सासनी तहसील परिसर में रजिस्ट्री प्रक्रिया के निजीकरण के विरोध में शनिवार को भी अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प वेंडरों और टाइपिस्टों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। सभी ने अपने चैंबर बंद रखे, जिसके कारण तहसील का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया का निजीकरण करने से तहसील के कातिबों, स्टाम्प वेंडरों और अधिवक्ताओं के रोजगार पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका यह भी कहना है कि इस फैसले से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान होगा। वक्ताओं ने तहसील परिसर में नारेबाजी करते हुए इस निर्णय को जनविरोधी बताया और कहा कि इसे किसी भी हाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा। अधिवक्ताओं की मांग है कि रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह सरकारी तंत्र के अधीन रहना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। शनिवार को पूरे दिन चैंबर बंद रहने और कार्य बहिष्कार के कारण दूर-दराज से तहसील आने वाले फरियादियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेजों से संबंधित आवश्यक कार्य न हो पाने के कारण लोग निराश होकर वापस लौटते दिखे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। प्रदर्शन में सतीश बागर, पी.के. सिंह वाल्यान, सुनील दत्त पाठक, कृष्ण सिंह तोमर, अनिल गुप्ता, सुभाष कुमार, अजुद्दीन प्रसाद, के.पी. सुमन, भरत सिंह बघेल, राजवीर सिंह, महेश तोमर, प्रदीप सिंह, गीतम सिंह, गौरी शंकर कुशवाहा, राजेश लवानिया, संजीव कुमार सहित कई वकील, कातिब और स्टाम्प विक्रेता मौजूद थे।
सासनी तहसील परिसर में रजिस्ट्री प्रक्रिया के निजीकरण के विरोध में शनिवार को भी अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प वेंडरों और टाइपिस्टों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। सभी ने अपने चैंबर बंद रखे, जिसके कारण तहसील का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया का निजीकरण करने से तहसील के कातिबों, स्टाम्प वेंडरों और अधिवक्ताओं के रोजगार पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका यह भी कहना है कि इस फैसले से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान होगा। वक्ताओं ने तहसील परिसर में नारेबाजी करते हुए इस निर्णय को जनविरोधी बताया और कहा कि इसे किसी भी हाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा। अधिवक्ताओं की मांग है कि रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह सरकारी
तंत्र के अधीन रहना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। शनिवार को पूरे दिन चैंबर बंद रहने और कार्य बहिष्कार के कारण दूर-दराज से तहसील आने वाले फरियादियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेजों से संबंधित आवश्यक कार्य न हो पाने के कारण लोग निराश होकर वापस लौटते दिखे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण का यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। प्रदर्शन में सतीश बागर, पी.के. सिंह वाल्यान, सुनील दत्त पाठक, कृष्ण सिंह तोमर, अनिल गुप्ता, सुभाष कुमार, अजुद्दीन प्रसाद, के.पी. सुमन, भरत सिंह बघेल, राजवीर सिंह, महेश तोमर, प्रदीप सिंह, गीतम सिंह, गौरी शंकर कुशवाहा, राजेश लवानिया, संजीव कुमार सहित कई वकील, कातिब और स्टाम्प विक्रेता मौजूद थे।
- हाथरस के जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम "योग फॉर हेल्दी एजिंग" रखी गई थी। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धनवंतरी के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि सांसद अनूप वाल्मीकि और गौ सेवा आयोग के सदस्य दीपक गोयल शामिल हुए। इनके साथ जिले के विभिन्न जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भी एक साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के सदस्य दीपक गोयल ने योग के महत्व के साथ-साथ गौ संरक्षण, जैविक खेती और गोबर आधारित ऊर्जा पर विशेष जोर दिया। सांसद अनूप वाल्मीकि ने योग को स्वस्थ जीवन की वैज्ञानिक पद्धति बताते हुए सभी से इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। जिलाधिकारी अतुल वत्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। सभी जनप्रतिनिधियों ने युवाओं को जंक फूड छोड़कर पौष्टिक आहार और श्री अन्न (मोटे अनाज) अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन योग प्रशिक्षकों को सम्मानित करने और राष्ट्रगान के साथ हुआ।4
- बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो चीफ मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक भरी सभा में चेतावनी दी है। इस चेतावनी से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हुआ है।1
- चण्डौस में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जनवरी 2026 में प्रतिबंधित गौमांस बरामदगी के मामले में खुर्जा के चर्चित मीट कारोबारी और अल-हम्द मीट फैक्ट्री के मालिक अनवर हुसैन तथा अशफाक को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस के अनुसार, यह मामला जनवरी माह का है जब फैक्ट्री से जुड़े एक ट्रक की जाँच के दौरान भारी मात्रा में मांस बरामद हुआ था। बरामद मांस के नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए थे और हाल ही में मिली जाँच रिपोर्ट में मांस के प्रतिबंधित गौमांस होने की पुष्टि हुई। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों की तलाश शुरू की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। थाना चण्डौस पुलिस ने बताया है कि इस मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है और जाँच के आधार पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।1
- अलीगढ़ किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने एक दिवसीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इस बैठक के साथ ही, उन्होंने 'चलो गाँव की ओर' नामक अभियान का भी आह्वान किया।1
- अलीगढ़ के इगलास क्षेत्र में शनिवार को एक अनियंत्रित अलीगढ़ डिपो की रोडवेज बस सड़क किनारे एक दुकान में जा घुसी, जिससे एक महिला समेत कुल तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस संख्या UP 85 DT 6484 अलीगढ़ से मथुरा की ओर जा रही थी, तभी इगलास बिजलीघर के सामने अचानक बस बेकाबू हो गई। अनियंत्रित बस ने पहले पैदल जा रही एक महिला को टक्कर मारी, फिर सड़क किनारे खड़ी एक मोटरसाइकिल को कुचलते हुए सीधे दुकान में जा घुसी। इस हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और एंबुलेंस की मदद से घायलों को उपचार के लिए अलीगढ़ भेजा। घायलों में महिला समेत दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया है कि दुर्घटना के तुरंत बाद बस चालक और परिचालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची, क्षतिग्रस्त बस को कब्जे में लिया और यातायात व्यवस्था को सामान्य किया। पुलिस फिलहाल फरार चालक और परिचालक की तलाश कर रही है और हादसे के कारणों की गहन जांच भी जारी है। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश देखा गया, जिन्होंने परिवहन विभाग से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ-साथ घायलों को उचित उपचार और मुआवजा दिलाने की मांग की है।1
- हाथरस के नगला रमजू गांव निवासी 32 वर्षीय आलू व्यापारी विष्णु का शव खोंडा गांव के पास एक नलकूप पर पेड़ से फंदे पर लटका मिला है, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। उनकी यह मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। आलू के व्यापार से जुड़े विष्णु के बारे में बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से व्यवसाय में हुए भारी नुकसान के कारण मानसिक तनाव में थे। वहीं, मृतक के पिता मूलचंद ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस पिता की शिकायत और मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन जांच कर रही है, साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। इस घटना के बाद से मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।2
- हाथरस में एक विवादित जमीन को खाली कराने के लिए पहुंची नगर पालिका को भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें बिना कोई कार्रवाई किए ही वापस लौटना पड़ा। नगर पालिका इस भूमि पर अपना मालिकाना हक जता रही है, जबकि वहाँ पिछले 25 सालों से रह रहे परिवार का दावा है कि वे इस जमीन का नियमित किराया कोर्ट में जमा कर रहे हैं। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन के साथ तीखी नोकझोंक और हंगामा हुआ। फिलहाल, मौके पर मालिकाना हक के पुख्ता दस्तावेज न मिल पाने के कारण यह काम रोक दिया गया है। प्रशासन ने निर्णय लिया है कि दोनों पक्षों के कागजातों की गहन जांच के बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा।1