बिहार के दर्शकों के बीच पिछले कुछ वर्षों में साउथ भारतीय फिल्मों का क्रेज़ तेज़ी से बढ़ा है, जहाँ अब ये फिल्में युवाओं की पहली पसंद बन चुकी हैं। पहले लोग मुख्य रूप से बॉलीवुड फिल्मों को पसंद करते थे, लेकिन अब साउथ की एक्शन, ड्रामा और दमदार कहानियों वाली फिल्में अधिक पसंद की जा रही हैं। साउथ फिल्मों की लोकप्रियता सिनेमा हॉल से लेकर मोबाइल और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक लगातार बढ़ रही है। दर्शक मानते हैं कि इन फिल्मों में ज़बरदस्त एक्शन, भावनात्मक कहानियाँ और पारिवारिक मनोरंजन का बेहतरीन संगम देखने को मिलता है। फ़िल्म विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी डबिंग के आसानी से उपलब्ध होने और सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के कारण भी साउथ फिल्मों की पहुँच बिहार के छोटे शहरों और गाँवों तक हो गई है। इस बदली हुई पसंद के तहत, युवाओं में साउथ फिल्मों के प्रति विशेष उत्साह है, जिसमें एक्शन और कहानी को सबसे ज़्यादा पसंद किया जा रहा है। ओटीटी और सोशल मीडिया ने इनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया है, जिसके फलस्वरूप बिहार के सिनेमाघरों में भी दर्शकों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जो दर्शकों के मनोरंजन के बदलते अंदाज़ को दर्शाता है।
बिहार के दर्शकों के बीच पिछले कुछ वर्षों में साउथ भारतीय फिल्मों का क्रेज़ तेज़ी से बढ़ा है, जहाँ अब ये फिल्में युवाओं की पहली पसंद बन चुकी हैं। पहले लोग मुख्य रूप से बॉलीवुड फिल्मों को पसंद करते थे, लेकिन अब साउथ की एक्शन, ड्रामा और दमदार कहानियों वाली फिल्में अधिक पसंद की जा रही हैं। साउथ फिल्मों की लोकप्रियता सिनेमा हॉल से लेकर मोबाइल और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक लगातार बढ़ रही है। दर्शक मानते हैं कि इन फिल्मों में ज़बरदस्त एक्शन, भावनात्मक कहानियाँ और पारिवारिक मनोरंजन का बेहतरीन संगम देखने को मिलता है। फ़िल्म विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी डबिंग के आसानी से उपलब्ध होने और सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के कारण भी साउथ फिल्मों की पहुँच बिहार के छोटे शहरों और गाँवों तक हो गई है। इस बदली हुई पसंद के तहत, युवाओं में साउथ फिल्मों के प्रति विशेष उत्साह है, जिसमें एक्शन और कहानी को सबसे ज़्यादा पसंद किया जा रहा है। ओटीटी और सोशल मीडिया ने इनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया है, जिसके फलस्वरूप बिहार के सिनेमाघरों में भी दर्शकों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जो दर्शकों के मनोरंजन के बदलते अंदाज़ को दर्शाता है।
- स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, घूसखोरी और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन गंभीर आरोपों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग की जा रही है।1
- आगामी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव से पहले, नालंदा के रहुई प्रखंड स्थित पतासंग के श्री बालेश्वर सिंह +2 विद्यालय में शनिवार को एक भव्य शिक्षक संवाद समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लोकप्रिय शिक्षक नेता एवं विधान परिषद सदस्य प्रो. नवल किशोर यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। समारोह में विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जहाँ उन्होंने अपनी समस्याओं, मांगों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. नवल किशोर यादव को माला एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में प्रो. नवल किशोर यादव ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया और शिक्षा की गुणवत्ता व समाज के भविष्य को बेहतर बनाने में उनकी सर्वोपरि भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव स्वस्थ, सकारात्मक और विकासोन्मुखी मुद्दों पर आधारित होना चाहिए, जो केवल प्रतिनिधि चुनने का नहीं, बल्कि शिक्षकों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य को सुरक्षित करने का अवसर है। प्रो. यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षकों की समस्याओं को सदन से लेकर सरकार तक मजबूती से उठाने और उनके वेतन, सेवा शर्तों, पदोन्नति, स्थानांतरण व अन्य प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए लगातार संघर्ष करने का उल्लेख किया। उन्होंने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि वे हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में भी उनकी हर समस्या के समाधान के लिए 24 घंटे तत्पर रहेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षकों की पुरानी और महत्वपूर्ण मांग, पेंशन व्यवस्था की बहाली के लिए भी लगातार प्रयासरत रहने और इस मुद्दे को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाते रहने का संकल्प दोहराया। प्रो. नवल किशोर यादव ने आगामी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव का शंखनाद करते हुए शिक्षकों से एकजुट होकर शिक्षा, शिक्षक सम्मान और अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षकों का विश्वास और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसके बल पर शिक्षक हितों की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। समारोह के समापन पर उपस्थित शिक्षकों ने शिक्षा और शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए और प्रो. नवल किशोर यादव के प्रयासों की सराहना की, जिसके बाद कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।4
- एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दोस्तों को सूचित किया गया है कि उनके स्कूल में पन्द्रह अगस्त के लिए तैयारियां पूरे जोश और उत्साह के साथ चल रही हैं। पोस्ट में इन तैयारियों को लेकर खुशी, आश्चर्य और भरपूर रोमांच का माहौल व्यक्त किया गया है।1
- बिहार सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनके सरकारी आवास '10 सर्कुलर रोड' खाली करने का अल्टीमेटम देने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। राबड़ी देवी ने इस आदेश को मानने से साफ इनकार कर दिया है। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपना आवास खाली नहीं करेंगी। अपने पोते के जन्मदिन समारोह में शामिल होने के बाद पटना लौटी राबड़ी देवी ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में स्पष्ट कहा, 'सम्राट चौधरी जितना भी फोर्स बुलाकर मकान खाली करवाना चाहें, मैं मकान नहीं खाली करूंगी।' उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस शुरू हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि यह जंगलराज नहीं है और कानून का पालन करना होगा। उन्होंने राबड़ी देवी पर इलाज और जन्मदिन मनाने के लिए राज्य से बाहर जाने, लेकिन 'लूटने की बारी' आने पर बिहार आने का आरोप लगाया। नीरज कुमार ने कटाक्ष करते हुए पूछा कि आखिर 10 सर्कुलर रोड में लालू परिवार ने कौन सा खजाना छुपा रखा है, और कहा कि अगर कोई खजाना होगा तो बिहार पुलिस उसे खोज निकालेगी। बिहार के डिप्टी सीएम और जेडीयू नेता विजय कुमार चौधरी ने भी राबड़ी देवी के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में नियमों का पालन करना होगा, क्योंकि सभी कार्य कानून के अनुसार होते हैं और सभी को नियमों का पालन करना चाहिए। वहीं, बीजेपी के राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने राबड़ी देवी के बयान को टकराव पैदा करने वाला बताते हुए कहा कि उन्हें, जो बिहार की मुख्यमंत्री रही हैं, ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे पुलिस बल की जरूरत नहीं है, एक दरोगा ही आवास खाली करा देगा।1
- बिहार के राजगीर में आयोजित राजकीय मलमास मेला श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गुलजार है। मेले में लगे विभिन्न झूलों और अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों के बीच 'मौत का कुआं' लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। इस 'मौत के कुएं' में दो कार और चार मोटरसाइकिल चालक तेज रफ्तार में लकड़ी की ऊंची दीवारों पर रोमांचक करतब दिखाते हुए दर्शकों को हैरान कर रहे हैं। लड़के और लड़कियां अपने साहसिक प्रदर्शन से लोगों का खूब मनोरंजन कर रहे हैं। हर शो में बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर इस रोमांचक नजारे का आनंद ले रहे हैं। श्रद्धा और मनोरंजन के इस संगम बने मलमास मेले में 'मौत का कुआं' सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी बिहारशरीफ पहुंचे, लेकिन उनके आगमन के बावजूद जनप्रतिनिधियों ने जनता की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया। इस स्थिति को लेकर स्पष्ट रूप से असंतोष व्यक्त किया गया है, जहाँ जनता के मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है।1
- एक व्यक्ति को 'ए गुलफाम' कहकर संबोधित किया गया, जिसे बड़े ही मज़ाकिया अंदाज़ में बार-बार 'हीरो हीरो' पुकारा गया। इस दौरान यह भी बताया गया कि उसका नाम 'हीरो हीरो' ही है।1
- लहेरी थाना ने कांड संख्या 228/26 का खुलासा करते हुए चोरी के वाहनों के साथ 6 शातिर चोरों को सफलतापूर्वक दबोच लिया है।1