मध्य प्रदेश के आमला नगर में बस स्टैंड से चंद्रभागा तक चल रहे डिवाइडर निर्माण कार्य की धीमी गति अब लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है। हाल ही में सोमवार को थाना परिसर के सामने कार क्रमांक MP 48 ZE 8710 एक अधूरे डिवाइडर पर चढ़ गई। गनीमत रही कि आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद कर वाहन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह डिवाइडर निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है और न ही रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड अथवा संकेतक लगाए गए हैं, जिससे विशेषकर रात के समय वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति समझ नहीं आती और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। नागरिकों ने नगर पालिका पर यह भी आरोप लगाया है कि एक निर्माण कार्य पूरा किए बिना दूसरा कार्य शुरू कर दिया जाता है, जिसका परिणाम यह है कि शहर की कई प्रमुख सड़कें एक साथ खुदी पड़ी हैं। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को रोजाना जाम, धूल तथा दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासी इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि यदि निर्माण एजेंसी को समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, तो फिर इतनी देरी क्यों हो रही है। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि संबंधित ठेकेदार पर सख्ती नहीं दिखाई जा रही है। नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता जानना चाहती है कि डिवाइडर निर्माण कार्य तय समय में पूरा क्यों नहीं हुआ, अधूरे निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए, एक काम पूरा होने से पहले दूसरे निर्माण कार्य को शुरू करने की अनुमति किसने दी, और यदि किसी दिन बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इसके साथ ही, लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या नगर पालिका के इंजीनियर और सीएमओ नियमित रूप से निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से तत्काल मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक सभी निर्माण स्थलों पर अनिवार्य रूप से बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय लगाए जाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
मध्य प्रदेश के आमला नगर में बस स्टैंड से चंद्रभागा तक चल रहे डिवाइडर निर्माण कार्य की धीमी गति अब लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है। हाल ही में सोमवार को थाना परिसर के सामने कार क्रमांक MP 48 ZE 8710 एक अधूरे डिवाइडर पर चढ़ गई। गनीमत रही कि आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद कर वाहन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह डिवाइडर निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई है और न ही रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड अथवा संकेतक लगाए गए हैं, जिससे विशेषकर रात के समय वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति समझ नहीं आती और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। नागरिकों ने नगर पालिका पर यह भी आरोप लगाया है कि एक निर्माण कार्य पूरा किए बिना दूसरा कार्य शुरू कर दिया जाता है, जिसका परिणाम यह है कि शहर की कई प्रमुख सड़कें एक साथ खुदी पड़ी हैं। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को रोजाना जाम, धूल तथा दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासी इस बात पर सवाल उठा रहे हैं
कि यदि निर्माण एजेंसी को समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, तो फिर इतनी देरी क्यों हो रही है। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि संबंधित ठेकेदार पर सख्ती नहीं दिखाई जा रही है। नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता जानना चाहती है कि डिवाइडर निर्माण कार्य तय समय में पूरा क्यों नहीं हुआ, अधूरे निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए, एक काम पूरा होने से पहले दूसरे निर्माण कार्य को शुरू करने की अनुमति किसने दी, और यदि किसी दिन बड़ा हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इसके साथ ही, लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या नगर पालिका के इंजीनियर और सीएमओ नियमित रूप से निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से तत्काल मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक सभी निर्माण स्थलों पर अनिवार्य रूप से बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय लगाए जाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
- बौड़ी गांव में पानी की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। जानकारी के अनुसार, गांव के नल खराब हो चुके हैं, जिसके कारण ग्रामीणों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।1
- Post by Nishit Biswas1
- बैतूल जिले में कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने वर्षा ऋतु और मानसून की सक्रियता को देखते हुए रेत खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध जिले की समस्त रेत खदानों, नदियों और नालों से रेत उत्खनन पर 30 जून 2026 की मध्य रात्रि से लागू होगा और आगामी 1 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस संबंध में कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने सभी एसडीएम और तहसीलदार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।1
- ग्राम पंचायत बाकुड़।1
- आठनेर विकासखण्ड क्षेत्र में सातनेर विद्युत सब स्टेशन से हो रही अघोषित बिजली कटौती के कारण दर्जनों गांवों के लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। धामनगांव बाकुड के ग्रामीणों ने बताया कि हल्की बारिश में ही बिजली फाल्ट हो जाती है और घंटों तक गुल रहती है, जिससे उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, रविवार को हुई हल्की बारिश के बाद पूरी रात बिजली या तो डिम रही या कुछ गांवों में पूरी तरह से गुल रही। सोमवार को भी दोपहर से बिजली बंद है, जिससे भीषण गर्मी और उमस के कारण लोगों का हाल बेहाल है। सातनेर सब-स्टेशन से हो रही यह अघोषित बिजली कटौती ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है।1
- मुलताई-आठनेर मार्ग पर एक सड़क दुर्घटना में बाइक चला रहे एक युवक की मृत्यु हो गई है। यह हादसा तब हुआ जब एक अज्ञात वाहन ने बाइक चालक को टक्कर मार दी।1