शासकीय नाले पर अवैध अतिक्रमण, राजस्व विभाग की मिलीभगत का आरोप देवरी। देवरी विकासखंड के गौरझामर क्षेत्र में शासकीय नाले और उसके आसपास की भूमि पर अवैध अतिक्रमण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि राजस्व विभाग की निष्क्रियता और कथित मिलीभगत के चलते अवैध कॉलोनाइजर सरकारी नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य करा रहा है। प्रशासन द्वारा दो बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमों की अनदेखी कर विकसित की जा रही कॉलोनी जानकारी के अनुसार, गौरझामर की मुख्य सड़क से होकर गुजरने वाला शासकीय नाला घोसी पट्टी क्षेत्र में स्थित है। इसी क्षेत्र के खसरा क्रमांक 225/1 पर पिछले करीब चार माह से एक कॉलोनाइजर द्वारा अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। दूरी के नियम का उल्लंघन: नियमानुसार नाले से लगभग 15 से 20 मीटर की दूरी छोड़कर ही निर्माण किया जाना चाहिए, लेकिन इस नियम की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। जल निकासी का संकट: नाले पर हो रहे अतिक्रमण के कारण उसकी चौड़ाई घट रही है, जिससे भविष्य में भारी जलभराव और जल निकासी की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका है। नोटिस के बाद भी नहीं रुकी कार्रवाई, NGT जाने की तैयारी नायब तहसीलदार द्वारा कॉलोनाइजर नीरज जैन को इस संबंध में दो बार नोटिस जारी किया जा चुका है, किंतु जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से नाराज क्षेत्रवासियों ने अब इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय हरित अधिकरण NGT में करने की तैयारी शुरू कर दी है। इनका कहना: मुनव्वर खान (एसडीएम, देवरी): "मामले में प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है। नाले एवं उसके आसपास अवैध अतिक्रमण नियमों के विरुद्ध है। नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी।
शासकीय नाले पर अवैध अतिक्रमण, राजस्व विभाग की मिलीभगत का आरोप देवरी। देवरी विकासखंड के गौरझामर क्षेत्र में शासकीय नाले और उसके आसपास की भूमि पर अवैध अतिक्रमण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि राजस्व विभाग की निष्क्रियता और कथित मिलीभगत के चलते अवैध कॉलोनाइजर सरकारी नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य करा रहा है। प्रशासन द्वारा दो बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य बदस्तूर जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमों की अनदेखी कर विकसित की जा रही कॉलोनी जानकारी के अनुसार, गौरझामर की मुख्य सड़क से होकर गुजरने वाला शासकीय नाला घोसी पट्टी क्षेत्र में स्थित है। इसी क्षेत्र के खसरा क्रमांक 225/1 पर पिछले करीब चार माह से एक कॉलोनाइजर द्वारा अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। दूरी के नियम का उल्लंघन: नियमानुसार नाले से लगभग 15 से 20 मीटर की दूरी छोड़कर ही निर्माण किया जाना चाहिए, लेकिन इस नियम की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। जल निकासी का संकट: नाले पर हो रहे अतिक्रमण के कारण उसकी चौड़ाई घट रही है, जिससे भविष्य में भारी जलभराव और जल निकासी की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका है। नोटिस के बाद भी नहीं रुकी कार्रवाई, NGT जाने की तैयारी नायब तहसीलदार द्वारा कॉलोनाइजर नीरज जैन को इस संबंध में दो बार नोटिस जारी किया जा चुका है, किंतु जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से नाराज क्षेत्रवासियों ने अब इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय हरित अधिकरण NGT में करने की तैयारी शुरू कर दी है। इनका कहना: मुनव्वर खान (एसडीएम, देवरी): "मामले में प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है। नाले एवं उसके आसपास अवैध अतिक्रमण नियमों के विरुद्ध है। नियमानुसार कार्रवाई कराई जाएगी।
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- *SBI मंडी रोड शाखा पर मनमानी के आरोप, खाता खुलवाने 8-10 दिन से चक्कर काट रहा छात्र!* नरसिंहपुर ! 27 अगस्त 2026 नरसिंहपुर भारतीय स्टेट बैंक की मंडी रोड शाखा में खाता खुलवाने में कथित देरी और बार-बार नई औपचारिकताएं बताए जाने का मामला सामने आया है। छात्र प्रिंस लोधी ने इस संबंध में कलेक्टर नरसिंहपुर को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में छात्र ने आरोप लगाया कि वह पिछले 8-10 दिनों से बैंक में अपना खाता खुलवाने के लिए चक्कर लगा रहा है। स्कूल में खाता नंबर जमा करना आवश्यक होने के बावजूद अब तक उसका खाता नहीं खुल पाया है। छात्र के अनुसार, उसने बैंक द्वारा मांगी गई आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज और फॉर्म जमा किए थे तथा बैंक अधिकारी द्वारा फॉर्म का सत्यापन भी किया गया था। छात्र का कहना है कि इसके बाद भी अलग-अलग समय पर नई प्रक्रियाएं और नियम बताए जा रहे हैं, जिससे उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार की प्रक्रिया से छात्र के साथ-साथ अन्य अभिभावकों को भी परेशानी हो रही है। प्रिंस लोधी ने कलेक्टर से मामले को संज्ञान में लेकर उचित जांच एवं कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, एसबीआई के रीजनल मैनेजर जबलपुर तथा चीफ जनरल मैनेजर भोपाल को भी भेजी गई है।1
- 25 करोड़ की सीवरेज परियोजना पर संकट: भुगतान के अभाव में स्टाफ ने छोड़ा काम, चोकिंग-ओवरफ्लो से साईंखेड़ा परेशान 25 करोड़ की सीवरेज परियोजना पर संकट: भुगतान के अभाव में स्टाफ ने छोड़ा काम, चोकिंग-ओवरफ्लो से साईंखेड़ा परेशान साईंखेड़ा। नगर की स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एशियन डेवलपमेंट बैंक से वित्त पोषित एवं मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MPUDC), भोपाल के माध्यम से लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित साईंखेड़ा सीवरेज परियोजना अब अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। जिस परियोजना को नगर के लिए बड़ी सौगात माना गया था, वही आज उपेक्षा, भुगतान संबंधी विवाद और कमजोर संचालन व्यवस्था के चलते गंभीर संकट में पहुंचती दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार नवंबर 2024 में परियोजना के ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का कार्य प्रारंभ हुआ था। आरोप है कि इसके बाद लंबे समय से संबंधित ठेकेदार को भुगतान नहीं किया गया। भुगतान लंबित होने के कारण ठेकेदार कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हुआ और परियोजना के संचालन तथा रखरखाव में लगे कर्मचारियों के काम छोड़ने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई। स्टाफ हटते ही चरमराई व्यवस्था तकनीकी एवं मेंटेनेंस स्टाफ की कमी का सीधा असर अब जमीन पर दिखाई दे रहा है। नगर के विभिन्न हिस्सों में सीवरेज पाइपलाइन चोक होने, मैनहोल ओवरफ्लो होने, नालियां भरने और गंदा पानी फैलने जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बावजूद इनके स्थायी समाधान को लेकर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यदि परियोजना की नियमित मेंटेनेंस व्यवस्था इसी प्रकार प्रभावित रही तो करोड़ों रुपये से तैयार किया गया सीवरेज नेटवर्क धीरे-धीरे तकनीकी रूप से खराब होने की स्थिति में पहुंच सकता है। इसका सीधा असर नगरवासियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण पर पड़ेगा। ठेकेदार ने भी ऑपरेशन-मेंटेनेंस से अलग होने का दिया संकेत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भुगतान नहीं होने की स्थिति में संबंधित ठेकेदार द्वारा विभाग को अपनी कठिनाइयों से अवगत कराते हुए ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस कार्य से अलग किए जाने का अनुरोध भी किया गया है। यदि यह स्थिति सही है तो यह केवल भुगतान का मामला नहीं, बल्कि इतनी बड़ी सार्वजनिक परियोजना के भविष्य के संचालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। परियोजना का भविष्य कौन तय करेगा? नगरवासियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद परियोजना को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी किसकी है? नगर परिषद, MPUDC और संबंधित PIU के बीच समन्वय की स्थिति क्या है? लंबित भुगतान का समाधान कब होगा? मेंटेनेंस के लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ कब उपलब्ध होगा? और यदि वर्तमान एजेंसी ऑपरेशन-मेंटेनेंस से अलग होती है तो आगे परियोजना किस व्यवस्था से संचालित होगी? इन सवालों का स्पष्ट जवाब नगरवासियों को अब तक नहीं मिल पा रहा है। नए क्षेत्रों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी अस्पष्ट परियोजना का उद्देश्य केवल वर्तमान नेटवर्क को संचालित करना ही नहीं, बल्कि नगर के अधिकाधिक घरों एवं नए क्षेत्रों को सीवरेज सुविधा से जोड़ना भी है। लेकिन किस चरण में कितने नए घर जोड़े जाएंगे, नए क्षेत्रों को कब लाभ मिलेगा और इसके लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है, इस संबंध में भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है। करोड़ों की परियोजना पर अब जवाबदेही जरूरी यह मामला महज नाली चोक होने या मैनहोल ओवरफ्लो होने तक सीमित नहीं है। यह करोड़ों रुपये की सार्वजनिक निधि से निर्मित एक महत्वपूर्ण अधोसंरचना की कार्यक्षमता और उसके भविष्य से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते परियोजना के संचालन, रखरखाव, भुगतान और विस्तार को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आशंका है कि करोड़ों रुपये से निर्मित यह व्यवस्था धीरे-धीरे अनुपयोगी होती चली जाएगी और अंततः इसका आर्थिक एवं सामाजिक भार नगरवासियों को उठाना पड़ेगा। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा करें, परियोजना की वर्तमान तकनीकी स्थिति की जांच कराएं, लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट करें, जिम्मेदार एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करें और भविष्य के संचालन की ठोस कार्ययोजना सार्वजनिक करें। सवाल सीधा है—25 करोड़ रुपये की परियोजना यदि आज ही रखरखाव और संचालन के संकट में फंस गई है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और जवाबदेही तय कब होगी?1
- नरसिंहपुर - गांव में बिक रही अवैध शराब बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर sp को सौपा ज्ञापन सागौनी खुर्द में अवैध तरीके से बिक रही शराब पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है आज ग्रामीण युवा एसपी ऑफिस पहुंचे और एसपी को आवेदन दिया जिसमें उन्होंने गांव में बिक रही अवैध शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग की उनका कहना है कि गांव में कुछ लोगों के द्वारा अवैध शराब का विक्रय किया जा रहा है जिससे ग्रामीणों के साथ युवा पीढ़ी भी बर्बाद हो रही है वहीं गांव में पूर्णता शराब विक्रय पर रोक लगवाई जाए जिसको लेकर ग्रामीणों ने एसपी को ज्ञापन सोपा और शराब पूर्णता बंद करवाने की मांग1
- तेंदूखेड़ा पुलिस की बड़ी कार्यवाही,स्मैक के दो युवकों से 7.90 ग्राम नशीला पदार्थ बरामद ✍️ धर्मेंद्र साहू1