अरवल में जनगणना-2027 को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू अरवल। भारत की आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत जिला प्रशासन की ओर से सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिला पदाधिकारी अमृषा बैंस के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 मार्च 2026 से 18 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सरकारी कर्मी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य जनगणना के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं आवास गणना से जुड़े कार्यों को सुचारु रूप से संपन्न कराना है। प्रशिक्षण में अधिकारियों को घर-घर जाकर मकानों की जानकारी एकत्र करने, परिवारों का विवरण दर्ज करने तथा डिजिटल माध्यम से डाटा संग्रह करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि स्व-गणना प्रक्रिया 17 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 तक चलेगी, जबकि मकान सूचीकरण एवं आवास गणना 2 मई 2026 से 31 मई 2026 तक की जाएगी। प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि जनगणना देश की विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी नीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार होती है। इसलिए सभी कर्मियों को पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से इस कार्य को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण के बाद सभी कर्मी अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।
अरवल में जनगणना-2027 को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू अरवल। भारत की आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों के तहत जिला प्रशासन की ओर से सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिला पदाधिकारी अमृषा बैंस के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 मार्च 2026 से 18 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सरकारी कर्मी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य जनगणना के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं आवास गणना से जुड़े कार्यों को सुचारु रूप से संपन्न कराना है। प्रशिक्षण में अधिकारियों को घर-घर जाकर मकानों की जानकारी एकत्र करने, परिवारों का विवरण दर्ज करने तथा डिजिटल माध्यम से डाटा संग्रह करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि स्व-गणना प्रक्रिया 17 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 तक चलेगी, जबकि मकान सूचीकरण एवं आवास गणना 2 मई 2026 से 31 मई 2026 तक की जाएगी। प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि जनगणना देश की विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी नीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार होती है। इसलिए सभी कर्मियों को पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से इस कार्य को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण के बाद सभी कर्मी अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।
- बीजेपी आरएसएस कि पार्टी है और आरएसएस अग्रेज मैंडेड संगठन है rss के उतपति से ले कर आज तक यह गैरकानूनी रजिस्टर नही तिरंगा से नफ़रत आय ब्यय का बेउरा नही संबिधान का सम्मान नही ऐसे संगठन का पुत्र बीजेपी का बिचार धारा भारत वर्ष के हित का नही है यह देश मे नफ़रत घृणा फैला रहा है अपने मन मोताबिक पूरा सिस्टम क़ो नचा रहा जनहित समाप्त देश का रुपया लूट कर बिदेस भाग रहा है यही बीजेपी है अगर आप क़ो बीजेपी से लाभ हों रहा उसके लूट गैग मे आप शामिल है तो आप के लिए अच्छा जरूर होगा जय हिन्द जय संविधान9
- सपना कुमारी ने अपने ही भजन कीर्तन कर के सब को मोहित कर लिए1
- #followers #traidingreels रविवार की रात में आरा पटना मुख्य मार्ग पर अहिरपुरवा मनोकामना मंदिर से पहले बिजली का कवर वायर तार सड़क पर गिरा, बड़ा हादसा टला1
- जहानाबाद : पटना-गया मुख्य मार्ग NH-22 पर मसौढ़ी के पास रविवार को एक तेज रफ्तार ऑटो के अनियंत्रित होकर पलट जाने से करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया। घायलों में जहानाबाद जिले के जय किशुन बीघा गांव के चार लोग भी शामिल हैं, जिन्हें इलाज के लिए जहानाबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। घायलों ने बताया कि ऑटो पटना से जहानाबाद की ओर आ रहा था। इसी दौरान मसौढ़ी के पास सामने से आ रहे एक अन्य वाहन को बचाने के प्रयास में चालक ने अचानक मोड़ लिया, जिससे ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गई और उसमें सवार यात्री घायल हो गए।घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को ऑटो से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाने में मदद की। फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।1
- यह किसानो,नौजवानों की लड़ाइ है,दसको से बिहार पर चंद परिवारों के कब्जे से बिहार को मुक्त करने की लड़ाइ है,ध्वस्त शिक्षा वेवस्था जिसपर गरीब अमीर सभी का सामान्य हक है,गरीबी,पलायन कु वेवस्था से हमलोग सीधे लड़ाइ है,कई वर्षों से बिहार में पैदल घूम कर देख और महसूस कर रहे है इसको समाप्त करने के लिए जनता को अपने बिहार के लिए जगा रहे हैं!1
- राष्ट्रीय सवर्ण कल्याण मोर्चा के बैनर तले निकाली गई जन चेतना रैली जय श्री राम, यूजीसी का काला कानून वापस लो, सनातन जिंदाबाद, भारत माता की जय हो के लगे नारे डेहरी ऑन सोन/ रोहतास राष्ट्रीय सवर्ण कल्याण मोर्चा के बैनर तले रविवार को झारखंडी मंदिर के प्रांगण से विशाल जन चेतना रैली के माध्यम से सवर्ण ने हुकार भरी। हजारों की संख्या में सड़क पर जुलूस के रूप में उतरे राष्ट्रीय सवर्ण कल्याण मोर्चा के बैनर तले लोगों ने यूजीसी वापस के नारे लगाए । उन्होंने सनातन और ब्रह्मणवाद जिंदाबाद के भी नारे लगाए । रैली का नेतृत्व कर रहे मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी, सक्रिय सदस्य राजन राज, मनीषा दुबे, गोपाल सिंह,ललित सिंन्हा, सम्राट कुमार उर्फ़ सोनू सिंह, मुन्ना सिंह सहित हजारों की संख्या में स्वर्ण समाज के सदस्य सम्मिलित हुए।रैली के दौरान हाथों में विभिन्न स्लोगन के तख्ती लिए जय श्री राम, स्वर्ण एकता जिंदाबाद, भारत माता की जय, यूजीसी का काला कानून वापस लो, सनातन जिंदाबाद, भारत माता की जय हो के नारे लगाए गए। कार्यक्रम का प्रारंभ से पूर्व झारखंडी मंदिर में मोर्चा के सभी सदस्यों ने पूजा अर्चना कि तथा प्रसाद का वितरण किया गया। तत्पश्चात मोर्चा के सदस्यों ने भारत माता की जय, जय श्री राम- जय परशुराम कें नारों से शहर की सड़क गुंजायमान होती रही। रैली थाना चौक,अंबेडकर चौक, जख्खी बीघा,स्टेशन रोड, पाली रोड, रामा रानी चौक होते हुए बाबा वीर कुंवर सिंह चौक पहुंचा जहां मोर्चा के सही पदाधिकारी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किया। अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी व राजन राज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि यूजीसी के द्वारा स्वर्णो के दमन का प्रयास किया जा रहा है, कभी ब्राह्मणवाद के नाम पर गाली तो कभी मनुवादी को अभिशाप बताया जाता है,भारत के स्वर्णो को विशेष उद्देश्यों से गाली देना या उनके अस्तित्व समाप्त करने का संयंत्र षड्यंत्र चल रहा है.हम यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगे। यूजीसी के काले कानून को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे,इसे वापस लेना होगा। यह कानून कहीं ना कहीं हमें नीचा दिखाने एवं हमारे आने वाली पीढ़ीयों एवं यूनिवर्सिटी मे पढ़ने वाले बच्चों के शोषण एवं उनके पारिवारिक अस्तित्व के दमन की नीति है। रैली के दौरान जगह-जगह समाज के लोगों सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा मिष्ठान एवं पानी की व्यवस्था की गई थी। मौके पर संजय सिंह बाला, विनय मिश्रा उर्फ विजय बाबा, अकस के अध्यक्ष संतोष सिंह, सीमल सिंह, अधिवक्ता मनोज अज्ञानी, अधिवक्ता पंकज सिंह, अधिवक्ता अनूप सिंह,अनिल मिश्रा, मोनू पांडे, राणा प्रताप सिंह, अंबुज सिंह, आलोक सिंह, गोपाल सिंह, छोटू कुमार विशाल सिंह, परमहंस सिंह,श्रीकांत तिवारी, पारस दुबे, रंग विजय सिंह,अखिलेश तिवारी , फर्निद्र त्रिपाठी ,आजय कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।4
- जहानाबाद में अखिल विश्व गायत्री परिवार की युवा इकाई प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ द्वारा रविवार को 250वां साप्ताहिक पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम देवी मंदिर, दक्षिणी दौलतपुर राजा बाजार में संपन्न हुआ।इस अवसर पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश भी दिया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि लगातार 250 सप्ताह से चल रहे इस पौधरोपण अभियान का उद्देश्य पर्यावरण को सुरक्षित रखना और लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे भी अपने घरों, गांवों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधे लगाएं तथा उनकी देखभाल करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।इस मौके पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ के कई सदस्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे तथा सभी ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।1
- Post by Vaishnavi bhakt vinu1
- मां आरण्य देवी (जिन्हें स्थानीय स्तर पर कई बार 'आयरन देवी' कहा जाता है) बिहार के आरा (भोजपुर) शहर की सबसे प्रमुख अधिष्ठात्री देवी हैं। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक (सिद्धपीठ) माना जाता है, जिसका संबंध रामायण काल और पांडवों (महाभारत) से है। यहाँ माँ के महालक्ष्मी और महासरस्वती रूप की पूजा होती है। मां आरण्य देवी के बारे में मुख्य बातें: स्थान: यह मंदिर बिहार के आरा शहर के शीश महल चौक के पास स्थित है। इतिहास और मान्यता: मान्यता है कि पांडवों ने वनवास के दौरान इस स्थान पर देवी की स्थापना की थी। रामायण काल में भी भगवान राम ने यहाँ पूजा की थी। नाम का अर्थ: 'आरण्य' का अर्थ है 'वन' (जंगल)। चूँकि यह क्षेत्र प्राचीन काल में वन (आरण्य) था, इसलिए इन्हें आरण्य देवी कहा जाता है। 'आरा' शहर का नाम भी इन्हीं देवी के नाम पर पड़ा है। प्रतिमा: मंदिर के गर्भगृह में दो प्रमुख प्रतिमाएँ हैं - एक काली (महा सरस्वती) और दूसरी श्वेत (महालक्ष्मी), जो ५ फीट ऊँचे सिंहासन पर विराजमान हैं। महत्व: यह सिद्धपीठ है और नवरात्र के दौरान यहाँ विशेष उत्सव और भारी भीड़ होती है1