पोरसा क्षेत्र में भक्ति की गूंज: श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण जन्म और बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन पोरसा। “जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान को अवतार लेना पड़ता है”—इसी संदेश के साथ ग्राम इन्नी खेरा (रजौधा) स्थित श्री जगन्नाथ बगिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के दौरान आचार्य सुनील मिश्रा शास्त्री ने भगवान कृष्ण के जन्म और उनकी बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कंस के अत्याचार और भगवान का अवतार आचार्य शास्त्री ने बताया कि जब कंस का अत्याचार चरम पर पहुंच गया, तब भगवान विष्णु को पृथ्वी पर कृष्ण के रूप में अवतरित होना पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में मध्य रात्रि को हुआ। उनके जन्म के समय चमत्कारिक घटनाएं घटीं—कारागार के बंधन स्वतः खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव द्वारा गोकुल पहुंचाए गए कृष्ण जन्म के बाद पिता वासुदेव नवजात कृष्ण को लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे, जहां नंद बाबा के घर जन्मी कन्या को लेकर वे वापस मथुरा लौट आए। जब सुबह कंस को इस घटना की जानकारी मिली, तो उसने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, लेकिन वह कन्या आकाश में प्रकट होकर दिव्य स्वर में बोली—“हे कंस, तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है।” इसके बाद कंस भयभीत हो उठा और उसने मथुरा में जन्मे अनेक नवजात बालकों का वध करवा दिया। पूतना वध और बाल लीलाएं कथा में पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य शास्त्री ने बताया कि पूतना ने विषैले दूध से बालक कृष्ण को मारने का प्रयास किया, लेकिन भगवान कृष्ण ने उसका अंत कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने माखन चोरी, कालिया नाग दमन, और अन्य बाल लीलाओं का सजीव चित्रण किया। कथा के दौरान श्रद्धालु “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे भजनों पर झूम उठे। भक्ति के साथ सामाजिक संदेश आचार्य सुनील मिश्रा शास्त्री ने कथा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए, क्योंकि वृक्षों से मिलने वाली छाया और ऑक्सीजन मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती गिरिजा देवी गज सिंह तोमर सहित गांव के अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कथा की व्यवस्थाओं में सत्यवान सिंह तोमर, चंद्रभान सिंह तोमर, राजेश सिंह तोमर, बृजेश सिंह तोमर, रामकिशोर सिंह तोमर, दद्दू सहित समस्त ग्रामवासियों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और उल्लास का ऐसा वातावरण बना रहा, जिसने हर किसी को कृष्णमय कर दिया। पोरसा क्षेत्र में भक्ति के गुंज
पोरसा क्षेत्र में भक्ति की गूंज: श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण जन्म और बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन पोरसा। “जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान को अवतार लेना पड़ता है”—इसी संदेश के साथ ग्राम इन्नी खेरा (रजौधा) स्थित श्री जगन्नाथ बगिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के दौरान आचार्य सुनील मिश्रा शास्त्री ने भगवान कृष्ण के जन्म और उनकी बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण और विस्तृत वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कंस के अत्याचार और भगवान का अवतार आचार्य शास्त्री ने बताया कि जब कंस का अत्याचार चरम पर पहुंच गया, तब भगवान विष्णु को पृथ्वी पर कृष्ण के रूप में अवतरित होना पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में मध्य रात्रि को हुआ। उनके जन्म के समय चमत्कारिक घटनाएं घटीं—कारागार के बंधन स्वतः खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव द्वारा गोकुल पहुंचाए गए कृष्ण जन्म के बाद पिता वासुदेव नवजात कृष्ण को लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे, जहां नंद बाबा के घर जन्मी कन्या को लेकर वे वापस मथुरा लौट आए। जब सुबह कंस को इस घटना की जानकारी मिली, तो उसने उस कन्या को मारने का प्रयास किया, लेकिन वह कन्या आकाश में प्रकट होकर दिव्य स्वर में बोली—“हे कंस, तेरा संहार करने वाला जन्म ले चुका है।” इसके बाद कंस भयभीत हो उठा और उसने मथुरा में जन्मे अनेक नवजात बालकों का वध करवा दिया। पूतना वध और बाल लीलाएं कथा में पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए आचार्य शास्त्री ने बताया कि पूतना ने विषैले दूध से बालक कृष्ण को मारने का प्रयास किया, लेकिन भगवान कृष्ण ने उसका अंत कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने माखन चोरी, कालिया नाग दमन, और अन्य बाल लीलाओं का सजीव चित्रण किया। कथा के दौरान श्रद्धालु “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे भजनों पर झूम उठे। भक्ति के साथ सामाजिक संदेश आचार्य सुनील मिश्रा शास्त्री ने कथा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए, क्योंकि वृक्षों से मिलने वाली छाया और ऑक्सीजन मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती गिरिजा देवी गज सिंह तोमर सहित गांव के अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कथा की व्यवस्थाओं में सत्यवान सिंह तोमर, चंद्रभान सिंह तोमर, राजेश सिंह तोमर, बृजेश सिंह तोमर, रामकिशोर सिंह तोमर, दद्दू सहित समस्त ग्रामवासियों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और उल्लास का ऐसा वातावरण बना रहा, जिसने हर किसी को कृष्णमय कर दिया। पोरसा क्षेत्र में भक्ति के गुंज
- अम्बाह अवैध रैत खनन के चलते लाइन मे लगी रैत के ट्रैक्टर ट्रॉली1
- वाह रे सरकारी तंत्र ,,, कागज़ों में भुगतान पूरा, और धरातल पर कार्य शून्य, मामला अंबाह तहसील के ग्राम पंचायत अमिलेडा का , ग्रामीणों का आरोप जनता के विकास के पैसों का हो गया बंदरबांट, भीमसेन सिंह तोमर। अंबाह । सरकारी पैसे का किस प्रकार से दुरुप्रयोग होता है इसका ताजा और मन को को विचलित कर देने वाला वाक्या अंबाह तहसील के ग्राम पंचायत मढैला (अमिलेडा राजस्व नाम)गांव का आया है यहां पर सचिव और सरपंच ने संयुक्त हस्ताक्षर करके राशि का आहरण तो कर लिया लेकिन धरातल पर कोई भी विकास कार्य शुरू तक नहीं कराया और आपस में ही ऊपर ही ऊपर पैसों का बंदरबांट भी हो गया जब इसकी भनक ग्राम पंचायत के युवाओं और आम जनता को लगी तो उन्होंने अधिकारी से लेकर सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी है अब देखना होगा कि संबंधितों के खिलाफ कोई कठोर कार्यवाही होगी या फिर मामला फिर से बंदरबांट पर आकर टिक जाएगा1
- Post by Banti shrivas1
- Post by Aravind Kumar9027958728-2831123
- Post by Gyadeen Verma1
- *नगर लहार मे धूमधाम से मनाया गया भगवान श्री परशुराम का प्रकटोत्सव* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 *परशुराम मंदिर में पूजा अर्चना के बाद निकाली गई भव्य शोभा यात्रा* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 *समाजसेवी डॉ विनोद तिवारी ने गांव गांव जाकर सर्वसमाज को एकत्रित करने में अहम भूमिका निभाई* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 *यात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ हुआ भव्य स्वागत* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 लहार..भगवान विष्णु के छटवें अवतार भगवान परशुराम जी के जन्मोंत्सव पर लहार नगर में धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई,सम्पूर्ण विधानसभा क्षेत्र से आए सकल हिन्दु समाज के सनातिनियों द्वारा भव्य शोभा यात्रा निकाली गई जिस शोभायात्रा का जगह जगह स्वागत हुआ,शोभायात्रा में नगर व विधानसभा क्षेत्र के सर्व समाज के वरिष्ठ गणमान्य नागरिक शामिल हुए,शोभायात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ किया भव्य स्वागत किया गया, विशाल शोभायात्रा में रथ पर भगवान परशुराम जी की तस्वीर रख कर आगे आगे रथ चला लोगों के द्वारा भगवान के श्री चरणों मे आरती तिलक के साथ तस्वीर पर फूल माला चढ़ा कर पूजन किया गया,सर्व समाज के लोगों के द्वारा जगह जगह पुष्प वर्षा की गई व जगह जगह शीतल जल पेय लस्सी ,कोल्ड ड्रिंक,शरबत की व्यवस्था की गई इस दौरान हजारों की संख्या में लोग पैदल साथ चले,साथ मे दो पहिया व चार पहिया वाहन भी साथ मे चले,यह शोभा यात्रा भगवान परशुराम जी के मंदिर में पूजा अर्चना के बाद प्रारंभ हुई व नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए पचपेड़ा तिराहा पर जाकर संपन्न हुई,आशीर्वाचन के बाद तदुपरांत रेस्ट हाउस पर भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।।।1
- Post by JP NEWS झोलाछाप पत्रकार /Rohit bajouriya1
- थार कांड के बाद बढ़ा विवाद: विधायक प्रीतम लोधी का बयान वायरल, भाषा पर उठे सवाल । करैरा/पिछोर। 16 अप्रैल को हुई थार वाहन दुर्घटना के बाद मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। जहां एक ओर पुलिस प्रशासन घटना में कानूनी कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बयानबाजी ने पूरे प्रकरण को राजनीतिक रंग दे दिया है। पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे करैरा एसडीओपी के संदर्भ में आपत्तिजनक भाषा का उपयोग करते नजर आ रहे हैं। इंटरव्यू के दौरान दिए गए इस बयान के बाद अब जनप्रतिनिधियों की भाषा और मर्यादा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि 16 अप्रैल की सुबह विधायक के पुत्र दिनेश ने थार वाहन से पांच लोगों को टक्कर मार दी थी। घटना के बाद करैरा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन की जांच की। इस दौरान वाहन पर नियम विरुद्ध काली फिल्म और नंबर प्लेट की जगह “विधायक” लिखा पाया गया, जिसे हटाने की हिदायत देकर चालक को छोड़ दिया गया था। हालांकि, दो दिन बाद भी वाहन में कोई सुधार नहीं किया गया और वही थार नगर की सड़कों पर घूमती देखी गई। इसके बाद करैरा एसडीओपी ने नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वाहन का चालान किया। इस कार्रवाई के बाद विधायक के बयान सामने आए, जिसने विवाद को और हवा दे दी। एक संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल क्या उचित है—यह सवाल अब आम जनता और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस अपनी जांच और कानूनी प्रक्रिया में जुटी हुई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन पर बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में पार्टी नेतृत्व और प्रशासन आगे क्या रुख अपनाते हैं।1