मुक्तिधाम में मानवता की मिसाल: बेजुबान पक्षियों के लिए लगाए गए सकोरे, भोजन-पानी की स्थायी व्यवस्था पोरसा। भीषण गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जहां इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी और भोजन के लिए जूझ रहे हैं, वहीं पोरसा के मुक्तिधाम परिसर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। समाजसेवा और जीवदया की भावना को साकार करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मुक्तिधाम के संरक्षक समाजसेवी डॉ. अनिल गुप्ता के सानिध्य में परिसर में एक दर्जन सकोरे (मिट्टी के पात्र) टांगे गए और पक्षियों के लिए दाने की भी व्यवस्था की गई। इस सेवा कार्य में ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बीके रेखा बहन, पूर्व भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता, श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता, महेश चंद्र पेगोरिया, रामधुन बघेल, नरेंद्र राठौर, संजय अग्रवाल, क्षया शर्मा, संतोषी तोमर, रूबी, कल्याण सिंह फौजी सहित अनेक समाजसेवियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सकोरों में दिन में तीन बार भरा जाएगा पानी समाजसेवियों ने न केवल सकोरे टांगे, बल्कि उनकी नियमित देखरेख की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ली है। तय किया गया है कि इन सकोरों में दिन में तीन बार शुद्ध पानी भरा जाएगा, ताकि भीषण गर्मी में पक्षियों को राहत मिल सके। क्यों जरूरी है पक्षियों के लिए पानी और दाना? गर्मी के मौसम में तापमान लगातार बढ़ने से प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगते हैं। ऐसे में पक्षियों के सामने जीवन संकट खड़ा हो जाता है। सकोरों में पानी और दाना रखने से: पक्षियों को निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाया जा सकता है उनकी जीवन रक्षा होती है पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) सुरक्षित रहती है जीव सेवा का धार्मिक और सामाजिक महत्व भारतीय संस्कृति में बेजुबान जीवों की सेवा को पुण्य कार्य माना गया है। मान्यता है कि पशु-पक्षियों को पानी और अन्न देने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। पक्षियों की सेवा से मिलने वाले लाभ मन को शांति और संतोष प्राप्त होता है बच्चों और समाज में संवेदनशीलता बढ़ती है पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आती है यह छोटी पहल बड़े स्तर पर जीवन बचाने का माध्यम बनती है समाज के लिए प्रेरणा मुक्तिधाम में की गई यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। बढ़ती गर्मी में यदि हर व्यक्ति अपने घर, छत या आंगन में एक सकोरा रखे, तो हजारों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है। इस अवसर पर पूरे मुक्तिधाम परिसर में सेवा, संवेदना और करुणा का भाव देखने को मिला, जिसने यह संदेश दिया कि मानवता सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि हर जीव के प्रति दया ही सच्ची सेवा है। मुक्तिधाम मैं मानवता की मिसाल पक्षियों के लिए लगाए गए पानी के सकोरे
मुक्तिधाम में मानवता की मिसाल: बेजुबान पक्षियों के लिए लगाए गए सकोरे, भोजन-पानी की स्थायी व्यवस्था पोरसा। भीषण गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जहां इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी और भोजन के लिए जूझ रहे हैं, वहीं पोरसा के मुक्तिधाम परिसर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। समाजसेवा और जीवदया की भावना को साकार करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मुक्तिधाम के संरक्षक समाजसेवी डॉ. अनिल गुप्ता के सानिध्य में परिसर में एक दर्जन सकोरे (मिट्टी के पात्र) टांगे गए और पक्षियों के लिए दाने की भी व्यवस्था की गई। इस सेवा कार्य में ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बीके रेखा बहन, पूर्व भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता, श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता, महेश चंद्र पेगोरिया, रामधुन बघेल, नरेंद्र राठौर, संजय अग्रवाल, क्षया शर्मा, संतोषी तोमर, रूबी, कल्याण सिंह फौजी सहित अनेक समाजसेवियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सकोरों में दिन में तीन बार भरा जाएगा पानी समाजसेवियों ने न केवल सकोरे टांगे, बल्कि उनकी नियमित देखरेख की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ली है। तय किया गया है कि इन सकोरों में दिन में तीन बार शुद्ध पानी भरा जाएगा, ताकि भीषण गर्मी में पक्षियों को राहत मिल सके। क्यों जरूरी है पक्षियों के लिए पानी और दाना? गर्मी के मौसम में तापमान लगातार बढ़ने से प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगते हैं। ऐसे में पक्षियों के सामने जीवन संकट खड़ा हो जाता है। सकोरों में पानी और दाना रखने से: पक्षियों को निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाया जा सकता है उनकी जीवन रक्षा होती है पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) सुरक्षित रहती है जीव सेवा का धार्मिक और सामाजिक महत्व भारतीय संस्कृति में बेजुबान जीवों की सेवा को पुण्य कार्य माना गया है। मान्यता है कि पशु-पक्षियों को पानी और अन्न देने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। पक्षियों की सेवा से मिलने वाले लाभ मन को शांति और संतोष प्राप्त होता है बच्चों और समाज में संवेदनशीलता बढ़ती है पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आती है यह छोटी पहल बड़े स्तर पर जीवन बचाने का माध्यम बनती है समाज के लिए प्रेरणा मुक्तिधाम में की गई यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। बढ़ती गर्मी में यदि हर व्यक्ति अपने घर, छत या आंगन में एक सकोरा रखे, तो हजारों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है। इस अवसर पर पूरे मुक्तिधाम परिसर में सेवा, संवेदना और करुणा का भाव देखने को मिला, जिसने यह संदेश दिया कि मानवता सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि हर जीव के प्रति दया ही सच्ची सेवा है। मुक्तिधाम मैं मानवता की मिसाल पक्षियों के लिए लगाए गए पानी के सकोरे
- अम्बाह अवैध रैत खनन के चलते लाइन मे लगी रैत के ट्रैक्टर ट्रॉली1
- वाह रे सरकारी तंत्र ,,, कागज़ों में भुगतान पूरा, और धरातल पर कार्य शून्य, मामला अंबाह तहसील के ग्राम पंचायत अमिलेडा का , ग्रामीणों का आरोप जनता के विकास के पैसों का हो गया बंदरबांट, भीमसेन सिंह तोमर। अंबाह । सरकारी पैसे का किस प्रकार से दुरुप्रयोग होता है इसका ताजा और मन को को विचलित कर देने वाला वाक्या अंबाह तहसील के ग्राम पंचायत मढैला (अमिलेडा राजस्व नाम)गांव का आया है यहां पर सचिव और सरपंच ने संयुक्त हस्ताक्षर करके राशि का आहरण तो कर लिया लेकिन धरातल पर कोई भी विकास कार्य शुरू तक नहीं कराया और आपस में ही ऊपर ही ऊपर पैसों का बंदरबांट भी हो गया जब इसकी भनक ग्राम पंचायत के युवाओं और आम जनता को लगी तो उन्होंने अधिकारी से लेकर सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी है अब देखना होगा कि संबंधितों के खिलाफ कोई कठोर कार्यवाही होगी या फिर मामला फिर से बंदरबांट पर आकर टिक जाएगा1
- Post by Banti shrivas1
- Post by Aravind Kumar9027958728-2831123
- Post by Gyadeen Verma1
- *नगर लहार मे धूमधाम से मनाया गया भगवान श्री परशुराम का प्रकटोत्सव* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 *परशुराम मंदिर में पूजा अर्चना के बाद निकाली गई भव्य शोभा यात्रा* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 *समाजसेवी डॉ विनोद तिवारी ने गांव गांव जाकर सर्वसमाज को एकत्रित करने में अहम भूमिका निभाई* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 *यात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ हुआ भव्य स्वागत* 🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰🟰 लहार..भगवान विष्णु के छटवें अवतार भगवान परशुराम जी के जन्मोंत्सव पर लहार नगर में धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई,सम्पूर्ण विधानसभा क्षेत्र से आए सकल हिन्दु समाज के सनातिनियों द्वारा भव्य शोभा यात्रा निकाली गई जिस शोभायात्रा का जगह जगह स्वागत हुआ,शोभायात्रा में नगर व विधानसभा क्षेत्र के सर्व समाज के वरिष्ठ गणमान्य नागरिक शामिल हुए,शोभायात्रा का जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ किया भव्य स्वागत किया गया, विशाल शोभायात्रा में रथ पर भगवान परशुराम जी की तस्वीर रख कर आगे आगे रथ चला लोगों के द्वारा भगवान के श्री चरणों मे आरती तिलक के साथ तस्वीर पर फूल माला चढ़ा कर पूजन किया गया,सर्व समाज के लोगों के द्वारा जगह जगह पुष्प वर्षा की गई व जगह जगह शीतल जल पेय लस्सी ,कोल्ड ड्रिंक,शरबत की व्यवस्था की गई इस दौरान हजारों की संख्या में लोग पैदल साथ चले,साथ मे दो पहिया व चार पहिया वाहन भी साथ मे चले,यह शोभा यात्रा भगवान परशुराम जी के मंदिर में पूजा अर्चना के बाद प्रारंभ हुई व नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए पचपेड़ा तिराहा पर जाकर संपन्न हुई,आशीर्वाचन के बाद तदुपरांत रेस्ट हाउस पर भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।।।1
- Post by JP NEWS झोलाछाप पत्रकार /Rohit bajouriya1
- थार कांड के बाद बढ़ा विवाद: विधायक प्रीतम लोधी का बयान वायरल, भाषा पर उठे सवाल । करैरा/पिछोर। 16 अप्रैल को हुई थार वाहन दुर्घटना के बाद मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। जहां एक ओर पुलिस प्रशासन घटना में कानूनी कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बयानबाजी ने पूरे प्रकरण को राजनीतिक रंग दे दिया है। पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे करैरा एसडीओपी के संदर्भ में आपत्तिजनक भाषा का उपयोग करते नजर आ रहे हैं। इंटरव्यू के दौरान दिए गए इस बयान के बाद अब जनप्रतिनिधियों की भाषा और मर्यादा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि 16 अप्रैल की सुबह विधायक के पुत्र दिनेश ने थार वाहन से पांच लोगों को टक्कर मार दी थी। घटना के बाद करैरा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन की जांच की। इस दौरान वाहन पर नियम विरुद्ध काली फिल्म और नंबर प्लेट की जगह “विधायक” लिखा पाया गया, जिसे हटाने की हिदायत देकर चालक को छोड़ दिया गया था। हालांकि, दो दिन बाद भी वाहन में कोई सुधार नहीं किया गया और वही थार नगर की सड़कों पर घूमती देखी गई। इसके बाद करैरा एसडीओपी ने नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वाहन का चालान किया। इस कार्रवाई के बाद विधायक के बयान सामने आए, जिसने विवाद को और हवा दे दी। एक संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल क्या उचित है—यह सवाल अब आम जनता और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस अपनी जांच और कानूनी प्रक्रिया में जुटी हुई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन पर बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में पार्टी नेतृत्व और प्रशासन आगे क्या रुख अपनाते हैं।1