यह प्रश्न उठाया गया है कि बिहार में ऐसी स्थिति क्यों है जहाँ मसखरों को नायक बनाया गया, पतियों के स्थान पर पत्नियों को सत्ता का वारिस स्वीकार किया गया, विरासत की राजनीति के कारण अस्वस्थ स्वास्थ्य मंत्री तक को स्वीकार कर लिया गया, और सामूहिक हत्याकांड के आरोपों से घिरे व्यक्तियों को भी सम्राट के रूप में स्वीकार कर लिया गया। इसी बिहार में, जब कोई युवा सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं जैसे मुद्दों पर बात करता है, तो कुछ कलमकारों की लेखनी में अचानक नैतिकता का ज्वार उमड़ पड़ता है। आश्चर्य व्यक्त किया गया है कि जिन लोगों को सामूहिक हत्याकांड के आरोपियों का नेतृत्व स्वीकार करने में कभी कोई संकोच नहीं हुआ, वे आज भरत तिवारी के बलिदान और उसके पीछे खड़े जनभावों से असहज दिखाई देते हैं। लेखक के अनुसार, लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णायक होती है, और यदि जनता किसी बलिदानी की चिता में अपना दर्द, अपनी उपेक्षा और अपने संघर्ष का प्रतिबिंब देख रही है, तो उसका कद कुछ अखबार के स्तंभकारों या किसी कलम की स्याही से नहीं, बल्कि जनसमर्थन से तय होगा। यह स्पष्ट किया गया है कि भरत तिवारी का महिमामंडन नहीं हो रहा है, बल्कि उन प्रश्नों को स्वर दिया जा रहा है जिन्हें वर्षों से अनसुना किया गया है। यदि जनहित की बात करना, सत्ता से सवाल पूछना और जनता के साथ खड़ा होना अपराध है, तो ऐसा ही अपराध लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी किया था। कलम का वास्तविक धर्म बलिदान को छोटा-बड़ा करना नहीं, बल्कि सत्ता को आईना दिखाना है। यदि कुछ कलमकार सत्ता से प्रश्न पूछने के बजाय प्रश्न पूछने वालों को ही कठघरे में खड़ा करने लगें, तो वे अपना मूल दायित्व ही भूल जाते हैं। अंत में, यह तीखा सवाल दोहराया गया है कि जब सामूहिक हत्याकांड के आरोपी स्वीकार्य हैं, तो सवाल उठाने वाला बलिदानी अस्वीकार्य क्यों है?
यह प्रश्न उठाया गया है कि बिहार में ऐसी स्थिति क्यों है जहाँ मसखरों को नायक बनाया गया, पतियों के स्थान पर पत्नियों को सत्ता का वारिस स्वीकार किया गया, विरासत की राजनीति के कारण अस्वस्थ स्वास्थ्य मंत्री तक को स्वीकार कर लिया गया, और सामूहिक हत्याकांड के आरोपों से घिरे व्यक्तियों को भी सम्राट के रूप में स्वीकार कर लिया गया। इसी बिहार में, जब कोई युवा सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं जैसे मुद्दों पर बात करता है, तो कुछ कलमकारों की लेखनी में अचानक नैतिकता का ज्वार उमड़ पड़ता है। आश्चर्य व्यक्त किया गया है कि जिन लोगों को सामूहिक हत्याकांड के आरोपियों का नेतृत्व स्वीकार करने में कभी कोई संकोच नहीं हुआ, वे आज भरत तिवारी के बलिदान और उसके पीछे खड़े जनभावों से असहज दिखाई देते हैं। लेखक के अनुसार, लोकतंत्र में जनता ही अंतिम निर्णायक होती है, और यदि जनता किसी बलिदानी की चिता में अपना दर्द, अपनी उपेक्षा और अपने संघर्ष का प्रतिबिंब देख रही है, तो उसका कद कुछ अखबार के स्तंभकारों या किसी कलम की स्याही से नहीं, बल्कि जनसमर्थन से तय होगा। यह स्पष्ट किया गया है कि भरत तिवारी का महिमामंडन नहीं हो रहा है, बल्कि उन प्रश्नों को स्वर दिया जा रहा है जिन्हें वर्षों से अनसुना किया गया है। यदि जनहित की बात करना, सत्ता से सवाल पूछना और जनता के साथ खड़ा होना अपराध है, तो ऐसा ही अपराध लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भी किया था। कलम का वास्तविक धर्म बलिदान को छोटा-बड़ा करना नहीं, बल्कि सत्ता को आईना दिखाना है। यदि कुछ कलमकार सत्ता से प्रश्न पूछने के बजाय प्रश्न पूछने वालों को ही कठघरे में खड़ा करने लगें, तो वे अपना मूल दायित्व ही भूल जाते हैं। अंत में, यह तीखा सवाल दोहराया गया है कि जब सामूहिक हत्याकांड के आरोपी स्वीकार्य हैं, तो सवाल उठाने वाला बलिदानी अस्वीकार्य क्यों है?
- रायसेन जिले से राज्य स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने विश्व योग दिवस के अवसर पर वर्ल्ड हेरिटेज सांची में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की।1
- रायसेन जिले में बारिश के मौसम के बीच सांची मार्ग की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मानसूनी बारिश से पहले सड़क की मरम्मत को आवश्यक नहीं समझा, लेकिन अब भारी मानसूनी वर्षा के बीच ही आनन-फानन में डामरीकरण और पैचवर्क का काम करवाया जा रहा है। बारिश के पानी के बीच हो रहे इस निर्माण कार्य से सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब यह काम धूप में आसानी से किया जा सकता था, तब अधिकारी निष्क्रिय रहे। अब बारिश के दौरान केवल खानापूर्ति की जा रही है, जो कुछ ही दिनों में फिर से खराब हो जाएगी। जनता ने इसे सरकारी बजट का सीधा दुरुपयोग बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।1
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने योग को हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग की अवधारणा केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तन, मन और आत्मा के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने शरीर को स्वस्थ, मन को शांत तथा जीवन को सुखी, संतुलित और आनंदमय बना सकता है।1
- विदिशा के गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र पर हुई री-नीट परीक्षा में तीन छात्राएं शामिल नहीं हो सकीं। तकनीकी दिक्कतों और दस्तावेजों में गड़बड़ी के कारण उन्हें परीक्षा केंद्र के बाहर ही रोक दिया गया, जिसके बाद परिजनों ने कॉलेज गेट पर हंगामा शुरू कर दिया। दरअसल, दो छात्राओं का बायोमेट्रिक थंब इंप्रेशन नहीं लग पा रहा था, जबकि एक तीसरी छात्रा पुराना प्रवेश पत्र लेकर परीक्षा देने पहुंची थी। इस स्थिति से उत्पन्न तनाव के बीच नोडल अधिकारी को मामले की जानकारी दी गई, जिसके बाद उन्होंने तत्काल मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया। नोडल अधिकारी के दखल के बाद बायोमेट्रिक समस्या से जूझ रही दोनों छात्राओं को आखिरकार परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल गई, लेकिन गलत प्रवेश पत्र लेकर आई तीसरी छात्रा को केंद्र से बाहर भेज दिया गया। इस घटना के बाद परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा बढ़ा दी गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए दस्तावेजों की जांच को और सख्त कर दिया गया।4
- आज संगठन सृजन अभियान के तहत भोपाल ग्रामीण के नजीराबाद ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की देवापुरा मंडलम बैठक अंजनी आश्रम पर आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस परिवार के साथियों के साथ बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर मंडलम अध्यक्ष, पंचायत कमेटी के अध्यक्ष और बीएलए/2 सहित कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।1
- एक समझौते के बावजूद शांति भंग हो गई है और ईरान ने खुली चुनौती दी है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भविष्य में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की संभावना का उल्लेख किया है। क्षेत्रीय घटनाक्रमों के कारण ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। अब सभी की निगाहें आने वाले कूटनीतिक और रणनीतिक फैसलों पर टिकी हैं।1
- रायसेन जिले के त्रिमूर्ति चौराहा के पास एक एक्सयूवी वाहन ने कहर मचाते हुए एक बाइक और एक यूको कार को टक्कर मार दी।1