थाना राजेपुर क्षेत्र के ग्राम अंबरपुर की मढ़ैया में पैतृक भूमि विवाद को लेकर एक परिवार आमरण अनशन और भूख हड़ताल पर बैठ गया है। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे गांव निवासी गिरीश चंद्र मिश्रा अपनी पत्नी गायत्री, पुत्री सुमन, पुत्र देवेश और बहू गंगा देवी के साथ अनशन पर बैठे। गिरीश चंद्र मिश्रा का आरोप है कि करीब 7 डिसमिल भूमि पर उनका पिछले 40 वर्षों से कब्जा है, लेकिन गांव के ही रमाकांत, ओमकार और अरुण द्वारा उस भूमि पर मिट्टी डलवाकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे इस भूमि पर बाबू कल्याण सिंह के नाम से पार्क बनवाना चाहते हैं, लेकिन न्याय न मिलने के कारण परिवार सहित भूख हड़ताल शुरू करनी पड़ी है। वहीं, दूसरे पक्ष के रमाकांत का कहना है कि उन्होंने अंबरपुर मोड़ के निकट लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए अपनी 14 डिसमिल भूमि दी थी, जिसके बदले में उन्हें यह जमीन मिलने की प्रक्रिया चल रही है। रमाकांत ने बताया कि उन्होंने 17 मार्च 2026 को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना में जा रही अपनी भूमि एवं मकान के मुआवजे को लेकर न्याय की गुहार लगाई थी। उनके अनुसार, ग्राम सभा अंबरपुर की गाटा संख्या 202 और 203 की भूमि एक्सप्रेसवे परियोजना में प्रभावित हो रही है। रमाकांत का आरोप है कि गाटा संख्या 203 में बने मकान का सही मूल्यांकन नहीं किया गया, जबकि मकान निर्माण में करीब 25 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से अपनी उपस्थिति में मकान का पुनः सर्वे कराकर निष्पक्ष जांच के बाद उचित मुआवजा निर्धारित किए जाने की मांग की है। पूरे मामले पर क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक अतुल कुमार ने बताया कि जिस भूमि को लेकर विवाद और आरोप लगाए जा रहे हैं, वह सरकारी जमीन है, जिस पर पहले से एक पक्ष का कब्जा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे पक्ष की भूमि लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना में जा रही है और उसका बैनामा होना प्रस्तावित है। राजस्व निरीक्षक के अनुसार, जिन चार परिवारों की भूमि लिंक एक्सप्रेस-वे में अधिग्रहित हो रही है और जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं बचेगी, उन्हें बसाने के लिए इसी सरकारी जमीन से प्रति परिवार 2 डिसमिल के हिसाब से कुल 8 डिसमिल भूमि दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि बैनामे की प्रक्रिया के दौरान संबंधित परिवारों की मूल भूमि से उतनी ही 8 डिसमिल जमीन की कटौती कर ली जाएगी। विवाद की सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और दरोगा जगदीश वर्मा ने घटनास्थल का जायजा लिया। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर दो पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। थाना प्रभारी राजेपुर नागेंद्र सिंह ने बताया कि यह मामला राजस्व विभाग से संबंधित भूमि विवाद का है और क्षेत्र में इसे लेकर चर्चाओं का माहौल बना हुआ है।
थाना राजेपुर क्षेत्र के ग्राम अंबरपुर की मढ़ैया में पैतृक भूमि विवाद को लेकर एक परिवार आमरण अनशन और भूख हड़ताल पर बैठ गया है। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे गांव निवासी गिरीश चंद्र मिश्रा अपनी पत्नी गायत्री, पुत्री सुमन, पुत्र देवेश और बहू गंगा देवी के साथ अनशन पर बैठे। गिरीश चंद्र मिश्रा का आरोप है कि करीब 7 डिसमिल भूमि पर उनका पिछले 40 वर्षों से कब्जा है, लेकिन गांव के ही रमाकांत, ओमकार और अरुण द्वारा उस भूमि पर मिट्टी डलवाकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे इस भूमि पर बाबू कल्याण सिंह के नाम से पार्क बनवाना चाहते हैं, लेकिन न्याय न मिलने के कारण परिवार सहित भूख हड़ताल शुरू करनी पड़ी है। वहीं, दूसरे पक्ष के रमाकांत का कहना है कि उन्होंने अंबरपुर मोड़ के निकट लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए अपनी 14 डिसमिल भूमि दी थी, जिसके बदले में उन्हें यह जमीन मिलने की प्रक्रिया चल रही है। रमाकांत ने बताया कि उन्होंने 17 मार्च 2026 को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना में जा रही अपनी भूमि एवं मकान के मुआवजे को लेकर न्याय की गुहार लगाई थी। उनके अनुसार, ग्राम सभा अंबरपुर की गाटा संख्या 202 और 203 की भूमि एक्सप्रेसवे परियोजना में प्रभावित हो रही है। रमाकांत का आरोप है कि गाटा संख्या 203 में बने मकान का सही मूल्यांकन नहीं
किया गया, जबकि मकान निर्माण में करीब 25 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से अपनी उपस्थिति में मकान का पुनः सर्वे कराकर निष्पक्ष जांच के बाद उचित मुआवजा निर्धारित किए जाने की मांग की है। पूरे मामले पर क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक अतुल कुमार ने बताया कि जिस भूमि को लेकर विवाद और आरोप लगाए जा रहे हैं, वह सरकारी जमीन है, जिस पर पहले से एक पक्ष का कब्जा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे पक्ष की भूमि लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना में जा रही है और उसका बैनामा होना प्रस्तावित है। राजस्व निरीक्षक के अनुसार, जिन चार परिवारों की भूमि लिंक एक्सप्रेस-वे में अधिग्रहित हो रही है और जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं बचेगी, उन्हें बसाने के लिए इसी सरकारी जमीन से प्रति परिवार 2 डिसमिल के हिसाब से कुल 8 डिसमिल भूमि दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि बैनामे की प्रक्रिया के दौरान संबंधित परिवारों की मूल भूमि से उतनी ही 8 डिसमिल जमीन की कटौती कर ली जाएगी। विवाद की सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और दरोगा जगदीश वर्मा ने घटनास्थल का जायजा लिया। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर दो पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। थाना प्रभारी राजेपुर नागेंद्र सिंह ने बताया कि यह मामला राजस्व विभाग से संबंधित भूमि विवाद का है और क्षेत्र में इसे लेकर चर्चाओं का माहौल बना हुआ है।
- फर्रुखाबाद जनपद में ई-रिक्शा में यात्रा कर रही एक महिला के साथ बड़ी वारदात सामने आई है, जिसमें नकाबपोश महिलाओं और ई-रिक्शा चालक की कथित मिलीभगत से उसके बैग से लाखों के जेवर चोरी कर लिए गए। इस घटना से जनपद में ई-रिक्शा सफर के दौरान जेवरात पार करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। लुटेरे करीब 9 तोला सोने के जेवर और लगभग 730 ग्राम चांदी के जेवर लेकर फरार हो गए। राजेपुर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर गांव की निवासी कांता देवी अपनी बहू के साथ रिश्तेदारी में शमशाबाद जाने के लिए पांचाल घाट गोल चक्कर से ई-रिक्शा में बैठी थीं। पीड़िता ने चालक से लाल दरवाजा और टाउन हॉल तहसील के पास छोड़ने को कहा था। आरोप है कि जब ई-रिक्शा लाल दरवाजा पहुंचा, तो वहां पहले से मौजूद दो नकाबपोश महिलाएं, जिनमें एक युवती भी शामिल थी, उसी रिक्शा में सवार हो गईं। सफर के दौरान इन महिलाओं ने बातचीत और चकमा देकर पीड़िता का ध्यान भटकाए रखा। दोपहर लगभग 1 बजे 15 जून 2026 को जब ई-रिक्शा टाउन हॉल क्षेत्र के पास पहुंचा और पीड़िता ने अपना बैग बहू को पकड़ाया, तो उसे उसका वजन कम महसूस हुआ। बैग की चेन खोलकर देखने पर पता चला कि उसमें रखे सोने और चांदी के सभी जेवर गायब थे। इस वारदात के बाद पीड़िता काफी देर तक ई-रिक्शा चालक को तलाशती रही, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उसने 16 जून को पांचाल घाट पहुंचकर डायल 112 पुलिस को सूचना दी और पूरी घटना से अवगत कराया। घटना के बाद क्षेत्र में सार्वजनिक वाहनों में महिलाओं को निशाना बनाने वाले गिरोह के सक्रिय होने की चर्चा है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। सार्वजनिक वाहनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को सावधानी बरतने और अपने कीमती सामान को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना देने को कहा गया है।4
- फर्रुखाबाद जिले के मोहम्मदाबाद कस्बे में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ पाँच बच्चों की माँ अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई है।1
- फर्रुखाबाद जिला प्रशासन ने आगामी मानसून और संभावित बाढ़ आपदा से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इन तैयारियों को परखने के लिए राहत एवं बचाव कार्यों की एक मेगा मॉक ड्रिल का भी आयोजन किया गया। प्रशासन ने गंगा और रामगंगा नदी के किनारे बसे गांवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 52 बाढ़ चौकियां और 24 बाढ़ शरणालय स्थापित करने की योजना बनाई है। जिलाधिकारी अंकुर लाठर ने बताया कि जिले में 77 अतिसंवेदनशील और 112 संवेदनशील गांवों की पहचान कर उन पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 15 जून के बाद सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया जाएगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 15 से 25 जून के बीच मानसून के फर्रुखाबाद पहुंचने की संभावना है। फर्रुखाबाद जिले में लगभग 68 किलोमीटर लंबा गंगा तटीय क्षेत्र है, जिसके कारण हर वर्ष 300 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं। कई क्षेत्रों में बाढ़ के साथ-साथ कटान की समस्या भी गंभीर रूप ले लेती है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, सदर तहसील के 37, कायमगंज के 113 और अमृतपुर के 172 गांव बाढ़ प्रभावित श्रेणी में आते हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए सदर तहसील में 5, कायमगंज में 6 और अमृतपुर में 13 बाढ़ शरणालय बनाए जाएंगे, वहीं सदर में 4, कायमगंज में 15 और अमृतपुर में 33 बाढ़ चौकियां स्थापित की जाएंगी। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जिले में कुल 191 नावों और उनके नाविकों की तैनाती की जाएगी, जिनमें सदर तहसील की 30, कायमगंज की 54 और अमृतपुर की 107 नावें शामिल हैं। इसके अलावा, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए सदर क्षेत्र में 5, कायमगंज में 28 और अमृतपुर में 20 गोताखोरों को भी तैनात किया जाएगा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य लक्ष्य बाढ़ के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखना है, जिसके लिए सभी विभागों को समय रहते पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन मानसून से पहले ही अलर्ट मोड में आ गया है।1
- फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र में एक पति पर अपनी पत्नी को तलाक का भय दिखाकर देवर से हलाला कराने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस ने पति सहित उसके दो भाइयों के खिलाफ मुस्लिम महिला विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। शहर के एक मोहल्ले की निवासी महिला का निकाह 3 मई 2015 को मऊदरवाजा के बीबीगंज निवासी एक युवक से हुआ था। उनके चार बच्चे हैं, जिनमें एक पुत्री और तीन पुत्र शामिल हैं। महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि शादी के शुरुआती दिनों से ही पति उस पर दबाव बनाता था कि वह उसके भाई के साथ भी पत्नी की तरह रहे। महिला के विरोध करने पर आरोपी पति ने उसे तीन तलाक का डर दिखाया और अपने देवर के साथ हलाला करने के लिए मजबूर किया। पीड़िता के अनुसार, 10 मई को पति और उसके दो देवरों ने मिलकर महिला की पिटाई की और उसे घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद 23 मई को पति ने अपने वकील के माध्यम से महिला को तीन तलाक का नोटिस भी भिजवाया। महिला ने पुलिस को दी तहरीर में यह भी आरोप लगाया है कि उसका पति बच्चों के साथ भी मारपीट और क्रूरता करता है। उसने अपने बच्चों को वापस दिलाने की मांग की है। फतेहगढ़ कोतवाली के प्रभारी तेज सिंह ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।4
- फर्रुखाबाद में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में भेदभाव बरते जाने का आरोप सामने आया है।1
- फर्रुखाबाद में पति समेत तीन लोगों पर तीन तलाक और हलाला का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगा है। इस आरोप के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के मुरिया खेड़ा ज्ञान में कलान थाना और सिविल पुलिस मौजूद है।2
- फर्रुखाबाद जिले के राजेपुर ब्लॉक परिसर में लगाए गए पौधे सूख गए हैं। ये पौधे एक भाजपा विधायक द्वारा रोपे गए थे, जो अन्य जनपद से संबंधित थे।1