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पाथाखेड़ा स्थित बजरंग मंदिर के पास खाने के टिफिन बेचने वाले एक व्यक्ति को अज्ञातवास ने टक्कर मार दी। इस घटना में वह व्यक्ति घायल हो गया, जिसके बाद उसे घोड़ाडोंगरी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
Namdev gujre Khabar bhart news
पाथाखेड़ा स्थित बजरंग मंदिर के पास खाने के टिफिन बेचने वाले एक व्यक्ति को अज्ञातवास ने टक्कर मार दी। इस घटना में वह व्यक्ति घायल हो गया, जिसके बाद उसे घोड़ाडोंगरी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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- पवित्र नगरी मुलताई में अवैध शराब की बिक्री को लेकर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नगर के विभिन्न क्षेत्रों में खुलेआम अवैध शराब बेचे जाने की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन विभाग द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अधिकांश समय मुख्यालय पर मौजूद नहीं रहते, जिससे आम नागरिकों को जानकारी प्राप्त करने या शिकायत दर्ज कराने में भारी परेशानी होती है। विभाग में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। आबकारी अधिकारी राजेश वट्टी पर भी फोन नहीं उठाने का आरोप है; नागरिकों का कहना है कि शिकायत के लिए कई बार संपर्क करने पर भी उनका फोन रिसीव नहीं किया जाता, जिससे अवैध शराब कारोबारियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग द्वारा समय-समय पर कार्रवाई किए जाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन कब और कहाँ कितनी मात्रा में शराब जब्त की गई, इसकी जानकारी प्रेसनोट के माध्यम से सार्वजनिक नहीं की जाती। इस अपारदर्शिता के कारण आबकारी विभाग की कार्रवाई और पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। नगरवासियों का कहना है कि धार्मिक और पवित्र नगरी मुलताई में जगह-जगह अवैध शराब की बिक्री से सामाजिक वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए और अवैध शराब के कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाया जाए। साथ ही, विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है।1
- जीआरपी इटारसी को राजधानी एक्सप्रेस में यात्रियों के सोते समय लाखों की चोरी करने वाले एक शातिर बदमाश को पकड़ने में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 'भूरा उर्फ आशीष' नामक इस आरोपी को धर दबोचा है, जिसके पास से ₹8,50,000 से अधिक का चोरी किया गया सामान बरामद किया गया है। सीसीटीवी फुटेज और साइबर सेल की तकनीकी मदद से पुलिस ने इस शातिर चोर की 'नींद' उड़ा दी, जिससे यात्रियों को निशाना बनाकर चोरी करने वाला यह बदमाश अब कानून की गिरफ्त में है।1
- भैंसदेही विधानसभा के भीमपुर ब्लॉक के रंभा पंचायत के रिंगढाणा गांव में आगजनी की घटना से प्रभावित परिवारों से मिलने केंद्रीय मंत्री (सांसद) डीडी उईके और क्षेत्रीय विधायक महेंद्रसिंह चौहान पहुँचे। इस दौरान रिंगढाणा के एक पीड़ित सहानु कास्देकर ने नेताओं को अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि उनके बेटे की सोमवार को शादी थी और आग लगने से शादी का सब कुछ जलकर खाक हो गया है, जिससे अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि शादी कैसे करें। सहानु कास्देकर ने बताया कि उनके बेटे की बारात डोडाजाम जाने वाली थी और शादी की सारी खरीदी भी पूरी हो चुकी थी। आगजनी में उनके 4,12,000 रुपये नकद, शादी के सभी कपड़े, जेवर और अनाज सहित सबकुछ जलकर राख हो गया है। केंद्रीय मंत्री डीडी उईके ने रिंगढाणा के सभी पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मंत्री और विधायक ने मौके पर लोगों को कपड़े भी वितरित किए और पीड़ितों से चिंता न करने का आग्रह करते हुए कहा कि वे सब उनके साथ खड़े हैं। गौरतलब है कि विधायक महेंद्रसिंह चौहान शनिवार को भी रिंगढाणा के पीड़ितों से मिलने गए थे, जहाँ उन्होंने नकद राशि के साथ कपड़े, राशन और पानी आदि की व्यवस्थाएँ करवाई थीं। आज फिर विधायक ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे लोगों के खाते समय सीमा में खोलें और पीने के पानी के लिए बोर खनन करवाएँ। इस दौरान केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डीडी उईके के साथ क्षेत्रीय विधायक महेंद्रसिंह चौहान, जनपद अध्यक्ष भैय्यालाल इरपाचे, जिला महामंत्री कृष्णा गायकी, मंडल अध्यक्ष अनिल उईके, जिला पंचायत सदस्य सोनू सुनील भलावी, पूर्व जनपद अध्यक्ष सुनील भलावी, मिनॉग भुसुमकर, यूमो अध्यक्ष विकलसिंह, विनोद वर्टी, सरपंच गुंजी बाई गन्नू बारस्कर, श्यामजी यादव, सरपंच मनाराम जी और मुन्नालाल कवड़े सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।3
- सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर बाबरी घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान, लगभग 1 लाख श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में आस्था की डुबकी लगाई।1
- आज सोमवती अमावस्या के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाई। पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन पड़ने वाली इस सोमवती अमावस्या पर सोमवार सुबह 4:00 बजे से लेकर दोपहर तक नर्मदा घाटों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। सोहागपुर के ग्राम माछा, अजेरा, ईशरपुर, रेवा, बनखेड़ी और पामली सहित विभिन्न नर्मदा घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे। दोपहर 12:00 बजे तक स्नान का यह पवित्र दौर जारी रहा, जहाँ भक्तों ने मां नर्मदा में स्नान करने के बाद उनकी पूजा-अर्चना भी की। पुराणों के अनुसार, मां नर्मदा में स्नान और उनके दर्शन करने से पापों से मुक्ति मिलती है, इसी धार्मिक मान्यता के साथ श्रद्धालुओं ने यह विशेष स्नान संपन्न किया।1
- सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर मुलताई की ताप्ती नगरी में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। अधिकमास की समाप्ति और सोमवती अमावस्या के विशेष संयोग के चलते सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त ताप्ती तट पर पहुंचे और पुण्य सलिला मां ताप्ती में आस्था की डुबकी लगाई। ताप्ती स्नान के उपरांत, श्रद्धालुओं ने नगर के प्रमुख मंदिरों में जाकर भगवान शिव, मां ताप्ती और अन्य देवी-देवताओं के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें भाग लेकर श्रद्धालुओं ने व्रत-उपवास किए और दान-पुण्य कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। ताप्ती तट पर दिनभर मेले जैसा माहौल रहा, जहाँ दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भी भारी संख्या में भक्तगण पहुँचे। श्रद्धालुओं की इस भारी भीड़ को देखते हुए, प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। ताप्ती तट और मंदिर परिसरों में स्वयंसेवकों को भी तैनात किया गया था, जिन्होंने श्रद्धालुओं को आवश्यक सहयोग प्रदान किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान, दान और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण ताप्ती उद्गम नगरी में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना बना रहा और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर दिखा।1
- इटारसी नगर पालिका की कथित सुस्ती और विभिन्न वॉर्डों की मूलभूत समस्याओं को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मयूर जायसवाल के नेतृत्व में नगर पालिका का घेराव किया। इस 'काव्यात्मक' और 'तीखे' प्रहार का लक्ष्य सोए हुए प्रशासन को जगाना बताया गया। यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन सड़क, पानी और साफ़-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव को उजागर करने के लिए आयोजित किया गया था, जिसे भारी जनसमर्थन मिला। प्रदर्शनकारियों ने यह सवाल उठाया कि आखिर जनता टैक्स चुकाने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं के लिए कब तक तरसती रहेगी और नगर पालिका के पास विकास के बजट का क्या हिसाब है। पोस्ट में पाठकों से भी अपील की गई है कि वे अपने वॉर्ड में नगर पालिका की सबसे बड़ी लापरवाही को लेकर अपनी राय या भड़ास टिप्पणी अनुभाग में दर्ज करें।1
- भैंसदेही से करीब 35-40 किलोमीटर दूर पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे लोकलदारी गाँव के आदिवासी किसान अपनी पीढ़ियों से चली आ रही खेती वाली जमीनों से विस्थापित होने के गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके खेतों पर बनी झोपड़ियों को तोड़ा गया, महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अब इन्हीं जमीनों पर प्लांटेशन लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। लगभग 100 मकानों और करीब 1,500 निवासियों वाले इस गाँव की मुख्य आजीविका खेतिहर कृषि पर निर्भर है, लेकिन सड़क, परिवहन और पर्याप्त सुविधाओं की कमी के कारण यहाँ के युवा रोजगार के लिए महाराष्ट्र की ओर पलायन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे दशकों से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं और कई पीढ़ियों की आजीविका इन्हीं खेतों से जुड़ी है। उन्होंने वनाधिकार (Forest Rights Act) के तहत कई बार आवेदन दिए, शिविरों में भी गए, लेकिन वर्षों बीतने के बावजूद उन्हें वनाधिकार पट्टा नहीं मिला। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलने पर केवल आश्वासन ही मिला। एक वरिष्ठ ग्रामीण ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, "हमारी दादी-नानी यहीं पली-बढ़ीं, आज हमें हमारी जमीन से बेदखल किया जा रहा है।" वन अधिकार कानून, 2006, जंगलों में रहने वाले पारंपरिक समुदायों को भूमि और उपयोग के अधिकार देता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी और जटिल है जिसमें सत्यापन, ग्रामसभा का निर्णय और अधिकारियों की मंजूरी आवश्यक होती है। लोकलदारी के किसानों ने सभी आवश्यक दस्तावेज और आवेदन जमा किए, पर उन्हें मंजूरी नहीं मिली। भैंसदेही विधायक महेंद्र सिंह चौहान ने ग्रामीणों से मिलने के बाद उन्हें वन विभाग और जिला प्रशासन से मिलकर समाधान निकालने का प्रयास करने का आश्वासन दिया है। इस प्लांटेशन से स्थानीय आजीविका गंभीर रूप से प्रभावित होगी, जिससे युवा पलायन और सामाजिक अस्थिरता बढ़ सकती है। साथ ही महिला और बुजुर्ग परिवारों की सुरक्षा तथा पारंपरिक जमीनों के अधिकार भी जोखिम में पड़ जाएंगे। ग्रामीणों ने विधायक से मदद मांगी है और यदि बात नहीं बनी तो वे बड़े जन आंदोलन या कानूनी रास्ता अपनाने का संकेत दे रहे हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग और जिला प्रशासन का आधिकारिक बयान क्या आता है और विधायक की अगली कार्रवाई क्या होती है।2
- भैंसदेही के भीमपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत रम्भा के ग्राम रिंगढ़ाना में एक दर्दनाक अग्निकांड ने 19 परिवारों की जिंदगी बदल दी है। बताया जा रहा है कि तेज हवा के बीच खाना बनाते समय निकली एक छोटी सी चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और एक के बाद एक 19 कच्चे मकान इसकी चपेट में आ गए। इस भीषण आग में घरों में रखा अनाज, कपड़े, घरेलू सामान और वर्षों की मेहनत से जुटाई गई पूंजी चंद पलों में राख में बदल गई, वहीं कई बकरियां और अन्य पालतू पशु भी झुलस गए। आग लगने के बाद गांव में चारों ओर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आग बुझाने का प्रयास किया, जिसमें कई लोगों के हाथ और शरीर झुलस गए। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, लेकिन आग की भयावहता को नियंत्रित करने में उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम अजीत मरावी पूरी रात मौके पर डटे रहे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर राहत तथा बचाव कार्य की कमान संभाली। जिन परिवारों के घर जल गए थे, उन्हें तत्काल राहत देते हुए आंगनवाड़ी केंद्र और स्कूल भवनों में ठहराने की व्यवस्था की गई, ताकि कोई भी परिवार खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर न हो। मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण पेश करते हुए, एसडीएम अजीत मरावी और जनपद सीईओ झलकन की मौजूदगी में सचिव संघ भैंसदेही के अध्यक्ष संतोष लोखंडे, रितेश कावड़कर, भगवंतराव कनाठे सहित अधिकारियों और कर्मचारियों ने पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। वहीं, चोपनी खुर्द के सरपंच गणेश ने भी आगे बढ़कर मदद की और ग्रामीणों से गेहूं एकत्रित कर अपने स्वयं के ट्रैक्टर से 15 कट्टी गेहूं रिंगढ़ाना पहुंचाया, साथ ही रातभर आग बुझाने के प्रयासों में सहयोग किया। रिंगढ़ाना के कई परिवारों की छत छिन जाने के बावजूद, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सामूहिक मदद ने संकट की इस घड़ी में इंसानियत के जीवित होने का प्रमाण दिया है। राख में तब्दील हुए घरों के बीच अब पीड़ित परिवारों को नए सिरे से जिंदगी बसाने की उम्मीद दिखने लगी है, और मदद के लिए बढ़ते हाथ उनके हौसले को टूटने नहीं दे रहे हैं।2