नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक बाढ़: 105 भारतीय पर्यटक लापता, कैलाश-मानसरोवर यात्रा प्रभावित काठमांडू / नई दिल्ली। 26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत की ओर से आई अचानक और भीषण बाढ़ ने हिमालयी सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी का जलस्तर कुछ ही मिनटों में बेतहाशा बढ़ गया। टिमुरे, स्याब्रुबेसी और आसपास के इलाकों में घर, पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं बह गईं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 384 यात्री लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत जाने वाले श्रद्धालु थे। यह खबर लिखे जाने तक मौतों का आंकड़ा अलग-अलग स्रोतों में 8 से 22 के बीच बताया जा रहा है। नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन अभी अंतिम आंकड़ा जारी नहीं कर पाए हैं क्योंकि कई इलाकों में संचार पूरी तरह ठप है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है। क्या हुआ और कब हुआ बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत के इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार इसका केंद्र गोसाइंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में था। इसके कुछ समय बाद ही भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का बड़ा प्रवाह आ गया। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि भूकंप के बाद हिमस्खलन हुआ, जिसने नदी का रास्ता रोक दिया। पानी जमा होता गया और फिर अचानक नीचे की तरफ फूट पड़ा। रसुवा में पिछले 24 घंटे में सिर्फ 7 मिलीमीटर के आसपास बारिश दर्ज हुई थी। इसलिए स्थानीय बारिश को बाढ़ का कारण नहीं माना जा रहा। वैज्ञानिकों और मौसम विभाग का प्रारंभिक आकलन है कि तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) या बर्फीले हिमस्खलन से ल्हेंदे नदी अवरुद्ध हुई और फिर पानी भोटेकोशी सिस्टम में आ गया। आईसीआईएमओडी की पुरानी स्टडी के अनुसार भोटेकोशी बेसिन में 100 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें हैं। कौन सी झील फटी, इसकी पुष्टि सैटेलाइट इमेज और तकनीकी जांच के बाद ही हो पाएगी। बाढ़ का पानी रसुवा से आगे नुवाकोट और धादिंग जिलों तक पहुंच गया। त्रिसूली नदी में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा। अधिकारियों ने मुग्लिन तक के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया। कितने लोग लापता, कितने प्रभावित नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची के अनुसार: कुल लापता यात्री: 384 विदेशी नागरिक: 291 नेपाली नागरिक: 93 विदेशी यात्रियों में भारत का आंकड़ा सबसे बड़ा है — 105 भारतीय और 37 एनआरआई। बाकी में ब्रिटेन के 12, मलेशिया के 17, अमेरिका के 3-4, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिक शामिल हैं। कई यात्रियों की राष्ट्रीयता अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। ट्रैवल एजेंसियों के हिसाब से सबसे ज्यादा यात्री ट्रेकर्स सोसाइटी, सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल्स, लीफ हॉलिडे, हिमालयन ग्लेशियर और कैलाश जर्नी जैसी कंपनियों के थे। सम्राट टूर्स ने बताया कि उनके 59 भारतीय यात्री कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे। ये यात्री रसुवागढ़ी चेकपॉइंट के पास थे या सीमा पार करने की तैयारी में थे। सुरक्षा बलों का नुकसान भी बड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार नेपाल पुलिस के करीब 26 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 9 जवान और कुछ सेना कर्मी लापता बताए जा रहे हैं। लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे करीब 60 लोगों से सुबह से संपर्क नहीं हो सका। इनमें सुरंग के अंदर काम कर रहे 35 लोग शामिल हैं। परियोजना का पावरहाउस बाढ़ में बह गया। तिब्बत की तरफ ग्यिरोंग पोर्ट पर भी भूस्खलन हुआ। चीन के सरकारी मीडिया ने वहां “बड़ी संख्या में हताहत” की आशंका जताई है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार मार्ग प्रभावित हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर को कितना नुकसान रसुवा के टिमुरे बाजार, सीमा शुल्क कार्यालय क्षेत्र और स्याब्रुबेसी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई घर पूरी तरह बह गए या कीचड़ और मलबे में दब गए। एक पुल कुछ ही सेकंड में बह गया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैले। जलविद्युत क्षेत्र को बड़ा झटका लगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रसुवा और नुवाकोट में कम से कम 13 परियोजनाएं प्रभावित हुईं। इनमें चालू और निर्माणाधीन दोनों शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में 354 मेगावाट क्षमता प्रभावित बताई गई है। लांगटांग 20 मेगावाट की निर्माणाधीन परियोजना का पावरहाउस पूरी तरह बह गया। सड़कें और संचार व्यवस्था ठप होने से हेलीकॉप्टर कुछ जगहों पर उतर नहीं पाए। नेपाल सेना ने कई हेलीकॉप्टर तैनात किए। एक रिपोर्ट के अनुसार 88 लोगों को बचाया जा चुका है, लेकिन पहाड़ी इलाके और लगातार बहते पानी के कारण सर्च ऑपरेशन मुश्किल है। भारत की प्रतिक्रिया और हेल्पलाइन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। भारत हर संभव मानवीय मदद देने को तैयार है। भारतीय टीमें रेस्क्यू और राहत कार्यों में समन्वय कर रही हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान राहत सामग्री लेकर शाम 7 बजे उड़ान भरने वाला था। अगली सुबह सी-17 विमान भी भेजा जाएगा। एनडीआरएफ की टीम तैनात रहने वाली है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं: +977 985 131 6807 +977 970 910 7500 नेपाल पर्यटन बोर्ड और टूरिस्ट पुलिस के नंबर: टोल फ्री: 1234 हॉटलाइन: 1144 टूरिस्ट पुलिस: 9851289445 परिवारों से अपील की गई है कि आधिकारिक पुष्टि होने तक अफवाहों पर विश्वास न करें। कई यात्री अभी भी संपर्क से बाहर हैं क्योंकि नेटवर्क पूरी तरह डाउन है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर असर रसुवागढ़ी मार्ग कैलाश-मानसरोवर यात्रा का महत्वपूर्ण रास्ता है। अगस्त का महीना यात्रा के पीक सीजन में आता है। इसलिए बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु इसी रूट से तिब्बत जा रहे थे। अचानक बाढ़ ने न सिर्फ यात्रा रोक दी बल्कि सैकड़ों परिवारों को चिंता में डाल दिया। कई एजेंसियां अपने ग्रुप का हाल जानने की कोशिश कर रही हैं। यह घटना हिमालय में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियल झीलों के खतरे को फिर याद दिलाती है। पिछले साल भी भोटेकोशी में बाढ़ आई थी। वैज्ञानिक लंबे समय से इस बेसिन की निगरानी की जरूरत बता रहे हैं, क्योंकि तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघल रहे हैं और झीलें अस्थिर हो रही हैं। आगे क्या नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह मोबिलाइज किया है। चीन के साथ समन्वय चल रहा है ताकि स्रोत का पता चल सके और दूसरी बाढ़ का खतरा टाला जा सके। कुछ अधिकारियों ने अपस्ट्रीम में अभी भी अवरोध रहने की आशंका जताई है। डाउनस्ट्रीम जिलों — नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन — में लोगों को नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी गई है। भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी सतर्कता बरती जा रही है, हालांकि मुख्य प्रभाव नेपाल-तिब्बत सीमा पर ही है। अभी स्थिति विकसित हो रही है। मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा बदल सकता है। बचाव दल रात भर काम करते रहेंगे। भारतीय दूतावास और नेपाल पर्यटन बोर्ड लगातार अपडेट जारी कर रहे हैं। यह त्रासदी सिर्फ एक बाढ़ की खबर नहीं है। यह हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी, सीमा पार सहयोग और तीर्थयात्रा के जोखिम की याद दिलाती है। लापता हर व्यक्ति के परिवार इस वक्त इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है जल्द अच्छी खबर आए।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक बाढ़: 105 भारतीय पर्यटक लापता, कैलाश-मानसरोवर यात्रा प्रभावित काठमांडू / नई दिल्ली। 26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत की ओर से आई अचानक और भीषण बाढ़ ने हिमालयी सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी का जलस्तर कुछ ही मिनटों में बेतहाशा बढ़ गया। टिमुरे, स्याब्रुबेसी और आसपास के इलाकों में घर, पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं बह गईं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 384 यात्री लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत जाने वाले श्रद्धालु थे। यह खबर लिखे जाने तक मौतों का आंकड़ा अलग-अलग स्रोतों में 8 से 22 के बीच बताया जा रहा है। नेपाल पुलिस और स्थानीय प्रशासन अभी अंतिम आंकड़ा जारी नहीं कर पाए हैं क्योंकि कई इलाकों में संचार पूरी तरह ठप है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है। क्या हुआ और कब हुआ बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत के इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार इसका केंद्र गोसाइंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में था। इसके कुछ समय बाद ही भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का बड़ा प्रवाह आ गया। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि भूकंप के बाद हिमस्खलन हुआ, जिसने नदी का रास्ता रोक दिया। पानी जमा होता गया और फिर अचानक नीचे की तरफ फूट पड़ा। रसुवा में पिछले 24 घंटे में सिर्फ 7 मिलीमीटर के आसपास बारिश दर्ज हुई थी। इसलिए स्थानीय बारिश को बाढ़ का कारण नहीं माना जा रहा। वैज्ञानिकों और मौसम विभाग का प्रारंभिक आकलन है कि तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) या बर्फीले हिमस्खलन से ल्हेंदे नदी अवरुद्ध हुई और फिर पानी भोटेकोशी सिस्टम में आ गया। आईसीआईएमओडी की पुरानी स्टडी के अनुसार भोटेकोशी बेसिन में 100 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें हैं। कौन सी झील फटी, इसकी पुष्टि सैटेलाइट इमेज और तकनीकी जांच के बाद ही हो पाएगी। बाढ़ का पानी रसुवा से आगे नुवाकोट और धादिंग जिलों तक पहुंच गया। त्रिसूली नदी में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा। अधिकारियों ने मुग्लिन तक के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया। कितने लोग लापता, कितने प्रभावित नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची के अनुसार: कुल लापता यात्री: 384 विदेशी नागरिक: 291 नेपाली नागरिक: 93 विदेशी यात्रियों में भारत का आंकड़ा सबसे बड़ा है — 105 भारतीय और 37 एनआरआई। बाकी में ब्रिटेन के 12, मलेशिया के 17, अमेरिका के 3-4, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिक शामिल हैं। कई यात्रियों की राष्ट्रीयता अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। ट्रैवल एजेंसियों के हिसाब से सबसे ज्यादा यात्री ट्रेकर्स सोसाइटी, सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल्स, लीफ हॉलिडे, हिमालयन ग्लेशियर और कैलाश जर्नी जैसी कंपनियों के थे। सम्राट टूर्स ने बताया कि उनके 59 भारतीय यात्री कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे। ये यात्री रसुवागढ़ी चेकपॉइंट के पास थे या सीमा पार करने की तैयारी में थे। सुरक्षा बलों का नुकसान भी बड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार नेपाल पुलिस के करीब 26 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 9 जवान और कुछ सेना कर्मी लापता बताए जा रहे हैं। लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे करीब 60 लोगों से सुबह से संपर्क नहीं हो सका। इनमें सुरंग के अंदर काम कर रहे 35 लोग शामिल हैं। परियोजना का पावरहाउस बाढ़ में बह गया। तिब्बत की तरफ ग्यिरोंग पोर्ट पर भी भूस्खलन हुआ। चीन के सरकारी मीडिया ने वहां “बड़ी संख्या में हताहत” की आशंका जताई है। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार मार्ग प्रभावित हुआ है। इंफ्रास्ट्रक्चर को कितना नुकसान रसुवा के टिमुरे बाजार, सीमा शुल्क कार्यालय क्षेत्र और स्याब्रुबेसी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। कई घर पूरी तरह बह गए या कीचड़ और मलबे में दब गए। एक पुल कुछ ही सेकंड में बह गया, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैले। जलविद्युत क्षेत्र को बड़ा झटका लगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रसुवा और नुवाकोट में कम से कम 13 परियोजनाएं प्रभावित हुईं। इनमें चालू और निर्माणाधीन दोनों शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में 354 मेगावाट क्षमता प्रभावित बताई गई है। लांगटांग 20 मेगावाट की निर्माणाधीन परियोजना का पावरहाउस पूरी तरह बह गया। सड़कें और संचार व्यवस्था ठप होने से हेलीकॉप्टर कुछ जगहों पर उतर नहीं पाए। नेपाल सेना ने कई हेलीकॉप्टर तैनात किए। एक रिपोर्ट के अनुसार 88 लोगों को बचाया जा चुका है, लेकिन पहाड़ी इलाके और लगातार बहते पानी के कारण सर्च ऑपरेशन मुश्किल है। भारत की प्रतिक्रिया और हेल्पलाइन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। भारत हर संभव मानवीय मदद देने को तैयार है। भारतीय टीमें रेस्क्यू और राहत कार्यों में समन्वय कर रही हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान राहत सामग्री लेकर शाम 7 बजे उड़ान भरने वाला था। अगली सुबह सी-17 विमान भी भेजा जाएगा। एनडीआरएफ की टीम तैनात रहने वाली है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं: +977 985 131 6807 +977 970 910 7500 नेपाल पर्यटन बोर्ड और टूरिस्ट पुलिस के नंबर: टोल फ्री: 1234 हॉटलाइन: 1144 टूरिस्ट पुलिस: 9851289445 परिवारों से अपील की गई है कि आधिकारिक पुष्टि होने तक अफवाहों पर विश्वास न करें। कई यात्री अभी भी संपर्क से बाहर हैं क्योंकि नेटवर्क पूरी तरह डाउन है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर असर रसुवागढ़ी मार्ग कैलाश-मानसरोवर यात्रा का महत्वपूर्ण रास्ता है। अगस्त का महीना यात्रा के पीक सीजन में आता है। इसलिए बड़ी संख्या में भारतीय श्रद्धालु इसी रूट से तिब्बत जा रहे थे। अचानक बाढ़ ने न सिर्फ यात्रा रोक दी बल्कि सैकड़ों परिवारों को चिंता में डाल दिया। कई एजेंसियां अपने ग्रुप का हाल जानने की कोशिश कर रही हैं। यह घटना हिमालय में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियल झीलों के खतरे को फिर याद दिलाती है। पिछले साल भी भोटेकोशी में बाढ़ आई थी। वैज्ञानिक लंबे समय से इस बेसिन की निगरानी की जरूरत बता रहे हैं, क्योंकि तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघल रहे हैं और झीलें अस्थिर हो रही हैं। आगे क्या नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह मोबिलाइज किया है। चीन के साथ समन्वय चल रहा है ताकि स्रोत का पता चल सके और दूसरी बाढ़ का खतरा टाला जा सके। कुछ अधिकारियों ने अपस्ट्रीम में अभी भी अवरोध रहने की आशंका जताई है। डाउनस्ट्रीम जिलों — नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन — में लोगों को नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी गई है। भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी सतर्कता बरती जा रही है, हालांकि मुख्य प्रभाव नेपाल-तिब्बत सीमा पर ही है। अभी स्थिति विकसित हो रही है। मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा बदल सकता है। बचाव दल रात भर काम करते रहेंगे। भारतीय दूतावास और नेपाल पर्यटन बोर्ड लगातार अपडेट जारी कर रहे हैं। यह त्रासदी सिर्फ एक बाढ़ की खबर नहीं है। यह हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी, सीमा पार सहयोग और तीर्थयात्रा के जोखिम की याद दिलाती है। लापता हर व्यक्ति के परिवार इस वक्त इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है जल्द अच्छी खबर आए।
- बीकानेर जिले की सभी 7 नगरीय निकायों में वोटिंग की तारीख को बदला है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी की सिफारिश के बाद इसमें बड़ा बदलाव किया है। विभिन्न मेले, तीज त्योहार पर अलग-अलग सामाजिक संगठनों की मांग और धार्मिक यात्राओं को देखते हुए1
- अभी कुछ समय पहले केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के सामने वार्ड पार्षद भाजपा टिकट दावेदार टिकट दिलाने के लिए मंत्री के सामने अपने समर्थकों के साथ ताकत दे खाते हुए।1
- - देशनोक में विधायक व चुनाव प्रभारी ने ली भाजपा की बैठक !! कार्यकर्ताओं को दिया जीत का मंत्र, विधायक भाटी बोले - देशनोक में बनेगा भाजपा का बोर्ड !! देशनोक, 25 अगस्त।देशनोक नगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस के बाद मंगलवार को करणी मंडल सेवा सदन में भारतीय जनता पार्टी देशनोक मंडल की चुनावी बैठक आयोजित हुई। बैठक में कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी, नगरपालिका चुनाव प्रभारी पूर्णाराम चौधरी, कोलायत विस्तारक गिरधारी सिंह एवं भाजपा देहात जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया सहित पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने कहा कि भाजपा ओछी और घटिया राजनीति में विश्वास नहीं करती, बल्कि विकास, सुशासन और राष्ट्रसेवा को समर्पित राजनीति की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि देशनोक की जनता से किए गए विकास के वादों को धरातल पर उतारा जा रहा है। विधायक भाटी ने कहा कि देशनोक की प्रमुख सड़क पर लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान तथा करणी माता मंदिर और तेमड़ा राय मंदिर को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण का वादा किया गया था। विधायक निधि कोष से 87.50 लाख रुपये की लागत से नाला निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है। विधायक भाटी ने पूर्व मंत्री एवं नगरपालिका के तत्कालीन अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि व्यक्तिगत जिद और अहंकार के कारण देशनोकवासियों को अंतिम शवयात्रा तक कीचड़ के बीच से निकालने जैसी पीड़ादायक स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह मार्मिक और शर्मनाक दृश्य आज भी देशनोकवासियों को कचोटता है। विधायक भाटी ने पार्टी संगठन को लेकर स्पष्ट कहा कि भाजपा में न कोई ग्रुप है और न कोई गुटबाजी। पार्टी का एकमात्र लक्ष्य देशनोक का विकास और जनता की सेवा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि देशनोक नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। सर्वसम्मति और जीत की क्षमता के आधार पर होगा प्रत्याशी चयन नगरपालिका चुनाव में प्रत्याशियों की दावेदारी को लेकर विधायक भाटी ने कहा कि वार्डवासियों की राय, पार्टी सर्वे और सर्वमान्य एवं जिताऊ उम्मीदवार को प्राथमिकता देते हुए टिकट का निर्णय किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर पार्टी की जीत के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। चुनाव प्रभारी पूर्णाराम चौधरी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन की मजबूती और बूथ स्तर तक प्रभावी चुनावी रणनीति के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनाव में जीत के लिए आवश्यक गुरुमंत्र देते हुए कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभानी होगी। कोलायत विस्तारक गिरधारी सिंह ने कार्यकर्ताओं को भाजपा की रीति-नीति एवं संगठनात्मक कार्यपद्धति से अवगत करवाया तथा चुनाव में अनुशासन और समन्वय के साथ कार्य करने की बात कही। भाजपा देहात जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया ने भी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पार्टी के पक्ष में वातावरण तैयार करने का आह्वान किया। बैठक का संचालन करते हुए सुशील पड़िहार ने विधायक अंशुमान सिंह भाटी द्वारा देशनोक में करवाए गए विकास कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने देशनोक में ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता को लेकर मांग दोहराई तथा राजकीय महाविद्यालय में व्याप्त कमियों और आवश्यकताओं को विधायक के समक्ष रखा। वहीं प्रन्यास अध्यक्ष बादल सिंह ने देशनोक में तहसील की मांग प्रमुखता से रखते हुए विधायक भाटी द्वारा क्षेत्र में करवाए जा रहे विकास कार्यों के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में कार्यकर्ताओं ने आगामी नगरपालिका चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने और देशनोक नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड बनाने का संकल्प लिया। - देशनोक में विधायक व चुनाव प्रभारी ने ली भाजपा की बैठक !! कार्यकर्ताओं को दिया जीत का मंत्र, विधायक भाटी बोले - देशनोक में बनेगा भाजपा का बोर्ड !! देशनोक, 25 अगस्त।देशनोक नगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस के बाद मंगलवार को करणी मंडल सेवा सदन में भारतीय जनता पार्टी देशनोक मंडल की चुनावी बैठक आयोजित हुई। बैठक में कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी, नगरपालिका चुनाव प्रभारी पूर्णाराम चौधरी, कोलायत विस्तारक गिरधारी सिंह एवं भाजपा देहात जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया सहित पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने कहा कि भाजपा ओछी और घटिया राजनीति में विश्वास नहीं करती, बल्कि विकास, सुशासन और राष्ट्रसेवा को समर्पित राजनीति की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि देशनोक की जनता से किए गए विकास के वादों को धरातल पर उतारा जा रहा है। विधायक भाटी ने कहा कि देशनोक की प्रमुख सड़क पर लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान तथा करणी माता मंदिर और तेमड़ा राय मंदिर को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण का वादा किया गया था। विधायक निधि कोष से 87.50 लाख रुपये की लागत से नाला निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है। विधायक भाटी ने पूर्व मंत्री एवं नगरपालिका के तत्कालीन अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि व्यक्तिगत जिद और अहंकार के कारण देशनोकवासियों को अंतिम शवयात्रा तक कीचड़ के बीच से निकालने जैसी पीड़ादायक स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह मार्मिक और शर्मनाक दृश्य आज भी देशनोकवासियों को कचोटता है। विधायक भाटी ने पार्टी संगठन को लेकर स्पष्ट कहा कि भाजपा में न कोई ग्रुप है और न कोई गुटबाजी। पार्टी का एकमात्र लक्ष्य देशनोक का विकास और जनता की सेवा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि देशनोक नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। सर्वसम्मति और जीत की क्षमता के आधार पर होगा प्रत्याशी चयन नगरपालिका चुनाव में प्रत्याशियों की दावेदारी को लेकर विधायक भाटी ने कहा कि वार्डवासियों की राय, पार्टी सर्वे और सर्वमान्य एवं जिताऊ उम्मीदवार को प्राथमिकता देते हुए टिकट का निर्णय किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर पार्टी की जीत के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। चुनाव प्रभारी पूर्णाराम चौधरी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन की मजबूती और बूथ स्तर तक प्रभावी चुनावी रणनीति के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनाव में जीत के लिए आवश्यक गुरुमंत्र देते हुए कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभानी होगी। कोलायत विस्तारक गिरधारी सिंह ने कार्यकर्ताओं को भाजपा की रीति-नीति एवं संगठनात्मक कार्यपद्धति से अवगत करवाया तथा चुनाव में अनुशासन और समन्वय के साथ कार्य करने की बात कही। भाजपा देहात जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया ने भी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पार्टी के पक्ष में वातावरण तैयार करने का आह्वान किया। बैठक का संचालन करते हुए सुशील पड़िहार ने विधायक अंशुमान सिंह भाटी द्वारा देशनोक में करवाए गए विकास कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने देशनोक में ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता को लेकर मांग दोहराई तथा राजकीय महाविद्यालय में व्याप्त कमियों और आवश्यकताओं को विधायक के समक्ष रखा। वहीं प्रन्यास अध्यक्ष बादल सिंह ने देशनोक में तहसील की मांग प्रमुखता से रखते हुए विधायक भाटी द्वारा क्षेत्र में करवाए जा रहे विकास कार्यों के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक में कार्यकर्ताओं ने आगामी नगरपालिका चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने और देशनोक नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड बनाने का संकल्प लिया।1
- ईद मिलादुन्नबी पर झझु में निकला विशाल जुलूस, अमन-चैन और भाईचारे की मांगी दुआ झझु में ईद मिलादुन्नबी के मौके पर बुधवार को विशाल जुलूस निकाला गया। पर्व को लेकर गांव में उत्साह का माहौल रहा और जुलूस के दौरान अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया। जुलूस की शुरुआत कसाइयों की मस्जिद से हुई। बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए और हर्षोल्लास के साथ मुख्य बाजार की ओर रवाना हुए। मुख्य बाजार से होता हुआ जुलूस नई मस्जिद तेलियां पहुंचा। यहां स्थानीय लोगों की ओर से जुलूस का पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान जुलूस में शामिल लोगों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई। वहीं कसाइयों की मस्जिद के आगे भी श्रद्धालुओं के लिए खीर का आयोजन किया गया, जहां लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद जुलूस मस्त बाजार से होते हुए ईदगाह पहुंचा। ईदगाह में समाज के लोगों ने देश और गांव में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआ मांगी। ईद मिलादुन्नबी के इस आयोजन में पूरे गांव में उत्साह के साथ सौहार्द का माहौल देखने को मिला। जुलूस के रास्ते में जगह-जगह लोगों ने स्वागत किया और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। जुलूस को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कोलायत थाना अधिकारी जसवीर सिंह के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता बड़ी संख्या में तैनात रहा। पुलिस टीम ने जुलूस के पूरे मार्ग पर निगरानी रखी और शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में पर्व संपन्न करवाया। झझु से हरीश राव की ग्राउंड रिपोर्ट, आवाज चैनल।1
- Post by प्रदीप कुमार डागा1
- km news29 का परिचय kM news29 founder Anchor शीशपाल बिश्नोई1
- ब्रेकिंग न्यूज़ | खींवसर आकला बाईपास पर मिले बलदेव नाइक के शव मामले में दूसरे दिन बनी सहमति। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग के बाद शव लिया। ब्रेकिंग न्यूज़ | खींवसर आकला बाईपास पर मिले बलदेव नाइक के शव मामले में दूसरे दिन बनी सहमति। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग के बाद शव लिया। पुलिस ने मेडिकल पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया। परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मामले को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद।1
- यशवंत सिन्हा का बड़ा दावा मोदी से देश नहीं संभल रहा, यूपी हाथ से निकला तो 2029 तक सरकार चलाना मुश्किल इकबाल खान बीकानेर,भाजपा पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई मोर्चों पर अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं कर पा रही है। सिन्हा ने कहा कि उन्हें मोदी को चुनने को लेकर अब अपनी पुरानी राजनीतिक भूमिका पर भी पछतावा है और उन्होंने इसे बड़ी भूल बताया।सिन्हा के मुताबिक 2014 के मोदी और 2026 के मोदी में काफी अंतर आ चुका है। उन्होंने दावा किया कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से जनता परेशान है और सरकार इन समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रही है। उन्होंने चीनी की बढ़ती कीमतों का भी जिक्र करते हुए कहा कि आम आदमी पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विदेश नीति को लेकर भी मोदी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत को लगातार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि देश की आर्थिक स्थिति और रक्षा से जुड़े मामलों को लेकर भी गंभीर चुनौतियां हैं।यशवंत सिन्हा ने कहा कि भाजपा के भीतर भी प्रधानमंत्री मोदी और गुजरात लॉबी को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। उनके अनुसार पार्टी के कई लोग मौजूदा नेतृत्व से खुश नहीं हैं और युवाओं के बीच भी सरकार को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है। सिन्हा ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश भाजपा के हाथ से निकल गया तो मोदी के लिए 2029 तक सरकार चलाना मुश्किल हो सकता है। उनका दावा है कि ऐसी स्थिति में सहयोगी दल सरकार से दूरी बना सकते हैं और भाजपा के भीतर भी नेतृत्व को लेकर बगावत की स्थिति पैदा हो सकती है।उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पहले की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं और आने वाला समय भाजपा तथा मोदी सरकार के लिए राजनीतिक रूप से बेहद चुनौती पूर्ण रहने वाला है।1