भारतीय रेल में रनिंग कर्मचारियों, खासकर लोको पायलटों पर 'जितनी चादर हो, उतने पैर पसारने चाहिए' वाला मुहावरा उल्टा बैठता दिख रहा है। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण पैर इतने पसारे जा रहे हैं कि चादर फट चुकी है, जिसे 'ओवरटाइम भत्ते' के धागे से सिला जा रहा है। इस ओवरटाइम को आम बोलचाल में 'अतिरिक्त कमाई का जादुई चिराग' कहा जा रहा है, और कुछ लोको पायलट इसे आपदा में अवसर के रूप में देख रहे हैं। खासकर पूर्व मध्य रेलवे (ECR Zone) में लोको पायलट 12 से 16 घंटे की नॉन-स्टॉप ड्यूटी कर रहे हैं। आँखों में नींद और थकान होने के बावजूद, उनके दिमाग में ओवरटाइम के रुपयों का कैलकुलेटर चलता रहता है, जहाँ लंबी ड्यूटी का मतलब मोटा बैंक बैलेंस है। इस खेल में केवल ट्रेन चलाने वाले ही नहीं, अधिकारी संवर्ग भी शामिल है। वे कम कर्मचारियों से क्षमता से बाहर काम लेने को 'कुशल प्रबंधन' का नाम दे रहे हैं, जिसके लिए उन्हें वाहवाही और अवार्ड मिल रहे हैं। कागजों पर 'कम लागत में ज्यादा काम' दिखाकर अधिकारियों की तरक्की का रास्ता साफ हो रहा है। लेकिन इस वाहवाही और पैसों की दौड़ के बीच रेलवे के संरक्षा और सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन हो रहा है, जो केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। नियमों के उल्लंघन से बड़े रेल हादसे हो चुके हैं और जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। सवाल उठता है कि क्या केवल कागजों पर सुरक्षा नियमों की कसमें खा लेने या निर्देशों का हवाला दे देने से जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? ये नियम तब तक बेअसर हैं जब तक उन्हें जमीनी हकीकत पर कड़ाई से लागू न किया जाए, और जो लोको पायलट नियमों का पालन करते हैं, वे भी इस व्यवस्था में खुद को बेबस पाते हैं। यह स्थिति लोको पायलटों के लिए ढेर सारे पैसे तो ला सकती है, लेकिन एक पिता, एक पति और एक बेटे के रूप में परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। थकान की अंधी रफ्तार में हुई कोई भी चूक ऐसी भरपाई न होने वाली क्षति का कारण बन सकती है, जिसे रेलवे का कोई भी भत्ता कभी पूरा नहीं कर पाएगा, क्योंकि बीता हुआ समय और गया हुआ इंसान कभी वापस नहीं लौटता। यह सोचने वाली बात है कि यह कड़वी सच्चाई अंतरात्मा को कितनी झकझोरती है, या केवल कुछ शब्द बनकर रह जाती है, क्योंकि जिंदगी की पटरी सुरक्षित रखना पूरी तरह उनके ही हाथ में है।
भारतीय रेल में रनिंग कर्मचारियों, खासकर लोको पायलटों पर 'जितनी चादर हो, उतने पैर पसारने चाहिए' वाला मुहावरा उल्टा बैठता दिख रहा है। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण पैर इतने पसारे जा रहे हैं कि चादर फट चुकी है, जिसे 'ओवरटाइम भत्ते' के धागे से सिला जा रहा है। इस ओवरटाइम को आम बोलचाल में 'अतिरिक्त कमाई का जादुई चिराग' कहा जा रहा है, और कुछ लोको पायलट इसे आपदा में अवसर के रूप में देख रहे हैं। खासकर पूर्व मध्य रेलवे (ECR Zone) में लोको पायलट 12 से 16 घंटे की नॉन-स्टॉप ड्यूटी कर रहे हैं। आँखों में नींद और थकान होने के बावजूद, उनके दिमाग में ओवरटाइम के रुपयों का कैलकुलेटर चलता रहता है, जहाँ लंबी ड्यूटी का मतलब मोटा बैंक बैलेंस है। इस खेल में केवल ट्रेन चलाने वाले ही नहीं, अधिकारी संवर्ग भी शामिल है। वे कम कर्मचारियों से क्षमता से बाहर काम लेने को 'कुशल प्रबंधन' का नाम दे रहे हैं, जिसके लिए उन्हें वाहवाही और अवार्ड मिल रहे हैं। कागजों पर 'कम लागत में ज्यादा काम' दिखाकर अधिकारियों की तरक्की का रास्ता साफ हो रहा है। लेकिन इस वाहवाही और पैसों की दौड़ के बीच रेलवे के संरक्षा और सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन हो रहा
है, जो केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। नियमों के उल्लंघन से बड़े रेल हादसे हो चुके हैं और जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। सवाल उठता है कि क्या केवल कागजों पर सुरक्षा नियमों की कसमें खा लेने या निर्देशों का हवाला दे देने से जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? ये नियम तब तक बेअसर हैं जब तक उन्हें जमीनी हकीकत पर कड़ाई से लागू न किया जाए, और जो लोको पायलट नियमों का पालन करते हैं, वे भी इस व्यवस्था में खुद को बेबस पाते हैं। यह स्थिति लोको पायलटों के लिए ढेर सारे पैसे तो ला सकती है, लेकिन एक पिता, एक पति और एक बेटे के रूप में परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। थकान की अंधी रफ्तार में हुई कोई भी चूक ऐसी भरपाई न होने वाली क्षति का कारण बन सकती है, जिसे रेलवे का कोई भी भत्ता कभी पूरा नहीं कर पाएगा, क्योंकि बीता हुआ समय और गया हुआ इंसान कभी वापस नहीं लौटता। यह सोचने वाली बात है कि यह कड़वी सच्चाई अंतरात्मा को कितनी झकझोरती है, या केवल कुछ शब्द बनकर रह जाती है, क्योंकि जिंदगी की पटरी सुरक्षित रखना पूरी तरह उनके ही हाथ में है।
- चंदौली विकासखंड चहनिया के ग्रामसभा मजिदहा में 22 जून, सोमवार को एक ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पूर्व प्रधान और वरिष्ठ समाजसेवी बब्बू सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव में भगवान श्रीराम-सीता, रामदरबार और माता दुर्गा की प्रतिमाओं की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। यह तीन दिवसीय अनुष्ठान 20 जून से शुरू हुआ था, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया है। प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य आयोजन के साथ ही, आज (22 जून) एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया है।1
- वाराणसी के लालपुर पांडेयपुर थाना क्षेत्र के हुकुलगंज में एक कुएं की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। कई दिनों तक काम रोकने के बाद आज नगर निगम की एक टीम मौके पर पहुंची थी, जिसका उद्देश्य वहां हो रहे निर्माण कार्य और दीवार को ध्वस्त करना था। जब नगर निगम की टीम निर्माण रोकने और दीवार तोड़ने पहुंची, तो कब्जा कर रहे लोगों ने उनके रोकने के बावजूद काम नहीं रोका और टीम के साथ तीखी बहस की। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय पार्षद से भी इन लोगों की तीखी नोकझोंक हुई। फिलहाल, हुकुलगंज क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, और स्थिति को नियंत्रित करने व विवाद सुलझाने के लिए बातचीत जारी है।1
- धीना के गुरैनी पंप कैनाल स्थित गंगा तट पर किसानों का गंगा कटान रोकथाम की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 25वें दिन भी जारी रहा। धरनारत किसानों ने प्रशासन पर उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है। किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने बताया कि 25 दिनों से लगातार धरना प्रदर्शन के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। किसान नेता रविंद्र सिंह 'मुन्ना' ने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता के कारण हजारों एकड़ कृषि भूमि गंगा की धारा में समाहित हो चुकी है, और सिंचाई विभाग द्वारा मिट्टी भरी बोरियां डालकर कटान रोकने का प्रयास केवल एक अस्थायी उपाय है, जो बिल्कुल भी स्थायी समाधान नहीं है। किसानों ने पत्थरों के बोल्डर, तारजाल और अन्य तकनीकी उपायों के माध्यम से जमीनी स्तर पर मजबूत कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है। धरने की अध्यक्षता कर रहे शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर आकर सिर्फ औपचारिकता निभाकर लौट गए, जबकि किसानों की मूल समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है। दीनानाथ श्रीवास्तव ने उम्मीद जताई कि 21 जून को क्षेत्रीय विधायक के आने की संभावना है और किसान उनसे आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कटानरोधी कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई, तो किसान आर-पार की लड़ाई लड़ने को बाध्य होंगे। किसानों ने साफ किया है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। इस धरना-प्रदर्शन में आशीष कुमार, मुन्ना सिंह, प्यारेलाल, शिवराज, रामआशीष, धनंजय, गुरुप्रकाश, रामदयाल सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।3
- चंदौली विकासखंड चहनिया के ग्रामसभा मजिदहा में आज 22 जून, सोमवार को एक ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन हो रहा है। पूर्व प्रधान और वरिष्ठ समाजसेवी बब्बू सिंह के नेतृत्व में भगवान श्रीराम-सीता, रामदरबार और माता दुर्गा की प्रतिमाओं की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। यह तीन दिवसीय अनुष्ठान 20 जून से शुरू हुआ था, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। महोत्सव के पहले दिन, शनिवार को पूर्व प्रधान बब्बू सिंह के नेतृत्व में 108 कन्याओं ने बलुआ घाट से मां गंगा का पवित्र जल भरकर भव्य कलश यात्रा निकाली। इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में "जय श्रीराम जय माता दी" के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा था। वहीं, रविवार 21 जून को रामायण पाठ, हवन-पूजन और यज्ञ संपन्न हुए। आज सोमवार को विद्वान आचार्यों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के बाद दोपहर 1 बजे से एक विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जो श्रद्धालुओं के आगमन तक जारी रहेगा। आयोजक पूर्व प्रधान बब्बू सिंह और ग्रामवासियों ने बताया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गांव की एकता, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। गांव में भव्य सजावट, साफ-सफाई और प्रकाश की व्यवस्था की गई है, और बब्बू सिंह ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं तथा धर्मप्रेमियों से कार्यक्रम में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है। महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।1
- चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा किए गए धरना प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने मुकदमा दर्ज किया है। जिला पंचायत सदस्य अंजनी सिंह इस मुकदमे के संबंध में चर्चा में हैं।1
- चंदौली जिले में सीवर का स्तर बिगड़ने के कारण घरों और सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। इस गंभीर समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए एक जोरदार प्रदर्शन किया है।1
- उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में तहसील दिवस के मौके पर एक फरियादी ने अधिकारियों के सामने ही अपनी शिकायत जोर-जोर से रखी। फरियादी ने चिल्ला-चिल्लाकर बताया कि वह आठ बार से शिकायत कर रहा है, लेकिन अब तक उसकी बात पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। उसने आरोप लगाया कि सभी अधिकारी और कर्मचारी मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं।1
- चहनियां कस्बे की ग्रामसभा खंडवारी में भीषण गर्मी के बीच पशु-पक्षियों और निराश्रित जीव-जंतुओं के लिए शुद्ध पेयजल का एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। पूर्व प्रधान और वरिष्ठ समाजसेवी भज्जू राम सिंह चौहान के नेतृत्व में की गई यह पहल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। इस अभियान के तहत गांव के प्रमुख स्थानों पर जलपात्र और टंकियां स्थापित की गई हैं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से गायों, बछड़ों, पक्षियों और अन्य सभी जीवों के लिए नियमित रूप से स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भीषण गर्मी में पानी की कमी से किसी भी जीव की जान न जाए और बेजुबान प्राणियों को सहारा मिल सके।1