सत्ता नहीं, हक़ चाहिए! भीख नहीं, अधिकार चाहिए! 20 फ़ीसदी नहीं, 80 फ़ीसदी की सरकार चाहिए साथियों,आज ऐसे महान पुरुष की जयंती मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिसने जीवन भर सेवा को ही धर्म,और समानता को ही राजनीति माना। आज हम उस महापुरुष को याद कर रहे हैं जो खुद कभी मंच का भूखा नहीं रहा, लेकिन जिसने करोड़ों वंचितों को मंच पर खड़ा कर दिया। मैं बात कर रहा हूँ भारत रत्न, जननायक, समाजवादी चिंतक – कर्पूरी ठाकुर जी की। साथियों, जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के विचारों पर आने से पहले मैं दो शब्द अपने देश और अपने समाज के बारे में कहना चाहता हूँ। हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहाँ हम ईश्वर की पूजा करते हैं, भगवान को पूज्य मानते हैं, उनके नाम पर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और गिरजाघर बनाते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जिन महापुरुषों को हम पूजते हैं वे किस पृष्ठभूमि से आए थे? श्रीकृष्ण जी गाय चराने वाले थे। हज़रत मोहम्मद साहब बकरी चराने वाले थे। ईसा मसीह फर्नीचर बनाने वाले कारीगर थे। संत कबीर दास जी कपड़ा बुनने वाले जुलाहे थे। लेकिन साथियों, आज हमारे समाज का दुर्भाग्य देखिए जो मेहनत का काम करता है, उसे छोटा समझा जाता है। जो गंदगी फैलाता है, उसे बड़ा आदमी माना जाता है। जो कूड़ा उठाता है, उसे नीचा दिखाया जाता है। और जो कूड़ा फैलाता है, वह समाज में सम्मान पाता है। क्या यही हमारे धर्म का संदेश है? क्या यही हमारे महापुरुषों की सीख है? नहीं साथियों, यही विषमता, यही अन्याय, यही पाखंड जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को राजनीति में लाया। साथियों,कर्पूरी ठाकुर जी उस समाज से आए जहाँ गरीबी थी,जहाँ शोषण था, जहाँ पिछड़े और दलित लोगों की आवाज़ नहीं थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। मैं आपको ले चलता हूँ 1978 में उस समय जब पिछड़ों को हक़ देने की बात करना राजनीतिक आत्महत्या माना जाता था,तब जननायक कर्पूरी ठाकुर जी बिहार के मुख्यमंत्री बने। और मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने वो काम किया जिसकी हिम्मत किसी में नहीं थी। उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग को अलग पहचान दी, और 26 प्रतिशत आरक्षण वंचित, पीड़ित, शोषित समाज को देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। साथियों,उन्होंने सत्ता को सेवा का साधन बनाया, ना कि परिवार बढ़ाने का औज़ार। ना बंगला, ना बैंक बैलेंस, ना रिश्तेदारों की फौज बस एक ही सपना समान भारत, न्यायपूर्ण समाज। साथियों,आज संयुक्त जनादेश पार्टी जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की उसी विचारधारा को आगे बढ़ा रही है। हम कहते हैं, राजनीति 10–15 परिवारों की बपौती नहीं है। राजनीति 80% मेहनतकश जनता की आवाज़ है।हम कहते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोज़गार मुफ़्त और समान होना चाहिए। हम कहते हैं। जो खेत में हल चलाता है,जो सड़क साफ़ करता है,जो फैक्ट्री में पसीना बहाता है।वही इस देश का असली मालिक है। साथियों,जननायक कर्पूरी ठाकुर जी सिर्फ़ एक नेता नहीं थे, वह एक विचार थे, एक आंदोलन थे, एक क्रांति थे। साथियो! मेहनतकश भाइयों और बहनों!आज मैं आपसे भाषण देने नहीं आया हूँ, मैं आज हिसाब लेने आया हूँ! 75 साल से इस देश की सत्ता पर मुट्ठी भर लोग बैठे हैं। उन्होंने हमारी मेहनत से महल बनाए,और हमारे बच्चों को भूखा रखा! मैं पूछता हूँ ।जिस किसान ने देश को अनाज दिया, क्या उसे सम्मान मिला? जिस मजदूर ने इमारत खड़ी की, क्या उसे घर मिला?नहीं मिला! आज देश की राजनीति में 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज केवल वोटर है, और 20 फ़ीसदी लोग राजा बने बैठे हैं। संयुक्त जनादेश पार्टी इस गुलामी की राजनीति को तोड़ने आई है। अब मेहनतकश समाज खुद सत्ता चलाएगा! हम साफ़ कहते हैं 👉 हमारी पार्टी 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज को राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोजगार दिलाकर रहेगी। यह कोई घोषणा नहीं, इंकलाब है! आज गरीब का बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़कर भी पीछे रह जाता है। क्यों?क्योंकि शिक्षा भी व्यापार बना दी गई है! हम कहते हैं ।शिक्षा बिकेगी नहीं, बँटेगी! आज अस्पताल अमीरों के लिए हैं, गरीब के लिए श्मशान है! हम कहते हैं इलाज पर ताला नहीं, दलालों पर ताला लगेगा! न्याय?गरीब को तारीख मिलती है,अमीर को फैसला!हम इस न्याय व्यवस्था को बदलकर रख देंगे! रोजगार की बात करो तो युवा की डिग्री मज़ाक बन चुकी है! हम कहते हैं। खैरात नहीं, रोजगार चाहिए!अब सुन लो हमारी सबसे बड़ी घोषणा,जो सत्ता के ठेकेदारों को हिला देगी! 👉 संयुक्त जनादेश पार्टी सत्ता में आई तो हर जाति का मुख्यमंत्री बनेगा! 👉 छह-छह महीने तक सत्ता समाज में घूमेगी! 👉 अब कोई जाति मालिक नहीं बनेगी, सब बराबर होंगे! जो लोग कहते हैं यह संभव नहीं है, मैं उनसे पूछता हूँ — जब मुख्यमंत्री कुर्सी कुछ परिवारों में घूम सकती है, तो समाज में क्यों नहीं? हम जाति की राजनीति नहीं करते, हम जाति के शोषण की राजनीति खत्म करते हैं! आज मैं जनता से पूछता हूँ क्या आप अपने बच्चों को नौकर बनते देखना चाहते हैं, या हुक्म चलाते देखना चाहते हैं? अगर हुक्म चलाना है, तो सत्ता बदलनी पड़ेगी! व्यवस्था बदलनी पड़ेगी! अब जनता जाग चुकी है! अब वोट देकर चुप बैठने का ज़माना खत्म हो गया है! मैं साफ़ कहता हूँ — जो मेहनतकश समाज के हक़ में नहीं, वह सत्ता में रहने का हक़दार नहीं! शाहजहांपुर,पीलीभीतकी धरती से आज हम ऐलान करते हैं 👉 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज राज करेगा!
सत्ता नहीं, हक़ चाहिए! भीख नहीं, अधिकार चाहिए! 20 फ़ीसदी नहीं, 80 फ़ीसदी की सरकार चाहिए साथियों,आज ऐसे महान पुरुष की जयंती मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिसने जीवन भर सेवा को ही धर्म,और समानता को ही राजनीति माना। आज हम उस महापुरुष को याद कर रहे हैं जो खुद कभी मंच का भूखा नहीं रहा, लेकिन जिसने करोड़ों वंचितों को मंच पर खड़ा कर दिया। मैं बात कर रहा हूँ भारत रत्न, जननायक, समाजवादी चिंतक – कर्पूरी ठाकुर जी की। साथियों, जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के विचारों पर आने से पहले मैं दो शब्द अपने देश और अपने समाज के बारे में कहना चाहता हूँ। हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहाँ हम ईश्वर की पूजा करते हैं, भगवान को पूज्य मानते हैं, उनके नाम पर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और गिरजाघर बनाते हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि जिन महापुरुषों को हम पूजते हैं वे किस पृष्ठभूमि से आए थे? श्रीकृष्ण जी गाय चराने वाले थे। हज़रत मोहम्मद साहब बकरी चराने वाले थे। ईसा मसीह फर्नीचर बनाने वाले कारीगर थे। संत कबीर दास जी कपड़ा बुनने वाले जुलाहे थे। लेकिन साथियों, आज हमारे समाज का दुर्भाग्य देखिए जो मेहनत का काम करता है, उसे छोटा समझा जाता है। जो गंदगी फैलाता है, उसे बड़ा आदमी माना जाता है। जो कूड़ा उठाता है, उसे नीचा दिखाया जाता है। और जो कूड़ा फैलाता है, वह समाज में सम्मान पाता है। क्या यही हमारे धर्म का संदेश है? क्या यही हमारे महापुरुषों की सीख है? नहीं साथियों, यही विषमता, यही अन्याय, यही पाखंड जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को राजनीति में लाया। साथियों,कर्पूरी ठाकुर जी उस समाज से आए जहाँ गरीबी थी,जहाँ शोषण था, जहाँ पिछड़े और दलित लोगों की आवाज़ नहीं थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। मैं आपको ले चलता हूँ 1978 में उस समय जब पिछड़ों को हक़ देने की बात करना राजनीतिक आत्महत्या माना जाता था,तब जननायक कर्पूरी ठाकुर जी बिहार के मुख्यमंत्री बने। और मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने वो काम किया जिसकी हिम्मत किसी में नहीं थी। उन्होंने अति पिछड़ा वर्ग को अलग पहचान दी, और 26 प्रतिशत आरक्षण वंचित, पीड़ित, शोषित समाज को देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। साथियों,उन्होंने सत्ता को सेवा का साधन बनाया, ना कि परिवार बढ़ाने का औज़ार। ना बंगला, ना बैंक बैलेंस, ना रिश्तेदारों की फौज बस एक ही सपना समान भारत, न्यायपूर्ण समाज। साथियों,आज संयुक्त जनादेश पार्टी जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की उसी विचारधारा को आगे बढ़ा रही है। हम कहते हैं, राजनीति 10–15 परिवारों की बपौती नहीं है। राजनीति 80% मेहनतकश जनता की आवाज़ है।हम कहते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोज़गार मुफ़्त और समान होना चाहिए। हम कहते हैं। जो खेत में हल चलाता है,जो सड़क साफ़ करता है,जो फैक्ट्री में पसीना बहाता है।वही इस देश का असली मालिक है। साथियों,जननायक कर्पूरी ठाकुर जी सिर्फ़ एक नेता नहीं थे, वह एक विचार थे, एक आंदोलन थे, एक क्रांति थे। साथियो! मेहनतकश भाइयों और बहनों!आज मैं आपसे भाषण देने नहीं आया हूँ, मैं आज हिसाब लेने आया हूँ! 75 साल से इस देश की सत्ता पर मुट्ठी भर लोग बैठे हैं। उन्होंने हमारी मेहनत से महल बनाए,और हमारे बच्चों को भूखा रखा! मैं पूछता हूँ ।जिस किसान ने देश को अनाज दिया, क्या उसे सम्मान मिला? जिस मजदूर ने इमारत खड़ी की, क्या उसे घर मिला?नहीं मिला! आज देश की राजनीति में 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज केवल वोटर है, और 20 फ़ीसदी लोग राजा बने बैठे हैं। संयुक्त जनादेश पार्टी इस गुलामी की राजनीति को तोड़ने आई है। अब मेहनतकश समाज खुद सत्ता चलाएगा! हम साफ़ कहते हैं 👉 हमारी पार्टी 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज को राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोजगार दिलाकर रहेगी। यह कोई घोषणा नहीं, इंकलाब है! आज गरीब का बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़कर भी पीछे रह जाता है। क्यों?क्योंकि शिक्षा भी व्यापार बना दी गई है! हम कहते हैं ।शिक्षा बिकेगी नहीं, बँटेगी! आज अस्पताल अमीरों के लिए हैं, गरीब के लिए श्मशान है! हम कहते हैं इलाज पर ताला नहीं, दलालों पर ताला लगेगा! न्याय?गरीब को तारीख मिलती है,अमीर को फैसला!हम इस न्याय व्यवस्था को बदलकर रख देंगे! रोजगार की बात करो तो युवा की डिग्री मज़ाक बन चुकी है! हम कहते हैं। खैरात नहीं, रोजगार चाहिए!अब सुन लो हमारी सबसे बड़ी घोषणा,जो सत्ता के ठेकेदारों को हिला देगी! 👉 संयुक्त जनादेश पार्टी सत्ता में आई तो हर जाति का मुख्यमंत्री बनेगा! 👉 छह-छह महीने तक सत्ता समाज में घूमेगी! 👉 अब कोई जाति मालिक नहीं बनेगी, सब बराबर होंगे! जो लोग कहते हैं यह संभव नहीं है, मैं उनसे पूछता हूँ — जब मुख्यमंत्री कुर्सी कुछ परिवारों में घूम सकती है, तो समाज में क्यों नहीं? हम जाति की राजनीति नहीं करते, हम जाति के शोषण की राजनीति खत्म करते हैं! आज मैं जनता से पूछता हूँ क्या आप अपने बच्चों को नौकर बनते देखना चाहते हैं, या हुक्म चलाते देखना चाहते हैं? अगर हुक्म चलाना है, तो सत्ता बदलनी पड़ेगी! व्यवस्था बदलनी पड़ेगी! अब जनता जाग चुकी है! अब वोट देकर चुप बैठने का ज़माना खत्म हो गया है! मैं साफ़ कहता हूँ — जो मेहनतकश समाज के हक़ में नहीं, वह सत्ता में रहने का हक़दार नहीं! शाहजहांपुर,पीलीभीतकी धरती से आज हम ऐलान करते हैं 👉 80 फ़ीसदी मेहनतकश समाज राज करेगा!
- सोनी शुक्ला क्रांति लखनऊ उत्तर प्रदेश1
- प्रतापगढ़ :- विधानसभा पट्टी के अंतर्गत विकासखंड आसपुर देवसरा के अंतर्गत ग्राम सभा उदईशाहपुर अमरगढ़ में गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति परिसर में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सेवानिवृत्त सीबीसीआईडी अधिकारी श्री त्रिभुवन नाथ तिवारी जी ने की। ध्वजारोहण बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति के सचिव श्री सचिन ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ‘गब्बर सिंह’ जी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान छोटी बालिकाओं पलक एवं महक ने देशभक्ति से ओत-प्रोत भाषण प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर मंच पर श्री कृष्णकांत तिवारी (पुजारी),लेखपाल श्री अशोक तिवारी जी श्री मानिक लाल त्रिगुनाइत, श्री विजय प्रताप सिंह जी, श्री दिनेश त्रिगुनाइत, श्री राकु त्रिगुनाइत, श्री बसंत तिवारी जी, श्री पीयूष शुक्ला जी श्री चंद्र प्रकाश तिवारी जी, सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणजन एवं क्षेत्रीय नागरिकों की सहभागिता और उपस्थिति रही...3
- *बाराबंकी में सनसनी: आम की बाग में पेड़ से लटका मिला युवक का शव, गांव में मचा हड़कंप* बाराबंकी जनपद के मसौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गांव से कुछ दूरी पर स्थित आम की बाग में एक युवक का शव रस्सी के सहारे पेड़ की डाल से लटकता हुआ मिला। सुबह जैसे ही ग्रामीणों की नजर शव पर पड़ी, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और खबर आग की तरह गांव व आसपास के क्षेत्र में फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। मृतक युवक की पहचान महेंद्र सिंह (27 वर्ष) पुत्र राजाराम, निवासी पहली पार के रूप में हुई है। घटनास्थल पर युवक की मोटरसाइकिल खड़ी मिली, जबकि उसका मोबाइल फोन पेड़ के नीचे पड़ा हुआ था, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मृतक चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसके तीन बड़े भाई अरविंद, वीरेंद्र कुमार और शैलेंद्र कुमार हैं। महेंद्र सिंह की चार वर्ष पूर्व शादी सफदरगंज थाना क्षेत्र के रसौली गांव में हुई थी। घटना की जानकारी मिलते ही पत्नी भी मौके पर पहुंची, जिनका रो-रो कर हाल बेहाल हो गया। माता-पिता और भाई इस घटना से गहरे सदमे में हैं। वहीं घटना के संबंध में मसौली थाना प्रभारी अजय प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले के सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। मृतक के पिता राजाराम ने बताया कि उनका बेटा बेहद होनहार और मेहनती था। वह मोटरसाइकिल पार्ट्स की दुकान चलाता था, मैकेनिक था और बिजली का काम भी जानता था। अचानक हुई इस घटना ने परिवार को तोड़ कर रख दिया है। पिता ने कहा कि इस हादसे के बाद माता-पिता और भाइयों के आंसू सूख चुके हैं। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। युवक की मौत आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और कारण, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।2
- आज गणतंत्र दिवस के 77 वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अपने खून से पत्र लिखकर UGC के द्वारा बनाए गए काले कानून का विरोध किया। #सवर्ण आर्मी सर्वेश पांडे1
- राष्ट्रीय मानवाधिकार एकता संघ आनंद कुमार रिपोर्टर इंचार्ज बाराबंकी आज संघ के द्वारा जिला कार्यालय सिद्धौर में तिरंगा फहराकर गणतंत्र दिवस मनाया गया जिसमें,, रामदास वर्मा (जिला महामंत्री ) तम्रेश कुमार (जिला उपाध्यक्ष ) लल्लन सिंह यादव ( जिला सचिव) राम अजय (जिला सचिव) दस्तगीर (जिला सचिव) हृदय कुमार (जिला सचिव) सदस्य गढ़ ,,,, अवधेश गुप्ता दीपक धीमान दिलीप कुमार चंद्रमोल विद्या राम प्रेम चन्द्र आदि लोग उपस्थित रहे।1
- रायबरेली | सड़क हादसे में युवक की मौत, परिजनों में कोहराम1
- #सोनी शुक्ला क्रांति लखनऊ उत्तर प्रदेश परमपूज्यरम पूज्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के साथ कुछ दानव प्रवृत्ति के अधिकारियों द्वारा किया गया अभद्र व्यवहार—यह केवल एक संत का नहीं, बल्कि सनातन धर्म का खुला अपमान है। उनके शिष्यों की शिखा पकड़कर अपमानित करना हमारी संस्कृति, मर्यादा और आस्था पर सीधा प्रहार है। मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से स्पष्ट मांग करती हूँ कि ऐसे अधिकारियों की तुरंत पहचान कर उन्हें कठोर दंड दिया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सनातन परंपराओं और संत समाज और नारी शक्ति का अपमान करने का साहस न कर सकें। जनहित सर्व समाज सेवा समिति संपूर्ण भारत राष्ट्रीय अध्यक्ष कवियत्री सोनी शुक्ला क्रांति लखनऊ उत्तर प्रदेश1
- बीजेपी के सभी नेताओं को चेतावनी अगर आदरणीय सिटी मजिस्ट्रेट बरेली के पद पर रहे अलंकार त्रिवेदी जी को अगर किसी ने पागल शब्द का उपयोग किया उसकी में दंड देने का कार्य शुरू करूंगी सोनी शुक्ला क्रांति लखनऊ उत्तर प्रदेश1
- जिम्मेदारो की मूक सहमति हरियाली पर चल रहा आरा लखनऊ वन रेंज के गुलरियन खेडा नहर के पास बेखौफ लकड़ी ठेकेदार ने दो दर्जन आम पेडो की बलि चढा दी। अवैध कटान लकड़ी को क्षेत्र की वैध आरा मशीनों पर पहुचा दी गई पर जिम्मेदारो की नींद नहीं खुली। ग्रामीणों की मानें तो रात भर पेट्रोल आरा मशीनों से पेड़ों को कटा गया और ट्रैक्टर ट्राली से लकड़ी मशीनों पर पहुचती रही। अगर ग्रामीणों की माने तो आसिफ नामक ठेकेदार ने हरियाली को किया नष्ट।1