गाजीपुर की बेटी स्वप्निल सिंह का बड़ा कमाल: ‘जान अभी बाकी है’ से बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री गाजीपुर: अक्सर कहा जाता है कि पढ़-लिखकर अफसर बनना ही सफलता की पहचान है, लेकिन कुछ लोग अपने सपनों की राह खुद चुनते हैं। स्वप्निल सिंह ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया। गाजीपुर की गलियों से निकलकर मायानगरी तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, जुनून और जिद की मिसाल बन गया है। बचपन से ही तय था सपना स्वप्निल सिंह बताती हैं कि उन्हें कक्षा 1-2 से ही साफ था कि उन्हें एक्टिंग और डांस के क्षेत्र में जाना है। घंटों डांस करना उनका जुनून था। जब उन्होंने अपनी मां से Dance India Dance में जाने की इच्छा जताई, तो शुरुआत में परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि आम भारतीय परिवारों की तरह पढ़ाई को ही करियर का मुख्य विकल्प माना जाता था। हालांकि, स्वप्निल पढ़ाई में भी तेज थीं और स्कूल की डिबेट प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। संघर्षों के बीच मां बनीं ताकत गाजीपुर के शाह फैज पब्लिक स्कूल और सेंट जॉन्स स्कूल से शुरुआती पढ़ाई के बाद स्वप्निल आगे की शिक्षा के लिए कोटा गईं। साल 2014 उनके जीवन का सबसे कठिन दौर रहा, जब पिता का निधन हो गया। दो बहनों में बड़ी होने के कारण जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन उनकी मां ने हर कदम पर उनका साथ दिया। पूर्वांचल जैसे क्षेत्र में लड़कियों का एक्टिंग में जाना आज भी आसान नहीं माना जाता, लेकिन उनके कजिन (फोटोग्राफर) ने उनका हौसला बढ़ाया। बर्फीली वादियों में शूटिंग का इम्तिहान फिल्म जान अभी बाकी है की शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए स्वप्निल बताती हैं कि पर्दे पर दिखने वाली चमक-दमक के पीछे कड़ी मेहनत छिपी होती है। उत्तराखंड की कड़क ठंड और बर्फीली वादियों में शूटिंग करना आसान नहीं था। पहले ही दिन उन्हें मशहूर कोरियोग्राफर विष्णु देवा के साथ काम करने का मौका मिला, जिन्होंने प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण जैसे सितारों को ट्रेन किया है। स्वप्निल बताती हैं कि एक फिल्म यूनिट में करीब 200 लोग होते हैं और सभी एक परफेक्ट शॉट का इंतजार करते हैं। कई बार वह नर्वस होकर रो भी पड़ती थीं, लेकिन डायरेक्टर सत्यजीत ने उन्हें संभाला और पारिवारिक माहौल दिया। नए कलाकारों के लिए संदेश स्वप्निल सिंह का मानना है कि आज के दौर में Instagram, YouTube और रील्स के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाना आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के युवाओं को इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए अपने हुनर को दुनिया तक पहुंचाना चाहिए। 1 मई को रिलीज होगी फिल्म स्वप्निल सिंह और मकरंद देशपांडे जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी फिल्म ‘जान अभी बाकी है’ 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। निष्कर्ष: गाजीपुर की स्वप्निल सिंह आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो छोटे शहरों से बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं।
गाजीपुर की बेटी स्वप्निल सिंह का बड़ा कमाल: ‘जान अभी बाकी है’ से बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री गाजीपुर: अक्सर कहा जाता है कि पढ़-लिखकर अफसर बनना ही सफलता की पहचान है, लेकिन कुछ लोग अपने सपनों की राह खुद चुनते हैं। स्वप्निल सिंह ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया। गाजीपुर की गलियों से निकलकर मायानगरी तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, जुनून और जिद की मिसाल बन गया है। बचपन से ही तय था सपना स्वप्निल सिंह बताती हैं कि उन्हें कक्षा 1-2 से ही साफ था कि उन्हें एक्टिंग और डांस के क्षेत्र में जाना है। घंटों डांस करना उनका जुनून था। जब उन्होंने अपनी मां से Dance India Dance में जाने की इच्छा जताई, तो शुरुआत में परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि आम भारतीय परिवारों की तरह पढ़ाई को ही करियर का मुख्य विकल्प माना जाता था। हालांकि, स्वप्निल पढ़ाई में भी तेज थीं और स्कूल की डिबेट प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। संघर्षों के बीच मां बनीं ताकत गाजीपुर के शाह फैज पब्लिक स्कूल और सेंट जॉन्स स्कूल से शुरुआती पढ़ाई के बाद स्वप्निल आगे की शिक्षा के लिए कोटा गईं। साल 2014 उनके जीवन का सबसे कठिन दौर रहा, जब पिता का निधन हो गया। दो बहनों में बड़ी होने के कारण जिम्मेदारियां बढ़ीं, लेकिन उनकी मां ने हर कदम पर उनका साथ दिया। पूर्वांचल जैसे क्षेत्र में लड़कियों का एक्टिंग में जाना आज भी आसान नहीं माना जाता, लेकिन उनके कजिन (फोटोग्राफर) ने उनका हौसला बढ़ाया। बर्फीली वादियों में शूटिंग का इम्तिहान फिल्म जान अभी बाकी है की शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए स्वप्निल बताती हैं कि पर्दे पर दिखने वाली चमक-दमक के पीछे कड़ी मेहनत छिपी होती है। उत्तराखंड की कड़क ठंड और बर्फीली वादियों में शूटिंग करना आसान नहीं था। पहले ही दिन उन्हें मशहूर कोरियोग्राफर विष्णु देवा के साथ काम करने का मौका मिला, जिन्होंने प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण जैसे सितारों को ट्रेन किया है। स्वप्निल बताती हैं कि एक फिल्म यूनिट में करीब 200 लोग होते हैं और सभी एक परफेक्ट शॉट का इंतजार करते हैं। कई बार वह नर्वस होकर रो भी पड़ती थीं, लेकिन डायरेक्टर सत्यजीत ने उन्हें संभाला और पारिवारिक माहौल दिया। नए कलाकारों के लिए संदेश स्वप्निल सिंह का मानना है कि आज के दौर में Instagram, YouTube और रील्स के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाना आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के युवाओं को इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए अपने हुनर को दुनिया तक पहुंचाना चाहिए। 1 मई को रिलीज होगी फिल्म स्वप्निल सिंह और मकरंद देशपांडे जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी फिल्म ‘जान अभी बाकी है’ 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। निष्कर्ष: गाजीपुर की स्वप्निल सिंह आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो छोटे शहरों से बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं।
- Post by Jitendra Maurya1
- गाजीपुर के मोहम्मदाबाद क्षेत्र में रविवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। भांवरकोल क्षेत्र के गोडउर से वाराणसी जा रही रोडवेज बस (नंबर UP 65 ET 9882) को हाटा गांव स्थित अम्बा हॉस्पिटल के पास सरिता मेडिकल स्टोर के सामने एक तेज रफ्तार डंफर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस क्षतिग्रस्त हो गई, हालांकि बस में सवार सभी यात्री बाल-बाल बच गए। हादसे में बस चालक को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर मारने के बाद डंफर चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस फरार डंफर और उसके चालक की तलाश में जुटी हुई है।1
- गाजीपुर गंगा नदी में वीर अब्दुल हमीद सेतु से गिरा हुआ ट्रेलर ड्राइवर 24 वर्षीय राजन यादव का श व 30 घंटे बाद बड़ी मशक्कत करके बरामद किया गया1
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- तौकीर अंसारी को प्रदेश सचिव बनाए जाने पर नादौली बॉर्डर पर भव्य स्वागत। #ballia_up60 #Rasara #बलिया #समाजवादीपार्टी #मानसिंहसेंगर #जनजनकामान #अखिलेशयादव1
- Post by Public Media news1
- चंदौली के धानापुर क्षेत्र के पगही-विझवल कुसुम्ही गांव के सिवान में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल में अचानक भीषण आग लग गई। अज्ञात कारणों से लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस घटना में करीब 10 बीघा से अधिक गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई, जिससे कई किसानों को भारी नुकसान हुआ। पीड़ित किसानों में रामलाल यादव समेत कई लोग शामिल हैं, जिनकी मेहनत की पूरी फसल नष्ट हो गई। आग हरदेव पीजी कॉलेज के पीछे स्थित खेतों में लगी थी। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही आग बुझा ली गई। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।1
- आयोजित महान सम्राट अशोक की 2370 वीं जयंती समारोह 20261