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तमकुहीराज क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सेवा में निरंतर समर्पित। आज बेदूपार इंटर कॉलेज स्थित बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें खाद्य सामग्री वितरित की जाएगी। इस संकट की घड़ी में हम अपने क्षेत्रवासियों के साथ मजबूती से खड़े हैं। आप सभी समर्थ साथियों से विनम्र अपील है कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आएं। — मृगेंद्र भारद्वाज (सुपुत्र: श्री गोपेंद्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष - किसान मोर्चा, कुशीनगर, INDJP) #Kushinagar #TamkuhiRaj #FloodRelief #JanSeva #SamajSeva #UttarPradesh #FloodReliefCamp #INDJP #KisanMorcha #HumanityFirst #SocialWork #UPNews #TrendingNow #FacebookReels #ViralVideo
Desi Dispatch News
तमकुहीराज क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सेवा में निरंतर समर्पित। आज बेदूपार इंटर कॉलेज स्थित बाढ़ राहत शिविर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें खाद्य सामग्री वितरित की जाएगी। इस संकट की घड़ी में हम अपने क्षेत्रवासियों के साथ मजबूती से खड़े हैं। आप सभी समर्थ साथियों से विनम्र अपील है कि बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आएं। — मृगेंद्र भारद्वाज (सुपुत्र: श्री गोपेंद्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष - किसान मोर्चा, कुशीनगर, INDJP) #Kushinagar #TamkuhiRaj #FloodRelief #JanSeva #SamajSeva #UttarPradesh #FloodReliefCamp #INDJP #KisanMorcha #HumanityFirst #SocialWork #UPNews #TrendingNow #FacebookReels #ViralVideo
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- 🚨 बिग ब्रेकिंग | एपी तटबंध से बेहद भयावह तस्वीर कुशीनगर के जवहीदयाल में एपी तटबंध पर अभी-अभी बंधा टूट गया है और आरपार हो गया है।1
- गंडक के दबाव से चंपारण तटबंध क्षतिग्रस्त, टूटने का खतरा। ----- फुलिखाड़ में बांध टूटने से कई गांवों में घुसा पानी, एनडीआरएफ ने फंसे लोगों को निकाला। नौतन।।गंडक नदी के बढ़ते दबाव के बीच प्रखंड क्षेत्र में चंपारण तटबंध कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया है।फुलिखाड़ के समीप बांध टूटने से शिवराजपुर पंचायत के दमका टोला, छरकी,भगवानपुर पंचायत के विशम्भरपुर व मंगलपुर कला तथा मंगलपुर गुदरिया पंचायत के श्यामपुर और बनकटवा गांव में पानी फैल गया है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।ग्रामीणों के अनुसार, तटबंध कई जगहों पर जर्जर होकर गुफानुमा हो गया है। ऐसे में लगातार गंडक के दबाव से बांध के टूटने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अभियंता क्षतिग्रस्त हिस्सों पर नजर बनाए हुए हैं। मंगलपुर क्षेत्र में करीब पांच जगहों पर गंडक द्वारा चंपारण तटबंध के कटाव की सूचना के बाद अभियंताओं और सैकड़ों लोगों ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत व बचाव कार्य शुरू किया। मिट्टी और बालू की बोरियों से कटाव रोकने का प्रयास किया गया।इधर, फुलिखाड़ में बांध टूटने के बाद गांवों में पानी फैलने से कई परिवार प्रभावित हुए हैं।घरों में पानी घुसने के बाद लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। सूचना पर एनडीआरएफ की टीम गांवों में पहुंची और घरों में फंसे लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।वहीं, चंपारण तटबंध पर शरण लिए ग्रामीणों ने शुद्ध पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की है।ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण घर छोड़कर तटबंध पर रहने को मजबूर हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई है।ग्रामीणों ने प्रशासन से पेयजल, शौचालय और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। अंचलाधिकारी अल्का कुमारी ने बताई कि शौचालय व पानी की व्यवस्था किया जा रहा है।4
- जिला स्तरीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता 2026 का तीन दिवसीय आयोजन मंगलवार से शुरू हुआ। 29 September. जिला खेल पदाधिकारी माननीय श्री राकेश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। 29.09.2026.1
- बाढ़ के मुद्दे पर जिला समहरणालय मे धरने पर बैठे भाजपा विधायक जिले के अधिकारियो से नाराज दिखे भाजपा विधायक उन्होंने मुख्यमंत्री के आने तक धरने पर रहने की बात कही1
- नारायणी के कहर के बीच मुख्यमंत्री का कुशीनगर दौरा कटान स्थल का हवाई सर्वे, राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों से संवाद; 5 हजार सूखा राशन किट और त्वरित मुआवजे के निर्देश नारायणी के कहर के बीच मुख्यमंत्री का कुशीनगर दौरा कटान स्थल का हवाई सर्वे, राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों से संवाद; 5 हजार सूखा राशन किट और त्वरित मुआवजे के निर्देश 🔴 जनहानि पर ₹4 लाख तत्काल सहायता, पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ 🔴 फसल क्षति का 15 दिन में पारदर्शी सर्वे, किसानों को शीघ्र मुआवजे के निर्देश 🔴 एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की फ्लड यूनिट राहत-बचाव में तैनात नारायणी नदी के बढ़े जलप्रवाह और तटबंधों पर बने दबाव के बीच मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पहले तटबंध कटान स्थल का हवाई सर्वेक्षण किया और इसके बाद सड़क मार्ग से प्रभावित ग्राम जवही दयाल स्थित पंचायत भवन/राहत शिविर पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ पीड़ितों का कुशलक्षेम जाना तथा राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने राहत सामग्री वितरण स्थल पर प्रभावित नागरिकों से संवाद करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रदेश सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ पूरी मजबूती और संवेदनशीलता से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और सहायता अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। अचानक बढ़ा नदी का जलप्रवाह मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश, देश के विभिन्न हिस्सों तथा नेपाल में हुई मूसलाधार बारिश के कारण पिछले चार दिनों में नारायणी नदी का जलप्रवाह सामान्य 3 से 4 लाख क्यूसेक से बढ़कर करीब 5.5 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। बढ़े जलप्रवाह के दबाव से तटबंध क्षतिग्रस्त हुए और कई गांवों में जलभराव की स्थिति बनी। राहत-बचाव के लिए टीमें मैदान में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ की दो, एसडीआरएफ की दो टीमें तथा पीएसी की फ्लड यूनिट राहत एवं बचाव कार्य में लगाई गई हैं। मुख्यमंत्री ने जलमग्न और बेघर हुए लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाने तथा वहां गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल और जनरेटर से 24 घंटे प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रभावित परिवारों के लिए 5,000 सूखा राशन किट की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक किट का वजन करीब 50 किलोग्राम बताया गया है, जिसमें चावल, आटा, आलू, दाल, तेल, मसाले, नमक, लाई, चना, बाल्टी समेत दैनिक उपयोग की करीब 35 प्रकार की सामग्री शामिल है। जनहानि पर चार लाख, मकान क्षति पर सहायता मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा में जनहानि होने पर प्रभावित परिवार को ₹4 लाख की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का आवास उपलब्ध कराया जाएगा। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए भी नियमानुसार आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए गए। किसानों की फसल का 15 दिन में सर्वे बाढ़ से धान, गन्ना और सब्जियों की फसलों को हुए नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों का 15 दिन के भीतर पारदर्शी सर्वे कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र किसानों को राहत राशि उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। बीमारी और सांप के खतरे से निपटने की तैयारी बाढ़ का पानी उतरने के बाद जलजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में अगले 5-6 दिनों तक नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी पीएचसी और सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम और एंटी रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। नारायणी के दीर्घकालिक समाधान पर जोर मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग को क्षतिग्रस्त तटबंधों की तत्काल मरम्मत के साथ भविष्य की सुरक्षा के लिए उनके स्थायी सुदृढ़ीकरण के निर्देश दिए। साथ ही नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार जल शक्ति मंत्री और प्रमुख सचिव सिंचाई के स्तर से ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे नदी की गहराई बढ़ाने, जलप्रवाह को सुगम बनाने और नदी में जमा सिल्ट के समुचित उपयोग की दिशा में दीर्घकालिक समाधान विकसित किया जा सके। रात में सूचना मिलते ही अधिकारियों को भेजा था मौके पर प्रशासन के अनुसार मुख्यमंत्री को सोमवार रात ही तटबंध कटान की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद उन्होंने मंडलायुक्त, एडीजी समेत संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। निर्देश के क्रम में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि मौसम साफ होने के साथ स्थिति तेजी से सामान्य होगी तथा शासन-प्रशासन का पूरा तंत्र प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए सक्रिय रहेगा। इस दौरान सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, सांसद विजय कुमार दुबे, विधायक डॉ. असीम कुमार राय, विधायक सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, विधायक पी.एन. पाठक, भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गेश राय, राजेश्वर सिंह, प्रमुख सचिव सिंचाई, गोरखपुर मंडल के आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह, एडीजी रामकुमार, जिलाधिकारी संजय चौहान, पुलिस अधीक्षक सहित जनपद स्तरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।4
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया हवाई सर्वेक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया हवाई सर्वेक्षण1
- फुलिखांड में टूटा चंपारण तटबंध, नौतन के कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी! गंडक की धारा ने बदली दिशा, शिवराजपुर से बनकटवा तक बढ़ा बाढ़ का खतरा—लोगों में दहशत नौतन से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और पानी के दबाव के बीच फुलिखांड के पास चंपारण तटबंध टूट गया है। तटबंध टूटते ही गंडक नदी की धारा नौतन इलाके की ओर मुड़ गई और आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है। तटबंध टूटने का असर शिवराजपुर के श्यामपुर, बैजू भगत टोला, बनकटवा समेत कई गांवों में दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते पानी को देखकर ग्रामीणों में अफरातफरी और दहशत का माहौल है। सबसे बड़ी चिंता किसानों की है। तटबंध के पूरब दिशा में सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूबने के खतरे में है। खेतों में तेजी से फैल रहे पानी को देखकर किसान मायूस नजर आ रहे हैं। हालांकि, बनकटवा मुख्य मार्ग पर फिलहाल बाढ़ का पानी नहीं चढ़ा है, लेकिन जिस तेजी से पानी फैल रहा है, उससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाने की अपील की है। प्रशासन की ओर से लोगों को किसी भी स्थिति में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं, तटबंध टूटने की खबर मिलते ही डबरिया, तेलुआ, गहिरी समेत कई गांवों के लोग चंपारण तटबंध पर पहुंच गए हैं। लोग गंडक नदी के रौद्र रूप को अपनी आंखों से देख रहे हैं और आगे की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पानी का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो नौतन के और कितने गांव इसकी चपेट में आएंगे? प्रशासन की निगाह स्थिति पर बनी हुई है और ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा गया है।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया हवाई सर्वेक्षण1
- करोड़ों खर्च के बाद भी पहली बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं बांध, जल शक्ति मंत्री से पूछा सवाल ### करोड़ों खर्च के बाद भी पहली बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं बांध, जल शक्ति मंत्री से पूछा सवाल **तमकुहीराज।** कुशीनगर के तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से बाढ़ और बांधों की स्थिति को लेकर सवाल किया गया। सवाल यह था कि आखिर हर साल बांधों की मरम्मत और सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद पहली ही बाढ़ में बांधों के क्षतिग्रस्त होने की नौबत क्यों आ जाती है? क्षेत्र में बाढ़ के दौरान बांधों पर दबाव बढ़ने और कई स्थानों पर क्षति की स्थिति सामने आने के बाद निर्माण कार्यों और मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि बांधों पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो उनकी मजबूती और सुरक्षा ऐसी होनी चाहिए कि वे बाढ़ के दबाव को झेल सकें। इसी मुद्दे को लेकर जल शक्ति मंत्री से पूछा गया कि क्या बाढ़ खंड द्वारा कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता की नियमित जांच होती है? यदि जांच होती है तो बार-बार बांध क्षतिग्रस्त होने के लिए जिम्मेदार कौन है? **बड़ा सवाल यह भी है कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बांध पहली ही बाढ़ में क्षतिग्रस्त कैसे हो जाते हैं? क्या इसके पीछे सिर्फ प्राकृतिक दबाव है या फिर निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की भी जांच जरूरी है?** मामले की निष्पक्ष जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1