सादड़ी में ऐतिहासिक मूसल गेर की धूम सादड़ी में एतिहासिक मूसल गेर की धूमः सगरवंशी माली समाज के लोगों ने भैरव स्वरूप का श्रृंगार कर किया नृत्य, बड़ी संख्या में आए लोग (सादड़ी )में बुधवार शाम को यहां की प्रसिद्ध हामैळा (मूसल) गेर आकर्षण का केंद्र रही। यह गेर जोधपुर प्रांत की एकमात्र ऐसी गेर मानी जाती है, जिसे रियासतकालीन गेर का सांस्कृतिक दर्जा प्राप्त है। इस गेर को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। युवाओं ने हाथों में मूसल लेकर किया नृत्य इस गेर में सगरवंशी माली समाज के सदस्य भैरव स्वरूप का श्रृंगार कर हाथों में मूसल लेकर नृत्य करते हैं। ढोल, ताशे और मृदंग की थाप पर वे होली की अठखेलियों का प्रदर्शन करते हैं। पारंपरिक वेशभूषा और भैरव स्वरूप में सजे गेरिये शहर की गलियों में नृत्य करते हुए लोक संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत करते हैं।डेढ़ सौ साल पहले हुई थी परंपरा की शुरूआत इतिहास के अनुसार, लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले नाडोल रियासत से आए सगरवंशी माली समाज के करीब तीन सौ परिवारों ने सादड़ी में बसने के बाद इस मूसल गेर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने इष्ट देव भैरव और माता आशापुरा की आराधना के रूप में इसे प्रारंभकिया था। समय के साथ परिस्थितियों के कारण इस परंपरा में शामिल परिवारों की संख्या घटकर अब लगभग 20 से 25 रह गई है, लेकिन समाज का उत्साह आज भी बरकरार है। इस गेर की एक खास विशेषता यह भी है कि इसमें महिलाएं भी पारंपरिक उत्साह के साथ सहभागिता निभाती हैं। वर्षों पुरानी यह परंपरा सादड़ी की लोकसंस्कृति को आज भी जीवंत बनाए हुए है और शीतला अष्टमी के अवसर पर यह गेर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के रूप में सामने आती है। रिपोर्टर भीकाराम कंडारा की रिपोर्ट
सादड़ी में ऐतिहासिक मूसल गेर की धूम सादड़ी में एतिहासिक मूसल गेर की धूमः सगरवंशी माली समाज के लोगों ने भैरव स्वरूप का श्रृंगार कर किया नृत्य, बड़ी संख्या में आए लोग (सादड़ी )में बुधवार शाम को यहां की प्रसिद्ध हामैळा (मूसल) गेर आकर्षण का केंद्र रही। यह गेर जोधपुर प्रांत की एकमात्र ऐसी गेर मानी जाती है, जिसे रियासतकालीन गेर का सांस्कृतिक दर्जा प्राप्त है। इस गेर को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। युवाओं ने हाथों में मूसल लेकर किया नृत्य इस गेर में सगरवंशी माली समाज के सदस्य भैरव स्वरूप का श्रृंगार कर हाथों में मूसल लेकर नृत्य करते हैं। ढोल, ताशे और मृदंग की थाप पर वे होली की अठखेलियों का प्रदर्शन करते हैं। पारंपरिक वेशभूषा और भैरव स्वरूप में सजे गेरिये शहर की गलियों में नृत्य करते हुए लोक संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत करते हैं।डेढ़ सौ साल पहले हुई थी परंपरा की शुरूआत इतिहास के अनुसार, लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले नाडोल रियासत से आए सगरवंशी माली समाज के करीब तीन सौ परिवारों ने सादड़ी में बसने के बाद इस मूसल गेर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने इष्ट देव भैरव और माता आशापुरा की आराधना के रूप में इसे प्रारंभकिया था। समय के साथ परिस्थितियों के कारण इस परंपरा में शामिल परिवारों की संख्या घटकर अब लगभग 20 से 25 रह गई है, लेकिन समाज का उत्साह आज भी बरकरार है। इस गेर की एक खास विशेषता यह भी है कि इसमें महिलाएं भी पारंपरिक उत्साह के साथ सहभागिता निभाती हैं। वर्षों पुरानी यह परंपरा सादड़ी की लोकसंस्कृति को आज भी जीवंत बनाए हुए है और शीतला अष्टमी के अवसर पर यह गेर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के रूप में सामने आती है। रिपोर्टर भीकाराम कंडारा की रिपोर्ट
- सादड़ी में ऐतिहासिक मूसल गेर की धूम सादड़ी में एतिहासिक मूसल गेर की धूमः सगरवंशी माली समाज के लोगों ने भैरव स्वरूप का श्रृंगार कर किया नृत्य, बड़ी संख्या में आए लोग (सादड़ी )में बुधवार शाम को यहां की प्रसिद्ध हामैळा (मूसल) गेर आकर्षण का केंद्र रही। यह गेर जोधपुर प्रांत की एकमात्र ऐसी गेर मानी जाती है, जिसे रियासतकालीन गेर का सांस्कृतिक दर्जा प्राप्त है। इस गेर को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। युवाओं ने हाथों में मूसल लेकर किया नृत्य इस गेर में सगरवंशी माली समाज के सदस्य भैरव स्वरूप का श्रृंगार कर हाथों में मूसल लेकर नृत्य करते हैं। ढोल, ताशे और मृदंग की थाप पर वे होली की अठखेलियों का प्रदर्शन करते हैं। पारंपरिक वेशभूषा और भैरव स्वरूप में सजे गेरिये शहर की गलियों में नृत्य करते हुए लोक संस्कृति की अनूठी झलक प्रस्तुत करते हैं।डेढ़ सौ साल पहले हुई थी परंपरा की शुरूआत इतिहास के अनुसार, लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले नाडोल रियासत से आए सगरवंशी माली समाज के करीब तीन सौ परिवारों ने सादड़ी में बसने के बाद इस मूसल गेर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने इष्ट देव भैरव और माता आशापुरा की आराधना के रूप में इसे प्रारंभकिया था। समय के साथ परिस्थितियों के कारण इस परंपरा में शामिल परिवारों की संख्या घटकर अब लगभग 20 से 25 रह गई है, लेकिन समाज का उत्साह आज भी बरकरार है। इस गेर की एक खास विशेषता यह भी है कि इसमें महिलाएं भी पारंपरिक उत्साह के साथ सहभागिता निभाती हैं। वर्षों पुरानी यह परंपरा सादड़ी की लोकसंस्कृति को आज भी जीवंत बनाए हुए है और शीतला अष्टमी के अवसर पर यह गेर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के रूप में सामने आती है। रिपोर्टर भीकाराम कंडारा की रिपोर्ट1
- सदन के बाहर नारेबाजी- नरेंदर भी गायब, सिलेंडर भी गायब:राहुल बोले- मोदी घबराए हैं; अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद बिरला की वापसी,नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर की सीढ़ियों पर विपक्षी सांसदों के साथ बैठकर चाय और बिस्किट खाए.... देखिए राजपथ न्यूज़ पर1
- दिल्ली के किराड़ी में सिलेंडर के मुद्दे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सिलेंडर के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, सिलेंडर के बढ़े हुए दामों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हल्ला बोल, सिलेंडर की हो रही कालाबाजारी पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा.1
- AI ले जाएगी नौकरी1
- न्यूज़: दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में सी-ब्लॉक मार्केट से लापता हुए एक बच्चे को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरक्षित बरामद कर लिया। सूचना मिलते ही थाना जहांगीरपुरी (PS Jahangir Puri) की टीम ने तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगातार तलाश अभियान चलाया, साथ ही सीसीटीवी फुटेज की जांच और स्थानीय लोगों से पूछताछ की। लगातार प्रयासों के बाद बच्चे का पता लगा लिया गया। ऑपरेशन “मिलाप” के तहत बच्चे को सुरक्षित उसके परिवार के हवाले कर दिया गया। अपने बच्चे को सकुशल वापस पाकर परिवार ने राहत की सांस ली और दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त किया।1
- दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में देर रात लगी भीषण आग दिल्ली: उत्तम नगर के मनसा राम पार्क के पास मछली मार्केट में देर रात अचानक आग लग गई। जिसके चलते 400 से अधिक झुग्गी झोपड़ी जलकर राख हो गए । बताया जा रहा ही कि आग करीब आधा किलोमीटर से एक किलोमीटर तक फैली थी । फिलहाल अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया और पुलिस मामले की जांच कर रही है।2
- उत्तराखंड: चंपावत जिले के टनकपुर के उछोली गोठ में भूमि विवाद को लेकर ग्रामीणों व पुलिस के बीच जोरदार बहस वीडियो सोशल मीडिया में वायरल1
- राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रचार को मिली रफ्तार, जनपद न्यायाधीश ने प्रचार वाहन को दिखाई हरी झंडी 14 मार्च की राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जागरूकता अभियान शुरू, प्रचार वाहन रवाना भदोही 11 मार्च 2026:–राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली व उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशानुसार माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय के कुशल मार्गदर्शन में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 14 मार्च 2026 को आयोजित की जा रही है। जिसके परिप्रेक्ष्य में अखिलेश दूबे, माननीय जनपद न्यायाधीश / अध्यक्ष महोदय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भदोही के निर्देशानुपालन में राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाये जाने हेतु अमित वर्मा, अपर जिला जज/एस०सी०/एस०टी०एक्ट, श्रीमती पुष्पा सिंह, अपर जिला जज प्रथम/नोडल, आनन्द मिश्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्रीमती तरूणिमा पाण्डेय पूर्णकालिक सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भदोही, समस्त न्यायिक अधिकारीगण, परिवहन अधिकारी जनपद भदोही व यातायात प्रभारी द्वारा आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रचार वाहन को माननीय जनपद न्यायाधीश महोदय के द्वारा सुबह 10:30 बजे हरी झण्डी दिखाकर जनपद न्यायालय सरपतहा ज्ञानपुर से रवाना किया गया। जिससे आगामी लोक अदालत का व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके तथा अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण हो।भदोही से सूर्य प्रकाश पाण्डेय की रिपोर्ट1