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किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ के एक प्रवासी मजदूर आज़म का सूरत में करंट लगने से दुखद निधन हो गया। आज़म का पार्थिव शरीर जब उनके गृह क्षेत्र टेढ़ागाछ पहुँचा, तो उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने और दुख व्यक्त करने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़ पड़े।
Manzar AlamRN
किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ के एक प्रवासी मजदूर आज़म का सूरत में करंट लगने से दुखद निधन हो गया। आज़म का पार्थिव शरीर जब उनके गृह क्षेत्र टेढ़ागाछ पहुँचा, तो उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने और दुख व्यक्त करने के लिए भारी संख्या में लोग उमड़ पड़े।
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- सोशल मीडिया पर इन दिनों कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि चीनी सेना 60 किलोमीटर तक भारतीय सीमा में घुस आई है और उसने भारतीयों को मारना-पीटना शुरू कर दिया है। लोग इन वीडियो को धड़ल्ले से साझा कर रहे हैं और ऐसी बातें कर रहे हैं। हालांकि, इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए बताया गया है कि ये वीडियो पूरी तरह से नकली और फर्जी हैं। ये वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बनाए गए हैं और लोगों को गलत एवं झूठी जानकारी देने के लिए प्रसारित किए जा रहे हैं। वास्तविकता यह है कि इन वीडियो में चीनी सेना नहीं है, बल्कि ये मणिपुर की ही किसी घटना से संबंधित हैं। इन झूठी अफवाहों पर ध्यान न देने और इनसे बचने की अपील की गई है। जय हिंद।2
- Post by Abdul Kuddus Abdul Kuddus1
- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक मुर्शिद आलम ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बीफ फैक्ट्रियों को तत्काल बंद करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही, विधायक आलम ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की भी पुरज़ोर वकालत की है।1
- अररिया के फारबिसगंज प्रखंड स्थित हरिपुर पंचायत में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यदि निचले स्तर के अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते हैं, तो उन्हें बड़े अधिकारियों के पास शिकायत करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर बड़े पदाधिकारी भी सुनवाई नहीं करते हैं, तो नागरिक सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय आकर उनसे शिकायत कर सकते हैं।1
- किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की धबैली पंचायत के खारी बस्ती वार्ड नंबर 1 के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन के सामने अपनी वर्षों पुरानी मांग और परेशानी रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण बारिश के मौसम में आवागमन अत्यधिक कठिन हो जाता है। कीचड़ और जलभराव के कारण स्कूली बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और आम जनता को दैनिक कार्यों के लिए आने-जाने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, मुखिया और वार्ड सदस्य से कई बार सड़क बनाने की गुहार लगाई, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस उदासीनता के चलते ग्रामीणों में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है। अब ग्रामीण जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें यह बुनियादी सुविधा मिल सके और उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सके।2