खबरें-✔️मधेपुरा जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए काम कर रहे लोक भारती सेवा आश्रम ने अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस मनाया। इसमें बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) व आशा यूनिटों ने भी सहयोग दिया और जिले में बाल विवाह की रोकथाम का संकल्प दोहराया। लोक भारती सेवा आश्रम, जिला प्रशासन, पंचायतों ,स्कूलों और धर्म गुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है। जिले में हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। संगठन खास तौर से बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर प्रशासन व सरकार के सहयोग से इसकी रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाता रहा है । लोक भारती सेवा आश्रम देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश की सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन का सहयोगी संगठन है।जिले में अब तक बाल विवाह के खिलाफ अभियान की सफलता पर संतोष जाहिर करते हुए लोक भारती सेवा आश्रम के सचिव राजा विक्रांत ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि चंद वर्षों पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था की नाबालिग़ बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर 2 साल की सजा वह जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसमें बराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर,साज- सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली , बैंड बाजा वाले, मैरिज हॉल के मालिक और यहां तक की विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है । लेकिन जमीन पर हमारे गहन जागरूकता अभियानों से जागरूकता बढ़ी है और हालात बदले हैं । अब लोग बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं और प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रहा है। यह एक उल्लेखनीय बदलाव है और हमें विश्वास है कि हम 2030 से पहले ही जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, धर्म गुरुओं और मौलानाओं ने बाल विवाह मुक्ति के लिए शपथ लिया।
खबरें-✔️मधेपुरा जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाहों की रोकथाम के लिए काम कर रहे लोक भारती सेवा आश्रम ने अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस मनाया। इसमें बाल विवाह निषेध अधिकारी (सीएमपीओ) व आशा यूनिटों ने भी सहयोग दिया और जिले में बाल विवाह की रोकथाम का संकल्प दोहराया। लोक भारती सेवा आश्रम, जिला प्रशासन, पंचायतों ,स्कूलों और धर्म गुरुओं के साथ मिलकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए स्कूलों, पंचायतों और गांवों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहा है। जिले में हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। संगठन खास तौर से बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर प्रशासन व सरकार के सहयोग से इसकी रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाता रहा है । लोक भारती सेवा आश्रम देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश की सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन का सहयोगी संगठन है।जिले में अब तक बाल विवाह के खिलाफ अभियान की सफलता पर संतोष जाहिर करते हुए लोक भारती सेवा आश्रम के सचिव राजा विक्रांत ने कहा कि अक्षय तृतीया के शुभ दिन की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन व नागरिक समाज संगठनों की सतर्कता से अब अक्षय तृतीया के दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में खासी कमी आई है लेकिन हमें इसे पूरी तरह रोकने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि चंद वर्षों पहले तक लोगों को यह भी नहीं पता था की नाबालिग़ बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर 2 साल की सजा वह जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसमें बराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर,साज- सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली , बैंड बाजा वाले, मैरिज हॉल के मालिक और यहां तक की विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है । लेकिन जमीन पर हमारे गहन जागरूकता अभियानों से जागरूकता बढ़ी है और हालात बदले हैं । अब लोग बाल विवाहों की सूचना दे रहे हैं और प्रशासन तुरंत इसकी रोकथाम के लिए कार्रवाई कर रहा है। यह एक उल्लेखनीय बदलाव है और हमें विश्वास है कि हम 2030 से पहले ही जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, धर्म गुरुओं और मौलानाओं ने बाल विवाह मुक्ति के लिए शपथ लिया।
- नोएडा में एक महिला ने एक शराबी आदमी का सामना किया, जो सड़क पर मुस्लिम महिला को परेशान कर रहा था। वह आदमी, जिसने हाथ में बीयर की बोतल लेकर धमकाने की कोशिश की थी, उसे बाद में दुम दबाकर वहाँ से भागना पड़ा था। #indianmuslim #noida #muslimah #burkha #hijab1
- Post by Ramsingh82355298901
- अक्षय तृतीया पर रामनगर महेश काली मंदिर परिसर में वर्षों से आ रही परंपरा के अनुसार 24 घंटे का अखंड रामधुन अष्टयाम कार्यक्रम शुरूआत आज दस बजे से हो गई है।1
- Post by Csi news1
- मधेपुरा सदर प्रखंड के तूरकाही, वार्ड संख्या 5 सोमवार को भक्ति, श्रद्धा और उत्साह के अद्भुत संगम का साक्षी बना, जब बजरंगबली मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया। पूरा इलाका “जय श्री राम” और “बजरंगबली की जय” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर 501 कन्याओं ने सिर पर कलश लेकर भव्य शोभायात्रा निकाली। आरपीएम कॉलेज के समीप से पवित्र जल लेकर शुरू हुई यह यात्रा करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर मंदिर पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और हर कदम पर भक्ति की गंगा बहती नजर आई। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को एक विशाल धार्मिक उत्सव का रूप दे दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत की व्यवस्था की गई थी। यूथ फाउंडेशन के सदस्यों ने सेवा भाव का परिचय देते हुए यात्रा में शामिल लोगों के लिए जूस और पानी की व्यवस्था कर सराहनीय योगदान दिया। एक भक्त की अधूरी इच्छा से बना आस्था का धाम इस मंदिर की नींव एक सच्चे भक्त की श्रद्धा में छिपी है। स्थानीय भक्त कोको दास यहां एक छोटे से मंदिर में वर्षों तक बजरंगबली की पूजा करते रहे। उनकी और उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद भी उनकी एक ही इच्छा अधूरी रह गई—इस स्थान पर बजरंगबली की भव्य प्रतिमा स्थापित हो। गांव और समाज के लोगों ने इस इच्छा को अपना संकल्प बना लिया। सामूहिक सहयोग और अटूट आस्था के बल पर यहां भव्य मंदिर और प्रतिमा का निर्माण कराया गया। आज उसी सपने को साकार करते हुए विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और सामूहिक एकता की जीवंत मिसाल बनकर उभरा, जिसने हर श्रद्धालु के हृदय को भावविभोर कर दिया। बाइट - जयप्रकाश पंडित, पुजारी बाइट - बानो मुखिया, स्थानीय आयोजक4
- पोखराम का लरका है वाड 7 मुसलीम टोला थाना मुरली गंज जिला मधेपुरा1
- aam tikla1
- यह सरकार की सोची समझी साजिश थी क्योंकि यह बिल जो है 2023 में ही पास हो चुका है वह जानते थे कि बिल पास नहीं होंगे इसलिए वह देख सकते आप लोग मात्र 10 मिनट का अंदर वह कहां से प्रिंटेड बैनर लेकर आ गए और महिला आंदोलनकारी के बीच में जो है वह बैनर हाथ में मिल गया यह सरकार की जो है एक बहुत बड़ी सोची समझी साजिश है क्योंकि आगे जो है इलेक्शन है इसलिए इस प्रकार का जो है तमाशा किया जा रहा है1