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वाराणसी पुलिस ने बिना नंबर वाले वाहनों और अश्लील गानों पर सख्त कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसा है। इस अभियान के तहत, कैंट रेलवे स्टेशन पर चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस ने एक साउंड बॉक्स वाले ऑटो को सीज कर दिया।
अंकित सैनी
वाराणसी पुलिस ने बिना नंबर वाले वाहनों और अश्लील गानों पर सख्त कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसा है। इस अभियान के तहत, कैंट रेलवे स्टेशन पर चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस ने एक साउंड बॉक्स वाले ऑटो को सीज कर दिया।
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- उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में तहसील दिवस के मौके पर एक फरियादी ने अधिकारियों के सामने ही अपनी शिकायत जोर-जोर से रखी। फरियादी ने चिल्ला-चिल्लाकर बताया कि वह आठ बार से शिकायत कर रहा है, लेकिन अब तक उसकी बात पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। उसने आरोप लगाया कि सभी अधिकारी और कर्मचारी मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं।1
- चंदौली जिले के गरला गांव में सरकारी पैसे के बड़े पैमाने पर गबन और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, महिला मित्र पूनम कुमारी (NMMS) और जेई सचिव मिलकर सरकारी पैसे की लूट खसोट कर रहे हैं। इन पर 40% कमीशन बनाने का आरोप है। मांग की गई है कि इन सभी कथित दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, क्योंकि गरला गांव में अधिकारी कथित तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग कर अपनी जेब गरम कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने इस बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार और सरकारी पैसे के गबन की तुरंत जांच कराने की अपील की है।2
- चंदौली के शहाबगंज में अखिल भारतीय किसान सभा मंडल कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक सहकारी समिति प्रांगण में हुई, जहाँ क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं पर विस्तृत चर्चा के बाद 30 जून को शहाबगंज ब्लॉक मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष बिना बांध टूटे ही कर्मनाशा नदी का पानी कई गाँवों में फैल गया था, जिससे केवल दो दिनों की बारिश में अनेक घर-मकान क्षतिग्रस्त हो गए और फसलें बर्बाद हो गईं। किसानों ने इस स्थिति के लिए जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने को जिम्मेदार ठहराया। सभा में प्रमुख मांगों में लेवा-इलिया मार्ग, जेगुरी-केरायगांव मार्ग सहित क्षेत्र की विभिन्न सड़कों के नीचे बड़े कलवर्ट (कुलावा) बनाने की बात कही गई, ताकि बरसात के दौरान पानी का निकास सुचारु हो सके और खेतों, मकानों तथा ग्रामीण सड़कों को हर वर्ष होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, शहाबगंज से अलीपुर, डुमरी और सीमावर्ती क्षेत्रों तक जाने वाले मार्गों पर भी पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग उठाई गई। किसान सभा के पदाधिकारियों ने क्षेत्र की नहरों, माइनरों, डेनों और नालियों की समय पर सफाई कराने पर भी जोर दिया, जिससे बरसात के पानी की निकासी हो सके और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके, क्योंकि सिंचाई व्यवस्था की उपेक्षा से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर, शहाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 30 बेड अस्पताल का दर्जा दिए जाने के साथ-साथ पर्याप्त चिकित्सकों, कर्मचारियों और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग दोहराई गई। साथ ही, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलिया एवं कटवा माफी में भी स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की मांग की गई। मनरेगा मजदूरों को समय पर कार्य और भुगतान सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया गया, वहीं खाद वितरण व्यवस्था में किसानों पर जबरन जैविक खाद थोपने की शिकायतों पर भी ध्यान दिलाया गया, जिसमें किसानों ने पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद, बीज और कीटनाशक उपलब्ध कराने की मांग की। राशन वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा गया कि कई स्थानों पर कोटेदार राशन कार्ड धारकों पर अनावश्यक रूप से नमक, साबुन एवं अन्य सामग्री लेने का दबाव बना रहे हैं। किसान सभा ने ऐसी प्रथाओं पर तत्काल रोक लगाने और पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराने की मांग की। इस धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए किसान सभा ने 26, 27 और 28 जून को विभिन्न गाँवों में जनसंपर्क जत्था निकालने का निर्णय लिया है, जिसके दौरान किसानों और ग्रामीणों को उनकी समस्याओं तथा संगठन की मांगों से अवगत कराया जाएगा। बैठक में किसान सभा के जिला मंत्री लालचंद सिंह एडवोकेट, मंडल अध्यक्ष स्वामीनाथ, मंडल मंत्री नंदलाल, उपाध्यक्ष बदरुद्दीन अंसारी, लालजी मास्टर, बड़ेलाल, सुरु, जसवंत सहित बड़ी संख्या में किसान एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने 30 जून के धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।1
- एक तालाब में डूबने से तीन बच्चों की दुखद मौत के बाद, मंत्री जमा खान पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। उन्होंने आपदा मद से ₹12 लाख का चेक शोक संतप्त परिवारों को सौंपा।1
- धीना के गुरैनी पंप कैनाल स्थित गंगा तट पर किसानों का गंगा कटान रोकथाम की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 25वें दिन भी जारी रहा। धरनारत किसानों ने प्रशासन पर उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है। किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने बताया कि 25 दिनों से लगातार धरना प्रदर्शन के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। किसान नेता रविंद्र सिंह 'मुन्ना' ने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता के कारण हजारों एकड़ कृषि भूमि गंगा की धारा में समाहित हो चुकी है, और सिंचाई विभाग द्वारा मिट्टी भरी बोरियां डालकर कटान रोकने का प्रयास केवल एक अस्थायी उपाय है, जो बिल्कुल भी स्थायी समाधान नहीं है। किसानों ने पत्थरों के बोल्डर, तारजाल और अन्य तकनीकी उपायों के माध्यम से जमीनी स्तर पर मजबूत कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है। धरने की अध्यक्षता कर रहे शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर आकर सिर्फ औपचारिकता निभाकर लौट गए, जबकि किसानों की मूल समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है। दीनानाथ श्रीवास्तव ने उम्मीद जताई कि 21 जून को क्षेत्रीय विधायक के आने की संभावना है और किसान उनसे आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कटानरोधी कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई, तो किसान आर-पार की लड़ाई लड़ने को बाध्य होंगे। किसानों ने साफ किया है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। इस धरना-प्रदर्शन में आशीष कुमार, मुन्ना सिंह, प्यारेलाल, शिवराज, रामआशीष, धनंजय, गुरुप्रकाश, रामदयाल सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।3
- चंदौली जिले के नौगढ़ ब्लॉक स्थित बरबसपुर ग्राम पंचायत में इंटरलॉकिंग बिछाते समय पानी निकासी के लिए नाली न बनाने की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस चूक के कारण, बारिश का पानी इकट्ठा हो जाने से एक मिट्टी का घर ढह गया। यह घटना दिखाती है कि अगर पानी इसी तरह जमा होता रहा, तो पूरे बरसात के मौसम में इंटरलॉकिंग के आसपास बने अन्य सभी मिट्टी के घरों के भी गिरने की आशंका है, जिससे व्यापक नुकसान हो सकता है।2
- चन्दौली जिले के सैयदराजा कोतवाली क्षेत्र में स्थित जेवरिया बाद गांव में कोटे के चुनाव को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। चुनाव में धांधली का गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में ग्रामीण सदर तहसील दिवस पहुंचे, जहाँ उन्होंने एडीएम को एक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में अब तक तीन बार चुनाव कराए जा चुके थे, लेकिन इसके बावजूद चौथी बार भी मतदान करवाया गया। उन्होंने प्रमुख महेंद्र सिंह पर दबाव बनाने का सीधा आरोप लगाया, जिसके कारण यह पुनः मतदान कराया गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित करते हुए इसमें बाहरी लोगों को बुलाकर मतदान कराया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है, और उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही फिर से चुनाव कराने की पुरजोर मांग की है।2