लगे रहो मुन्ना भाई हास्य व्यंग्य: सावधान! कहीं आपका बच्चा भी 100% तो नहीं ला रहा..? लगे रहो मुन्ना भाई हास्य व्यंग्य: सावधान! कहीं आपका बच्चा भी 100% तो नहीं ला रहा..? जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट रैलियों में वादों के बजाय ये बच्चे आंकड़ों का गणित समझाने लगेंगे और जनता सिर खुजलाती रह जाएगी। दूसरी ओर, कॉर्पोरेट जगत में साक्षात्कार का आलम यह है कि प्रबंधक को 'गधा मजदूरी' करने वाला चाहिए : जॉली अंकल इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 21 अप्रैल 2026)। आज सुबह जैसे ही अखबार खोला चाय की चुस्की गले में ही अटक गई। खबर थी कि 26 होनहारों ने गाड़े झंडे और हासिल किए पूरे सौ प्रतिशत अंक। मोहल्ले के खन्ना जी का बेटा जो खुद 95.8 प्रतिशत लाकर खुश हो रहा था यह खबर पढ़कर बेहोश हो गया। लेकिन असली चिंता तो उन छब्बीस बच्चों की है। बेचारे अब उनका भविष्य अंधकार में है। समाज के कड़े नियमों के मुताबिक अब उन पर आवश्यकता से अधिक योग्यता होने का ऐसा ठप्पा लगा है कि आजीविका के सारे छोटे रास्ते बंद हो गए हैं। असल में शिक्षा का बाजारीकरण इतना बढ़ गया है कि अब उपाधियां किलो के भाव बिक रही हैं लेकिन किताबी ज्ञान बनाम वास्तविक जीवन के युद्ध में बच्चा कहीं खो गया है। उसे लगता है कि सौ प्रतिशत अंक उसे सुकून देंगे जबकि असल में वह मानसिक तनाव और जरूरत से ज्यादा सोचने की पहली सीढ़ी पहले से ही चढ़ चुका है। राजनीति और रिजेक्शन का गणित साफ बात है कि इतना पढ़-लिखकर अब ये बच्चे न तो मुख्यमंत्री बन पाएंगे और न ही प्रधानमंत्री। राजनीति का पहला नियम है कि डिग्री ऐसी हो जिसे ढूंढने के लिए सी.आई.डी लगानी पड़े। अब जिसने सौ में से सौ अंक पा लिए, उसकी बुद्धि इतनी सीधी हो जाएगी कि वह टेढ़ी राजनीति क्या खाक करेगा? रैलियों में वादों के बजाय ये बच्चे आंकड़ों का गणित समझाने लगेंगे और जनता सिर खुजलाती रह जाएगी। दूसरी ओर, कॉर्पोरेट जगत में साक्षात्कार का आलम यह है कि प्रबंधक को 'गधा मजदूरी' करने वाला चाहिए। सौ प्रतिशत वाला तुरंत तर्क दे देगा कि गधा मेहनत तो करता है पर तरक्की नहीं पाता। बस, इसी तर्क के कारण कंपनी उन्हें 'अत्यधिक योग्यता' का हवाला देकर बाहर का रास्ता दिखा देती है। उच्च शिक्षा ने उन्हें 'कागज़ का शेर' तो बना दिया, पर असल दुनिया में शिकार करना नहीं सिखाया। ऐसे में तो बस यही कहना ठीक रहेगा कि लगे रहो मुन्ना भाई, क्योंकि इस कागजी दौड़ का अंत कहीं नजर नहीं आता। व्यवस्था बनाम प्रतिभा का पलायन आज देश में योग्यता से ज्यादा 'जुगाड़' की कीमत है। इसी तंत्र की खामियों के कारण लाखों प्रतिभावान लोग देश छोड़ रहे हैं। वे विदेश में छोटे काम करके खुश हैं क्योंकि वहां मेहनत का सम्मान है। भारत में तो स्थिति यह है कि पैंतालीस किताबें लिखने के बाद भी लेख छपवाने के लिए 'सहयोग राशि' मांग ली जाती है। डिजिटल इंडिया के दौर में भी कंप्यूटर के जानकार को अपना जायज काम कराने के लिए बिचौलिये की जरूरत पड़ती है। शिक्षा और रोजगार के बीच की यह खाई युवाओं में निराशा और अवसाद को जन्म दे रही है। आर्थिक विसंगति और जीवन का संघर्ष आर्थिक असंतुलन का आलम देखिए, जो सौ प्रतिशत लाया है, वह 20-25 हजार की नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है, जबकि जिसने स्कूल की दहलीज कम ही लांघी, वह ठेकेदारी और रसूख के दम पर करोड़ों बटोर रहा है। माता-पिता को लगता है कि 'सौ प्रतिशत' वाला बेटा बुढ़ापे का सहारा बनेगा, पर बच्चा तो खुद आर्थिक तंगी और आत्मघाती ख्यालों से लड़ रहा है। हम मशीनों की तरह काम करने वाले रोबोट तो बना रहे हैं, पर खुशहाल इंसान बनाना भूल गए हैं। प्रसन्नता का मंत्र: मुस्कान ही असली उपाधि है : दोस्तों इस लेख को केवल नकारात्मकता से न लें। मेरा मकसद आपको डराना नहीं बल्कि यह समझाना है कि जीवन में संतोष और हर्ष ही असली प्रतिशत हैं। अंक आपकी आजीविका की शुरुआत कर सकते हैं लेकिन आपकी प्रतिभा और आपका शुक्रगुज़ार होने का भाव ही आपके जीवन की दिशा तय करेगा। याद रखें कि जीवन में उल्लास और आनंदमय रहना ही सबसे बड़ी योग्यता है। अपनी मेहनत जारी रखें और अपने प्रयासों में प्रसन्नता का रंग भरें। अगर व्यवस्था आज धीमी है तो कल यह ज़रूर बदलेगी। हमारे देश के नेताओं ने कहा है कि 2047 तक भारत केवल शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि सबसे खुशहाल देश भी बनेगा। वो बात अलग है कि तब तक हम में से कितने लोग जिंदा होंगे लेकिन आप अपने बच्चों को सौ प्रतिशत अंकों के लिए नहीं बल्कि सौ प्रतिशत हंसी खुशी और मुस्कान के लिए तैयार करें और मुस्कुराते हुए कहें कि लगे रहो मुन्ना भाई क्योंकि खुशियाँ बाँटने से ही खुशियाँ बढ़ती हैं। समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
लगे रहो मुन्ना भाई हास्य व्यंग्य: सावधान! कहीं आपका बच्चा भी 100% तो नहीं ला रहा..? लगे रहो मुन्ना भाई हास्य व्यंग्य: सावधान! कहीं आपका बच्चा भी 100% तो नहीं ला रहा..? जनक्रांति कार्यालय रिपोर्ट रैलियों में वादों के बजाय ये बच्चे आंकड़ों का गणित समझाने लगेंगे और जनता सिर खुजलाती रह जाएगी। दूसरी ओर, कॉर्पोरेट जगत में साक्षात्कार का आलम यह है कि प्रबंधक को 'गधा मजदूरी' करने वाला चाहिए : जॉली अंकल इंडिया जनक्रांति न्यूज़ डेस्क (जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन कार्यालय न्यूज़ डेस्क 21 अप्रैल 2026)। आज सुबह जैसे ही अखबार खोला चाय की चुस्की गले में ही अटक गई। खबर थी कि 26 होनहारों ने गाड़े झंडे और हासिल किए पूरे सौ प्रतिशत अंक। मोहल्ले के खन्ना जी का बेटा जो खुद 95.8 प्रतिशत लाकर खुश हो रहा था यह खबर पढ़कर बेहोश हो गया। लेकिन असली चिंता तो उन छब्बीस बच्चों की है। बेचारे अब उनका भविष्य अंधकार में है। समाज के कड़े नियमों के मुताबिक अब उन पर आवश्यकता से अधिक योग्यता होने का ऐसा ठप्पा लगा है कि आजीविका के सारे छोटे रास्ते बंद हो गए हैं। असल में शिक्षा का बाजारीकरण इतना बढ़ गया है कि अब उपाधियां किलो के भाव बिक रही हैं लेकिन किताबी ज्ञान बनाम वास्तविक जीवन के युद्ध में बच्चा कहीं खो गया है। उसे लगता है कि सौ प्रतिशत अंक उसे सुकून देंगे जबकि असल में वह मानसिक तनाव और जरूरत से ज्यादा सोचने की पहली सीढ़ी पहले से ही चढ़ चुका है। राजनीति और रिजेक्शन का गणित साफ बात है कि इतना पढ़-लिखकर अब ये बच्चे न तो मुख्यमंत्री बन पाएंगे और न ही प्रधानमंत्री। राजनीति का पहला नियम है कि डिग्री ऐसी हो जिसे ढूंढने के लिए सी.आई.डी लगानी पड़े। अब जिसने सौ में से सौ अंक पा लिए, उसकी बुद्धि इतनी सीधी हो जाएगी कि वह टेढ़ी राजनीति क्या खाक करेगा? रैलियों में वादों के बजाय ये बच्चे आंकड़ों का गणित समझाने लगेंगे और जनता सिर खुजलाती रह जाएगी। दूसरी ओर, कॉर्पोरेट जगत में साक्षात्कार का आलम यह है कि प्रबंधक को 'गधा मजदूरी' करने वाला चाहिए। सौ प्रतिशत वाला तुरंत तर्क दे देगा कि गधा मेहनत तो करता है पर तरक्की नहीं पाता। बस, इसी तर्क के कारण कंपनी उन्हें 'अत्यधिक योग्यता' का हवाला देकर बाहर का रास्ता दिखा देती है। उच्च शिक्षा ने उन्हें 'कागज़ का शेर' तो बना दिया, पर असल दुनिया में शिकार करना नहीं सिखाया। ऐसे में तो बस यही कहना ठीक रहेगा कि लगे रहो मुन्ना भाई, क्योंकि इस कागजी दौड़ का अंत कहीं नजर नहीं आता। व्यवस्था बनाम प्रतिभा का पलायन आज देश में योग्यता से ज्यादा 'जुगाड़' की कीमत है। इसी तंत्र की खामियों के कारण लाखों प्रतिभावान लोग देश छोड़ रहे हैं। वे विदेश में छोटे काम करके खुश हैं क्योंकि वहां मेहनत का सम्मान है। भारत में तो स्थिति यह है कि पैंतालीस किताबें लिखने के बाद भी लेख छपवाने के लिए 'सहयोग राशि' मांग ली जाती है। डिजिटल इंडिया के दौर में भी कंप्यूटर के जानकार को अपना जायज काम कराने के लिए बिचौलिये की जरूरत पड़ती है। शिक्षा और रोजगार के बीच की यह खाई युवाओं में निराशा और अवसाद को जन्म दे रही है। आर्थिक विसंगति और जीवन का संघर्ष आर्थिक असंतुलन का आलम देखिए, जो सौ प्रतिशत लाया है, वह 20-25 हजार की नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है, जबकि जिसने स्कूल की दहलीज कम ही लांघी, वह ठेकेदारी और रसूख के दम पर करोड़ों बटोर रहा है। माता-पिता को लगता है कि 'सौ प्रतिशत' वाला बेटा बुढ़ापे का सहारा बनेगा, पर बच्चा तो खुद आर्थिक तंगी और आत्मघाती ख्यालों से लड़ रहा है। हम मशीनों की तरह काम करने वाले रोबोट तो बना रहे हैं, पर खुशहाल इंसान बनाना भूल गए हैं। प्रसन्नता का मंत्र: मुस्कान ही असली उपाधि है : दोस्तों इस लेख को केवल नकारात्मकता से न लें। मेरा मकसद आपको डराना नहीं बल्कि यह समझाना है कि जीवन में संतोष और हर्ष ही असली प्रतिशत हैं। अंक आपकी आजीविका की शुरुआत कर सकते हैं लेकिन आपकी प्रतिभा और आपका शुक्रगुज़ार होने का भाव ही आपके जीवन की दिशा तय करेगा। याद रखें कि जीवन में उल्लास और आनंदमय रहना ही सबसे बड़ी योग्यता है। अपनी मेहनत जारी रखें और अपने प्रयासों में प्रसन्नता का रंग भरें। अगर व्यवस्था आज धीमी है तो कल यह ज़रूर बदलेगी। हमारे देश के नेताओं ने कहा है कि 2047 तक भारत केवल शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि सबसे खुशहाल देश भी बनेगा। वो बात अलग है कि तब तक हम में से कितने लोग जिंदा होंगे लेकिन आप अपने बच्चों को सौ प्रतिशत अंकों के लिए नहीं बल्कि सौ प्रतिशत हंसी खुशी और मुस्कान के लिए तैयार करें और मुस्कुराते हुए कहें कि लगे रहो मुन्ना भाई क्योंकि खुशियाँ बाँटने से ही खुशियाँ बढ़ती हैं। समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशक /सम्पादक राजेश कुमार वर्मा द्वारा प्रकाशित व प्रसारित।
- *पेंशनर्स ने प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन* समस्तीपुर: ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट पेंशनर्स फेडरेशन (AISGPF) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें राज्य सरकार के पेंशनर्स की लंबित मांगों को उठाया गया है। फेडरेशन ने 22-23 फरवरी 2026 को कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित अपने द्वितीय अखिल भारतीय सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। ज्ञापन में पेंशनर्स की विभिन्न मांगों को शामिल किया गया है, जिनमें उनके अधिकारों और कल्याण की सुरक्षा और संवर्धन शामिल हैं। फेडरेशन ने प्रधानमंत्री से इन मांगों पर विचार करने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया है।1
- Aajtak isme pani aaya hi nhi jab se laga hain1
- Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur1
- दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष चयन प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है। ऑल इंडिया पासवान एकता मंच के राष्ट्रीय महासचिव सह दलित चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र पासवान उर्फ गुरुजी ने संस्कृत विश्वविद्यालय के साहित्य विभाग में वरीयता के बावजूद डॉ. संतोष पासवान को विभागाध्यक्ष नहीं बनाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुजी ने कहा कि जब विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में विभागाध्यक्ष की नियुक्ति हो चुकी है, तो साहित्य विभाग में नियुक्ति को टालना संदेह पैदा करता है। उन्होंने इसे कथित तौर पर जातीय भेदभाव से जोड़ते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। इस मुद्दे को लेकर गुरुजी ने कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय, राज्यपाल सह कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री समेत उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में 22 अप्रैल को प्रस्तावित सीनेट बैठक से पहले डॉ. संतोष पासवान की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो देशभर की दलित संस्थाएं उग्र आंदोलन और अनशन के लिए बाध्य होंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी प्रकार का जातीय भेदभाव संविधान के मूल्यों के खिलाफ है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। गुरुजी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्पक्ष और त्वरित निर्णय लेने की अपील की है, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में समानता और सामाजिक न्याय की भावना बनी रहे। दिनदहाड़े फायरिंग से दहला कल्याणपुर, एक युवक की मौत, दूसरा जिंदगी-मौत से जूझ रहा। समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में अपराधियों ने दिनदहाड़े तांडव मचाते हुए बाइक सवार दो युवकों को गोली मार दी। इस सनसनीखेज वारदात में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। मिली जानकारी के अनुसार, गोलीबारी की यह घटना तारा चौक से सोमनाहा जाने वाली सड़क पर माधोपुर गांव के समीप हुई। बताया जाता है कि दोनों युवक बाइक से कहीं जा रहे थे, तभी घात लगाए अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग जब तक मौके पर पहुंचे, तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। घटना में घायल युवक की पहचान कल्याणपुर प्रखंड के जितवारिया गांव निवासी रजीव कुमार के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों की मदद से उसे तुरंत कल्याणपुर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं, मृत युवक की पहचान खबर संग्रह किए जाने तक नहीं हो सकी थी । सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल से एक हथियार तथा एक बाइक बरामद किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी गई है। फिलहाल, गोलीबारी के पीछे के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।1
- अक्षय तृतीयाक शुभ अवसर पर आई माननीय गार्जियन आदरणीय श्री उदय शंकर चौधरी भाईजी के नेतृत्व में आयोजित भगवान श्री परशुराम जीके पूजनोत्सव लहेरियासराय बलभद्रपुर ब्रहम स्थानक प्राँगण में सभ गोटेक उपस्थिति में पूरा धूम धाम सँ मनायल गेल। जय परशुराम।❤️🙏🏻1
- भगवानपुर थाना अंतर्गत मियाँ बैरो पंचायत के चौर के पोखर में महिला का शव मिला.1
- Post by Vaanishree News1
- Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur1