शाहाबाद में सबसे अलग पहचान बना रहीं भाजपा नेत्री पारिषा तिवारी — जिनकी समाज सेवा, धार्मिक आस्था और आत्मीय व्यवहार से बढ़ती चर्चा से विचलित हो रहे जहाँ बहुत से कुत्सित मानसिकता के लोग वहीं बढ़ रहे आगामी विधानसभा में समीकरण बदलने के आसार और इसीलिए क्षेत्रीय बुध्दिजीवीजन कर रहे पारिषा तिवारी की इधर राजनैतिक प्रष्ठभूमि तैयार करने हेतु आपस में विचार विमर्श — पढ़ें खबर और समझें शाहाबाद का राजनैतिक माहौल शाहाबाद (हरदोई) शाहाबाद क्षेत्र में सामाजिक सक्रियता, धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और लोगों से आत्मीय संवाद के कारण भाजपा नेत्री पारिषा तिवारी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। समाज सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और सहज व्यवहार को लेकर कई प्रबुद्धजनों और सामाजिक विश्लेषकों द्वारा उनके योगदान की सराहना की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पारिषा तिवारी का काम करने का तरीका पारंपरिक राजनीतिक शैली से अलग दिखाई देता है। वे जो भी करती हैं उसे सादगी, सरलता और पूरे मनोयोग के साथ करने की कोशिश करती हैं, यही कारण है कि समाज के विभिन्न वर्गों में उन्हें सहज स्वीकार्यता मिल रही है। ⬛ “जो भी करती हैं पूरे मनोयोग से करती हैं, इसलिए लोगों में बढ़ रहा भरोसा”— सम्मान से बना संवाद होली के अवसर पर आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में पत्रकारों का आत्मीय सम्मान और प्रीतिभोज ने होली पूर्व हुए आयोजन को विशेष बना दिया। कई लोगों ने इसे सम्मान और संवाद की सकारात्मक पहल बताया। ⬛ धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी क्षेत्र में होने वाले कई पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक कार्यक्रमों में पारिषा तिवारी की सक्रिय भागीदारी देखी जाती है। आयोजन की व्यवस्थाओं में भी वे सहयोग करती नजर आती हैं। ⬛ जरूरतमंदों की यथासंभव सहायता स्थानीय लोगों के अनुसार जरूरतमंद और पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए भी वे समय-समय पर आगे आती रही हैं, जिससे उनके प्रति लोगों में अपनत्व की भावना देखी जाती है। ⬛ होली पर पत्रकारों के सम्मान की दिखी अलग पहल क्षेत्रीय चर्चाओं में यह बात सामने आई कि इस बार होली के अवसर पर पत्रकारों को सप्रेम उपहार और आत्मीय सम्मान देने की पहल पारिषा तिवारी ने की। कई लोगों का मानना है कि इस आयोजन ने राजनीति में सम्मान और संवाद का सकारात्मक संदेश दिया। ⬛ सादगी और सहजता की छवि स्थानीय लोगों का कहना है कि पारिषा तिवारी का व्यवहार हमेशा सहज और सरल रहता है। वे सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में औपचारिकता से अधिक अपनत्व को महत्व देती हैं। ⬛ “भाजपा की थी, हूँ और रहूँगी” मीडिया से बातचीत में पारिषा तिवारी ने स्पष्ट कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और पार्टी के निर्णय के साथ खड़ी रहेंगी। ⬛ सर्वहित पहले, स्वहित बाद में भगवान भरोसे उनका कहना है कि राजनीति का उद्देश्य केवल पद प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज का हित होना चाहिए। वे चाहती हैं कि लोग उन्हें सीधे मिलें, समझें और परखें, उसके बाद मन से उनकी मदद करें ⬛ बुजुर्गों से आशीर्वाद, युवाओं से सहयोग चाहिए पारिषा तिवारी ने क्षेत्र के बुजुर्गों, माताओं-बहनों और युवाओं से आशीर्वाद और सहयोग की अपील करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर ही विकास की राह मजबूत होती है। ⬛ पारिषा के आने से बदला राजनैतिक माहौल और उठे सवाल यह कि — ▪ क्या शाहाबाद की राजनीति में सम्मान और संवाद की नई परंपरा बन रही है? ▪ क्या जनता अब नेताओं के व्यवहार और कार्यशैली को ज्यादा महत्व देना चाहती है? ▪ क्या सेवा और सामाजिक सक्रियता ही पारिषा की असली पहचान बन सकती है? ▪ क्या बदलती राजनीति में संवाद और सम्मान का महत्व बढ़ रहा है? ▪ क्या नई शैली की राजनीति क्षेत्र में पारिषा नई दिशा दे सकती है? ⬛ राजनीतिक विश्लेषण — संवाद और सहभागिता की राजनीति स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब क्षेत्रीय राजनीति में केवल चुनावी गतिविधियाँ ही नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव, संवाद और सम्मान भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में पारिषा तिवारी की सक्रियता को कई लोग संवाद और सामाजिक सहभागिता वाली राजनीति के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह शैली क्षेत्र की राजनीति में किस रूप में असर डालती है, यह देखना दिलचस्प होगा। सादगी, सेवा और सम्मान की इस शैली ने पारिषा तिवारी को शाहाबाद क्षेत्र की राजनीति में अलग पहचान दिलाई है और यही कारण है कि उनकी सक्रियता इन दिनों चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। सोशल मीडिया पर पारिषा तिवारी की अनेक फोटो और वीडियो लगातार साझा होती रहती हैं। इनमें धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों और लोगों से आत्मीय मुलाकातों की झलक दिखाई देती है। समर्थकों का कहना है कि उनके व्यवहार, सहजता और सकारात्मक भाव से जुड़ी ये झलकियाँ ही उनकी सामाजिक सक्रियता और मिलनसार स्वभाव को दर्शाती हैं।
शाहाबाद में सबसे अलग पहचान बना रहीं भाजपा नेत्री पारिषा तिवारी — जिनकी समाज सेवा, धार्मिक आस्था और आत्मीय व्यवहार से बढ़ती चर्चा से विचलित हो रहे जहाँ बहुत से कुत्सित मानसिकता के लोग वहीं बढ़ रहे आगामी विधानसभा में समीकरण बदलने के आसार और इसीलिए क्षेत्रीय बुध्दिजीवीजन कर रहे पारिषा तिवारी की इधर राजनैतिक प्रष्ठभूमि तैयार करने हेतु आपस में विचार विमर्श — पढ़ें खबर और समझें शाहाबाद का राजनैतिक माहौल शाहाबाद (हरदोई) शाहाबाद क्षेत्र में सामाजिक सक्रियता, धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और लोगों से आत्मीय संवाद के कारण भाजपा नेत्री पारिषा तिवारी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। समाज सेवा, जरूरतमंदों की सहायता और सहज व्यवहार को लेकर कई प्रबुद्धजनों और सामाजिक विश्लेषकों द्वारा उनके योगदान की सराहना की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पारिषा तिवारी का काम करने का तरीका पारंपरिक राजनीतिक शैली से अलग दिखाई देता है। वे जो भी करती हैं उसे सादगी, सरलता और पूरे मनोयोग के साथ करने की कोशिश करती हैं, यही कारण है कि समाज के विभिन्न वर्गों में उन्हें सहज स्वीकार्यता मिल रही है। ⬛ “जो भी करती हैं पूरे मनोयोग से करती हैं,
इसलिए लोगों में बढ़ रहा भरोसा”— सम्मान से बना संवाद होली के अवसर पर आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में पत्रकारों का आत्मीय सम्मान और प्रीतिभोज ने होली पूर्व हुए आयोजन को विशेष बना दिया। कई लोगों ने इसे सम्मान और संवाद की सकारात्मक पहल बताया। ⬛ धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी क्षेत्र में होने वाले कई पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक कार्यक्रमों में पारिषा तिवारी की सक्रिय भागीदारी देखी जाती है। आयोजन की व्यवस्थाओं में भी वे सहयोग करती नजर आती हैं। ⬛ जरूरतमंदों की यथासंभव सहायता स्थानीय लोगों के अनुसार जरूरतमंद और पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए भी वे समय-समय पर आगे आती रही हैं, जिससे उनके प्रति लोगों में अपनत्व की भावना देखी जाती है। ⬛ होली पर पत्रकारों के सम्मान की दिखी अलग पहल क्षेत्रीय चर्चाओं में यह बात सामने आई कि इस बार होली के अवसर पर पत्रकारों को सप्रेम उपहार और आत्मीय सम्मान देने की पहल पारिषा तिवारी ने की। कई लोगों का मानना है कि इस आयोजन ने राजनीति में सम्मान और संवाद का सकारात्मक संदेश दिया। ⬛ सादगी और सहजता की छवि स्थानीय लोगों का कहना है कि पारिषा तिवारी का व्यवहार हमेशा सहज और सरल रहता है। वे
सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में औपचारिकता से अधिक अपनत्व को महत्व देती हैं। ⬛ “भाजपा की थी, हूँ और रहूँगी” मीडिया से बातचीत में पारिषा तिवारी ने स्पष्ट कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और पार्टी के निर्णय के साथ खड़ी रहेंगी। ⬛ सर्वहित पहले, स्वहित बाद में भगवान भरोसे उनका कहना है कि राजनीति का उद्देश्य केवल पद प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज का हित होना चाहिए। वे चाहती हैं कि लोग उन्हें सीधे मिलें, समझें और परखें, उसके बाद मन से उनकी मदद करें ⬛ बुजुर्गों से आशीर्वाद, युवाओं से सहयोग चाहिए पारिषा तिवारी ने क्षेत्र के बुजुर्गों, माताओं-बहनों और युवाओं से आशीर्वाद और सहयोग की अपील करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों के साथ मिलकर ही विकास की राह मजबूत होती है। ⬛ पारिषा के आने से बदला राजनैतिक माहौल और उठे सवाल यह कि — ▪ क्या शाहाबाद की राजनीति में सम्मान और संवाद की नई परंपरा बन रही है? ▪ क्या जनता अब नेताओं के व्यवहार और कार्यशैली को ज्यादा महत्व देना चाहती है? ▪ क्या सेवा और सामाजिक सक्रियता ही पारिषा की असली पहचान बन सकती है? ▪ क्या बदलती
राजनीति में संवाद और सम्मान का महत्व बढ़ रहा है? ▪ क्या नई शैली की राजनीति क्षेत्र में पारिषा नई दिशा दे सकती है? ⬛ राजनीतिक विश्लेषण — संवाद और सहभागिता की राजनीति स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब क्षेत्रीय राजनीति में केवल चुनावी गतिविधियाँ ही नहीं बल्कि सामाजिक जुड़ाव, संवाद और सम्मान भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में पारिषा तिवारी की सक्रियता को कई लोग संवाद और सामाजिक सहभागिता वाली राजनीति के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह शैली क्षेत्र की राजनीति में किस रूप में असर डालती है, यह देखना दिलचस्प होगा। सादगी, सेवा और सम्मान की इस शैली ने पारिषा तिवारी को शाहाबाद क्षेत्र की राजनीति में अलग पहचान दिलाई है और यही कारण है कि उनकी सक्रियता इन दिनों चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। सोशल मीडिया पर पारिषा तिवारी की अनेक फोटो और वीडियो लगातार साझा होती रहती हैं। इनमें धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों और लोगों से आत्मीय मुलाकातों की झलक दिखाई देती है। समर्थकों का कहना है कि उनके व्यवहार, सहजता और सकारात्मक भाव से जुड़ी ये झलकियाँ ही उनकी सामाजिक सक्रियता और मिलनसार स्वभाव को दर्शाती हैं।
- धर्म सभा में बोले शंकराचार्य गाय और ब्राह्मण भारतीय संस्कृति के मूल1
- एसटीएफ और शाहाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, रेलवे स्टेशन के पास से दबोचा शाहाबाद (हरदोई) लगभग 13 वर्षों से फरार चल रहे 50 हजार रुपये के इनामी हत्यारोपी को एसटीएफ और शाहाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ हत्या समेत कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार थाना शाहाबाद में दर्ज मुकदमा संख्या 444/13 धारा 302 व 504 के मामले में वांछित चल रहे आरोपी विपिन सिंह उर्फ राजू पुत्र विनोद कुमार सिंह निवासी मठो खेड़ा, अजमत खां, थाना शाहाबाद को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। आरोपी लंबे समय से फरार था, जिसकी गिरफ्तारी पर पुलिस महानिरीक्षक लखनऊ परिक्षेत्र द्वारा 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। मंगलवार को एसटीएफ कानपुर नगर और शाहाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को आंधी रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और 670 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पहले भी हत्या समेत कई गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज बताए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और फिर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।4
- Post by SV भारत न्यूज़ संवाददाता रामबाबू1
- हरदोई: कोतवाली बेनीगंज के पिपरी गांव निवासी 21 वर्षीय मोहित पुत्र छोटे की बीते शनिवार ट्रैक्टर की टक्कर से हुई मृत्यु पर आक्रोशित मृतक के परिजनों द्वारा प्रताप नगर कोथावां सड़क मार्ग को किया गया जाम। पीड़ित परिवार से बात करने में जुटी बेनीगंज पुलिस। जहां मृतक के परिजनों का कहना है कि ट्रैक्टर व चालक को गिरफ्तार करने के पश्चात जाम को खोला जाएगा।1
- उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली में ई-रिक्शा चलाने वाले रामपाल को 38.5 करोड़ रुपये का लेनदेन और इनकम टैक्स न भरने का नोटिस मिला है। यहां तक कि रामपाल इस नोटिस को पढ़ भी नहीं सकते। 15 वर्षों से वह अपनी पत्नी रामलली के साथ दिल्ली में रहकर ई-रिक्शा चलाते हैं और पत्नी घरों में झाड़ू-पोंछा करती हैं। गांव में उनके पास केवल एक बीघा जमीन है, जिस पर खेती होती है। ऐसे में करोड़ों रुपये का लेनदेन कैसे हुआ, यह रहस्य बना हुआ है। जांच में पता चला कि सत्र 2023-24 में 7.5 करोड़ और सत्र 2024-25 में 31 करोड़ का लेनदेन उनके पैन कार्ड से दर्ज किया गया। रामपाल को इसका कोई पता नहीं था। अब इनकम टैक्स विभाग ने आयकर रिटर्न न भरने पर नोटिस जारी किया है।1
- godi Midia ka huaa khulasa Indian new ka khulasa😄😄😢😝 kya hoga india kya Bhai jab asi midiya hai hmaare yaha1
- हरदोई। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता डीडीएम नाबार्ड आदित्य शर्मा ने की। कार्यक्रम में वित्तीय साक्षरता केंद्र अहिरोरी, संडीला और शाहाबाद के स्टाफ ने प्रतिभाग कर महिलाओं को वित्तीय साक्षरता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को क्रिसिल फाउंडेशन द्वारा संचालित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया गया। इस अवसर पर सीबीओ अनुपम तिवारी ने और टोडरपुर अशोक कुमार अर्चना देवी महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं के उपयोग, बचत की आदत, डिजिटल लेन-देन तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया। इस अवसर पर डीडीएम नाबार्ड आदित्य शर्मा, एलडीएम अरविंद रंजन एवं अन्य अतिथियों ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वित्तीय साक्षरता महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में डीडीएम नाबार्ड आदित्य शर्मा एवं एलडीएम अरविंद रंजन द्वारा उपस्थित महिलाओं को उपहार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर वित्तीय साक्षरता से संबंधित जानकारी प्राप्त की।1
- ट्रक की टक्कर से घायल सांड ने तड़प-तड़पकर तोड़ा दम, डॉक्टर का फोन नहीं उठा, साड़ का साथी साड़ जहाँ मौके पर दुखी नजर आया वहीं हमेशा की तरह एक बार फिर पशु चिकित्सा अधिकारी की संवेदनहीनता सर्वविदित हो गई। गौरतलब है कि नगर शाहाबाद में इंसानियत और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई। एलआईसी कार्यालय के सामने एक अज्ञात ट्रक चालक ने तेजी व लापरवाही से सड़क पर खड़े एक आवारा सांड को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि सांड गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पने लगा। मौके पर मौजूद लोगों ने घायल सांड को बचाने के लिए काफी देर तक राजकीय पशु चिकित्सालय के डॉक्टर को फोन मिलाया, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने एक भी कॉल रिसीव नहीं की। लोगों का कहना है कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद बेजुबान की जान बच सकती थी। इलाज के अभाव में घायल सांड ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद क्षेत्र में असंतोष फैल गया। लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मिलीभगत से पशु चिकित्सालय के जिम्मेदार पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं और आपात स्थिति में भी फोन उठाना जरूरी नहीं समझते। लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है बल्कि जहाँ एक ओर कभी पशु चिकित्सा अधिकारी आदि न केवल आवारा पशुओं के इलाज के लिए आगे नहीं आते वहीं पालतू पशुओं के इलाज करने के लिए तैयार नहीं रहते, और ऊपर टोल फ्री नम्बर मिलाने पर भी पशुओं को इलाज नहीं मिल पाता। आरोप है कि एक ओर गो शालाओं में गोवंश इलाज एवं देखभाल के अभाव में बेमौत तड़प तड़प कर मर रहे हैं वहीं दूसरी ओर तेज रफ्तार वाहन रौद रहे हैं और तीसरी ओर गोवंशो की गोकशी के लिए तस्करी -बिक्री के भी सूत्र मिल रहे हैं, इतना ही नहीं कई बार स्थानीय विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के नेताओं ने आवाज़ बुलंद की किन्तु उनकी आवाज़ भी भ्रष्टाचार के नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बन गई। अब सवाल जो उठ रहे हैं — ▪ क्या सरकारी पशु चिकित्सालय सिर्फ कागजों में ही चल रहा है? ▪ आपात स्थिति में भी डॉक्टर फोन नहीं उठाएंगे तो बेजुबानों की जान कैसे बचेगी? ▪ जिम्मेदारों की लापरवाही पर प्रशासन कार्रवाई करेगा या मामला यूं ही दबा दिया जाएगा? ▪ क्षेत्र में आए दिन कहीं न कहीं गंभीर रोगों से ग्रस्त पशुओं की इलाज के अभाव में मौत की जबाबदेही आखिर किसकी है।1