जनपद एटा के मलावन स्थित जवाहरपुर तापीय विद्युत परियोजना का जिलाधिकारी अरविन्द सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इला मारन ने 04 जून 2026 को संयुक्त रूप से विस्तृत निरीक्षण किया। अधिकारियों ने परियोजना की कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया, साथ ही प्लांट के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश में बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए, जिलाधिकारी एवं एसएसपी ने परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक अनुग्रह रवि से चर्चा की। निरीक्षण में पाया गया कि प्लांट की एक इकाई पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन कर रही है, जबकि दूसरी इकाई तकनीकी कारणों से अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पा रही है। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य कंट्रोल रूम में चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंताओं के साथ समीक्षा कर दोनों इकाइयों को शीघ्र पूर्ण क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए। परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्लांट की स्थापना, निर्माण प्रक्रिया, विद्युत उत्पादन क्षमता, पारेषण व्यवस्था और आधुनिक तकनीकी उपकरणों की कार्यप्रणाली की जानकारी दी, तथा सेंट्रल कंट्रोल रूम, स्विच यार्ड, टरबाइन एवं जनरेटर सेक्शन और मॉडल रूम में स्थापित त्रिआयामी (3-डी) मॉडल के माध्यम से उत्पादन प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने जवाहरपुर तापीय विद्युत परियोजना को प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ बताया, जो विद्युत उत्पादन के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही है। उन्होंने विद्युत उत्पादन एवं पारेषण कार्यों में गुणवत्ता, दक्षता, पारदर्शिता और सभी सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पूर्व में हुई अग्निकांड की घटना का उल्लेख करते हुए, जिलाधिकारी ने सीआईएसएफ अधिकारियों को पुनः मॉक ड्रिल एवं ड्रेस रिहर्सल आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जिलाधिकारी ने प्लांट परिसर में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने परियोजना प्रबंधन को अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्लांट के आसपास आठ किलोमीटर की परिधि में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) मद से विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय जनता को भी परियोजना का सीधा लाभ मिल सके। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परियोजना में उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सुव्यवस्थित संचालन, उच्च सुरक्षा मानकों और तकनीकी दक्षता के माध्यम से निर्बाध विद्युत उत्पादन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति मिल सके। इस अवसर पर डीएफओ विपिन वर्मा, उप जिलाधिकारी सदर श्वेता सिंह, तहसीलदार नीरज वार्ष्णेय, मुख्य महाप्रबंधक अनुग्रह रवि, चीफ इंजीनियर एल.पी. गौतम, अरविंद मिश्रा, अधीक्षण अभियंता मोहम्मद अबूजर, सीआईएसएफ के अखिलेश मिश्रा एवं अभय सिंह सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
जनपद एटा के मलावन स्थित जवाहरपुर तापीय विद्युत परियोजना का जिलाधिकारी अरविन्द सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इला मारन ने 04 जून 2026 को संयुक्त रूप से विस्तृत निरीक्षण किया। अधिकारियों ने परियोजना की कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया, साथ ही प्लांट के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश में बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए, जिलाधिकारी एवं एसएसपी ने परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक अनुग्रह रवि से चर्चा की। निरीक्षण में पाया गया कि प्लांट की एक इकाई पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन कर रही है, जबकि दूसरी इकाई तकनीकी कारणों से अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पा रही है। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य कंट्रोल रूम में चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंताओं के साथ समीक्षा कर दोनों इकाइयों को शीघ्र पूर्ण क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए। परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्लांट की स्थापना, निर्माण प्रक्रिया, विद्युत उत्पादन क्षमता, पारेषण व्यवस्था और आधुनिक तकनीकी उपकरणों की कार्यप्रणाली की जानकारी दी, तथा सेंट्रल कंट्रोल रूम, स्विच यार्ड, टरबाइन एवं जनरेटर सेक्शन और मॉडल रूम में स्थापित त्रिआयामी (3-डी) मॉडल के माध्यम से उत्पादन प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने जवाहरपुर तापीय विद्युत परियोजना को प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ बताया, जो विद्युत उत्पादन के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही है। उन्होंने विद्युत उत्पादन एवं पारेषण कार्यों में गुणवत्ता, दक्षता, पारदर्शिता और सभी सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पूर्व में हुई अग्निकांड की घटना का उल्लेख करते हुए, जिलाधिकारी ने सीआईएसएफ अधिकारियों को पुनः मॉक ड्रिल एवं ड्रेस रिहर्सल आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जिलाधिकारी ने प्लांट परिसर में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने परियोजना प्रबंधन को अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्लांट के आसपास आठ किलोमीटर की परिधि में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) मद से विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय जनता को भी परियोजना का सीधा लाभ मिल सके। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परियोजना में उपलब्ध व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सुव्यवस्थित संचालन, उच्च सुरक्षा मानकों और तकनीकी दक्षता के माध्यम से निर्बाध विद्युत उत्पादन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति मिल सके। इस अवसर पर डीएफओ विपिन वर्मा, उप जिलाधिकारी सदर श्वेता सिंह, तहसीलदार नीरज वार्ष्णेय, मुख्य महाप्रबंधक अनुग्रह रवि, चीफ इंजीनियर एल.पी. गौतम, अरविंद मिश्रा, अधीक्षण अभियंता मोहम्मद अबूजर, सीआईएसएफ के अखिलेश मिश्रा एवं अभय सिंह सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- एटा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन ने शुक्रवार को रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित साप्ताहिक परेड का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस बल की कार्यकुशलता, अनुशासन और व्यवस्थाओं का जायजा लिया, साथ ही पुलिसकर्मियों को शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए दौड़ भी लगवाई। उन्होंने बेहतर पुलिसिंग हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। परेड निरीक्षण के दौरान, एसएसपी ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के टर्नआउट की जांच करते हुए उन्हें निर्धारित वर्दी में ड्यूटी करने, अनुशासन बनाए रखने और आमजन के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस की छवि उसके व्यवहार और कार्यशैली से बनती है, इसलिए प्रत्येक पुलिसकर्मी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए। निरीक्षण के उपरांत, पुलिसकर्मियों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दौड़ कराई गई और टोलीवार ड्रिल के माध्यम से अनुशासन, एकरूपता तथा सामूहिक समन्वय का अभ्यास कराया गया। डॉ. इलामारन ने यूपी-112 पीआरवी वाहनों का भी गहन निरीक्षण किया, जिसमें लाइट, हूटर, पीए सिस्टम सहित अन्य उपकरणों की जांच की गई। उन्होंने दंगा नियंत्रण और सुरक्षा संबंधी उपकरणों की उपलब्धता व कार्यक्षमता की जानकारी लेते हुए पुलिसकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने और रिस्पॉन्स टाइम बेहतर रखने का निर्देश दिया। इसके बाद, उन्होंने पुलिस लाइन स्थित मेस, कैंटीन, बैरकों और पुलिस आवासीय परिसर का निरीक्षण कर साफ-सफाई, भोजन व्यवस्था व अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। कर्मचारियों से उनकी समस्याओं व आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर संबंधित अधिकारियों को शीघ्र समाधान के निर्देश भी दिए गए। इसी क्रम में, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन और क्षेत्राधिकारी सदर/लाइन संकल्पदीप कुशवाह ने पुलिस लाइन परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। एसएसपी ने इस मौके पर कहा कि वृक्ष केवल हरियाली नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं और पर्यावरण संतुलन तथा भावी पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाए जाने चाहिए। कार्यक्रम में प्रतिसार निरीक्षक किशन लाल गौतम सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। एसएसपी की इस पहल ने पुलिस बल में फिटनेस, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक जागरूकता फैलाई।1
- बागवाला पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा है जिस पर ₹25,000 का इनाम घोषित था। इस गिरफ्तारी के संबंध में सीओ सदर ने क्या बयान दिया है, इस बारे में पूरी जानकारी सुनने के लिए कहा गया है।1
- कस्बा सकीट के नगला काजी गाँव में, गौ रक्षक दल सकीट टीम ने एक भागवत कथा के आयोजन के दौरान कलश धारण करने वाली कन्याओं को सम्मानित किया। गौ रक्षक दीपक ठाकुर द्वारा दी गई खास रिपोर्ट के अनुसार, यह सम्मान समारोह 'जय श्री राम' और 'जय गौ माता' के जयकारों से गूंज उठा, जो इस धार्मिक अवसर पर गौ रक्षा के प्रति दल के गहरे समर्पण और भक्ति को दर्शाता है।1
- कासगंज जिले के पटियाली क्षेत्र में एक स्थान पर हमेशा पानी का जमाव बना रहता है। यह स्थिति लगातार बनी रहती है।1
- कासगंज जिले की पटियाली तहसील के नगला भैरू गाँव में गौतम बुद्ध की एक प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा के आसपास एक ऐसी जगह है जहाँ "आंध्र" बहुत अधिक मात्रा में है, जिसके चलते कई बार भैंसें उसमें डूब चुकी हैं। आरोप है कि गाँव के प्रधान इस समस्या को ठीक करने या उस जगह की साफ-सफाई करवाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। सरकार से अपील की गई है कि इस गंदगी और जानवरों के डूबने की समस्या का समाधान किया जाए, क्योंकि गौतम बुद्ध की मूरत के पास अत्यधिक गंदगी फैली हुई है।1
- स्थानीय निवासियों के अनुसार, उनके क्षेत्र में नाले की स्थिति बेहद खराब है। इस संबंध में प्रधान जी से कई बार शिकायत भी की गई है, लेकिन अभी तक इस समस्या पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।2
- मैनपुरी जिले के नगला पीपल गांव के ग्रामीण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जहाँ गांव की एक भी गली पक्की नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, गांव की हर गली में लगातार पानी का भराव रहता है, जिसके कारण ग्रामवासियों को पानी में से होकर निकलना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में अभी तक नालियों और सड़कों का निर्माण नहीं कराया गया है। इसी को देखते हुए, ग्रामवासियों ने संबंधित महोदय जी से अनुरोध किया है कि उनके गांव की नालियों और सड़कों को पक्का कराया जाए।1
- एटा शहर के मोहल्ला कैलाशगंज में राशन वितरण के दौरान गेहूं की गुणवत्ता को लेकर कार्ड धारकों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें मिल रहे गेहूं में खराब और काले दानों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और अन्य अशुद्धियाँ मिली हुई हैं, जिसके कारण इसे साफ करने में काफी समय और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा गरीबों को मुफ्त और सस्ती दरों पर राशन देने का उद्देश्य तब पूरा नहीं होगा, जब खाद्यान्न की गुणवत्ता ही खराब हो। इस मामले में उचित दर विक्रेता हरिप्रकाश शर्मा ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि उन्हें जो गेहूं सरकारी गोदाम से प्राप्त होता है, उसी का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि गेहूं में मिट्टी और खराब दानों की शिकायत उन्हें भी मिली है, लेकिन उनके पास उपलब्ध स्टॉक को ही वितरित करना उनकी बाध्यता है। शर्मा ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से गेहूं की गुणवत्ता की जाँच कराने और बेहतर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। स्थानीय निवासियों ने भी खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों से इस पूरे मामले की गहन जाँच करने, दोषी स्तर पर कड़ी कार्रवाई करने और राशन कार्ड धारकों को स्वच्छ व गुणवत्तायुक्त गेहूं उपलब्ध कराने की माँग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि गरीब परिवारों को मिलने वाले राशन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्षेत्र में यह मुद्दा गरमाया हुआ है और उपभोक्ता विभागीय कार्रवाई के इंतजार में हैं।1