सोनम वांगचुक जी ने अपना अनशन तोड़ दिया है। उनके द्वारा अनशन समाप्त करना छात्र हितों के प्रति मोदी सरकार पर देश के युवाओं के अटूट भरोसे की जीत है। यह निर्णय पेपर लीक के ख़िलाफ़ संवेदनशील और जवाबदेह मोदी सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कड़े कदमों की प्रतिबद्धता पर भरोसे की मुहर है। देश के युवाओं के हितों से जुड़े विषय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और सरकार इस प्राथमिकता से एक इंच भी पीछे नहीं हटने वाली है। सोनम वांगचुक जी द्वारा अपना अनशन तोड़ना इसी अटूट भरोसे की अभिव्यक्ति है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने वीडियो संदेश में जो बातें कही हैं, वे देश की सकारात्मक युवा शक्ति के मन को छूने वाली हैं। सोनम वांगचुक जी ने प्रधानमंत्री जी के इस संदेश के बाद अपने अनशन पर विराम देकर सरकार की संवेदनशीलता और छात्र हितों में कदम उठाने की कटिबद्धता को और अधिक मजबूती प्रदान की है।
सोनम वांगचुक जी ने अपना अनशन तोड़ दिया है। उनके द्वारा अनशन समाप्त करना छात्र हितों के प्रति मोदी सरकार पर देश के युवाओं के अटूट भरोसे की जीत है। यह निर्णय पेपर लीक के ख़िलाफ़ संवेदनशील और जवाबदेह मोदी सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कड़े कदमों की प्रतिबद्धता पर भरोसे की मुहर है। देश के युवाओं के हितों से जुड़े विषय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और सरकार इस प्राथमिकता से एक इंच भी पीछे नहीं हटने वाली है। सोनम वांगचुक जी द्वारा अपना अनशन तोड़ना इसी अटूट भरोसे की अभिव्यक्ति है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने वीडियो संदेश में जो बातें कही हैं, वे देश की सकारात्मक युवा शक्ति के मन को छूने वाली हैं। सोनम वांगचुक जी ने प्रधानमंत्री जी के इस संदेश के बाद अपने अनशन पर विराम देकर सरकार की संवेदनशीलता और छात्र हितों में कदम उठाने की कटिबद्धता को और अधिक मजबूती प्रदान की है।
- लगातार 34 दिन के अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने आज अपना अनशन समाप्त कर दिया है। कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और कई अन्य राजनेताओं के शामिल एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें आश्वासन दिया और उनकी कुछ मांगों पर अपनी सहमति भी जताई, जिसके बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया। अनशन समाप्त करते ही उन्होंने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्वक रहने और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के बीच बहुत से अराजक तत्व भी शामिल हो गए हैं, इसलिए सभी को संयम बरतने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष से भी आग्रह किया कि वे इसे राजनीतिक अखाड़ा न बनाएं और इस मुद्दे पर संसद में बात करें।1
- अनशन के नाम पर पूरी तरह से झूठा ढोंग किया गया है। असलियत यह है कि अनशन पर बैठा यह ढोंगी बाबा आराम से लेटकर सब कुछ खा-पी रहा है।1
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- अन्ना हजारे युवाओं के समर्थन में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के पक्ष में मौन व्रत पर बैठ गए हैं। इससे पहले जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठे थे, तब आम आदमी पार्टी की किस्मत बदल गई थी। अब उनके इस आंदोलन के समर्थन में उतरने और मौन व्रत शुरू करने के बाद लग रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी की भी किस्मत बदलने वाली है।1
- पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा। इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा। दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का देर रात एक संदेश सामने आया है। इस संदेश में जल्दी ही फास्ट ट्रैक कोर्ट के होने की बात कही गई है।1
- लखीमपुर खीरी स्थित DM कार्यालय में राम सिंह नाम का एक शख्स अचानक पहुँचकर अधिकारियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने लगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। मामले में सिंगाही थाना प्रभारी दिलीप चौबे ने बताया कि राम सिंह प्रशासन पर दबाव बनाने के इरादे से कुल्हाड़ी लेकर DM कार्यालय पहुँचा था।1