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भंवर कुवा इंदौर में आदिवासी का जन सैलाब जन सैलाब से 2 किलोमीटर आदिवासी
Vishal Jadhav
भंवर कुवा इंदौर में आदिवासी का जन सैलाब जन सैलाब से 2 किलोमीटर आदिवासी
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- आदिवासी डांडिया मामा की प्रतिमा पर माल अर्पण किया एवं बड़ी रैली निकाली गई जिसमें हजारों की तादाद में आदिवासी अपने ढोल नगाड़े और हथियारों के साथ देश निकले डीजे की थाप पर डांस किया तरह-तरह की आदिवासी राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष में आज इंदौर में डांडिया मामा बिल की प्रतिमा पर हिमालय अर्पण किया और रंगारंग झांकियां निकाली गई जिसमें लाखों की तादाद में आदिवासी उपलब्ध से जो अपनी भेज दो ढोल तमाशा डीजे1
- गुरु पर श्रद्धा ,विश्वास, निष्ठा ,रखने वाले व आत्मसात करने वालो का भाग्य गुरु के हाथ में होता है -संत श्री गोपालराम विश्व जागृति मिशन का गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से संपन्न* गुरु पर श्रद्धा ,विश्वास, निष्ठा ,रखने वाले व आत्मसात करने वालो का भाग्य गुरु के हाथ में होता है -संत श्री गोपालराम इंदौर । *लोक विख्यात संत आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज द्वारा स्थापित विश्व जागृति मिशन इंदौर मंडल के तत्वाधान में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से संपन्न* *विश्व जागृति मिशन इंदौर मंडल के महामंत्री श्री कृष्ण मुरारी शर्मा के द्वारा बताया गया कि गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन रामद्वारा उषा नगर में ब्यावर राजस्थान से चातुर्मास हेतु पधारे संत श्री गोपाल राम जी महाराज तथा बाल संत श्री गोविंद राम जी महाराज के uआतिथ्य में मनाया गया है* *संत श्री गोपालराम जी महाराज ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सदगुरुदेव पर श्रद्धा विश्वास और निष्ठा रखने वाले तथा सदगुरु के बताए मार्ग को आत्मसात करने वाले भक्तों का भाग्य हमेशा गुरु के हाथ में होता है, इसके अतिरिक्त संत श्री ने यह भी कहा कि जिस प्रकार लकड़ी के अन्दर जलने का गुण होता है किंतु उसे जलाने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है, समझ लीजिए की गुरु ही वह अग्नि है जो आपके ज्ञान को प्रकाशित करता है इसलिए जीवन में गुरु का होना अत्यावश्यक है* *बाल संत श्री गोविंद राम जी महाराज के द्वारा गुरु के लिए बहुत ही कारण प्रिय भजन "आनंद ही आनंद बरस रहा गुरुदेव तुम्हारे चरणों में" से वहां बड़ी संख्या में उपस्थित गुरु भक्तों को मंत्र मुग्ध कर दिया, आपके द्वारा हमारे सनातनी संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए संस्कार आज की सबसे बड़ी आवश्यकता प्रतिपादित किया कार्यक्रम में राजेंद्र अग्रवाल (टाइगर टॉर्च) दिलीप बडोले, ओमप्रकाश सोलंकी, अनिल शर्मा, पीतांबर मंगलानी,गोविंद गंगराड़े, सत्यनारायण मारू, अजय बैंडवाल,अजय कानूनगो, नवीनचंद्र भुसारी, श्रीमती आशालता डाबर, स्वीटी शर्मा, शोभा जोशी, शोभा सोलंकी, कुसुम ओसवाल, मधुकान्ता आदि के द्वारा आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है* *1
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- नेमीनगर (जैन कालोनी) चतुर्मास समिति, इंदौर द्वारा की गई प्रेस वार्ता ( स्थान नेमीनगर जैन कॉलोनी इंदौर) इन्दौर आचार्य आदिसागर जी अंकलीकर परम्परा चतुर्थ पट्टाधिश चर्या चक्रवर्ती समन्वयश्राष्टा तिर्थोद्धारक *परम पूज्य आचार्य 108 श्री सुनील सागर जी महाराज। ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के दौर में मानव का उपलब्ध संसाधनों का गुलाम हो जाना बड़ा संकट के रूप में सामने आना चिंता का विषय है। पुराने हमारे संस्कार को अपनाया जाए तो पारिवारिक विवादों व वैवाहिक संबंधों में कटुता अपने आप समाप्त हो जाएगी। अभिभावकों को बच्चों को समय दें, संवाद बनाए रखें व संस्कृति व संस्कारों की शिक्षा दी दें तो बच्चों के बिगड़ने व नशा करने की प्रवृत्ति की समस्या का समाधान होगा। मोबाइल का बेतहाशा व अनुचित उपयोग ही संस्कृति व संस्कारों को बर्बाद कर रहे है। टूटते परिवार, रिश्तों के आदर को खत्म कर मानव को एकल व अंतमुर्खी बना रहे है। आज की शिक्षा प्रणाली किताबों का बोझ बन गई है। महात्मा गांधी, लालबहादुर शास्त्री, सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन के आदर्श बच्चों को पढ़ने को नहीं मिलते है। किताबें का बोझ सभ्य तो बना सकता है मगर शिष्ट नहीं बना सकता। अहिंसा, अनेकांत व अपरिग्रह को अपनाने की आवश्यकता है। यही मार्ग सही मार्ग है। आज भटके मानव को यही मार्ग सीधे रास्ते पर ला सकता है। गृहस्थ को अपने संसाधनों का ही उपयोग कर दिखावे से बचना चाहिए। आज ऐसी असमानता दिख रही है कि कोई भूखा है उसके पास रोटी खाने के लाले है और किसी के पास अधिक है। यह असमानता खत्म होना चाहिए। सभ्यता और संस्कृति से जुड़े रहे। एक दिन अपने हाथ से खाना पकायें, बिना बिजली के रहें, पैदल मंदिर जाएं , कुएं का पानी पिएं, प्राकृतिक संसाधनों का अधिक से अधिक उपयोग करें। आचार्य श्री ने कहा कि भगवान महावीर के संदेशों को जीवन में उतारे, सत्य, अहिंसा, शील, अपरिग्रह को जीवन में अंगीकार करे। प्राकृत भाषा को जीवन का अंग बनाए। देह ऐसी हो जाती है कि हाथ में कुछ नहीं बचता। धन छूट जाता है, जन छूट जाते हैं, तन भी छूट जाता है और अंततः संसार का सारा व्यवहार पीछे रह जाता है। धन, जन, तन सब छूटते, छूटे जग व्यवहार। कर्म साथ चलते सदा, धर्म सच्चा आधार।। धर्म ही सच्चा आधार है, धर्म ही सच्ची शरण है। लेकिन प्रश्न यह है कि कौन-सा धर्म? कैसा धर्म? दुनिया में धर्म के नाम पर बहुत कुछ दिखाई देता है, लेकिन जैन दर्शन हमें बताता है कि हमारा वास्तविक धर्म है— सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र—यही आत्मधर्म है। यही शरणभूत है। यही वह धर्म है जो आत्मा के साथ जाता है। हमारे तीर्थंकरों के नामों में भी “नाथ” शब्द जुड़ा हुआ है—शांतिनाथ, पार्श्वनाथ, अजितनाथ, मल्लिनाथ आदि। दक्षिण भारत में आज भी शांतिनाथ, पार्श्वनाथ, मल्लिनाथ जैसे नाम देखने को मिल जाते हैं। हमारे यहाँ भी पारसमल, पारसचंद्र जैसे नाम प्रचलित हैं। इसलिए जीवन रहते धर्म को पहचानिए, आत्मा को पहचानिए और सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान तथा सम्यक चारित्र के मार्ग पर चलने का पुरुषार्थ कीजिए। जय जिनेंद्र इंद्रकुमार सेठी। संदीप गंगवाल संयोजक। सहसंयोजक कैलाश लुहाड़िया गिरीश पाटोदी अध्यक्ष। मंत्री चतुर्मास समिति, नेमीनगर जैन कालोनी इंदौर1
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