बिहार के कटिहार जिले में सरकारी स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्कूली बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मिड-डे मील किया और भोजन की गुणवत्ता का स्वयं जायजा लिया। डीएम का यह कदम केवल मिड-डे मील की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बच्चों का उत्साह भी बढ़ा और स्कूल प्रशासन को यह संदेश मिला कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर जिले के जिलाधिकारी महीने में कम से कम एक बार इसी तरह बिना सूचना के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करें, बच्चों के साथ बैठकर भोजन करें और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति देखें, तो सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था में काफी सुधार आ सकता है। ऐसी पहल न केवल स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का काम करती है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।
बिहार के कटिहार जिले में सरकारी स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्कूली बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मिड-डे मील किया और भोजन की गुणवत्ता का स्वयं जायजा लिया। डीएम का यह कदम केवल मिड-डे मील की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बच्चों का उत्साह भी बढ़ा और स्कूल प्रशासन को यह संदेश मिला कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर जिले के जिलाधिकारी महीने में कम से कम एक बार इसी तरह बिना सूचना के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करें, बच्चों के साथ बैठकर भोजन करें और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति देखें, तो सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था में काफी सुधार आ सकता है। ऐसी पहल न केवल स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का काम करती है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।
- लखनऊ के सदर में स्थित सुविधाओं से लैस मेदांता हॉस्पिटल में अचानक सीलिंग गिरने से हड़कंप मच गया है। अस्पताल में रिसेप्शन के पास ऊपरी हिस्से के साइड वाली सीलिंग नीचे गिर गई, जिससे वहां मौजूद मरीजों और तीमारदारों में भारी खौफ का माहौल है। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सुविधाओं से लैस मेदांता हॉस्पिटल की इस तरह सीलिंग गिरने से मरीज और उनके तीमारदार बेहद दहशत में हैं।1
- लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने पर एक कैंसर पीड़ित दलित महिला के समर्थन में सैकड़ों महिलाओं ने घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह पूरा मामला जमीन कब्जा करने से जुड़ा हुआ है। इस मामले में वरिष्ठ सपा नेता एवं पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के समर्थकों पर आरोप लगे हैं। पुलिस द्वारा मामले में कोई कार्रवाई न किए जाने से नाराज होकर ही महिलाओं ने एकजुट होकर थाने का घेराव किया।3
- धार्मिक परंपराओं में सरकार के हस्तक्षेप को लेकर जगन्नाथ पुरी के शंकराचार्य नाराज हो गए हैं। वे धार्मिक परंपराओं में सरकारी दखल से काफी खफा हैं।1
- लखनऊ के याहियागंज वार्ड में याहियागंज चौकी के पास गंदगी का भारी अंबार लगा हुआ है। चौकी से महज कुछ ही कदम की दूरी पर स्थित सूरज धागा स्टोर ने लंबे समय से यह गंदगी फैला रखी है और यहाँ काफी समय से कोई सफाई भी नहीं कराई गई है। इस भारी गंदगी और बदबू के बीच से ही स्थानीय लोगों को आवाजाही करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे इलाके के लोगों का जीना दूभर हो गया है। सड़क पर फैली इस गंदगी की वजह से क्षेत्र में स्वास्थ्य का गंभीर खतरा पैदा हो गया है और संक्रमण फैलने की आशंका से बच्चों के अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूरज धागे वाला इस गंदगी की साफ-सफाई नहीं करवाता है, जिसके कारण जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।1
- लखनऊ के सैरपुर थाना क्षेत्र के उर्दू फारसी आईआईएम रोड पर एक बेहद अमानवीय मामला सामने आया है। यहां अपनी निजी जमीन पर 22 सालों से चौकीदारी कर रही एक दलित महिला सुमन रावत के घर पर दलालों ने जबरन बुल्डोजर चलवा दिया। हद तो तब हो गई जब अपनी चौकीदारी का हक और पैसा मांगने पर पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के बजाय पुलिस ने ही उसे जेल भेजने की धमकी दे डाली। दरअसल, कानपुर के रहने वाले जावेद अहमद ने 22 साल पहले इस पीड़ित महिला को दो बिस्वा जमीन और 5 हजार रुपये महीना देने का वादा किया था। लेकिन अपना वादा पूरा करने के बजाय जावेद अहमद ने मुनेश्वर यादव के साथ मिलकर महिला के आशियाने पर जबरन बुल्डोजर चलवाकर उसे जमींदोज कर दिया। इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी बेहद संदिग्ध नजर आ रही है। सामने आई जानकारी के अनुसार, दलालों ने पीड़ित महिला को इस जमीन से जबरन हटाने के लिए 15 लाख रुपये का ठेका लिया था। इसके बाद महिला के नाम पर 15 लाख रुपये का बंदरबांट कर लिया गया, जबकि पीड़ित महिला को महज 70 हजार रुपये थमाकर एक सादे कागज पर उसका अंगूठा लगवा लिया गया। दबंगों ने महिला के घर का सारा सामान जमींदोज कर दिया और घर में रखे कीमती जेवरात व अन्य सामान भी चोरी कर लिए। इस तबाही के बाद पीड़ित महिला अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूरे परिवार के साथ तपती गर्मी और बरसात में फुटपाथ पर सोने को मजबूर है। पीड़ित दलित महिला मार्च 2026 से लगातार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है।1