोजी रिपोर्ट: "नयाघाट की गलियों में पनपता 'पाप' – आस्था के केंद्र में अपराधियों का डेरा।" बड़ा सवाल: "पैसे बढ़ाओ, सुविधाएं पाओ... क्या सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे चल रहा है यह सब?" ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों की पावन धरा आज एक गंभीर और चिंताजनक मोड़ पर खड़ी है। अयोध्या जैसी पवित्र नगरी, जो विश्व स्तर पर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के लिए जानी जाती है, वहां के कुछ अनियंत्रित गेस्ट हाउस और लाज सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। हालिया खबरों ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के नाम पर चल रहे इन ठिकानों में न केवल अपराधियों को पनाह मिल रही है, बल्कि यह अनैतिक गतिविधियों के गढ़ भी बनते जा रहे हैं। 🎪जांच का अभाव और बढ़ता खतरा अयोध्या जैसे संवेदनशील शहर में, जो हमेशा से उपद्रवियों और आतंकी संगठनों के रडार पर रहा है, वहां बिना किसी वैध पहचान और पूछताछ के किसी को भी कमरा मिल जाना प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, नयाघाट जैसे इलाकों में मामूली सी रकम बढ़ाकर देने पर किसी भी संदिग्ध को 'हर तरह की सुविधा' उपलब्ध करा दी जाती है। यह लापरवाही कल को किसी बड़ी अनहोनी का सबब बन सकती है। 🎪समीक्षा: जब पनाहगाह बन जाए 'धर्मशाला' धार्मिक नगरियों में धर्मशालाओं और गेस्ट हाउसों का निर्माण तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए किया गया था। लेकिन आज मुनाफाखोरी की होड़ में संचालक नियमों को ताक पर रख रहे हैं। पहचान पत्र की अनदेखी: कमरों के आवंटन में आईडी कार्ड की औपचारिकता तो की जाती है, लेकिन आने वाले व्यक्ति की मंशा और उसकी संदिग्ध गतिविधियों पर कोई नजर नहीं रखता। सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच से दूर: छोटे और तंग गलियों में स्थित ये १०-१५ कमरों के गेस्ट हाउस अक्सर सुरक्षा जांच के दायरे से बाहर रह जाते हैं, जिससे अपराधी यहां छिपकर रेकी करने में सफल हो जाते हैं। नशा और देह व्यापार का जाल: धार्मिक स्थलों की गरिमा को तार-तार करते हुए, चोरी-छिपे इन ठिकानों का इस्तेमाल अवैध नशा और अनैतिक देह व्यापार के लिए किया जा रहा है, जो समाज के लिए एक गहरा घाव है। 🎪सामाजिक चिंतक का दृष्टिकोण: अब जागने का समय है एक समाज के तौर पर हमें यह समझना होगा कि चंद रुपयों का लालच पूरे शहर की शांति और सुरक्षा को दांव पर लगा रहा है। प्रशासन को केवल कागजों पर नियम बनाने के बजाय धरातल पर कड़े एक्शन लेने की जरूरत है। 🎪कड़े कदम जो अनिवार्य हैं: अनिवार्य डिजिटल डेटा: हर गेस्ट हाउस और लाज का डेटा रियल-टाइम में स्थानीय पुलिस स्टेशन के पोर्टल से जुड़ा होना चाहिए। नियमित छापेमारी: बिना पंजीकरण या नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को तत्काल सील किया जाए। जन-भागीदारी: स्थानीय लोगों को भी जागरूक होना होगा कि वे अपने आसपास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें। निष्कर्ष: यदि समय रहते इन अवैध और अनियंत्रित गेस्ट हाउसों पर नकेल नहीं कसी गई, तो 'अमन-चैन' की बातें केवल फाइलों तक सीमित रह जाएंगी। अयोध्या और उत्तर प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन और नागरिक, दोनों की साझा जिम्मेदारी है। आस्था बनाम अपराध: कब तक नियमों की धज्जियां उड़ाते रहेंगे ये अवैध ठिकाने? प्रशासन की सुस्ती या मिलीभगत? धार्मिक स्थलों पर गहराता अनैतिकता का साया। सावधान! आपकी बगल वाले कमरे में कोई 'भक्त' नहीं, 'भय' भी हो सकता है। मंडल ब्यूरो प्रमुख, बस्ती मंडल
- अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में जहाँ एक ओर विकास और सुशासन के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बस्ती जिले में प्रशासन की उदासीनता से क्षुब्ध होकर स्वयं सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेता को ही धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ा है। मनोरमा नदी की सफाई और जीर्णोद्धार की मांग को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रमणि पांडेय ने आज जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप धरने पर बैठे चंद्रमणि पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मनोरमा नदी की सफाई को लेकर प्रशासन ने पूर्व में कई वादे किए थे, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, "हम भगवान राम को मानने वाले लोग हैं और संवाद में विश्वास रखते हैं। हमने सुबह 10:30 बजे प्रशासन को सूचना पत्र दिया था कि यदि मनोरमा नदी की सफाई के लिए कोई लिखित आश्वासन या ठोस कार्ययोजना मिलती है, तो हम वार्ता को तैयार हैं।" अधिकारियों की लाचारी और 'जबरन' वार्ता का प्रयास भाजपा नेता का आरोप है कि जैसे ही वे अपने समर्थकों के साथ धरना स्थल पर पहुँचे, डीसी मनरेगा और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाकर 'वार्ता' के नाम पर ले जाने का प्रयास किया। पांडेय के अनुसार, अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि "हमारे हाथ में कुछ नहीं है" और उन्हें फोटो-वीडियो न बनाने की हिदायत दी गई। चंद्रमणि पांडेय ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें चाहे तो गिरफ्तार कर ले या जेल भेज दे, लेकिन जब तक मनोरमा नदी के सफाई अभियान को लेकर लिखित और ठोस कदम नहीं उठाए जाते, वे वहां से नहीं हटेंगे। "यह राजनीतिक नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है" उन्होंने जनपदवासियों से इस अभियान में जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि यह कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि मनोरमा नदी और मानव अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। मुख्य बिंदु: स्थान: जिलाधिकारी कार्यालय, बस्ती। प्रमुख चेहरा: वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रमणि पांडेय। मुद्दा: मनोरमा नदी की सफाई में प्रशासनिक शिथिलता और वादाखिलाफी। प्रशासन का रुख: अधिकारियों ने असमर्थता जताई। फिलहाल, जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना जारी है और यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।1
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- अगर इसी प्रकार सभी सनातनी एक होकर गौ रक्षा के लिए खड़े हो जाएं तो हमारी गौ माता सुरक्षित हो जाएगी और आज जो प्राकृतिक आपदाओं का सामना हम लोग कर रहे हैं वो बंद हो जाएगा क्योंकि हमारी गौमाता साक्षात् प्रकृति स्वरूप हैं अब उनको हम लोग इतना कष्ट देंगे तो आपदा तो आना तय है अभी कम है लेकिन इतनी आपदाएं आएंगी कि हम झेल नहीं सकते2
- संतकबीरनगर। जनपद में 10 मई को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के तत्वावधान में सामाजिक समरसता महा सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम स्थानीय जूनियर हाई स्कूल के प्रांगण में आयोजित होगा, जिसकी तैयारियों को लेकर संगठन स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। सम्मेलन में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं तथा लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है। पार्टी के प्रदेश सचिव अब्दुल अजीम ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना, सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना और संगठन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई है और इसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन के दौरान सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों के अधिकार, संगठन की नीतियों और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस सम्मेलन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़कर एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। सम्मेलन को लेकर समर्थकों में उत्साह का माहौल है, वहीं प्रशासन भी आयोजन को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए है।1
- संत कबीर नगर।। सदर विधायक अंकुर राज तिवारी ने उनके आवास पर पहुँचकर शोकाकुल परिवार से मिलकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और अंतिम संस्कार में सम्मिलित होकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। संत कबीर नगर।।राजधानी के चारबाग रेलवे स्टेशन के पास स्थित रवीन्द्रालय परिसर में यह कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा। इस महा समागम का उद्देश्य समाज की एकता को मजबूत करना, सामाजिक ताकत को बढ़ाना और राजनीतिक भागीदारी को सशक्त बनाना है। आयोजकों ने समाज के सभी लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपनी आवाज को मजबूत बनाएं और इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनें। कार्यक्रम में समाज के कई प्रमुख चेहरे शामिल होंगे, जिनमें श्याम सुंदर वर्मा, प्रिंस वर्मा, राजेश वर्मा, कन्हैया वर्मा, दिनेश वर्मा और अरविंद वर्मा प्रमुख हैं। आयोजकों के अनुसार, यह समागम समाज के भविष्य की दिशा तय करने और समस्याओं के समाधान पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा। तो आइए, 11 अप्रैल को लखनऊ पहुंचें और इस महा समागम का हिस्सा बनकर समाज की ताकत को एक नई दिशा दें।1
- 🏫 रामेश्वर प्रसाद मौर्य स्मारक इंटर कॉलेज 📍 ठकुराडाड़ी, धनघटा - संत कबीर नगर 📢 प्रवेश प्रारम्भ 📅 सत्र 2026-27 🗓️ प्रवेश प्रारम्भ: 02 फरवरी से 📚 मान्यता प्राप्त उ.प्र. माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा ✔️ हाईस्कूल – सभी विषय (सभी वर्ग) ✔️ इंटरमीडिएट – कला एवं विज्ञान वर्ग के सभी विषय 🏫 संचालित कक्षाएं 👉 कक्षा 1 से 12 तक 🎖️ NCC सुविधा उपलब्ध 👉 क्षेत्र का एकमात्र NCC मान्यता प्राप्त संस्थान 🚌 वाहन सुविधा उपलब्ध 👉 सभी मार्गों पर 📌 विशेष सूचना 👉 11वीं एवं 12वीं में कला एवं विज्ञान वर्ग की सभी कक्षाएं संचालित 📞 संपर्क करें: 9005740059 7080847797 70808483121
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- संतकबीरनगर । पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने सोमवार को थाना दुधारा का वार्षिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान थाना परिसर, बैरक, शौचालय, कार्यालय, हवालात सहित विभिन्न इकाइयों की साफ-सफाई और अभिलेखों की स्थिति का गहन परीक्षण किया गया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने नवनिर्मित साइबर थाना/सीसीटीएनएस कक्ष का उद्घाटन किया। साथ ही मिशन शक्ति अभियान 5.0 के द्वितीय चरण के अंतर्गत मिशन शक्ति केंद्र का भी फीता काटकर शुभारंभ किया। निरीक्षण के दौरान ग्राम प्रहरियों, संभ्रांत नागरिकों एवं चौकीदारों के साथ संवाद स्थापित किया गया। उत्कृष्ट सूचना संकलन और सराहनीय कार्य के लिए दो ग्राम चौकीदारों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुलिस अधीक्षक ने महिला हेल्प डेस्क एवं मिशन शक्ति केंद्र पर महिला संबंधी शिकायतों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि महिला फरियादियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनका त्वरित निस्तारण किया जाए। साथ ही महिला कर्मियों को क्षेत्र में जाकर हेल्पलाइन नंबरों के प्रति जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने एफआईआर रजिस्टर, विवेचना अभिलेख, मालखाना रजिस्टर एवं लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए सभी विवेचनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए। महिला एवं बाल अपराधों में विशेष सतर्कता और निर्धारित एसओपी के कड़ाई से पालन पर जोर दिया गया। निरीक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को शस्त्रों के रखरखाव एवं संचालन का अभ्यास भी कराया गया। एसपी ने जनता के प्रति शालीन व्यवहार, त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष पुलिसिंग पर बल देते हुए क्षेत्र में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रखने, रात्रि गश्त बढ़ाने और अपराधियों के विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद अमित कुमार, गोपनीय निरीक्षक अविनाश प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक अरविन्द शर्मा, रीडर एसपी रामआशीष यादव, पीआरओ पी.के. गुप्ता सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।1