चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी मंदिर का इतिहास (इन्द्रेश तोमर )मुरैना जिले की अंबाह तहसील में चम्बल नदी के बीहड़ों के बीच स्थित चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर क्षेत्र की प्राचीन आस्था और इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। प्राचीन समय में इस क्षेत्र को ऐसाह नाम से जाना जाता था, जिसे तोमर वंश की पुरानी राजधानी भी बताया जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर तोमर वंश की कुलदेवी माता भवेश्वरी को समर्पित है और इसकी स्थापना राजा अनंगपाल तोमर द्वारा कराई गई थी चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी मंदिर का इतिहास (इन्द्रेश तोमर )मुरैना जिले की अंबाह तहसील में चम्बल नदी के बीहड़ों के बीच स्थित चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर क्षेत्र की प्राचीन आस्था और इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। प्राचीन समय में इस क्षेत्र को ऐसाह नाम से जाना जाता था, जिसे तोमर वंश की पुरानी राजधानी भी बताया जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर तोमर वंश की कुलदेवी माता भवेश्वरी को समर्पित है और इसकी स्थापना राजा अनंगपाल तोमर द्वारा कराई गई थी। तोमर राजाओं के समय से ही यह स्थान राजपरिवार की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और आज भी अनेक श्रद्धालु यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध किंवदंती भी प्रचलित है। कहा जाता है कि तोमर राजाओं के पास एक अद्भुत पारसमणि थी, जिसके स्पर्श से लोहा भी सोने में बदल जाता था। लोककथाओं के अनुसार वह पारसमणि आज भी चम्बल नदी में इसी स्थान के आसपास कहीं स्थित है। बताया जाता है कि यहाँ चम्बल नदी का पानी एक स्थायी भंवर बनाकर गोमुख जैसे प्राकृतिक मार्गों से प्रवाहित होता है। इसी भंवर के भीतर पारसमणि होने की मान्यता प्रचलित है। किंवदंतियों के अनुसार कभी-कभी इस भंवर में रस्सी से बांधकर डाली गई लोहे की वस्तुएँ वापस खींचने पर सोने के रंग की बनकर निकलती थीं। हालांकि यह बातें लोककथाओं और जनश्रुतियों का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हीं कहानियों ने इस स्थान की रहस्यमयता और प्रसिद्धि को और बढ़ा दिया है। चम्बल के बीहड़ों के बीच स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धा, इतिहास और लोकविश्वास का अनोखा संगम माना जाता है। यहाँ आने वाले भक्त माता भवेश्वरी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएँ मांगते हैं और इस प्राचीन धरोहर से जुड़ी कथाओं को सुनते हुए क्षेत्र की समृद्ध परंपरा को महसूस करते हैं। आज चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि अंबाह क्षेत्र की ऐतिहासिक परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी माना जाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान विश्वास, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बना हुआ है।
चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी मंदिर का इतिहास (इन्द्रेश तोमर )मुरैना जिले की अंबाह तहसील में चम्बल नदी के बीहड़ों के बीच स्थित चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर क्षेत्र की प्राचीन आस्था और इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। प्राचीन समय में इस क्षेत्र को ऐसाह नाम से जाना जाता था, जिसे तोमर वंश की पुरानी राजधानी भी बताया जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर तोमर वंश की कुलदेवी माता भवेश्वरी को समर्पित है और इसकी स्थापना राजा अनंगपाल तोमर द्वारा कराई गई थी चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी मंदिर का इतिहास (इन्द्रेश तोमर )मुरैना जिले की अंबाह तहसील में चम्बल नदी के बीहड़ों के बीच स्थित चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर क्षेत्र की प्राचीन आस्था और इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। प्राचीन समय में इस क्षेत्र को ऐसाह नाम से जाना जाता था, जिसे तोमर वंश की पुरानी राजधानी भी बताया जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर तोमर वंश की कुलदेवी माता भवेश्वरी को समर्पित है और इसकी स्थापना राजा अनंगपाल तोमर द्वारा कराई गई थी। तोमर राजाओं के समय से ही यह स्थान राजपरिवार की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और आज भी अनेक श्रद्धालु यहाँ माता के दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध किंवदंती भी प्रचलित है। कहा जाता है कि तोमर राजाओं के पास एक अद्भुत पारसमणि थी, जिसके स्पर्श से लोहा भी सोने में बदल जाता था। लोककथाओं के अनुसार वह पारसमणि आज भी चम्बल नदी में इसी स्थान के आसपास कहीं स्थित है। बताया जाता है कि यहाँ चम्बल नदी का पानी एक स्थायी भंवर बनाकर गोमुख जैसे प्राकृतिक मार्गों से प्रवाहित होता है। इसी भंवर के भीतर पारसमणि होने की मान्यता प्रचलित है। किंवदंतियों के अनुसार कभी-कभी इस भंवर में रस्सी से बांधकर डाली गई लोहे की वस्तुएँ वापस खींचने पर सोने के रंग की बनकर निकलती थीं। हालांकि यह बातें लोककथाओं और जनश्रुतियों का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हीं कहानियों ने इस स्थान की रहस्यमयता और प्रसिद्धि को और बढ़ा दिया है। चम्बल के बीहड़ों के बीच स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धा, इतिहास और लोकविश्वास का अनोखा संगम माना जाता है। यहाँ आने वाले भक्त माता भवेश्वरी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएँ मांगते हैं और इस प्राचीन धरोहर से जुड़ी कथाओं को सुनते हुए क्षेत्र की समृद्ध परंपरा को महसूस करते हैं। आज चिल्लासन देवी माता भवेश्वरी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि अंबाह क्षेत्र की ऐतिहासिक परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी माना जाता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान विश्वास, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बना हुआ है।
- Post by Soni Verma1
- दिन दहाड़े मरने का प्रयास सोशल मीडिया पर जमके हुआ वीडियो वायरल1
- Post by Devesh Chahar1
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी ( उपमुख्यमंत्री ) का पुराना बयान सुनिए। ये बयान (2023) आज फिर से वायरल है। Trand News India1
- सिकंदरा आगरा केके नगर शिवकुंज बाबा बाबा जनरल स्टोर के पास प्लीज इसे कृपया करके सही कारण काफी टाइम हो गया है इसे / 84332767325
- होली पर शराब की पूरी बोतल गटक गई पत्नी, पति को डंडे से पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट शराब के नशे में विवाद के दौरान पत्नी ने डंडे से सेवानिवृत्त रेलकर्मी पति पर वार कर दिया। इससे घायल पति की मौत हो गई। पुलिस ने पत्नी पर गैरइरादतन हत्या का केस दर्जकर हिरासत में लिया है। अकबरपुर के जौहरडीह मुहल्ले के हौसिला प्रसाद रेलवे में चतुर्थ श्रेणी पद पर अकबरपुर रेलवे स्टेशन पर कार्यरत थे। वह सेवानिवृत्त हो चुके थे। पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी संगीता से किया था। दोनों घर से अलग होकर मोहसिनपुर मंसूरपुर में झोपड़ी में रहते थे। पुलिस के मुताबिक होली के दिन दोनों शराब के नशे में थे।1
- लखनऊ : 7वीं के छात्र की गोली लगने से मौत हो गई। पिता ज़मीर ख़ान ने ऐसी बात कहीं के सामने खड़े पुलिस वालो का ज़मीर ही झिंझोड़ दिया। आरोपी उपमुख्यमंत्री का साला बताया जा रहा है Trand News India1
- आगरा में समाजसेवी अतुल तिवारी की ओर से इस वर्ष भी श्री राज राजेश्वरी मां कैला देवी के दर्शन के लिए निःशुल्क बस यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस यात्रा में शहर के सभी भक्त शामिल हो सकेंगे। यात्रा के लिए निःशुल्क रजिस्ट्रेशन 15 मार्च तक अनिवार्य रखा गया है। इच्छुक श्रद्धालुओं को आधार कार्ड के साथ फतेहाबाद रोड स्थित टीडीआई मॉल के पीछे होटल स्टार ऑफ ताज पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 18 मार्च को सभी रजिस्टर्ड भक्तों को लेकर बसें होटल स्टार ऑफ ताज से कैला देवी के लिए रवाना होंगी। प्रेस वार्ता में समाजसेवी अतुल तिवारी, दिलीप तिवारी, अधिवक्ता नितिन वर्मा और शंभू नाथ चौबे ने यात्रा की जानकारी दी।1
- Post by Dharmendra Kumar3