एक नागरिक ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की 21 जून 2026 को योग दिवस पर देखी गई 'फिटनेस' पर सवाल उठाते हुए भारत की दिशा को एक 'बहुत गंभीर समस्या' बताया है। पोस्ट में मौजूदा लोकतांत्रिक प्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई गई है, जहाँ जनता वोट देकर नेता चुनती है, लेकिन यह तय करना पार्टी के हाथ में होता है कि मुख्यमंत्री या अन्य मंत्री कौन बनेगा। लेखक इस बात पर जोर देता है कि जब आम जनता अपने राज्य का मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री या शिक्षा मंत्री नहीं चुन सकती, तो यह समझना मुश्किल है कि यह किस तरह का लोकतंत्र या प्रजातंत्र है, जिसे एक 'गंभीर मुद्दा' बताया गया है। इस संबंध में, लेखक ने सरकारी कर्मचारियों और चुने हुए नेताओं के बीच एक तीखा विरोधाभास प्रस्तुत किया है। एक सरकारी कर्मचारी को एक छोटा सा गाँव, ब्लॉक या जिला चलाने के लिए कई मुश्किलों से गुजरना पड़ता है, जिसमें साक्षात्कार और तीन-चार पेपरों के बाद मेरिट लिस्ट में आने पर ही नौकरी मिलती है, और इसके लिए शिक्षित होना अनिवार्य है। इसके विपरीत, एक राज्य चलाने के लिए ऐसे मुख्यमंत्री का चयन कर लिया जाता है, जिन पर 'गुंडागर्दी के गंभीर आरोप' लगे हों, और उनकी पढ़ाई-लिखाई को कोई महत्व नहीं दिया जाता। यह स्थिति तब और अधिक चिंताजनक हो जाती है, जब ये पढ़े-लिखे अधिकारी उन नेताओं के अधीन काम करते हैं, जिन्हें कथित तौर पर स्वयं का हस्ताक्षर करना भी नहीं आता। लेखक इस पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हम 21वीं सदी में हैं, लेकिन हमारी सोच आज भी 'घटिया' बनी हुई है। पोस्ट में यह सोचने पर जोर दिया गया है कि देश की बागडोर किसके हाथों में दी जानी चाहिए — नौजवानों के हाथों में या उन बुजुर्गों के हाथों में, जिन पर पहले से ही कई मुकदमे चल रहे हैं और सत्ता में आने के बाद जो गायब हो जाते हैं। लेखक ने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष पार्टी का समर्थन नहीं करते, बल्कि सही को सही और गलत को गलत कहते हैं। अंत में, यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि जिस देश में हम रहते हैं, वहाँ आखिर चल क्या रहा है।
एक नागरिक ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की 21 जून 2026 को योग दिवस पर देखी गई 'फिटनेस' पर सवाल उठाते हुए भारत की दिशा को एक 'बहुत गंभीर समस्या' बताया है। पोस्ट में मौजूदा लोकतांत्रिक प्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई गई है, जहाँ जनता वोट देकर नेता चुनती है, लेकिन यह तय करना पार्टी के हाथ में होता है कि मुख्यमंत्री या अन्य मंत्री कौन बनेगा। लेखक इस बात पर जोर देता है कि जब आम जनता अपने राज्य का मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री या शिक्षा मंत्री नहीं चुन सकती, तो यह समझना मुश्किल है कि यह किस तरह का लोकतंत्र या प्रजातंत्र है, जिसे एक 'गंभीर मुद्दा' बताया गया है। इस संबंध में, लेखक ने सरकारी कर्मचारियों और चुने हुए नेताओं के बीच एक तीखा विरोधाभास प्रस्तुत किया है। एक सरकारी कर्मचारी को एक छोटा सा गाँव, ब्लॉक या जिला चलाने के लिए कई मुश्किलों से गुजरना पड़ता है, जिसमें साक्षात्कार और तीन-चार पेपरों के बाद मेरिट लिस्ट में आने पर ही नौकरी मिलती है, और इसके लिए शिक्षित होना अनिवार्य है। इसके विपरीत, एक राज्य चलाने के लिए ऐसे मुख्यमंत्री का चयन कर लिया जाता है, जिन पर 'गुंडागर्दी के गंभीर आरोप' लगे हों, और उनकी पढ़ाई-लिखाई को कोई महत्व नहीं दिया जाता। यह स्थिति तब और अधिक चिंताजनक हो जाती है, जब ये पढ़े-लिखे अधिकारी उन नेताओं के अधीन काम करते हैं, जिन्हें कथित तौर पर स्वयं का हस्ताक्षर करना भी नहीं आता। लेखक इस पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हम 21वीं सदी में हैं, लेकिन हमारी सोच आज भी 'घटिया' बनी हुई है। पोस्ट में यह सोचने पर जोर दिया गया है कि देश की बागडोर किसके हाथों में दी जानी चाहिए — नौजवानों के हाथों में या उन बुजुर्गों के हाथों में, जिन पर पहले से ही कई मुकदमे चल रहे हैं और सत्ता में आने के बाद जो गायब हो जाते हैं। लेखक ने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष पार्टी का समर्थन नहीं करते, बल्कि सही को सही और गलत को गलत कहते हैं। अंत में, यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि जिस देश में हम रहते हैं, वहाँ आखिर चल क्या रहा है।
- मंदसौर जिले के गांधी सागर में विश्व योग दिवस को बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के इस अवसर पर, पतंजलि योग समिति, गांधी सागर द्वारा शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया।1
- समदडिया गोल्ड में स्थित एक इलेक्ट्रिक पार्ट्स विक्रेता पर ग्राहक से अभद्रता करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह शिकायत एक ग्राहक द्वारा की गई है, जिसमें विक्रेता पर दुर्व्यवहार का आरोप है।1
- अमरपाटन के संदीपनी विद्यालय बेला में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को पूरे उत्साह और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस कार्यक्रम में योगाचार्यों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य श्री कुमार बहादुर सिंह, सहयोगी योगाचार्या श्रीमती संगीता दुबे और शैलेंद्र सिंह ने सभी उपस्थित लोगों को योगाभ्यास कराया। मुख्य अतिथि के रूप में जनपद सदस्य प्रजेश द्विवेदी, दादा भाई, सभापति अमरपाटन मंडल अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा और महामंत्री बद्री दहिया मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में लक्ष्मण रावत लकी, जिला अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा, मानेंद्र सिंह बेला, कौशलेश शुक्ला, विजय पाठक, रश्मि शुक्ला, सीमा वर्मा, रंजन द्विवेदी, सचिन त्रिपाठी, रेणु कुशवाहा, बबलू प्रजापति, प्रशांत मिश्रा, पत्रकार राम प्रसाद साहू, बृजेश सेन, संतोष पाण्डेय और अस्तित्व पब्लिक वेलफेयर सोसाइटी बेला के अध्यक्ष संदीप वर्मा सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक और छात्र भी शामिल थे। योग सत्र के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने विभिन्न आसन और प्राणायाम का अभ्यास किया। वक्ताओं ने इस अवसर पर योग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह स्वस्थ जीवन का आधार है और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना अत्यंत आवश्यक है। यह रिपोर्ट दैनिक तत्काल शंदेस के पत्रकार राम प्रसाद साहू द्वारा प्रस्तुत की गई है।4
- बारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, चित्रकूट में पुलिस अधीक्षक श्री अरुण कुमार सिंह की उपस्थिति में पुलिस लाइन्स स्थित परेड ग्राउंड में पुलिस कर्मियों ने योगाभ्यास किया। इस कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी राजापुर श्री यामीन अहमद, क्षेत्राधिकारी लाइन्स श्री राज कमल, प्रतिसार निरीक्षक श्री रामाशीष यादव और जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट के प्रभारी योग विभाग श्री जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कोतवाली कर्वी, महिला थाना, क्राइम ब्रान्च, एचटीयू, पुलिस लाइन, पुलिस कार्यालय तथा विभिन्न शाखाओं में तैनात पुलिस कर्मियों को योग का अभ्यास कराया। योग प्रशिक्षकों ने उपस्थित पुलिस कर्मियों को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया, साथ ही उनके शारीरिक एवं मानसिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान नियमित योग को स्वस्थ जीवनशैली का आधार बताते हुए सभी को प्रतिदिन योग करने के लिए प्रेरित किया गया। योगाभ्यास के दौरान यह भी बताया गया कि योग भारतीय संस्कृति एवं प्राचीन ज्ञान परम्परा की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे आज सम्पूर्ण विश्व ने अपनाया है। भारत की इस महान विधा ने विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन एवं आत्मबल का मार्ग प्रदान किया है, और हमें गर्व होना चाहिए कि योग की उत्पत्ति भारत में हुई तथा आज यह वैश्विक स्तर पर सम्मानित एवं स्वीकार्य है। आने वाली पीढ़ियों को योग की इस धरोहर से जोड़ना हम सभी का दायित्व है। यह भी समझाया गया कि योग न केवल व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं सशक्त बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को दूर कर आत्मसंयम, अनुशासन, एकाग्रता एवं मानसिक स्थिरता का भी विकास करता है। वर्तमान समय की व्यस्त एवं तनावपूर्ण जीवनशैली में मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम योग है। इसी क्रम में, जनपद के समस्त थानों के अधिकारी और कर्मचारीगण द्वारा भी योगाभ्यास किया गया।1
- सतना जिले के कोटर क्षेत्र में स्थित पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. प्रीतम सिंह पर एक किसान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का दावा है कि उनके बीमार बछड़े को उपचार के दौरान डॉक्टर ने गलत दवा दी, जिसके बाद बछड़े की हालत बिगड़ी और कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। पीड़ित किसान ने बताया कि वह अपने बछड़े को इलाज के लिए पशु चिकित्सालय लाया था, जहाँ उपचार और दवा दिए जाने के बाद उसकी तबीयत में सुधार होने के बजाय लगातार गिरावट आती गई। किसान ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पशुपालकों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इसी के साथ, पशुपालन विभाग के अधिकारियों से भी इस पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग उठने लगी है।1
- मैहर जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब का कारोबार तेज़ी से पैर पसार रहा है, जिसने कानून व्यवस्था और समाज के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इस अवैध धंधे का मुख्य मास्टरमाइंड भाटिया शराब कंपनी का मैनेजर संतोष सिंह बताया जा रहा है, जिसकी गतिविधियों के कारण युवाओं का भविष्य खतरे में है। आरोप है कि आबकारी विभाग के अधिकारी विजय सिंह की मिलीभगत से यह अवैध कार्य और अधिक बढ़ावा पा रहा है। मा शारदा की धार्मिक नगरी मैहर में यह अवैध शराब का कारोबार शासन के लिए चिंता का विषय बन गया है, खासकर तब जब प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ था। हैरानी की बात यह है कि मैहर के स्थानीय नेता उसी रास्ते से आते-जाते हैं जहाँ संतोष सिंह द्वारा अवैध रूप से टीन शेड के नीचे शराब बेची जाती है, लेकिन वे इसे अनदेखा करते प्रतीत होते हैं। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि क्या नेताओं या प्रशासन की भी इस अवैध कारोबार में सहमति है? अब सभी की निगाहें नवागत जिला कलेक्टर पर हैं कि वे इस अवैध धंधे पर अंकुश लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। यह प्रश्न बना हुआ है कि भाटिया शराब कंपनी के मैनेजर पर प्रशासन क्यों मेहरबान है और यह अवैध व्यापार कब तक जारी रहेगा।1
- सतना जिले के नागौद क्षेत्र स्थित हरदुआ विद्युत उपकेंद्र में उस समय हड़कंप मच गया जब आउटसोर्स ऑपरेटर अजय वर्मा नौकरी से निकाले जाने के विरोध में एक चालू विद्युत लाइन पर चढ़ गए और आत्मघाती कदम उठाने की चेतावनी देने लगे। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, अजय वर्मा का आरोप है कि कुछ दिनों पहले आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में कटौती की गई थी, जिसका सभी कर्मचारियों ने विरोध किया था। अजय वर्मा का दावा है कि कार्यपालन अभियंता पल्लव स्वर्णकार इसी विरोध का बदला ले रहे हैं। उनके अनुसार, इस कार्रवाई के तहत कई कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया है, जबकि कुछ अन्य को दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसी के विरोध में अजय वर्मा सबस्टेशन की चालू लाइन पर चढ़ गए और अपनी माँगें पूरी न होने पर जान देने की धमकी देने लगे। इस घटना की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। नागौद पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और कर्मचारी को सुरक्षित नीचे उतारने तथा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही है। हालांकि, कर्मचारी द्वारा लगाए गए इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।3