मिडिल ईस्ट में जारी महीनों के तनाव को समाप्त करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की वार्ता हुई। यह बैठक लेबनान को लेकर गहरे मतभेदों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के कारण बेहद तनावपूर्ण रही, जिसके चलते बातचीत बिगड़ती हुई नजर आई। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता में भाग लिया। हाल ही में हुए एक अंतरिम समझौते के बाद आयोजित इस बैठक का स्पष्ट उद्देश्य था कि दोनों देश सभी मुद्दों पर चर्चा कर चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें। बैठक शुरू होने से पहले, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों से अलग-अलग मुलाकात की, जिसके बाद ईरान ने साफ कर दिया कि अमेरिका से बातचीत की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह समझौते की शर्तों को जमीन पर कितना लागू करता है और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर कितना विराम लगाता है। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अब तक समझौते की पहली शर्त, यानी सभी मोर्चों पर सीजफायर लागू करने में विफल रहा है, जिसका प्रमाण लेबनान में अभी भी जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई है। क़रीब 80 मिनट तक चली इस बैठक में प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज कराने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि, वार्ता के दौरान तनाव तब बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए ईरान को धमकी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करे। इससे ईरान भड़क उठा और ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ देर के लिए बैठक छोड़कर चला गया। बाद में ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतने की ज़रूरत है और ईरान की सेना किसी भी स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे कूटनीतिक प्रक्रिया में सामान्य बताया और कहा कि कठिन वार्ताओं में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन बातचीत प्रगति करती रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को ईरान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए एक नए दृष्टिकोण से आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं। इस तनाव का असर साफ देखने को मिला, जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित प्रतीकात्मक हैंडशेक और संयुक्त तस्वीर से साफ इनकार कर दिया। दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी। नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए जो क्षेत्र बनाया है उसे जरूरत पड़ने तक बनाए रखेगा, और इजरायल एक खुद्दार देश है जहां हर बात पर सहमति होना जरूरी नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप हर वह काम नहीं करते जो इजरायल चाहता है, और न ही वह हर वह काम करते हैं जो ट्रंप चाहते हैं। ईरान-अमेरिका वार्ता में इस गतिरोध के कारण कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी हुई है, और ब्रेंट क्रूड $1 से अधिक महंगा होकर $81 के पार पहुंच गया है।
मिडिल ईस्ट में जारी महीनों के तनाव को समाप्त करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की वार्ता हुई। यह बैठक लेबनान को लेकर गहरे मतभेदों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के कारण बेहद तनावपूर्ण रही, जिसके चलते बातचीत बिगड़ती हुई नजर आई। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता में भाग लिया। हाल ही में हुए एक अंतरिम समझौते के बाद आयोजित इस बैठक का स्पष्ट उद्देश्य था कि दोनों देश सभी मुद्दों पर चर्चा कर चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें। बैठक शुरू होने से पहले, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों से अलग-अलग मुलाकात की, जिसके बाद ईरान ने साफ कर दिया कि अमेरिका से बातचीत की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह समझौते की शर्तों को जमीन पर कितना लागू करता है और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर कितना विराम लगाता है। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अब तक समझौते की पहली शर्त, यानी सभी मोर्चों पर सीजफायर लागू करने में विफल रहा है, जिसका प्रमाण लेबनान में अभी भी जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई है। क़रीब 80 मिनट तक चली इस बैठक में प्रतिबंधों में राहत और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज कराने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि, वार्ता के दौरान तनाव तब बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए ईरान को धमकी दी कि वह लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करे। इससे ईरान भड़क उठा और ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ देर के लिए बैठक छोड़कर चला गया। बाद में ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका को अपने बयानों में सावधानी बरतने की ज़रूरत है और ईरान की सेना किसी भी स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे कूटनीतिक प्रक्रिया में सामान्य बताया और कहा कि कठिन वार्ताओं में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन बातचीत प्रगति करती रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को ईरान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए एक नए दृष्टिकोण से आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं। इस तनाव का असर साफ देखने को मिला, जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित प्रतीकात्मक हैंडशेक और संयुक्त तस्वीर से साफ इनकार कर दिया। दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी। नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए जो क्षेत्र बनाया है उसे जरूरत पड़ने तक बनाए रखेगा, और इजरायल एक खुद्दार देश है जहां हर बात पर सहमति होना जरूरी नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप हर वह काम नहीं करते जो इजरायल चाहता है, और न ही वह हर वह काम करते हैं जो ट्रंप चाहते हैं। ईरान-अमेरिका वार्ता में इस गतिरोध के कारण कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी हुई है, और ब्रेंट क्रूड $1 से अधिक महंगा होकर $81 के पार पहुंच गया है।
- कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मोबाइल फोन छीनकर भागने वाले एक संदिग्ध चोर जुनैद की कथित तौर पर हार्ट अटैक से मौत हो गई। यह घटना बुधवार, 17 जून को कब्बन पेट के 14वें क्रॉस के पास हुई, जब जुनैद और उसके साथी अरबाज एक राहगीर का फोन चोरी करके भागने की कोशिश कर रहे थे। इंडिया टुडे से जुड़े सगाय राज की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार शाम करीब 5:30 बजे एक वकील सड़क किनारे वॉक कर रहे थे, तभी बाइक सवार अरबाज और पडरायनपुरा निवासी जुनैद आए और उनका मोबाइल फोन छीनकर भाग निकले। चोरों को भागते देख वकील और स्थानीय लोगों ने शोर मचाया। इसी दौरान एक दिहाड़ी मजदूर ने चोरों को रोकने के लिए उनके ऊपर एक बोरा फेंक दिया, जिससे उनकी बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दोनों सड़क पर गिर गए। भागने की कोशिश के दौरान, आरोपी जुनैद कुछ दूर स्थित एक फुटपाथ पर अचेत अवस्था में पाया गया और बाद में उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। वहीं, पुलिस ने दूसरे आरोपी अरबाज को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- Post by Bharatiya Jan KRANTI SENA1
- भरत तिवारी हत्याकांड के संबंध में, प्रशासन पर सवाल उठाया जा रहा है कि इस मामले में पुलिसकर्मियों को केवल निलंबित क्यों किया गया है। मांग की गई है कि उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए। आरोप लगाया गया है कि प्रशासन के अधिकारी, पुलिसकर्मियों को बचाने के उद्देश्य से, ऐसी कार्रवाई करते हैं।1
- प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर न केवल स्वयं योगाभ्यास किया, बल्कि उन्होंने वहां उपस्थित लोगों की योग मुद्राओं का भी बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने लोगों के पोस्चर को देखकर उनकी योग मुद्राएँ ठीक करवाईं।1
- केपी टेक्नोलॉजी एचडी वॉलपेपर के बारे में 'शुद्ध देसी' हिंदी भाषा में जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।1
- कॉकरोच जनता पार्टी को एक किसान संगठन का साथ मिल गया है। इस समर्थन के परिणामस्वरूप, कल बड़ी तादाद में किसानों और ट्रैक्टरों के पहुंचने की संभावना बन रही है।1
- दिल्ली मेट्रो में एक वानर की एंट्री ने यात्रियों को चौंका दिया, जिसके बाद उसने डिब्बे में खूब उधम और मस्ती मचाई। वीडियो में, विशेष रूप से 1 मिनट 5 सेकंड के बाद, 'कपिराज' को लोगों के कंधे और गोद में चढ़कर मस्ती करते देखा गया। वह खिड़की पर बैठकर बाहर के नज़ारों का भी आनंद लेते हुए नज़र आया। यह घटना सराय काले खां स्टेशन के पास पिंक लाइन पर हुई।1
- एक महीने से लापता महिला के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। उसकी तलाश में पति ने कई लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला था। अब सूचना मिलने के बाद महिला को एक अन्य व्यक्ति के साथ देखा गया, जिसके चलते पति और परिवार के सदस्य मौके पर पहुंच गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।1