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बिहार के बगहा स्थित बबुई टोला फील्ड के पास एक निर्माण कार्य में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जहाँ नाली बनाने के बजाय कथित तौर पर एक छोटा नहर बन गया है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय जनता में गहरा असंतोष है, और वे इस लापरवाही के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। सार्वजनिक तौर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि इस गड़बड़ी का जवाब कौन देगा, क्योंकि यह पूरा मामला अब जनता की आवाज़ बनकर उभरा है।

12 hrs ago
user_Sahil kumar
Sahil kumar
Local News Reporter बगहा, पश्चिम चंपारण, बिहार•
12 hrs ago

बिहार के बगहा स्थित बबुई टोला फील्ड के पास एक निर्माण कार्य में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जहाँ नाली बनाने के बजाय कथित तौर पर एक छोटा नहर बन गया है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय जनता में गहरा असंतोष है, और वे इस लापरवाही के लिए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। सार्वजनिक तौर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि इस गड़बड़ी का जवाब कौन देगा, क्योंकि यह पूरा मामला अब जनता की आवाज़ बनकर उभरा है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • पडरौना विकास क्षेत्र के कुबेरस्थान पेट्रोल टंकी के कई दिनों से खाली (सुख) होने के बाद, आज एचपी ऑयल कंपनी द्वारा कुबेरस्थान पडरौना मार्ग पर कर्मा बाबा के स्थान के पास डीजल उपलब्ध होने की सूचना मिली। इस खबर के मिलते ही किसान और ट्रैक्टर मालिक अपने गैलन लेकर मौके पर जमा हो गए और लंबी लाइन लगाकर डीजल लेने में व्यस्त हो गए। दरअसल, खेती का कार्य अपने चरम पर होने के कारण डीजल की खपत कुछ ज्यादा बढ़ गई है। इसी वजह से, डीजल के लिए मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोग गैलन लेकर जुटे और लंबी लाइन लग गई।
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    पडरौना विकास क्षेत्र के कुबेरस्थान पेट्रोल टंकी के कई दिनों से खाली (सुख) होने के बाद, आज एचपी ऑयल कंपनी द्वारा कुबेरस्थान पडरौना मार्ग पर कर्मा बाबा के स्थान के पास डीजल उपलब्ध होने की सूचना मिली। इस खबर के मिलते ही किसान और ट्रैक्टर मालिक अपने गैलन लेकर मौके पर जमा हो गए और लंबी लाइन लगाकर डीजल लेने में व्यस्त हो गए।

दरअसल, खेती का कार्य अपने चरम पर होने के कारण डीजल की खपत कुछ ज्यादा बढ़ गई है। इसी वजह से, डीजल के लिए मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोग गैलन लेकर जुटे और लंबी लाइन लग गई।
    user_S P Tiwari
    S P Tiwari
    Local News Reporter पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • एक पोस्ट में बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के ज्ञान (नॉलेज) पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया गया है। यह पोस्ट दर्शकों से मुख्यमंत्री के 'नॉलेज' को देखने का आग्रह करती है।
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    एक पोस्ट में बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के ज्ञान (नॉलेज) पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया गया है। यह पोस्ट दर्शकों से मुख्यमंत्री के 'नॉलेज' को देखने का आग्रह करती है।
    user_M.A.P NETWORK
    M.A.P NETWORK
    Local News Reporter पश्चिम चंपारण, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    23 hrs ago
  • कुशीनगर के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के सोहराव गांव में एक मामूली कहासुनी के बाद दो पक्ष आपस में भिड़ गए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें लात-घूंसे चले। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
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    कुशीनगर के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के सोहराव गांव में एक मामूली कहासुनी के बाद दो पक्ष आपस में भिड़ गए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें लात-घूंसे चले। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
    user_Aditya pandey
    Aditya pandey
    कसया, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    50 min ago
  • पूर्वांचल क्षेत्र में बिजली संकट को लेकर जनता अब अतीत की तुलना में वर्तमान को देखकर सवाल उठा रही है। यह सच है कि एक समय पूर्वांचल में लोग अंधेरे में जीते थे और बिजली कटौती आम बात थी, लेकिन अब वक्त बदल गया है। आज का दौर 15-20 साल पुरानी व्यवस्था से तुलना करके नहीं चल सकता, क्योंकि अब तकनीक बढ़ी है, संसाधन बढ़े हैं, बिजली उत्पादन बढ़ा है और स्मार्ट सिस्टम के साथ करोड़ों के प्रोजेक्ट भी आए हैं। इन सब विकास के बावजूद, जनता की उम्मीदें भी बढ़ी हैं और वे अब वर्तमान की समस्याओं पर सीधे सवाल कर रहे हैं। यदि पहले लोग बिजली के तार पर कपड़े सुखाते थे, तो अब वे जानना चाहते हैं कि इतने विकास और दावों के बावजूद गांवों में लो-वोल्टेज क्यों है? बिजली की बार-बार कटौती क्यों होती है और बिल इतने भारी क्यों आ रहे हैं? जनता की ज़रूरतें और परेशानियाँ आज की हैं, इसलिए वे अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान देखकर जवाब माँग रही है। इसी संदर्भ में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बिजली संकट पर दिए गए एक बड़े बयान पर भी सवाल उठाए गए हैं। टिप्पणी में कहा गया है कि वे ऐसे समय में बिजली संकट पर बोल रहे हैं, जबकि उनके ही शासन काल में बिजली के तार पर कपड़े सूखते थे, जो मौजूदा व्यवस्था पर एक तीखा कटाक्ष है।
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    पूर्वांचल क्षेत्र में बिजली संकट को लेकर जनता अब अतीत की तुलना में वर्तमान को देखकर सवाल उठा रही है। यह सच है कि एक समय पूर्वांचल में लोग अंधेरे में जीते थे और बिजली कटौती आम बात थी, लेकिन अब वक्त बदल गया है। आज का दौर 15-20 साल पुरानी व्यवस्था से तुलना करके नहीं चल सकता, क्योंकि अब तकनीक बढ़ी है, संसाधन बढ़े हैं, बिजली उत्पादन बढ़ा है और स्मार्ट सिस्टम के साथ करोड़ों के प्रोजेक्ट भी आए हैं।

इन सब विकास के बावजूद, जनता की उम्मीदें भी बढ़ी हैं और वे अब वर्तमान की समस्याओं पर सीधे सवाल कर रहे हैं। यदि पहले लोग बिजली के तार पर कपड़े सुखाते थे, तो अब वे जानना चाहते हैं कि इतने विकास और दावों के बावजूद गांवों में लो-वोल्टेज क्यों है? बिजली की बार-बार कटौती क्यों होती है और बिल इतने भारी क्यों आ रहे हैं? जनता की ज़रूरतें और परेशानियाँ आज की हैं, इसलिए वे अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान देखकर जवाब माँग रही है।

इसी संदर्भ में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बिजली संकट पर दिए गए एक बड़े बयान पर भी सवाल उठाए गए हैं। टिप्पणी में कहा गया है कि वे ऐसे समय में बिजली संकट पर बोल रहे हैं, जबकि उनके ही शासन काल में बिजली के तार पर कपड़े सूखते थे, जो मौजूदा व्यवस्था पर एक तीखा कटाक्ष है।
    user_Raju Chaubey
    Raju Chaubey
    Farmer कसया, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • निचलौल/महराजगंज क्षेत्र में इन दिनों पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसके चलते हाहाकार की स्थिति बनी हुई है। सुबह से ही ट्रैक्टरों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं और किसान तेज धूप में घंटों अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी है। किसानों के अनुसार, निचलौल क्षेत्र में कई पेट्रोल पंप होने के बावजूद डीजल की भारी कमी बनी हुई है, जो इस समय खेतों में चल रहे जुताई और बुवाई के महत्वपूर्ण कार्य को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। ट्रैक्टरों का घंटों लाइन में खड़ा रहना खेती-किसानी के लिए बाधा बन रहा है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ रहा है और उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में डीजल-पेट्रोल की खपत में अचानक काफी वृद्धि हुई है, और भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण कुछ लोग डीजल-पेट्रोल की संभावित तस्करी की आशंका भी जता रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस पूरे मामले पर "आखिर इतना डीजल कहां खप रहा है?" का सवाल आम लोगों से लेकर किसानों तक के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। किसानों ने जिला प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पेट्रोल पंपों पर डीजल की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि खेती का कार्य बिना किसी बाधा के चलता रहे।
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    निचलौल/महराजगंज क्षेत्र में इन दिनों पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसके चलते हाहाकार की स्थिति बनी हुई है। सुबह से ही ट्रैक्टरों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं और किसान तेज धूप में घंटों अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी है।

किसानों के अनुसार, निचलौल क्षेत्र में कई पेट्रोल पंप होने के बावजूद डीजल की भारी कमी बनी हुई है, जो इस समय खेतों में चल रहे जुताई और बुवाई के महत्वपूर्ण कार्य को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है। ट्रैक्टरों का घंटों लाइन में खड़ा रहना खेती-किसानी के लिए बाधा बन रहा है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ रहा है और उनका काम भी प्रभावित हो रहा है। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में डीजल-पेट्रोल की खपत में अचानक काफी वृद्धि हुई है, और भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण कुछ लोग डीजल-पेट्रोल की संभावित तस्करी की आशंका भी जता रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस पूरे मामले पर "आखिर इतना डीजल कहां खप रहा है?" का सवाल आम लोगों से लेकर किसानों तक के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। किसानों ने जिला प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पेट्रोल पंपों पर डीजल की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि खेती का कार्य बिना किसी बाधा के चलता रहे।
    user_Munna Ansari
    Munna Ansari
    निचलाउल, महाराजगंज, उत्तर प्रदेश•
    50 min ago
  • नोएडा फेज 2 में वेतन, बोनस और शोषण के खिलाफ 1,000 से अधिक फैक्ट्री कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ये श्रमिक ₹20,000 न्यूनतम वेतन और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग कर रहे थे, जिसे वे अपना संवैधानिक अधिकार बताते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में ₹11,000 से ₹13,000 की पगार में गुजारा करना असंभव है। अपनी इन जायज मांगों के बीच, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की। पुलिस ने जनता को "कीड़े-मकौड़े की तरह" मारा, जिससे यह तीखा सवाल उठा कि "क्या हम कॉक्रोच हैं?" हालाँकि पुलिस के डंडे टूट गए, लेकिन प्रदर्शनकारियों का हौसला नहीं टूटा। इस घटना ने एक बार फिर ऐसे नेताओं की आवश्यकता पर बल दिया है जो जमीनी हकीकत को समझते हों, न कि सिर्फ AC कमरों में बैठकर फैसले लेने वाले हों।
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    नोएडा फेज 2 में वेतन, बोनस और शोषण के खिलाफ 1,000 से अधिक फैक्ट्री कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ये श्रमिक ₹20,000 न्यूनतम वेतन और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग कर रहे थे, जिसे वे अपना संवैधानिक अधिकार बताते हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में ₹11,000 से ₹13,000 की पगार में गुजारा करना असंभव है। अपनी इन जायज मांगों के बीच, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की।

पुलिस ने जनता को "कीड़े-मकौड़े की तरह" मारा, जिससे यह तीखा सवाल उठा कि "क्या हम कॉक्रोच हैं?" हालाँकि पुलिस के डंडे टूट गए, लेकिन प्रदर्शनकारियों का हौसला नहीं टूटा। इस घटना ने एक बार फिर ऐसे नेताओं की आवश्यकता पर बल दिया है जो जमीनी हकीकत को समझते हों, न कि सिर्फ AC कमरों में बैठकर फैसले लेने वाले हों।
    user_News of Kushinagar
    News of Kushinagar
    Classified ads newspaper publisher तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • कानपुर के सरसौल में आयोजित पुलिस भर्ती की परीक्षा गंभीर अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई, जिसके कारण दर्जनों छात्र अपना पेपर नहीं दे पाए। इस स्थिति से आक्रोशित होकर छात्रों ने सड़क जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। मामले की सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए छात्रों को समझा-बुझाकर काबू पाया। हालांकि, इस घटना के बाद भी यह सवाल बरकरार है कि आखिर परीक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई। मूल प्रश्न यही है कि क्या इस तरह की अव्यवस्थाओं के बीच पारदर्शी परीक्षाओं का ढोंग चलता रहेगा?
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    कानपुर के सरसौल में आयोजित पुलिस भर्ती की परीक्षा गंभीर अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गई, जिसके कारण दर्जनों छात्र अपना पेपर नहीं दे पाए। इस स्थिति से आक्रोशित होकर छात्रों ने सड़क जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।

मामले की सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए छात्रों को समझा-बुझाकर काबू पाया। हालांकि, इस घटना के बाद भी यह सवाल बरकरार है कि आखिर परीक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई। मूल प्रश्न यही है कि क्या इस तरह की अव्यवस्थाओं के बीच पारदर्शी परीक्षाओं का ढोंग चलता रहेगा?
    user_News of Kushinagar
    News of Kushinagar
    Classified ads newspaper publisher तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बेतिया में खुलेआम उल्लंघन किया। वे एक प्रशिक्षण शिविर में दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे, जिससे प्रधानमंत्री के संदेश की धज्जियां उड़ गईं। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री लोगों से ईंधन बचाने की अपील कर रहे थे, वहीं उनकी ही पार्टी के लोग धरातल पर इस अपील की अनदेखी करते दिखे, जबकि आम लोग केवल फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डालकर अपनी सहभागिता निभा रहे थे।
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    प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बेतिया में खुलेआम उल्लंघन किया। वे एक प्रशिक्षण शिविर में दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे, जिससे प्रधानमंत्री के संदेश की धज्जियां उड़ गईं। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री लोगों से ईंधन बचाने की अपील कर रहे थे, वहीं उनकी ही पार्टी के लोग धरातल पर इस अपील की अनदेखी करते दिखे, जबकि आम लोग केवल फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डालकर अपनी सहभागिता निभा रहे थे।
    user_BN Chitranjan
    BN Chitranjan
    बैरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    3 hrs ago
  • बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया अंतर्गत कुमारबाग थाना क्षेत्र के रानीपुर रमपुरवा गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध और आक्रोश का सामना करना पड़ा। अंचलाधिकारी के नेतृत्व में जैसे ही टीम जमीन खाली कराने पहुंची, ग्रामीण अचानक उग्र हो गए। उन्होंने प्रशासनिक टीम को घेरकर तीखी नोकझोंक शुरू कर दी और मौके पर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल के साथ जमकर गाली-गलौज करते हुए हिंसक झड़प की। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीण और प्रशासनिक टीम के लोग आपस में उलझते और बहस करते दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि, वायरल हो रहे इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि हमारा चैनल अपडेट न्यूज़ बिहार नहीं करता है। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। प्रशासन इस मामले को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गया है, और चनपटिया सीओ द्वारा कुमारबाग थाना में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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    बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया अंतर्गत कुमारबाग थाना क्षेत्र के रानीपुर रमपुरवा गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध और आक्रोश का सामना करना पड़ा। अंचलाधिकारी के नेतृत्व में जैसे ही टीम जमीन खाली कराने पहुंची, ग्रामीण अचानक उग्र हो गए। उन्होंने प्रशासनिक टीम को घेरकर तीखी नोकझोंक शुरू कर दी और मौके पर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल के साथ जमकर गाली-गलौज करते हुए हिंसक झड़प की।

इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीण और प्रशासनिक टीम के लोग आपस में उलझते और बहस करते दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि, वायरल हो रहे इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि हमारा चैनल अपडेट न्यूज़ बिहार नहीं करता है। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। प्रशासन इस मामले को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गया है, और चनपटिया सीओ द्वारा कुमारबाग थाना में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
    user_Niraj Raj
    Niraj Raj
    बैरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    4 hrs ago
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