यह घटना अवैध रेत खनन पर हो रही कार्रवाई और उसके दुखद परिणाम को दर्शाती है। यहाँ इस समाचार का मुख्य विवरण दिया गया है: ## **अवैध खनन पर कार्रवाई के दौरान हादसा: नर्मदा में कूदने से युवक की मौत** नर्मदा नदी में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ माइनिंग टीम की दबिश के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। टीम को देखकर डर के मारे नदी में छलांग लगाने वाले एक युवक की डूबने से मौत हो गई। ### **घटना का मुख्य विवरण** * **वजह:** माइनिंग विभाग की टीम अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए छापेमारी करने पहुँची थी। * **हादसा:** टीम को अचानक सामने देख वहां काम कर रहे युवक घबरा गए। पकड़े जाने के डर से एक युवक ने नर्मदा नदी के गहरे पानी में छलांग लगा दी, जिससे उसकी जान चली गई। * **परिजनों का आरोप:** मृतक के परिजनों ने प्रशासन और माइनिंग विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बड़े रेत माफियाओं को खुली छूट दी जा रही है, जबकि गरीब लोग जो जीवनयापन के लिए बोरी में रेत ले जाते हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। ### **विवाद और आक्रोश** इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश देखा गया। परिजनों का तर्क है कि: 1. प्रशासन का दोहरा रवैया छोटे और बड़े कारोबारियों के प्रति अलग-अलग है। 2. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा मानकों या मानवीय दृष्टिकोण की कमी रही। > **नोट:** स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है ताकि मौत के सटीक कारणों और कार्रवाई की प्रक्रिया की निष्पक्षता का पता लगाया जा सके।
यह घटना अवैध रेत खनन पर हो रही कार्रवाई और उसके दुखद परिणाम को दर्शाती है। यहाँ इस समाचार का मुख्य विवरण दिया गया है: ## **अवैध खनन पर कार्रवाई के दौरान हादसा: नर्मदा में कूदने से युवक की मौत** नर्मदा नदी में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ माइनिंग टीम की दबिश के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। टीम को देखकर डर के मारे नदी में छलांग लगाने वाले एक युवक की डूबने से मौत हो गई। ### **घटना का मुख्य विवरण** * **वजह:** माइनिंग विभाग की टीम अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए छापेमारी करने पहुँची थी। * **हादसा:** टीम को अचानक सामने देख वहां काम कर रहे युवक घबरा गए। पकड़े जाने के डर से एक युवक ने नर्मदा नदी के गहरे पानी में छलांग लगा दी, जिससे उसकी जान चली गई। * **परिजनों का आरोप:** मृतक के परिजनों ने प्रशासन और माइनिंग विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बड़े रेत माफियाओं को खुली छूट दी जा रही है, जबकि गरीब लोग जो जीवनयापन के लिए बोरी में रेत ले जाते हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। ### **विवाद और आक्रोश** इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश देखा गया। परिजनों का तर्क है कि: 1. प्रशासन का दोहरा रवैया छोटे और बड़े कारोबारियों के प्रति अलग-अलग है। 2. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा मानकों या मानवीय दृष्टिकोण की कमी रही। > **नोट:** स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है ताकि मौत के सटीक कारणों और कार्रवाई की प्रक्रिया की निष्पक्षता का पता लगाया जा सके।
- कटनी में ऑटो चालकों की गुंडागर्दी: जंक्शन से मुड़वारा जाने का वसूला 1020रुपये किराया, विरोध करने पर मजदूरों को दी जान से मारने की धमकी। कटनी। कटनी शहर में ई-रिक्शा और ऑटो चालकों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब बाहरी यात्रियों के साथ सरेराह लूट और अभद्रता आम बात हो गई है। ताजा मामला कटनी जंक्शन और मुड़वारा स्टेशन के बीच का है, जहां दो गरीब मजदूरों से महज कुछ किलोमीटर की दूरी के लिए 1020 रुपये वसूल लिए गए। विरोध करने पर ऑटो चालक ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। मात्र 30 रुपये की बात कर बिठाया, फिर की अवैध वसूली पीड़ित यात्री दीपक यादव ने बताया कि वह अपने मित्र आकाश यादव के साथ शहडोल जिले के ग्राम गोपारु के निवासी हैं। दोनों पिछले तीन महीनों से पुणे में मजदूरी कर रहे थे। सोमवार शाम करीब 4:00 बजे जब वे रीवा-राजकोट एक्सप्रेस से कटनी जंक्शन पहुंचे, तो उन्हें शहडोल जाने वाली ट्रेन पकड़ने के लिए मुड़वारा स्टेशन जाना था। स्टेशन के बाहर एक ई-रिक्शा चालक ने 30 रुपये सवारी के हिसाब से उन्हें बिठाया। लेकिन मुड़वारा स्टेशन पहुंचते ही चालक के तेवर बदल गए। जब यात्रियों ने तयशुदा 60 रुपये देने की कोशिश की, तो चालक ने गाली-गलौज शुरू कर दी और प्रति सवारी 510 रुपये के हिसाब से कुल 1020 रुपये की मांग की। नकदी नहीं थी तो मोबाइल दुकान पर कराया 'PhonePe' दहशत का आलम यह था कि ऑटो चालक ने मजदूरों को जान से मारने की धमकी दी। जब मजदूरों ने नकदी न होने की बात कही, तो चालक उन्हें जबरन एक मोबाइल दुकान कृष्णा मोबाइल केयर पर ले गया। वहां दुकानदार के नंबर पर 1020 रुपये 'फोन पे' करवाए गए और दुकानदार से नकदी लेकर यात्रियों को छोड़ा गया। स्थानीय लोगों में आक्रोश खतरे में शहर की छवि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कटनी एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जहां चारों दिशाओं से यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है। इस तरह की घटनाएं कटनी की छवि खराब कर रही हैं। लोगों ने मांग की है कि ऐसे गुंडा तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, अन्यथा यात्रियों का इस शहर से भरोसा उठ जाएगा। इस मामले पर नेहा पच्चीसिया,नगर पुलिस अधीक्षक ने संज्ञान लेते हुए कहा कि पूर्व में भी ऐसी शिकायतों पर मुहिम चलाकर कार्रवाई की गई थी और चालकों को हिदायत दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस ताजा मामले में शिकायत मिलते ही तत्काल प्राथमिक दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।1
- मवेशी मलिक इस तरह से लापरवाही करते हैं कृपया कर थोड़ा सा हिदायत दें1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ 🚨 ग्राम धूरी में गेहूं की फसल कटने के बाद खेतों में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते कई खेत इसकी चपेट में आ गए। ग्रामीणों ने मिलकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग ने काफी नुकसान पहुंचाया। प्रभावित किसानों में शिवचरण चौधरी, सुभाष चौधरी, गेंदलाल और रामजी चौधरी सहित कई अन्य किसान शामिल हैं। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन और दमकल विभाग को सूचना दे दी गई है।2
- थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?” यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है। जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं। भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है। यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता। थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें। यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है। जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।1
- भीम आर्मी का प्रदर्शन जारी?1
- मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ स्कूल से घर लौट रही एक 13 वर्षीय नाबालिग छात्रा का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए अमदरा थाना पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। क्या है पूरा मामला? घटना शुक्रवार शाम करीब 4 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, नाबालिग छात्रा जब स्कूल से अपनी छुट्टी के बाद घर वापस लौट रही थी, तभी रास्ते में दो दरिंदों ने उसे अपना निशाना बनाया। आरोपियों ने छात्रा को जबरन अगवा किया और उसके साथ दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों की हुई पहचान अमदरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रविवार शाम को दोनों आरोपियों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है: सनी कोहली (उम्र 25 वर्ष, निवासी कटनी) गोलू उर्फ दीपक (उम्र 38 वर्ष, निवासी झुकेही, हाल निवासी कटनी) पुलिस की कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया। माननीय न्यायालय के आदेश के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है। इस घटना के बाद से क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। मध्य भारत न्यूज़ (MBN) के लिए मैहर से ब्यूरो रिपोर्ट।1
- मो. इस्लाम सिद्दीकी द्वारा मेरी गाड़ी का चालान काटा गया कर्वी चित्रकूट में आए दिन रोज चालान काट कर जन समूह को प्रताड़ित किया जा रहा, मैं अभी चौराहे से घर के काम से निकला था और मेरी बुलेट गाड़ी का चालान काट दिया जाता है,बीच चौराहे में मोबाइल लेकर खड़े इन वर्दी के भेष में ये गुंडे,वसूली गैंग,किसी आतंकवादी से कम नहीं जो बेमतलब जन समूह को लगातार हर रोज प्रताड़ित कर रहें हैं.... मेरा अपने बड़े भाईयों से निवेदन है की इस अराजकता के खिलाफ मेरा साथ दीजिए और जन प्रतिनिधियों को जगाने में सहयोग कीजिए, इन ट्राफिक पुलिस अधिकारियो के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही होना अत्यंत आवश्यक है1
- कटनी नगर//- *पार्षद जयनारायण निषाद एवम समाज सेवी श्याम निषाद* जी की देखरेख में सरस्वती स्कूल के पास की बची हुई सड़क का डामलीकरण कार्य विगत रात्रि में पूर्ण रूप से किया गया *आदिशक्ति माँ विंध्यवासनी मंदिर राकेश निषाद(पत्रकार)* *7509747686* #निर्माण #सड़क #प्रगति1