चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक द्वारा डंप किए गए औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ जेरोफिक्स को हटाने की मांग को लेकर 'जहर मुक्त बड़ी सादड़ी संघर्ष समिति' का आंदोलन सोमवार को 28वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान धरना स्थल पर पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव धीरज गुर्जर ने आंदोलनकारियों को समर्थन देते हुए सरकार और प्रशासन से मामले पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। धीरज गुर्जर ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही सर्वोपरि होती है, और जनभावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को जनता समय आने पर जवाब देती है। उन्होंने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से जेरोफिक्स मामले का जल्द समाधान निकालने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने और अनशन जैसे कदम उठाने के लिए वे मजबूर होंगे। गुर्जर ने यह भी कहा कि जेरोफिक्स के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी सादड़ी की जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, और मंत्री गौतम दक मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जेरोफिक्स को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरी चिंता है, लेकिन जिले के कई पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ नेता केवल धरना स्थल पर आकर ठेकेदारों को निशाना बनाते हैं, जबकि मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान जिंक की भूमिका पर चर्चा नहीं करते। पूर्व में कांग्रेस से विधायक प्रत्याशी रहे बद्रीलाल जाट ने इस अपशिष्ट पदार्थ के लंबे समय तक क्षेत्र में रहने से आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की आशंका जताई थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि जेरोफिक्स अभी तक पूरी तरह नहीं हटाया गया है और क्षेत्र में स्वास्थ्य, जल स्रोतों तथा पर्यावरण को लेकर खतरे की आशंका बनी हुई है। धीरज गुर्जर के स्थानीय नेताओं पर निशाना साधने और राजनीतिक नुकसान के डर से जनता के पक्ष में आवाज न उठाने के आरोप के बाद चित्तौड़गढ़ जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है, और स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जेरोफिक्स को क्षेत्र से पूरी तरह हटाना, पर्यावरणीय प्रभावों की जांच कराना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक द्वारा डंप किए गए औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ जेरोफिक्स को हटाने की मांग को लेकर 'जहर मुक्त बड़ी सादड़ी संघर्ष समिति' का आंदोलन सोमवार को 28वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान धरना स्थल पर पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव धीरज गुर्जर ने आंदोलनकारियों को समर्थन देते हुए सरकार और प्रशासन से मामले पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। धीरज गुर्जर ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही सर्वोपरि होती है, और जनभावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को जनता समय आने पर जवाब देती है। उन्होंने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से जेरोफिक्स मामले का जल्द समाधान निकालने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने और अनशन जैसे कदम उठाने के लिए वे मजबूर होंगे। गुर्जर ने यह भी कहा कि जेरोफिक्स के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी सादड़ी की जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, और मंत्री गौतम दक मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जेरोफिक्स को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरी चिंता है, लेकिन जिले के कई पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ नेता केवल धरना स्थल पर आकर ठेकेदारों को निशाना बनाते हैं, जबकि मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान जिंक की भूमिका पर चर्चा नहीं करते। पूर्व में कांग्रेस से विधायक प्रत्याशी रहे बद्रीलाल जाट ने इस अपशिष्ट पदार्थ के लंबे समय तक क्षेत्र में रहने से आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की आशंका जताई थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि जेरोफिक्स अभी तक पूरी तरह नहीं हटाया गया है और क्षेत्र में स्वास्थ्य, जल स्रोतों तथा पर्यावरण को लेकर खतरे की आशंका बनी हुई है। धीरज गुर्जर के स्थानीय नेताओं पर निशाना साधने और राजनीतिक नुकसान के डर से जनता के पक्ष में आवाज न उठाने के आरोप के बाद चित्तौड़गढ़ जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है, और स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जेरोफिक्स को क्षेत्र से पूरी तरह हटाना, पर्यावरणीय प्रभावों की जांच कराना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
- फादर्स डे के अवसर पर चित्तौड़गढ़ में पूर्व नायब तहसीलदार बंशीलाल सोनी को सम्मानित किया गया। इसी के साथ, गोविंद सोनी को उनके श्रवण कुमार सुपुत्र होने के लिए विशेष 'श्रवण कुमार सुपुत्र सम्मान' से नवाजा गया।1
- सुखपुरा में नालियों के पानी के कारण स्थानीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।1
- NEET परीक्षा के दौरान योगी की पुलिस ने एक सराहनीय कार्य किया है। जानकारी के अनुसार, एक छात्रा गलती से किसी और परीक्षा केंद्र पर पहुँच गई थी। इस स्थिति में, पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे अपनी कार में बिठाकर सही परीक्षा केंद्र तक पहुँचाया। इतना ही नहीं, छात्रा को देरी होने के बावजूद परीक्षा में बैठने दिया गया और उसने अपना एग्जाम सफलतापूर्वक दिया।1
- केंद्र सरकार एक ओर जहाँ स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं भीलवाड़ा के मांडल स्थित उप जिला चिकित्सालय की हालत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। मरीज यहाँ स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर पहुँचते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर की गंदगी देखकर लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। अस्पताल के बाहर लगी शुद्ध मीठे पानी की प्याऊ गंदगी से अटी पड़ी है, और इसके आसपास जमा कीचड़ तथा गंदा पानी मच्छरों के पनपने का मुख्य कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थिति के चलते डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। परिसर में जगह-जगह उगी कंटीली झाड़ियाँ, फैला कचरा और घूमते आवारा पशु भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के साथ-साथ गंदगी और बदबू का भी सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र की ऐसी स्थिति है, तो आम स्थानों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब क्षेत्रवासी यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या अस्पताल प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है, और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली इन व्यवस्थाओं पर आखिर कब तक पर्दा डाला जाएगा। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल सफाई अभियान चलाने, अस्पताल परिसर से झाड़ियों को हटाने और प्याऊ के आसपास फैली गंदगी को साफ कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।4
- राष्ट्रीय अफीम किसान संघ ने अफीम किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 23 जून को एक किसान जागरण रैली आयोजित करने की घोषणा की है। यह रैली 26 जून को चित्तौड़गढ़ में प्रस्तावित एक महापड़ाव की तैयारियों के तहत निकाली जा रही है, जिसमें डूंगला, बड़ीसादड़ी, कानोड़, भिंडर और वल्लभनगर सहित कई क्षेत्रों से हजारों किसानों के शामिल होने की संभावना है। संघ के अध्यक्ष दुर्गेश जोशी ने बताया कि रैली 23 जून को सुबह 10 बजे डूंगला से शुरू होकर बड़ीसादड़ी क्षेत्र के जरखाना मोड़ पहुंचेगी। वहाँ स्थानीय किसान इसका स्वागत करेंगे और उपखंड अधिकारी को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद रैली लूंणदा, अमरपुरा, मेनार और वल्लभनगर होते हुए आगे बढ़ेगी। हर पड़ाव पर क्षेत्रीय किसान रैली का स्वागत करेंगे और संबंधित उपखंड अधिकारियों को 8 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया जाएगा। रात्रि विश्राम इटली गांव में प्रस्तावित है। जोशी ने आगे बताया कि 24 जून को यह रैली मावली, भूपालसागर, कपासन और राशमी क्षेत्रों में पहुंचेगी, जहाँ किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। संघ का कहना है कि अफीम किसानों पर डोडा-चूरा नष्ट करने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनका वर्षों पुराना बकाया डोडा-चूरा अभी तक लंबित है। किसानों की मुख्य मांग है कि बिना उचित मुआवजे के नष्टीकरण की कोई कार्रवाई न की जाए और उनकी अन्य लंबित मांगों का भी जल्द समाधान किया जाए। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की 8 सूत्रीय मांगों को लेकर 26 जून को चित्तौड़गढ़ में महापड़ाव आयोजित किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें आमरण अनशन जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं, क्योंकि यह अफीम किसानों के अधिकारों की लड़ाई है और 26 जून के महापड़ाव की तैयारी तेजी से चल रही है।1
- हरमैन शरीफैन से लौटे हाजियों का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर खान परिवार ने शहर क़ाज़ी, पेश इमामों और विभिन्न धार्मिक तंजीमों के साथ मिलकर मोहब्बत व अकीदत की एक विशेष महफिल सजाई।1
- हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक स्टेडियम की खाली सीटें दिखाई दे रही हैं। यह वीडियो खेल समाचारों से संबंधित है और दर्शकों से इस पर अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है। लोगों को इसी प्रकार की और खेल खबरें जानने तथा प्लेटफॉर्म से जुड़े रहने के लिए सब्सक्राइब करने का निमंत्रण दिया गया है।1
- कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले थाने के भीतर यदि एक युवक भी सुरक्षित नहीं है, तो यह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। ऐसी घटनाओं के आरोप सामने आने से स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि थाने में आने वाली महिलाओं की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी। जब न्याय और सुरक्षा प्रदान करने वाली संस्थाओं पर ही सवाल उठने लगते हैं, तो जनता का उन पर से भरोसा कमजोर होने लगता है। इसी के मद्देनजर, इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच की तत्काल आवश्यकता है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। जनता को यह विश्वास दिलाना अनिवार्य है कि थाना न्याय और सुरक्षा का केंद्र है, न कि भय और असुरक्षा का।1