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कितने जिले में लगातार अतिक्रमण का प्रहार देखने को मिलता है जिससे लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है

7 hrs ago
user_Akshay Raj
Akshay Raj
बहादुरगंज, किशनगंज, बिहार•
7 hrs ago
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कितने जिले में लगातार अतिक्रमण का प्रहार देखने को मिलता है जिससे लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है

More news from बिहार and nearby areas
  • किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ में एक कल्वर्ट को खोदकर अधूरा छोड़ देने से स्थानीय सड़क की स्थिति बेहद खराब हो गई है। इस लापरवाही के कारण ग्रामीणों में भारी नाराज़गी है, क्योंकि इस बदहाल रास्ते से उन्हें आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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    किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ में एक कल्वर्ट को खोदकर अधूरा छोड़ देने से स्थानीय सड़क की स्थिति बेहद खराब हो गई है। इस लापरवाही के कारण ग्रामीणों में भारी नाराज़गी है, क्योंकि इस बदहाल रास्ते से उन्हें आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    user_Manzar AlamRN
    Manzar AlamRN
    तेरहागछ, किशनगंज, बिहार•
    4 hrs ago
  • Post by SonuMandal
    3
    Post by SonuMandal
    user_SonuMandal
    SonuMandal
    जोकीहाट, अररिया, बिहार•
    9 hrs ago
  • वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है। यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
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    वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है।

यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
    user_Zafar Rabbani
    Zafar Rabbani
    पोठिया, किशनगंज, बिहार•
    19 hrs ago
  • पूर्णिया जिले के एक प्रखंड में आयोजित प्रखंड सह जन कल्याण शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे DDC ने शिविर में मौजूद आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सरकारी योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी ली और उन्हें निर्देश दिए कि लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं और आवेदनों के साथ पहुंचे थे, जिनकी समस्याओं के समाधान हेतु DDC ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जनता की समस्याओं का समाधान समय पर होना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
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    पूर्णिया जिले के एक प्रखंड में आयोजित प्रखंड सह जन कल्याण शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे DDC ने शिविर में मौजूद आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से सुना। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सरकारी योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी ली और उन्हें निर्देश दिए कि लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाए।

इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं और आवेदनों के साथ पहुंचे थे, जिनकी समस्याओं के समाधान हेतु DDC ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जनता की समस्याओं का समाधान समय पर होना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
    user_Simanchal News
    Simanchal News
    Jalalgarh, Purnia•
    52 min ago
  • कोडरमा विधायक डॉ नीरा यादव ने योग दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन पर अवहेलना का गंभीर आरोप लगाया है।
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    कोडरमा विधायक डॉ नीरा यादव ने योग दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन पर अवहेलना का गंभीर आरोप लगाया है।
    user_झारखंड news
    झारखंड news
    Court reporter कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    1 hr ago
  • अररिया जिले के मोर कही शंकरपुर में दीनांमबद्री का मेला लगा हुआ है। आज कई लोग इस मेले में घूमने के लिए पहुँचे। इस अवसर पर लोगों से यह भी पूछा गया कि क्या वे मोर कही शंकरपुर को जानते हैं।
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    अररिया जिले के मोर कही शंकरपुर में दीनांमबद्री का मेला लगा हुआ है। आज कई लोग इस मेले में घूमने के लिए पहुँचे। इस अवसर पर लोगों से यह भी पूछा गया कि क्या वे मोर कही शंकरपुर को जानते हैं।
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    3 hrs ago
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार सुबह 8 बजे सखी वन स्टॉप सेंटर कोडरमा में एक योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं और बच्चों को योग के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। बताया गया कि योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है, साथ ही कई बीमारियों से भी बचाव संभव है। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि योग ऋषि-मुनियों द्वारा दी गई एक अमूल्य विरासत है, जिसे अपनाकर एक स्वस्थ और निरोग जीवन जिया जा सकता है। इसमें महिलाओं, पुरुषों और बच्चों सहित हर आयु वर्ग के लोगों को प्रतिदिन योग करने के लिए प्रेरित किया गया।
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    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार सुबह 8 बजे सखी वन स्टॉप सेंटर कोडरमा में एक योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं और बच्चों को योग के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। बताया गया कि योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है, साथ ही कई बीमारियों से भी बचाव संभव है।

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि योग ऋषि-मुनियों द्वारा दी गई एक अमूल्य विरासत है, जिसे अपनाकर एक स्वस्थ और निरोग जीवन जिया जा सकता है। इसमें महिलाओं, पुरुषों और बच्चों सहित हर आयु वर्ग के लोगों को प्रतिदिन योग करने के लिए प्रेरित किया गया।
    user_झारखंड news
    झारखंड news
    Court reporter कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    2 hrs ago
  • आरा में एक कथित फेक एनकाउंटर की घटना पर भारी बवाल छिड़ गया है। इस घटना में भरत तिवारी का कथित तौर पर फेक एनकाउंटर हुआ है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। इस मामले पर आरा के सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'गलत किया'। इस पूरे प्रकरण के बाद, लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
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    आरा में एक कथित फेक एनकाउंटर की घटना पर भारी बवाल छिड़ गया है। इस घटना में भरत तिवारी का कथित तौर पर फेक एनकाउंटर हुआ है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। इस मामले पर आरा के सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'गलत किया'। इस पूरे प्रकरण के बाद, लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
    user_Md Mursaleen
    Md Mursaleen
    दिघलबैंक, किशनगंज, बिहार•
    21 hrs ago
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