हजारीबाग जिले में आईपीएल मैचों के दौरान करोड़ों रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, बैटिंग माफिया और हवाला सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस की कथित 'गुप्त' धरपकड़ की आड़ में एक बेहद सनसनीखेज खेल की चर्चा जोर पकड़ रही है। अपुष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई में एक बड़ी राजनैतिक और प्रशासनिक सांठगांठ की बू आ रही है, जिससे पुलिस की इस 'गोपनीय कार्रवाई' की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि आईपीएल सट्टा सिंडिकेट से जुड़े कुणाल कुमार नामक एक संदिग्ध को पुलिस ने हिरासत में तो लिया था, लेकिन कथित तौर पर 11 लाख रुपये के लेन-देन के बाद उसे गुपचुप तरीके से छोड़ दिया गया। इस कथित डील के बाद सिंडिकेट से जुड़े लोगों के कबूलनामे सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें कई अन्य बड़े और रसूखदार लोगों के इस अवैध धंधे में शामिल होने का खुलासा हुआ है। बताया गया है कि पुलिस और बैटिंग माफिया के बीच हुई इस 'गुप्त डील' की खबर से हजारीबाग से लेकर रांची तक प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। इसके अलावा, सिंडिकेट के भीतर 'सर का कहना है अभी 40 कम से कम बाकी बात करके महीने का (Monthly) सेट कर लो' जैसे कोडवर्ड में दिए गए निर्देशों से मासिक फिक्सिंग या घूसखोरी के एक बड़े नेटवर्क के सक्रिय होने का खुलासा हुआ है। इस सिंडिकेट से 32 वर्षीय कुणाल शर्मा, प्रिंस कुमार, छोटू उर्फ राकेश अग्रवाल, शशि कुमार सिन्हा, सूरज कुमार, इशांत, श्याम गुप्ता और पिंकू जैसे कई संदिग्धों के नाम, पते और मोबाइल नंबर सामने आने की बात कही जा रही है, जो इसके अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय कड़ियों से जुड़े होने की ओर इशारा करता है। इस सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें लाखों-करोड़ों की रकम को 'किलो' के रूप में संबोधित किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, यह बात सामने आई है कि '11 कुणाल ने दिया, 7 शशि ने दिया, कुल = 18 किलो हुआ और 22 किलो और पहुंचाना है 7 दिनों के अंदर'। यह ब्यौरा दर्शाता है कि ऑनलाइन ऐप्स के जरिए केवल सट्टा ही नहीं लग रहा था, बल्कि बड़े पैमाने पर हवाला के जरिए भारी-भरकम पैसों का अवैध ट्रांजैक्शन भी हो रहा था, जिसमें 'समय सीमा' (7 दिनों के भीतर) तय करके रकम की वसूली और ट्रांसफर का खेल चल रहा था। चूंकि इस पूरे प्रकरण पर हजारीबाग जिला पुलिस या संबंधित थानों की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रेस रिलीज जारी नहीं की गई है, इसलिए यह खबर केवल सूत्रों से मिले इनपुट पर आधारित है। इस रहस्यमयी खामोशी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा दिया है। हजारीबाग के जागरूक नागरिकों और स्थानीय मीडिया जगत ने जिले के आरक्षी अधीक्षक (एसपी साहब) से इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेने की पुरजोर मांग की है। आम जनता का कहना है कि युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाले इस बैटिंग माफिया नेटवर्क और पुलिस कर्मियों पर लगे 'पैसा लेकर छोड़ने' के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। लोगों ने एसपी साहब से अविलंब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संदिग्धों की वास्तविक स्थिति, रुपयों के लेन-देन के दावों का सच और इस कथित सट्टा सिंडिकेट के पूरे मामले का पूरी तरह पारदर्शी और आधिकारिक खुलासा करने की मांग की है, ताकि सच सबके सामने आ सके।
हजारीबाग जिले में आईपीएल मैचों के दौरान करोड़ों रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, बैटिंग माफिया और हवाला सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस की कथित 'गुप्त' धरपकड़ की आड़ में एक बेहद सनसनीखेज खेल की चर्चा जोर पकड़ रही है। अपुष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई में एक बड़ी राजनैतिक और प्रशासनिक सांठगांठ की बू आ रही है, जिससे पुलिस की इस 'गोपनीय कार्रवाई' की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि आईपीएल सट्टा सिंडिकेट से जुड़े कुणाल कुमार नामक एक संदिग्ध को पुलिस ने हिरासत में तो लिया था, लेकिन कथित तौर पर 11 लाख रुपये के लेन-देन के बाद उसे गुपचुप तरीके से छोड़ दिया गया। इस कथित डील के बाद सिंडिकेट से जुड़े लोगों के कबूलनामे सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें कई अन्य बड़े और रसूखदार लोगों के इस अवैध धंधे में शामिल होने का खुलासा हुआ है। बताया गया है कि पुलिस और बैटिंग माफिया के बीच हुई इस 'गुप्त डील' की खबर से हजारीबाग से लेकर रांची तक प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। इसके अलावा, सिंडिकेट के भीतर 'सर का कहना है अभी 40 कम से कम बाकी बात करके महीने का (Monthly) सेट कर लो' जैसे कोडवर्ड में दिए गए निर्देशों से मासिक फिक्सिंग या घूसखोरी के एक बड़े नेटवर्क के सक्रिय होने का खुलासा हुआ है। इस सिंडिकेट से 32 वर्षीय कुणाल शर्मा, प्रिंस कुमार, छोटू उर्फ राकेश अग्रवाल, शशि कुमार सिन्हा, सूरज कुमार, इशांत, श्याम गुप्ता और पिंकू जैसे कई संदिग्धों के नाम, पते और मोबाइल नंबर सामने आने की बात कही जा रही है, जो इसके अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय कड़ियों से जुड़े होने की ओर इशारा करता है। इस सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें लाखों-करोड़ों की रकम को 'किलो' के रूप में संबोधित किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, यह बात सामने आई है कि '11 कुणाल ने दिया, 7 शशि ने दिया, कुल = 18 किलो हुआ और 22 किलो और पहुंचाना है 7 दिनों के अंदर'। यह ब्यौरा दर्शाता है कि ऑनलाइन ऐप्स के जरिए केवल सट्टा ही नहीं लग रहा था, बल्कि बड़े पैमाने पर हवाला के जरिए भारी-भरकम पैसों का अवैध ट्रांजैक्शन भी हो रहा था, जिसमें 'समय सीमा' (7 दिनों के भीतर) तय करके रकम की वसूली और ट्रांसफर का खेल चल रहा था। चूंकि इस पूरे प्रकरण पर हजारीबाग जिला पुलिस या संबंधित थानों की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रेस रिलीज जारी नहीं की गई है, इसलिए यह खबर केवल सूत्रों से मिले इनपुट पर आधारित है। इस रहस्यमयी खामोशी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा दिया है। हजारीबाग के जागरूक नागरिकों और स्थानीय मीडिया जगत ने जिले के आरक्षी अधीक्षक (एसपी साहब) से इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेने की पुरजोर मांग की है। आम जनता का कहना है कि युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाले इस बैटिंग माफिया नेटवर्क और पुलिस कर्मियों पर लगे 'पैसा लेकर छोड़ने' के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। लोगों ने एसपी साहब से अविलंब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संदिग्धों की वास्तविक स्थिति, रुपयों के लेन-देन के दावों का सच और इस कथित सट्टा सिंडिकेट के पूरे मामले का पूरी तरह पारदर्शी और आधिकारिक खुलासा करने की मांग की है, ताकि सच सबके सामने आ सके।
- केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने हजारीबाग में मीडिया से बातचीत के दौरान झारखंड सरकार पर राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और आम जनता की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। अन्नपूर्णा देवी ने हाल ही में हुई एक ट्रिपल मर्डर की घटना का विशेष रूप से जिक्र करते हुए दावा किया कि इतनी गंभीर वारदात के बाद भी सरकार और प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल व्याप्त है। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त है। उन्होंने सरकार से अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की, जिसके बाद राज्य का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।1
- राघव चड्ढा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जॉइन कर ली है। वे अब भाजपा सरकार में शामिल हो गए हैं।1
- देश में प्रमुख परीक्षाओं के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सुरक्षा व्यवस्था के लिए सेना तक लगानी पड़ रही है और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की मार्किंग में भी गलतियाँ सामने आई हैं। इन घटनाओं से यह मूलभूत प्रश्न उठता है कि आखिर क्यों देश के बड़े एग्जाम सही ढंग से नहीं हो पा रहे हैं।1
- कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा में ECLGS योजना के अंतर्गत ऋणों का वितरण किया गया। इस पहल के तहत, कुल 25 लाभुकों को इसका फायदा पहुँचा।1
- एक पत्रकार के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की घटना सामने आई है। यह पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1
- कोडरमा के जेजे कॉलेज को गिरिडीह भेजे जाने को लेकर छात्र नेताओं और छात्र-छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया।1
- हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत चानों पंचायत में एक पानी की टंकी मात्र शोपीस बनकर रह गई है। भीषण गर्मी के इस मौसम में भी यह टंकी ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने में विफल है, जिसके चलते इलाके के लोग पानी की हर बूंद के लिए तरस रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है और वह इस मामले पर पूरी तरह मौन बना हुआ है।1
- कोडरमा जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र के बागडे में एक नवविवाहिता की मौत के मामले को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज़ लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए सड़क जाम कर दिया। यह सड़क जाम करीब ढाई घंटे तक चला, जिसके बाद पुलिस द्वारा दिए गए आश्वासन पर इसे हटाया जा सका। इस घटना के कारण इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।1