राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की एक और बड़ी लापरवाही Re-NEET 2026 परीक्षा के दौरान सामने आई है, जहाँ पटना के दानापुर (शाहपुर) में परीक्षा शुरू होने से मात्र 10 मिनट पहले ही परीक्षा केंद्र बदल दिया गया। इस अचानक हुए बदलाव के कारण कई छात्र समय पर नए केंद्र नहीं पहुँच पाए और परीक्षा देने से वंचित रह गए। इसके बाद, आक्रोशित परिजनों ने भारी हंगामा करते हुए सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, अभ्यर्थियों ने सुबह 11 बजे अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया था, जिसमें शाहबाबाद/दानापुर क्षेत्र का पता अंकित था। छात्रों को पहले केंद्र के अंदर एंट्री भी दे दी गई थी, लेकिन परीक्षा शुरू होने से ठीक 10 मिनट पहले अधिकारियों ने बताया कि उनका सेंटर बदल चुका है। आखिरी वक्त पर केंद्र बदले जाने और सख्त 'नो-लेट' नीति के चलते, कुछ अभ्यर्थी केवल 2 मिनट की देरी की वजह से भी परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं पा सके और उन्हें रोते हुए बाहर देखा गया। इस प्रकरण से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे सरकार परीक्षा कराना ही नहीं चाहती। दानापुर ही नहीं, बल्कि 21 जून 2026 को हुई इस पुनर्परीक्षा में देश के कई अन्य हिस्सों से भी NTA की गंभीर तकनीकी खामियाँ सामने आई हैं। महाराष्ट्र के नागपुर के एक छात्र को भारत के बजाय सीधे आबू धाबी (UAE) का परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया था, जिसे शिकायत के बाद सुधारा गया। वहीं, ओडिशा की संजना संजीबनी को उनका केंद्र 1500 किलोमीटर दूर देहरादून दे दिया गया था, जिसे बाद में बदलकर भुवनेश्वर किया गया। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी 'हरिवंश राय बच्चन सांस्कृतिक केंद्र' को बदलकर अंतिम समय में नया वेन्यू 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर' कर दिया गया। एक बड़ा सवाल यह उठता है कि जब NTA, चाहे वह NEET हो या Re-NEET, परीक्षा समय पर नहीं करा सकती या हर परीक्षा लीक हो जाती है, और कभी परीक्षा से 10 मिनट पहले ही केंद्र 50 किलोमीटर दूर कर दिया जाता है, तो क्या सरकार को यह भी नहीं पता कि 50 किलोमीटर की दूरी 10 मिनट में कैसे पूरी की जा सकेगी? यदि सरकार समय पर परीक्षा नहीं करा सकती और बेरोजगारों को नौकरी नहीं दे सकती, तो ऐसी सरकार और ऐसे शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की एक और बड़ी लापरवाही Re-NEET 2026 परीक्षा के दौरान सामने आई है, जहाँ पटना के दानापुर (शाहपुर) में परीक्षा शुरू होने से मात्र 10 मिनट पहले ही परीक्षा केंद्र बदल दिया गया। इस अचानक हुए बदलाव के कारण कई छात्र समय पर नए केंद्र नहीं पहुँच पाए और परीक्षा देने से वंचित रह गए। इसके बाद, आक्रोशित परिजनों ने भारी हंगामा करते हुए सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। सोशल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, अभ्यर्थियों ने सुबह 11 बजे अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया था, जिसमें शाहबाबाद/दानापुर क्षेत्र का पता अंकित था। छात्रों को पहले केंद्र के अंदर एंट्री भी दे दी गई थी, लेकिन परीक्षा शुरू होने से ठीक 10 मिनट पहले अधिकारियों ने बताया कि उनका सेंटर बदल चुका है। आखिरी वक्त पर केंद्र बदले जाने और सख्त 'नो-लेट' नीति के चलते, कुछ अभ्यर्थी केवल 2 मिनट की देरी की वजह से भी परीक्षा कक्ष में प्रवेश नहीं पा सके और उन्हें रोते हुए बाहर देखा गया। इस प्रकरण से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे सरकार परीक्षा कराना ही नहीं चाहती। दानापुर ही नहीं, बल्कि 21 जून 2026 को हुई इस पुनर्परीक्षा में देश के कई अन्य हिस्सों से भी NTA की गंभीर तकनीकी खामियाँ सामने आई हैं। महाराष्ट्र के नागपुर के एक छात्र को भारत के बजाय सीधे आबू धाबी (UAE) का परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया था, जिसे शिकायत के बाद सुधारा गया। वहीं, ओडिशा की संजना संजीबनी को उनका केंद्र 1500 किलोमीटर दूर देहरादून दे दिया गया था, जिसे बाद में बदलकर भुवनेश्वर किया गया। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी 'हरिवंश राय बच्चन सांस्कृतिक केंद्र' को बदलकर अंतिम समय में नया वेन्यू 'इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर' कर दिया गया। एक बड़ा सवाल यह उठता है कि जब NTA, चाहे वह NEET हो या Re-NEET, परीक्षा समय पर नहीं करा सकती या हर परीक्षा लीक हो जाती है, और कभी परीक्षा से 10 मिनट पहले ही केंद्र 50 किलोमीटर दूर कर दिया जाता है, तो क्या सरकार को यह भी नहीं पता कि 50 किलोमीटर की दूरी 10 मिनट में कैसे पूरी की जा सकेगी? यदि सरकार समय पर परीक्षा नहीं करा सकती और बेरोजगारों को नौकरी नहीं दे सकती, तो ऐसी सरकार और ऐसे शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।
- मुंबई में नीट री-एग्जाम के दौरान कड़े नियमों के चलते दो छात्राओं को परीक्षा देने से वंचित होना पड़ा, जिससे परीक्षा केंद्र के बाहर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। यह घटना परेल स्थित महर्षि दयानंद कॉलेज में हुई, जहाँ छात्राओं को गेट बंद होने के निर्धारित समय 1:30 बजे के बाद केवल 2 मिनट की देरी से पहुंचने के कारण केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। परीक्षा केंद्रों पर समय-सीमा (गेट क्लोजिंग टाइम) का अत्यंत सख्ती से पालन किया जाता है, जिसके कारण छात्रों को थोड़ी सी भी देरी, चाहे वह 1 या 2 मिनट की ही क्यों न हो, होने पर सेंटर के भीतर जाने की अनुमति नहीं मिलती है।1
- देहरादून में प्रदेश कांग्रेस ने अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में सचिवालय तक कूच कर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने सरकार पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने, सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त न कराने और जनविरोधी नीतियां अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार प्रदेश की जमीनों को खुर्द-बुर्द कर माफियाओं के हवाले कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी नेताओं के आर्थिक हितों के कारण भूमि से जुड़े भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। गोदियाल ने दावा किया कि आचार संहिता लागू होने से पहले करीब 100 और जमीनों को चहेतों के नाम करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन बचाना सभी की जिम्मेदारी है और कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना संघर्ष जारी रखेगी।1
- टिहरी गढ़वाल में आशाराम बापू आश्रम के संचालकों के खिलाफ महिलाओं ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। महिलाओं का आरोप है कि आश्रम के संचालकों द्वारा अभद्रता और अतिक्रमण किया गया है। इस शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।1
- उत्तराखंड के नगरासू और गोविंदघाट क्षेत्र में निहंगों की कुछ लंबित मांगों को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। निहंगों का कहना है कि वे अपनी इन मांगों को प्रशासन और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना चाहते हैं। इस स्थिति के बीच यह सवाल भी उठ रहे हैं कि निहंग केवल हेमकुंड साहिब यात्रा पर आए श्रद्धालु हैं या वे अपनी मांगों के समर्थन में कोई आंदोलन करने का रास्ता अपना रहे हैं। हाल की घटनाओं के मद्देनजर, क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है और पुलिस-प्रशासन लगातार स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा क्षेत्र में शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।1
- हरिद्वार जनपद के पथरी क्षेत्र में हुई दो मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं का पथरी पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा किया है। पुलिस ने दो वाहन चोरों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर चोरी की कुल छह मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब दिनांक 21-06-2026 को थाना पथरी में मोटरसाइकिल चोरी के संबंध में मु.अ.सं. 301/26 और मु.अ.सं. 302/26 के तहत दो अभियोग पंजीकृत किए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार ने थानाध्यक्ष पथरी को चोरी की मोटरसाइकिलों की शीघ्र बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इन निर्देशों के अनुपालन में गठित पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, आसपास के क्षेत्रों में गहन जांच की और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी क्रम में, 21-06-2026 की रात मुखबिर की सूचना पर घुण्टी चौक जाने वाले मार्ग से दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान, दोनों आरोपियों ने मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं को स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से कुल छह चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुधांशु पुत्र पवन और मनीत पुत्र श्याम सिंह के रूप में हुई है, जो दोनों ग्राम धनपुरा, थाना पथरी, जनपद हरिद्वार के निवासी हैं। बरामद वाहनों के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है और पकड़े गए दोनों आरोपियों के विरुद्ध अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। बरामद की गई मोटरसाइकिलों में सिल्वर रंग की स्प्लेंडर (चे.न.- MBLHAR087HHB40546), काला रंग की स्प्लेंडर प्लस (चे.न.- HA11EVMHK85065), एक और काला रंग की स्प्लेंडर प्लस (चे.न.-HA10AGHHFG6182), काला-नीला रंग की डिस्कवर (चे.न.- MDZDSTNZZPCG3000, इंजन न.- NGBP638590), काला रंग की स्प्लेंडर प्लस (चे.न.- MBLHA10EJAHF57604, इंजन न.- HA10EAAHFB1297) और सिल्वर रंग की स्प्लेंडर प्लस (चे.न.- MBLHAR070ZHH26837, इंजन न.- HA10AGJHH40015) शामिल हैं। इस सफल अभियान में थानाध्यक्ष पथरी रविन्द्र कुमार, उ.नि. महेन्द्र पुंडीर, अ.उ.नि. जसवन्त बिष्ट, कां. नवीन कुमार और कां. जितेन्द्र पुंडीर की पुलिस टीम शामिल थी।1
- उत्तराखंड के देहरादून स्थित विकास नगर में धर्मा वाला टोल प्लाजा शिमला बायपास पर एक स्थानीय नागरिक को बेरहमी से पीटा गया। यह घटना 21.06.26 की रात की बताई जा रही है, जहाँ हरियाणा से आए कुछ लड़के-लड़कियाँ शराब के नशे में धुत होकर थोड़ी सी कहासुनी को लेकर इस मारपीट में शामिल थे और स्थानीय नागरिक को पीटते हुए नजर आए। इस मामले में पुलिस को सूचना मिली या नहीं, इस पर सवाल उठाया जा रहा है, क्योंकि अगर सूचना मिली भी है, तो अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। चेतावनी दी गई है कि यदि उत्तराखंड प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं करता है, तो इनके हौसले और बुलंद हो जाएँगे। माँग की गई है कि इनको जेल भेजा जाए ताकि आने वाले समय में कोई उत्तराखंड में ऐसी बदमाशी न कर सके।1