मुरादाबाद में एक तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भर-भरा कर गिर पड़ी, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई क्योंकि प्रशासन ने ठीक एक दिन पहले ही सबको सुरक्षित बाहर निकाल दिया था। मुरादाबाद में कल जो हुआ, उसने देश के उस स्थापित प्रशासनिक सिद्धांत को हिलाकर रख दिया है जिसके तहत अमूमन बुलडोजर और जांच समितियां हमेशा लाशों के मलबे पर ही अपना जलवा दिखाती हैं। जी हां, मुरादाबाद में एक तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भर-भरा कर गिर पड़ी, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई क्योंकि प्रशासन ने ठीक एक दिन पहले ही सबको सुरक्षित बाहर निकाल दिया था। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें व्यंग्य क्या है? व्यंग्य यही है भाइयो और बहनों, कि हमारे देश में सरकारी तंत्र ने समय रहते कोई अकलमंदी का काम कैसे कर लिया? आम तौर पर हमारी फाइलों की रफ्तार इतनी धीमी होती है कि जब तक किसी जर्जर इमारत को गिराने का आदेश टाइप होता है, तब तक इमारत खुद-ब-खुद मलबे में तब्दील होकर इतिहास बन चुकी होती है। लेकिन मुरादाबाद प्रशासन ने न जाने कौन सा 'अतींद्रिय ज्ञान' हासिल कर लिया या शायद कैलेंडर का सही इस्तेमाल करते हुए वक्त रहते मकान खाली करवा लिया और चारों तरफ आवागमन रोक दिया। इलाके के लोग आज भी सदमे में हैं कि क्या सचमुच कोई सरकारी मुलाजिम अपनी गहरी नींद से वक्त से पहले जाग गया था, या फिर सिस्टम के किसी सॉफ्टवेयर में कोई भयंकर बग आ गया था जिसके चलते सही समय पर सही फैसला ले लिया गया? दिल्ली से लेकर देश के बाकी हिस्सों तक, परंपरा तो यह रही है कि हादसा होने के बाद बड़े-बड़े नेता घटनास्थल पर पहुंचकर नम आंखों से शोक संदेश जारी करते हैं, मुआवजे की घोषणाओं के चेक बांटे जाते हैं, और अधिकारी जांच के नाम पर फाइलों पर धूल फांकते नजर आते हैं। लेकिन मुरादाबाद के इस अनोखे कारनामे ने उन महान भ्रष्ट परंपराओं को करारा झटका दिया है। सोचिए, उन अधिकारियों पर क्या बीती होगी जिन्होंने बिना किसी हाई-प्रोफाइल हादसे के, बिना किसी टीवी डिबेट के और बिना किसी मंत्री के दौरे के, सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभा दी! कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी बाबू ने गलती से सही फाइल पर साइन कर दिए हों और अब वह खुद अपनी इस गलती पर पछता रहा हो? खैर, जान बची तो लाखों पाए—इस कहावत को सच साबित करने के लिए मुरादाबाद प्रशासन को एक बार तो शाबाश कहना ही पड़ेगा। साथ ही यह उम्मीद भी करनी होगी कि यह कोई 'सिस्टम का अस्थायी ग्लिच' न हो, बल्कि असली सुधार की शुरुआत हो। वरना सामान्य दिनों में तो इस देश में चमत्कार ही होते हैं कि फाइलें दौड़ने लगें और इमारतें गिरने से पहले खाली हो जाएं। #Moradabad #BuildingCollapse #UPAdministration #SystemSudhar #Vyangya #IndianBureaucracy #SocialMediaSatire #MiracleOfSystem
मुरादाबाद में एक तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भर-भरा कर गिर पड़ी, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई क्योंकि प्रशासन ने ठीक एक दिन पहले ही सबको सुरक्षित बाहर निकाल दिया था। मुरादाबाद में कल जो हुआ, उसने देश के उस स्थापित प्रशासनिक सिद्धांत को हिलाकर रख दिया है जिसके तहत अमूमन बुलडोजर और जांच समितियां हमेशा लाशों के मलबे पर ही अपना जलवा दिखाती हैं। जी हां, मुरादाबाद में एक तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भर-भरा कर गिर पड़ी, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई क्योंकि प्रशासन ने ठीक एक दिन पहले ही सबको सुरक्षित बाहर निकाल दिया था। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें व्यंग्य क्या है? व्यंग्य यही है भाइयो और बहनों, कि हमारे देश में सरकारी तंत्र ने समय रहते कोई अकलमंदी का काम कैसे कर लिया? आम तौर पर हमारी फाइलों की रफ्तार इतनी धीमी होती है कि जब तक किसी जर्जर इमारत को गिराने का आदेश टाइप होता है, तब तक इमारत खुद-ब-खुद मलबे में तब्दील होकर इतिहास बन चुकी होती है। लेकिन मुरादाबाद प्रशासन ने न जाने कौन सा 'अतींद्रिय ज्ञान' हासिल कर लिया या शायद कैलेंडर का सही इस्तेमाल करते हुए वक्त रहते मकान खाली करवा लिया और चारों तरफ आवागमन रोक दिया। इलाके के लोग आज भी सदमे में हैं कि क्या सचमुच कोई सरकारी मुलाजिम अपनी गहरी नींद से वक्त से पहले जाग गया था, या फिर सिस्टम के किसी सॉफ्टवेयर में कोई भयंकर बग आ गया था जिसके चलते सही समय पर सही फैसला ले लिया गया? दिल्ली से लेकर देश के बाकी हिस्सों तक, परंपरा तो यह रही है कि हादसा होने के बाद बड़े-बड़े नेता घटनास्थल पर पहुंचकर नम आंखों से शोक संदेश जारी करते हैं, मुआवजे की घोषणाओं के चेक बांटे जाते हैं, और अधिकारी जांच के नाम पर फाइलों पर धूल फांकते नजर आते हैं। लेकिन मुरादाबाद के इस अनोखे कारनामे ने उन महान भ्रष्ट परंपराओं को करारा झटका दिया है। सोचिए, उन अधिकारियों पर क्या बीती होगी जिन्होंने बिना किसी हाई-प्रोफाइल हादसे के, बिना किसी टीवी डिबेट के और बिना किसी मंत्री के दौरे के, सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभा दी! कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी बाबू ने गलती से सही फाइल पर साइन कर दिए हों और अब वह खुद अपनी इस गलती पर पछता रहा हो? खैर, जान बची तो लाखों पाए—इस कहावत को सच साबित करने के लिए मुरादाबाद प्रशासन को एक बार तो शाबाश कहना ही पड़ेगा। साथ ही यह उम्मीद भी करनी होगी कि यह कोई 'सिस्टम का अस्थायी ग्लिच' न हो, बल्कि असली सुधार की शुरुआत हो। वरना सामान्य दिनों में तो इस देश में चमत्कार ही होते हैं कि फाइलें दौड़ने लगें और इमारतें गिरने से पहले खाली हो जाएं। #Moradabad #BuildingCollapse #UPAdministration #SystemSudhar #Vyangya #IndianBureaucracy #SocialMediaSatire #MiracleOfSystem
- अयोध्या मे महाराजा निषाद राज जयंती समारोह को लेकर सिविल लाइन स्थित एक होटल में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अयोध्या मे महाराजा निषाद राज जयंती समारोह को लेकर सिविल लाइन स्थित एक होटल में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। निषाद समाज की यह जयंती हर वर्ष 5 अप्रैल को मनाई जाती है, उसी को लेकर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता निषाद समाज के अध्यक्ष श्याम लाल निषाद के द्वारा की गई।बैठक में समाज के आपसी मतभेदों और समस्याओं को दूर कर सामाजिक एकता, शिक्षा और अन्य सामाजिक मुद्दों पर जोर दिया गया।उन्होंने बताया कि आगामी बैठक की तिथि की सूचना जल्द दी जाएगी। अगली बैठक में महाराजा निषाद राज जयंती समारोह के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। इस दौरान संरक्षक सहित समाज के तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।2
- बूचड खाने नहीं हटवा पाया अत्यंत दुखी हूं बीजेपी सांसद डॉक्टर साक्षी महाराज ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा बूचड खाने नहीं हटवा पाया अत्यंत दुखी हूं बीजेपी सांसद डॉक्टर साक्षी महाराज ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा अटल बिहारी शर्मा -: उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बाबा आदित्यनाथ योगी महाराज भी बूघड खानों को लेकर समय-समय पर बातें करते हैं! सावन का कावड़ यात्रा हो या फिर कुआर का नवरात्र खुले में मुर्गा मछली बकरा बेचने वालों को हिदायत देते हैं और कार्यवाही की भी प्रशासन को आदेश जारी करते हैं! भागवा कलर का प्रतीक जय श्री राम के नारे सनातन धर्म का सम्मान भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं मंत्रियों द्वारा करने की बात की जाती है! बावजूद इसके भी बूचड खाने बेधड़क संचालित हो रहे हैं और सांसद साक्षी महाराज जैसे नेता अत्यंत दुखी महसूस करते हैं तो कहीं ना कहीं से कोई बहुत बड़ा जिम्मेदार फेल हो रहा है! उत्तर प्रदेश सरकर को इस विषय पर गंभीरता से सोचना चाहिए और प्रशासन को सख्त आदेश देकर बूच़डखानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने का दिशा निर्देश जारी करना चाहिए! शुरुआत उत्तर प्रदेश के राजधानी से होनी चाहिए ताकि इसकी गूंज पूरे भारत तक सुनाई दे! अटल सत्य टी वी न्यूज़ 24 निष्पक्ष खबरों का संग्रह1
- अयोध्या में कृष्ण-सुदामा का महाधमाका! नन्हे कलाकारों ने मंच पर सजाई कृष्णलीला, भावुक हुआ ब्रह्माकुमारी आश्रम, तालियों से गूंजा परिसर1
- आरक्षण बचाओ,आरक्षण बढ़ाओ, बहुजन समाज का प्रदर्शन डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के इस्तीफा की मांग बिपिन पांडेय संवाददाता अजय भारत ए बी न्यूज़ अयोध्या लोकेशन अयोध्या ब्रेकिंग अयोध्या। यूपी के 22 विभागों में OBC, SC, ST आरक्षण में कथित घोटाले को लेकर बहुजन आंदोलन महासभा ने अयोध्या के गांधी पार्क में प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम जी पटेल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क से रोडवेज तक पैदल मार्च निकाला। और राष्ट्रपति व राज्यपाल को संबोधित 6 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।पटेल ने आरोप लगाया, 23 अगस्त को डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने आरक्षण विरोधियों का समर्थन किया, जो असंवैधानिक है। संगठन ने बृजेश पाठक के इस्तीफे और आरक्षण घोटाले में शामिल दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी, 20 सितंबर तक मांगें पूरी नहीं हुईं,तो अयोध्या से विधानसभा तक पैदल मार्च कर विधानसभा का घेराव किया जाएगा।4
- आज देश के दूसरे भारत रत्न रास्ट्रपति ड्रा सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती प्रत्येक वर्ष 5 सित 26 को नन्हे बच्चे के साथ विभिन्न स्कुलो मे शिक्षक दिवस के रूप में मनाई गई आज देश के दूसरे भारत रत्न रास्ट्रपति ड्रा सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती प्रत्येक वर्ष 5 सित 26 को नन्हे बच्चे के साथ विभिन्न स्कुलो मे शिक्षक दिवस के रूप में मनाई गई1
- नया पारिवारिक न्यायालय शुरू, चार आधुनिक कोर्ट रूम, लोगों को पारिवारिक मामलों में मिलेगी तेज और सुविधाजनक न्याय व्यवस्था।1
- सवर्ण समाज ने 24 अक्टूबर चाणक्य रथ यात्रा एवं लोकसभा घेराव का किया समर्थन अयोध्या।सवर्ण समाज की बैठक प्रेस क्लब सिविल लाइन में संपन्न हुई।जिसमें विभिन्न समाज से आए लोगों ने आगामी 24 अक्टूबर को पाटलिपुत्र पटना से निकल रही रथ यात्रा के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा किया और देश में सवर्ण समाज के खिलाफ चल रही साजिश पर गहरी चिंता जताते हुए अखिल भारतीय संयुक्त ब्राह्मण संघर्ष समिति द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन की सफलता के लिए ऐडी चोटी का जोर लगा देना के लिए सर्व समाज से आवाहन किया है। बैठक के मुख्य अतिथि पंडित कृपा निधान तिवारी ने पूरे देश के ब्राह्मण क्षत्रिय एवं वैश्य एवं श्रीवास्तव समाज के लोगों को एकजुट होकर छह बिंदुओं के समर्थन में आगे आने का आवाहन किया। आगामी 11 सितंबर को सभी सवर्ण समाज के लोगों की एक रैली गांधी पार्क से निकलकर जिला अधिकारी कार्यालय तक जाकर आंदोलन के सभी 6 बिंदुओं यूजीसी रोलबैक एवं आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर देश के प्रधानमंत्री को जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा जाएगा।देश एवं प्रदेश की सरकारे आपकी आवाज तभी सुनेगी जब एक बैनर तले आकर एकजुट होंगे2
- युवा संसद में नन्हे प्रतिभागियों का दम, कम उम्र में शानदार संवाद और नेतृत्व कौशल से सभी को चौंकाया।1
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