मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी के भीतर उन नेताओं को किनारे लगाने का दौर चल रहा है जो आने वाले समय में उनके आगे रोड़ा बन सकते हैं। इसी कड़ी में दतिया उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे काबिल नेता का टिकट काट दिया गया है। इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे दिग्गजों को भी दरकिनार किया जा चुका है, जबकि लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को केंद्र की राजनीति में भेज दिया गया है। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के इस फैसले ने राज्य भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है। दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से स्थानीय स्तर पर भारी विरोध, प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई है। कार्यकर्ताओं के इस गुस्से ने साफ कर दिया है कि यह मामला सिर्फ एक टिकट का नहीं, बल्कि संगठन से उनके भावनात्मक जुड़ाव का भी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा नए दौर के नेतृत्व को तैयार करने और नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, कुछ कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी के प्रभावशाली वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को जानबूझकर सीमित किया जा रहा है। हालांकि, इन अटकलों को लेकर भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कद्दावर नेताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे कद्दावर नेता को टिकट न मिलने से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आने वाले समय में यह देखना काफी अहम होगा कि भाजपा इस असंतोष को कैसे संभालती है और अपने कार्यकर्ताओं के साथ संवाद को किस तरह मजबूत करती है। इस बीच, हाल के इन बड़े फैसलों ने प्रदेश की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां आगे का भविष्य पूरी तरह से राम भरोसे दिखाई दे रहा है।
मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी के भीतर उन नेताओं को किनारे लगाने का दौर चल रहा है जो आने वाले समय में उनके आगे रोड़ा बन सकते हैं। इसी कड़ी में दतिया उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे काबिल नेता का टिकट काट दिया गया है। इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे दिग्गजों को भी दरकिनार किया जा चुका है, जबकि लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान को केंद्र की राजनीति में भेज दिया गया है। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के इस फैसले ने राज्य भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर एक नई और गंभीर
बहस छेड़ दी है। दतिया में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से स्थानीय स्तर पर भारी विरोध, प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई है। कार्यकर्ताओं के इस गुस्से ने साफ कर दिया है कि यह मामला सिर्फ एक टिकट का नहीं, बल्कि संगठन से उनके भावनात्मक जुड़ाव का भी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा नए दौर के नेतृत्व को तैयार करने और नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं, कुछ कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी के प्रभावशाली वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को जानबूझकर सीमित किया जा रहा है। हालांकि, इन
अटकलों को लेकर भाजपा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कद्दावर नेताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे कद्दावर नेता को टिकट न मिलने से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आने वाले समय में यह देखना काफी अहम होगा कि भाजपा इस असंतोष को कैसे संभालती है और अपने कार्यकर्ताओं के साथ संवाद को किस तरह मजबूत करती है। इस बीच, हाल के इन बड़े फैसलों ने प्रदेश की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां आगे का भविष्य पूरी तरह से राम भरोसे दिखाई दे रहा है।
- सतना के अमरपाटन में एबीवीपी (AbVP) के प्रांत सह संगठन मंत्री श्री आशीष शर्मा जी ने जगत जननी बड़ी गुरु मां शारदा देवी के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।1
- सतना के मैहर में माँ जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी का आज दिनांक 13/07/2026, दिन सोमवार को प्रातः कालीन अद्भुत श्रृंगार किया गया है। सोमवार की सुबह माता रानी के इस अत्यंत मनमोहक और अलौकिक रूप के दिव्य दर्शन कराए गए हैं। माता के इस भव्य श्रृंगार को देखकर लोग श्रद्धापूर्वक 'जय हो माई की' का जयघोष कर रहे हैं।2
- सतना में उचेहरा थाना और परसमनिया चौकी के समीप स्थित गुढ़ा गांव में रविवार दोपहर जमीनी विवाद को लेकर साहू समाज के दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हो गई। इस विवाद के दौरान एक पक्ष की महिलाओं के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगा है। इस घटना में कमलेश साहू, प्रदीप साहू, छोटू साहू, कलावती साहू एवं चंद्रवती साहू घायल हुए हैं। इन सभी घायलों ने परसमनिया चौकी और उचेहरा थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण कराया है। फरियादियों ने राजेश साहू, रमेश, उमेश, महेश, कपिल, अखिल, शिवम, पुष्पेंद्र, राजू एवं एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साथ ही घटना से जुड़े एक वायरल वीडियो की भी जांच कर रही है।1
- सतना जिले के उचेहरा थाना व परसमनिया चौकी के समीप स्थित गुढ़ा गांव में रविवार दोपहर को जमीनी विवाद को लेकर साहू समाज के दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हो गई। इस विवाद के दौरान एक पक्ष की महिलाओं के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है। घटना में घायल कमलेश साहू, प्रदीप साहू, छोटू साहू, कलावती साहू एवं चंद्रवती साहू ने परसमनिया चौकी और उचेहरा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने सभी घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया है। फरियादियों ने राजेश साहू, रमेश, उमेश, महेश, कपिल, अखिल, शिवम, पुष्पेंद्र, राजू एवं एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, साथ ही मामले में वायरल एक वीडियो की भी जांच की जा रही है।1
- सतना के कनियारी गांव में ग्रामीणों के कड़े विरोध के बावजूद दबंगई के बल पर जबरन शराब की दुकान खोले जाने से भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि कथित तौर पर 'भाटिया' द्वारा बाहुबल और बाहरी गुंडों का सहारा लेकर नियमों को ताक पर रखकर यह दुकान खोली गई है, जिससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यह दुकान पूरी तरह से रिहायशी इलाके में खोली गई है, जिसके पास घनी आबादी और लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े स्थल स्थित हैं। आबकारी नियमों के अनुसार इस घनी बस्ती के बीच शराब दुकान का संचालन पूरी तरह अवैध है, लेकिन प्रशासनिक मिलीभगत या अनदेखी के चलते इसे जबरन चालू कर दिया गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जब उन्होंने इसका विरोध किया तो भाटिया के समर्थकों और बाहर से बुलाए गए कथित गुंडों ने ग्रामीणों को चुप रहने की धमकी दी और जबरन शटर खोलकर शराब बेचना शुरू कर दिया। इस घटना को लेकर गांव की महिलाओं में सबसे ज्यादा गुस्सा देखा जा रहा है, जिनका मानना है कि रिहायशी इलाके में शराबियों के जमावड़े से उनके मान-सम्मान और सुरक्षा को खतरा पैदा होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि तुरंत संज्ञान लेकर दुकान को यहाँ से नहीं हटाया गया, तो वे उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे। इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि जबरन खुली इस दुकान को तुरंत बंद कराया जाए, विरोध करने वालों को धमकाने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई हो और आबकारी विभाग यह स्पष्ट करे कि रिहायशी इलाके में इस दुकान के संचालन की अनुमति आखिर कैसे दी गई।1
- समान थाना क्षेत्र के होटल पंगत के कमरा नंबर 108 में एक विवाहित व्यक्ति को दूसरी लड़की के साथ आपत्तिजनक हालत में रंगरेलियां मनाते हुए उसकी पत्नी ने रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद होटल से लेकर सड़क तक जमकर हाई वोल्टेज ड्रामा चला। पत्नी ने होटल के कमरे में ही अपने पति की जमकर पिटाई कर दी, जिसे देखकर वहां लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। इसके बाद गुस्साए लोगों के सामने ही महिला अपने पति को घसीटते हुए थाने ले गई। महिला ने बताया कि उसका और आकाश सिंह चौहान का प्रेम विवाह 3 जुलाई 2025 को हुआ था। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद पति उसे छोड़कर अचानक गायब हो गया था, जिसके बाद वह लगातार उसकी तलाश कर रही थी। इसी दौरान उसे पता चला कि उसका पति किसी दूसरी लड़की के साथ होटल में रासलीला रचा रहा है। जब वह होटल पहुंची तो पति के बिस्तर पर दूसरी लड़की को देखकर पति के होश उड़ गए। हालांकि, जब पुलिस ने थाने में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत की, तो कहानी में दूसरा मोड़ आया। पति ने पुलिस के सामने दावा किया कि वह अपनी जान का खतरा समझकर पत्नी से दूर भागा था, क्योंकि उसे डर है कि उसकी पत्नी उसे मार डालेगी।1