Shuru
Apke Nagar Ki App…
आवाज मध्यप्रदेश न्यूज़ 24 सागर की ओर से समस्त देश वासियों को गणतंत्रदिवस की बधाई आवाज मध्यप्रदेश न्यूज़ 24 सागर की ओर से समस्त देश वासियों को गणतंत्रदिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं
Sonu prajapati journalist Press
आवाज मध्यप्रदेश न्यूज़ 24 सागर की ओर से समस्त देश वासियों को गणतंत्रदिवस की बधाई आवाज मध्यप्रदेश न्यूज़ 24 सागर की ओर से समस्त देश वासियों को गणतंत्रदिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं
More news from Narsinghpur and nearby areas
- नरसिंहपुर - सरकारी भूमि पर दबंगों का कब्जा खाली करवाने के लिए महिला सरपंच ने कलेक्टर को दिया आवेदन1
- new video viral video Madhya Pradesh1
- इसलिए आज देश भर में बैंक हड़ताल पर हैं ये वीडियो सागर के बैंक की हड़ताल की है।1
- good evening 💐💐💐2
- Post by User32132
- सिंग्रामपुर /// ग्राम सिंग्रामपुर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा पुराण का आज अंतिम दिन अत्यंत भावपूर्ण एवं श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुआ। कथा के समापन अवसर पर कथा वाचक पंडित नितिन देव जी महाराज ने सुदामा चरित्र की मार्मिक कथा का विस्तार से वर्णन किया, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पंडित नितिन देव जी महाराज ने बताया कि सुदामा चरित्र सच्ची मित्रता, निष्काम भक्ति, विनम्रता और भगवान की करुणा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुदामा जी अत्यंत निर्धन थे, किंतु उनके हृदय में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपार प्रेम और श्रद्धा थी। निर्धनता के कारण वे वर्षों तक श्रीकृष्ण से मिलने नहीं गए, लेकिन पत्नी के आग्रह पर वे अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुँचे। भेंट स्वरूप उनके पास केवल थोड़े से चावल थे, जिन्हें वे संकोचवश छिपाकर ले गए। कथा के दौरान महाराज श्री ने भावपूर्ण प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जैसे ही श्रीकृष्ण ने सुदामा जी को देखा, वे सिंहासन से उतरकर उन्हें गले लगा लेते हैं, उनके चरण धोते हैं और अत्यंत प्रेमपूर्वक उनका सत्कार करते हैं। यह दृश्य दर्शाता है कि भगवान अपने भक्त की हैसियत या संपत्ति नहीं, बल्कि उसके भाव को देखते हैं। श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के लाए चावल प्रेमपूर्वक खाने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। पंडित नितिन देव जी महाराज ने कहा कि सुदामा ने भगवान से कभी धन या वैभव की कामना नहीं की। उनकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने बिना मांगे ही सुदामा का जीवन बदल दिया। जब सुदामा जी द्वारका से लौटे, तो उनकी कुटिया भव्य महल में परिवर्तित हो चुकी थी। महाराज श्री ने समझाया कि यह प्रसंग सिखाता है कि जो भक्त बिना स्वार्थ के ईश्वर का स्मरण करता है, उसकी सभी आवश्यकताओं का ध्यान भगवान स्वयं रखते हैं। कथा के समापन पर महाराज श्री ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि हमें सुदामा जैसे सरल, विनम्र और सच्चे भक्त बनने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में अहंकार, लोभ और स्वार्थ को त्यागकर यदि हम सच्चे मन से भगवान का स्मरण करें, तो जीवन स्वयं सुंदर और सार्थक हो जाता है। अंतिम दिन कथा के उपरांत पूर्णाहुति, आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही और ग्राम में भक्ति एवं श्रद्धा का वातावरण बना रहा। सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन भक्तों के लिए अविस्मरणीय अनुभूति बन गया। 🙏8
- नरसिंहपुर - मेला घूमने गए ग्रामीण के साथ हुई मारपीट कार्यवाही की मांग को लेकर कलेक्टर को दिया आवेदन1
- मानपुर गाव1
- गोटेगांव के झांसी घाट पर नर्मदा जयंती में उमड़ा आस्था का सैलाब कैलाश गुप्ता नई दुनिया मो 93294465061