मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त, हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त, हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट असुरक्षित घाट, टूटी सीढ़ियां और देर से पहुंची एंबुलेंस… दो परिवारों के बुझ गए जीवन के दीप स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से धर्मनगरी हरिद्वार में पवित्र गंगा नदी के तट पर सोमवार सुबह ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। आस्था और श्रद्धा से गंगा स्नान करने आए दो मित्र गंगा की तेज धारा में समा गए, और देखते ही देखते दो हंसते-खेलते परिवारों के जीवन में ऐसा अंधेरा छा गया, जिसे शायद कभी मिटाया नहीं जा सकेगा। यह दर्दनाक हादसा भूपतवाला ठोकर नंबर‑1 के कच्चे और असुरक्षित घाट पर हुआ, जहां सुरक्षा के नाम पर न सीढ़ियां सही हैं, न जंजीरें और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। दोस्ती निभाने उतरा मित्र… और दोनों ने खो दी जिंदगी मृतकों की पहचान बृजेश कुमार त्रिपाठी (43) पुत्र राजनाथ त्रिपाठी निवासी गाजियाबाद और उनके मित्र सचिन त्यागी (39) पुत्र जगत सिंह त्यागी के रूप में हुई है। दोनों अपने परिवारों के साथ हरिद्वार घूमने आए थे और सप्त सरोवर क्षेत्र के पास ठहरे हुए थे। सुबह श्रद्धा और भक्ति के साथ दोनों गंगा स्नान करने के लिए घाट पर पहुंचे। बताया जाता है कि जब बृजेश त्रिपाठी गंगा में स्नान कर रहे थे, तभी अचानक उनका पैर फिसल गया और वह गहराई में चले गए। अपने मित्र को डूबता देख सचिन त्यागी तुरंत उन्हें बचाने के लिए गंगा में उतर गए। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था… सचिन को तैरना नहीं आता था। कुछ ही क्षणों में दोनों मित्र गंगा की तेज धारा में समा गए। “बृजेश उठो… बबुआ उठो…”—पत्नी की चीखों ने दहला दिया घाट घटना की सूचना मिलते ही जल पुलिस मौके पर पहुंची और गंगा में खोज अभियान शुरू किया। एक जवान ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर गंगा की बर्फ जैसी ठंडी धारा में बार-बार डुबकी लगा रहा था। ठंड के कारण उसके हाथ-पैर कांप रहे थे, लेकिन वह लगातार डूबे लोगों को ढूंढने की कोशिश करता रहा। करीब 20-25 मिनट की मशक्कत के बाद पहला शव गंगा से बाहर निकाला गया। जैसे ही शव किनारे लाया गया, मृतक की पत्नी अपने पति से लिपट गई और फूट-फूट कर रोते हुए चिल्लाने लगी— एक महिला डॉक्टर ने मौके पर ही सीपीआर देकर उसकी सांस वापस लाने की कोशिश की, लेकिन कोई चमत्कार नहीं हुआ। दूसरी पत्नी की पुकार—“प्लीज मेरे पति को भी ढूंढो…” इधर दूसरी महिला अपने पति को ढूंढने के लिए जल पुलिस से हाथ जोड़कर विनती कर रही थी— “भैया… प्लीज उंनको भी जल्दी ढूंढो…” जल पुलिस के जवान फिर गंगा में कूद पड़े। करीब 20-25 मिनट बाद सचिन त्यागी का शव भी गंगा से बाहर निकाला गया। दोनों पत्नियों की चीख-पुकार, रोते-बिलखते बच्चे और गम में डूबा माहौल… घाट पर मौजूद हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर रहा था। “बृजेश… उठो… बबुआ उठो… कोई डॉक्टर बुलाओ… एंबुलेंस बुलाओ…” उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। एंबुलेंस की देरी ने बढ़ाया दर्द सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा हुआ जब सूचना मिलने के बावजूद 108 एंबुलेंस काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंची। पहला शव निकलने के लगभग 25 मिनट तक घाट और सड़क पर पड़ा रहा, जबकि परिवार बार-बार चिल्ला रहा था— “एंबुलेंस बुलाओ… जल्दी अस्पताल ले चलो…” लोगों का कहना था कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती और तुरंत अस्पताल ले जाया जाता, तो शायद जीवन बचाने की थोड़ी उम्मीद बन सकती थी। आखिरकार दोनों शवों को जिला अस्पताल हरिद्वार ले जाया गया। एक और युवक गंगा में लापता इस घटना के बीच यह भी जानकारी मिली कि सनिवार शाम परमार्थ निकेतन घाट के पास भी 26 वर्श क एक युवक गंगा में डूब गया था। युवक की पहचान नवीन पाठक पुत्र भवन पाठक निवासी बागेश्वर के रूप में हुई है। समाचार लिखे जाने तक जल पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। टूटे घाट, गायब सुरक्षा… हादसों को न्योता स्थानीय लोगों का कहना है कि भूपतवाला और सप्त सरोवर क्षेत्र के कई स्नान घाट बेहद खराब हालत में हैं। सीढ़ियां टूटी हुई हैं लोहे की जंजीरें और एंगल जंग लगकर टूट चुके हैं कई घाटों पर चेतावनी बोर्ड तक नहीं हैं जल पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं है लोग मजबूरी में पत्थरों के सहारे गंगा में उतरते हैं और फिसलकर हादसे का शिकार हो जाते हैं।  स्थानीय लोगों की चेतावनी फिर हुई सच स्थानीय निवासी सत्य प्रकाश का कहना है कि कई बार प्रशासनिक बैठकों में घाटों की सुरक्षा व्यवस्था सुधारने और जल पुलिस की तैनाती की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि यदि प्रशासन इन घाटों को सुरक्षित नहीं बना सकता, तो ऐसे घाटों को बंद कर देना चाहिए।  दो परिवारों के बुझ गए घर के दीप इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है— अब उन छोटे-छोटे बच्चों का क्या होगा, जो अपने पिता के लौटने का इंतजार कर रहे थे? उन पत्नियों का क्या होगा, जिनके जीवन का सहारा हमेशा के लिए छिन गया? गंगा किनारे यह दृश्य हर किसी को यही सोचने पर मजबूर कर रहा था कि एक परिवार का मुखिया चला जाए तो उसका घर कैसे चलता होगा… निष्कर्ष हरिद्वार में गंगा स्नान केवल आस्था नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी प्रश्न बन चुका है। यदि प्रशासन समय रहते घाटों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और आपात सेवाओं को मजबूत नहीं करता, तो ऐसी दर्दनाक घटनाएं भविष्य में भी दोहराई जाती रहेंगी। मां गंगा के तट पर उमड़ी श्रद्धा की भीड़ को सुरक्षा की भी उतनी ही आवश्यकता है, जितनी आस्था की। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार — रामेश्वर गौड़
मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त, हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त, हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट मां गंगा की गोद में समा गए दो दोस्त हरिद्वार में गंगा स्नान बना मातम, पत्नियों की चीखों से दहल उठा घाट असुरक्षित घाट, टूटी सीढ़ियां और देर से पहुंची एंबुलेंस… दो परिवारों के बुझ गए जीवन के दीप स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से धर्मनगरी हरिद्वार में पवित्र गंगा नदी के तट पर सोमवार सुबह ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। आस्था और श्रद्धा से गंगा स्नान करने आए दो मित्र गंगा की तेज धारा में समा गए, और देखते ही देखते दो हंसते-खेलते परिवारों के जीवन में ऐसा अंधेरा छा गया, जिसे शायद कभी मिटाया नहीं जा सकेगा। यह दर्दनाक हादसा भूपतवाला ठोकर नंबर‑1 के कच्चे और असुरक्षित घाट पर हुआ, जहां सुरक्षा के नाम पर न सीढ़ियां सही हैं, न जंजीरें और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। दोस्ती निभाने उतरा मित्र… और दोनों ने खो दी जिंदगी मृतकों की पहचान बृजेश कुमार त्रिपाठी (43) पुत्र राजनाथ त्रिपाठी निवासी गाजियाबाद और उनके मित्र सचिन त्यागी (39) पुत्र जगत सिंह त्यागी के रूप में हुई है। दोनों अपने परिवारों के साथ हरिद्वार घूमने आए थे और सप्त सरोवर क्षेत्र के पास ठहरे हुए थे। सुबह श्रद्धा और भक्ति के साथ दोनों
गंगा स्नान करने के लिए घाट पर पहुंचे। बताया जाता है कि जब बृजेश त्रिपाठी गंगा में स्नान कर रहे थे, तभी अचानक उनका पैर फिसल गया और वह गहराई में चले गए। अपने मित्र को डूबता देख सचिन त्यागी तुरंत उन्हें बचाने के लिए गंगा में उतर गए। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था… सचिन को तैरना नहीं आता था। कुछ ही क्षणों में दोनों मित्र गंगा की तेज धारा में समा गए। “बृजेश उठो… बबुआ उठो…”—पत्नी की चीखों ने दहला दिया घाट घटना की सूचना मिलते ही जल पुलिस मौके पर पहुंची और गंगा में खोज अभियान शुरू किया। एक जवान ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर गंगा की बर्फ जैसी ठंडी धारा में बार-बार डुबकी लगा रहा था। ठंड के कारण उसके हाथ-पैर कांप रहे थे, लेकिन वह लगातार डूबे लोगों को ढूंढने की कोशिश करता रहा। करीब 20-25 मिनट की मशक्कत के बाद पहला शव गंगा से बाहर निकाला गया। जैसे ही शव किनारे लाया गया, मृतक की पत्नी अपने पति से लिपट गई और फूट-फूट कर रोते हुए चिल्लाने लगी— एक महिला डॉक्टर ने मौके पर ही सीपीआर देकर उसकी सांस वापस लाने की कोशिश की, लेकिन कोई चमत्कार नहीं हुआ। दूसरी पत्नी की पुकार—“प्लीज मेरे पति को भी ढूंढो…” इधर दूसरी महिला अपने पति को ढूंढने के लिए जल पुलिस से हाथ जोड़कर विनती कर रही थी— “भैया… प्लीज उंनको भी जल्दी ढूंढो…” जल पुलिस के जवान फिर गंगा
में कूद पड़े। करीब 20-25 मिनट बाद सचिन त्यागी का शव भी गंगा से बाहर निकाला गया। दोनों पत्नियों की चीख-पुकार, रोते-बिलखते बच्चे और गम में डूबा माहौल… घाट पर मौजूद हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर रहा था। “बृजेश… उठो… बबुआ उठो… कोई डॉक्टर बुलाओ… एंबुलेंस बुलाओ…” उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। एंबुलेंस की देरी ने बढ़ाया दर्द सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा हुआ जब सूचना मिलने के बावजूद 108 एंबुलेंस काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंची। पहला शव निकलने के लगभग 25 मिनट तक घाट और सड़क पर पड़ा रहा, जबकि परिवार बार-बार चिल्ला रहा था— “एंबुलेंस बुलाओ… जल्दी अस्पताल ले चलो…” लोगों का कहना था कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती और तुरंत अस्पताल ले जाया जाता, तो शायद जीवन बचाने की थोड़ी उम्मीद बन सकती थी। आखिरकार दोनों शवों को जिला अस्पताल हरिद्वार ले जाया गया। एक और युवक गंगा में लापता इस घटना के बीच यह भी जानकारी मिली कि सनिवार शाम परमार्थ निकेतन घाट के पास भी 26 वर्श क एक युवक गंगा में डूब गया था। युवक की पहचान नवीन पाठक पुत्र भवन पाठक निवासी बागेश्वर के रूप में हुई है। समाचार लिखे जाने तक जल पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। टूटे घाट, गायब सुरक्षा… हादसों को न्योता स्थानीय लोगों का कहना है कि भूपतवाला और सप्त सरोवर क्षेत्र के कई स्नान घाट बेहद खराब हालत में हैं। सीढ़ियां टूटी हुई हैं लोहे की जंजीरें और एंगल जंग लगकर टूट चुके हैं कई
घाटों पर चेतावनी बोर्ड तक नहीं हैं जल पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं है लोग मजबूरी में पत्थरों के सहारे गंगा में उतरते हैं और फिसलकर हादसे का शिकार हो जाते हैं।  स्थानीय लोगों की चेतावनी फिर हुई सच स्थानीय निवासी सत्य प्रकाश का कहना है कि कई बार प्रशासनिक बैठकों में घाटों की सुरक्षा व्यवस्था सुधारने और जल पुलिस की तैनाती की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि यदि प्रशासन इन घाटों को सुरक्षित नहीं बना सकता, तो ऐसे घाटों को बंद कर देना चाहिए।  दो परिवारों के बुझ गए घर के दीप इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है— अब उन छोटे-छोटे बच्चों का क्या होगा, जो अपने पिता के लौटने का इंतजार कर रहे थे? उन पत्नियों का क्या होगा, जिनके जीवन का सहारा हमेशा के लिए छिन गया? गंगा किनारे यह दृश्य हर किसी को यही सोचने पर मजबूर कर रहा था कि एक परिवार का मुखिया चला जाए तो उसका घर कैसे चलता होगा… निष्कर्ष हरिद्वार में गंगा स्नान केवल आस्था नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी प्रश्न बन चुका है। यदि प्रशासन समय रहते घाटों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और आपात सेवाओं को मजबूत नहीं करता, तो ऐसी दर्दनाक घटनाएं भविष्य में भी दोहराई जाती रहेंगी। मां गंगा के तट पर उमड़ी श्रद्धा की भीड़ को सुरक्षा की भी उतनी ही आवश्यकता है, जितनी आस्था की। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार — रामेश्वर गौड़
- कार के शीशे ब्लैक पन्नी से पूरी तरह कवर कर आखिर कैसे पहुंची हरिद्वार रस्ते में अनेकों पुलिस थाने और चौकियां होने के बावजूद हरिद्वार में कैसे होगई दाखिल1
- The Aman Times डोईवाला में मारपीट व तोड़फोड़ के आरोपी गिरफ्तार शांति भंग में पुलिस ने किया चालान देहरादून। डोईवाला कोतवाली क्षेत्र के नुनावाला में युवक दीपक के साथ मारपीट और उसकी गाड़ी में तोड़फोड़ करने के मामले में डोईवाला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी के खिलाफ शांति भंग की धाराओं में चालान किया गया है। 🔹 गिरफ्तार आरोपी ओम रावत (27 वर्ष) पुत्र वीरेन्द्र सिंह रावत, निवासी वौंसरी, थाना पौड़ी गढ़वाल अजीत सिंह रावत (30 वर्ष) पुत्र वीरेन्द्र सिंह रावत, निवासी वौंसरी, थाना पौड़ी गढ़वाल अंश रावत (19 वर्ष) पुत्र मोहन सिंह रावत, निवासी भोगपुर, रानीपोखरी, देहरादून गौरव (19 वर्ष) पुत्र राजपाल पुंडीर, निवासी भोगपुर, रानीपोखरी, देहरादून 👉 पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने युवक के साथ मारपीट कर उसकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया था, जिस पर कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।1
- सब्जी से भरा छोटा हाथी स्टीयरिंग जाम होने से रोड से उतर कर खंदक में पलटा। छोटा हाथी पलटने से सब्जी बेचने निकले हाथी में सवार दो लोग मामूली रूप से हुए घायल। राहगीरों ने पलटे छोटे हाथी को खंदक से पलट कर कराया सीधा। बाइक सवार को बचाने के चक्कर में स्टीयरिंग हुआ छोटे हाथी का जाम। हाथी रोड से सीधा होते ही दोनों अपने काम पर हुए रवाना पूरा मामला नगीना थाना क्षेत्र के गांव तुखमापुर से नंदपुर को जाने वाली रोड का1
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- They boost metabolism, support healthy testosterone levels through healthy fats, and improve eye health with antioxidants like lutein. They are also an excellent, low-calorie option for weight management.1
- टिहरी नवनियुक्त पुलिस कप्तान श्वेता चौबे ने गिनाई प्राथमिकतायें1
- Post by Dpk Chauhan1
- The Aman Times देहरादून में पुलिस ने “ऑपरेशन नाइट स्ट्राइक” के तहत सड़क किनारे खड़ी कारों में बार बनाकर शराब पीने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। देर रात चलाए गए इस अभियान में कई लोगों को पकड़ा गया और उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना कानूनन अपराध है और इससे यातायात व्यवस्था व कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों की चेकिंग भी की गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।1
- गैस खत्म होने पर अब नहीं होगी परेशानी! शादी-विवाह और बड़े आयोजनों के लिए सरकार का बड़ा फैसला—डायल करें 1077 और पाएं तुरंत मदद।1