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गाजियाबाद पुलिस का बड़ा एक्शन, चार पहिया वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, शातिर चोर गिरफ्तार गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट की स्वॉट टीम और अपराध शाखा ने चार पहिया वाहनों की चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के एक शातिर सक्रिय सदस्य सद्दीक को थाना मोदीनगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से चोरी की गई एक स्कॉर्पियो कार बरामद हुई है। यह कार्रवाई 14 अप्रैल 2026 को पुलिस आयुक्त के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) के पर्यवेक्षण और सहायक पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में टीम ने इस गिरोह का खुलासा किया, जो गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सक्रिय था। पूछताछ में आरोपी सद्दीक ने खुलासा किया कि यह गिरोह पिछले काफी समय से चार पहिया वाहनों की चोरी कर उन्हें अलग-अलग राज्यों में बेचने का काम कर रहा था। चोरी की गई गाड़ियों के चेसिस और इंजन नंबर बदल दिए जाते थे, जिससे उनकी पहचान छिपाई जा सके। इसके बाद वाहनों को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। गिरोह के अन्य सदस्य मेरठ और दिल्ली के निवासी बताए गए हैं, जो मिलकर इस अपराध को अंजाम देते थे। आरोपी ने यह भी बताया कि गिरोह ने वर्ष 2020 से अब तक करीब 50-60 गाड़ियों की चोरी कर उनकी डिलीवरी की है। पुलिस द्वारा अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। गाजियाबाद पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन चोरों में हड़कंप मच गया है।

2 days ago
user_पत्रकार जितेन्द्र ठाकुर
पत्रकार जितेन्द्र ठाकुर
Media house गाज़ियाबाद, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
2 days ago

गाजियाबाद पुलिस का बड़ा एक्शन, चार पहिया वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, शातिर चोर गिरफ्तार गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट की स्वॉट टीम और अपराध शाखा ने चार पहिया वाहनों की चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के एक शातिर सक्रिय सदस्य सद्दीक को थाना मोदीनगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से चोरी की गई एक स्कॉर्पियो कार बरामद हुई है। यह कार्रवाई 14 अप्रैल 2026 को पुलिस आयुक्त के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) के पर्यवेक्षण और सहायक पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में टीम ने इस गिरोह का खुलासा किया, जो गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सक्रिय था। पूछताछ में आरोपी सद्दीक ने खुलासा किया कि यह गिरोह पिछले काफी समय से चार पहिया वाहनों की चोरी कर उन्हें अलग-अलग राज्यों में बेचने का काम कर रहा था। चोरी की गई गाड़ियों के चेसिस और इंजन नंबर बदल दिए जाते थे, जिससे उनकी पहचान छिपाई जा सके। इसके बाद वाहनों को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। गिरोह के अन्य सदस्य मेरठ और दिल्ली के निवासी बताए गए हैं, जो मिलकर इस अपराध को अंजाम देते थे। आरोपी ने यह भी बताया कि गिरोह ने वर्ष 2020 से अब तक करीब 50-60 गाड़ियों की चोरी कर उनकी डिलीवरी की है। पुलिस द्वारा अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। गाजियाबाद पुलिस की इस कार्रवाई से वाहन चोरों में हड़कंप मच गया है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • संवाददाता रेनू पुरी की रिपोर्ट
    4
    संवाददाता रेनू पुरी की रिपोर्ट
    user_PRADEEP PURI
    PRADEEP PURI
    गाज़ियाबाद, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • गाजियाबाद :- आज सुबह दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर एक एक्सीडेंट हो गया। सूचना पर थाना विजयनगर पुलिस पहुंची तो देखा कि एक थार व एक बाइक को एक टैम्पो ट्रैवलर ने पीछे से टक्कर मार दी। जिसमें कि तीन लोग घायल हो गये थे। घायल व्यक्तियों को अस्पताल ले जाया गया जहॉ उन्हें डॉक्टर द्वारा मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों के नाम दीपक पुत्र हरिवंश लाल, नवीन पुत्र स्व0 स्वराज कुमार व योगेश बाइक चालक हैं। इसके अलावा टैम्पो ट्रैवलर विरेन्द्र पुत्र जियालाल निवासी दिल्ली मूलतः निवासी अमेठी है को हिरासत में ले लिया गया है। मृतकों के परिवार जनो को सूचना दे दी गई है व परिवार जनों से तहरीर प्राप्त कर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जा रहा है। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। बाइट- श्रीमती उपासना पाण्डेय, सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली नगर
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    गाजियाबाद :- आज  सुबह दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर एक एक्सीडेंट हो गया। सूचना पर थाना विजयनगर पुलिस पहुंची तो देखा कि एक थार व एक बाइक को एक टैम्पो ट्रैवलर ने पीछे से टक्कर मार दी। जिसमें कि तीन लोग घायल हो गये थे। घायल व्यक्तियों को अस्पताल ले जाया गया जहॉ उन्हें डॉक्टर द्वारा मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों के नाम दीपक पुत्र हरिवंश लाल, नवीन पुत्र स्व0 स्वराज कुमार व योगेश बाइक चालक हैं। इसके अलावा टैम्पो ट्रैवलर विरेन्द्र पुत्र जियालाल निवासी दिल्ली मूलतः निवासी अमेठी है को हिरासत में ले लिया गया है। मृतकों के परिवार जनो को सूचना दे दी गई है व परिवार जनों से तहरीर प्राप्त कर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जा रहा है। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। 
बाइट- श्रीमती उपासना पाण्डेय, सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली नगर
    user_पत्रकार जितेन्द्र ठाकुर
    पत्रकार जितेन्द्र ठाकुर
    Media house गाज़ियाबाद, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Post by पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी
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    Post by पत्रकार  धीरेंद्र त्रिपाठी
    user_पत्रकार  धीरेंद्र त्रिपाठी
    पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी
    Press advisory गाज़ियाबाद, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। जिलाधिकारी महोदय श्री रविन्द्र कुमार मॉंदड़ द्वारा 150 लगभग झुकी झोपड़िया में समान लग जा रहा है। डीसीपी श्री धवल जायसवाल एवं समस्त पुलिस प्रशासन द्वारा जलकल पुलिस द्वारा आंख पर काबू करने की मस्कट जारी है। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।फिलहाल, गाज़िया बाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।
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    गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में 
विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर 
गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर 
OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं।
जिलाधिकारी महोदय श्री रविन्द्र कुमार मॉंदड़ द्वारा 150 लगभग झुकी झोपड़िया में समान लग जा रहा है। डीसीपी श्री धवल जायसवाल एवं समस्त पुलिस प्रशासन द्वारा जलकल पुलिस द्वारा आंख पर काबू करने की मस्कट जारी है। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं।
प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।फिलहाल, गाज़िया बाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।
    user_Pawan k Suryavansi
    Pawan k Suryavansi
    Advertising agency Ghaziabad, Uttar Pradesh•
    1 day ago
  • दिल्ली के आउटर नॉर्थ इलाके के नरेला औद्योगिक क्षेत्र इलाके के एक जूता फैक्ट्री में आग लगी फायर कंट्रोल रूम को इसकी सूचना सुबह 7:45 पर मिले बड़ी मसक्कत के बाद आग पर काबू पाएगा फायर की 16 गाड़ी मौके पर पहुंची मेक फॉर कैटिगरी का इस आग को दर्जा दिया गया था मौके पर लोकल पुलिस एंबुलेंस और फायर के वर्ष अधिकारी मौके पर पहुंचे
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    दिल्ली के आउटर नॉर्थ इलाके के नरेला औद्योगिक क्षेत्र इलाके के एक जूता फैक्ट्री में आग लगी फायर कंट्रोल रूम को इसकी सूचना सुबह 7:45 पर मिले बड़ी मसक्कत के बाद आग पर काबू पाएगा फायर की 16 गाड़ी मौके पर पहुंची मेक फॉर कैटिगरी का इस आग को दर्जा दिया गया था मौके पर लोकल पुलिस एंबुलेंस और फायर के वर्ष अधिकारी मौके पर पहुंचे
    user_Sanjay Khan
    Sanjay Khan
    शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • Post by Sadhna news mp.Cg.rj.Naajim
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    Post by Sadhna news mp.Cg.rj.Naajim
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    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • *जनगणना हुई शुरू, कलेक्टर ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा* गुना मध्यप्रदेश जिला कलेक्टरकिशोरकुमार कन्याल ने जनगणना के लिए आयोजित परिशिक्षण शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए।कलेक्टर महोदय ने जनगणना कार्य मे लगाए गए कर्मचारियों से सहज व आत्मीय भाव से भेंट की। उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक पोर्टल पर सभी अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन भर पाएंगे।एक मई से कर्मचारी घर घर जा कर जानकारी इकट्ठा करेगे। *गुना मध्यप्रदेश से डायरेक्टर आर के शर्मा की रिपोर्ट*
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    *जनगणना हुई शुरू, कलेक्टर ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा*  
गुना मध्यप्रदेश जिला कलेक्टरकिशोरकुमार कन्याल ने जनगणना के लिए आयोजित परिशिक्षण शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए।कलेक्टर महोदय ने जनगणना कार्य मे लगाए गए कर्मचारियों से सहज व आत्मीय भाव से भेंट की। उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक पोर्टल पर सभी अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन भर पाएंगे।एक मई से कर्मचारी घर घर जा कर जानकारी इकट्ठा करेगे।
*गुना मध्यप्रदेश से डायरेक्टर आर के शर्मा की रिपोर्ट*
    user_News 22 India
    News 22 India
    TV News Anchor करावल नगर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • दिल्ली के शाहदरा जिले से बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है, जहां थाना एमएस पार्क पुलिस ने महज़ 4 घंटे के भीतर एक सीरियल हाउस ब्रेकर को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सोना, चांदी, घड़ियां और कई कीमती सामान बरामद किए हैं। इतना ही नहीं, गिरफ्तार आरोपी पहले से 21 चोरी और घर में सेंधमारी के मामलों में शामिल पाया गया है। आइए दिखाते हैं यह पूरी शाहदरा जिले की थाना एमएस पार्क पुलिस ने एक बार फिर अपनी तेज़ और प्रभावी कार्यशैली का परिचय दिया है। दिनांक 12 अप्रैल 2026 को थाना एमएस पार्क में दिनदहाड़े घर में चोरी की PCR कॉल प्राप्त हुई, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। SHO इंस्पेक्टर राजेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में SI संदीप, ASI सुनील कुमार, HC अनुज, HC प्रदीप और HC जितेंद्र की टीम का गठन किया गया। टीम ने बिना समय गंवाए घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले और लोकल मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। तकनीकी निगरानी और मानव सूचना तंत्र के आधार पर पुलिस ने आरोपी शकील इरफान उर्फ इरफान उर्फ नाटा को सीमापुरी इलाके से दबोच लिया। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह नशे का आदी है और अपनी लत को पूरा करने के लिए घरों में चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चांदी के कंगन, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सोने की नथ, मंगलसूत्र, चांदी की चेन, घड़ियां, पायल और अन्य कीमती सामान बरामद किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि एमएस पार्क पुलिस ने इस कार्रवाई से तीन मामलों का खुलासा करते हुए सिर्फ 4 घंटे में केस सुलझा दिया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले से 21 चोरी और हाउस ब्रेकिंग के मामलों में शामिल रहा है। शाहदरा पुलिस की इस तेज
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    दिल्ली के शाहदरा जिले से बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है, जहां थाना एमएस पार्क पुलिस ने महज़ 4 घंटे के भीतर एक सीरियल हाउस ब्रेकर को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से सोना, चांदी, घड़ियां और कई कीमती सामान बरामद किए हैं।
इतना ही नहीं, गिरफ्तार आरोपी पहले से 21 चोरी और घर में सेंधमारी के मामलों में शामिल पाया गया है।
आइए दिखाते हैं यह पूरी 
शाहदरा जिले की थाना एमएस पार्क पुलिस ने एक बार फिर अपनी तेज़ और प्रभावी कार्यशैली का परिचय दिया है।
दिनांक 12 अप्रैल 2026 को थाना एमएस पार्क में दिनदहाड़े घर में चोरी की PCR कॉल प्राप्त हुई, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
SHO इंस्पेक्टर राजेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में SI संदीप, ASI सुनील कुमार, HC अनुज, HC प्रदीप और HC जितेंद्र की टीम का गठन किया गया।
टीम ने बिना समय गंवाए घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले और लोकल मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया।
तकनीकी निगरानी और मानव सूचना तंत्र के आधार पर पुलिस ने आरोपी शकील इरफान उर्फ इरफान उर्फ नाटा को सीमापुरी इलाके से दबोच लिया।
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह नशे का आदी है और अपनी लत को पूरा करने के लिए घरों में चोरी की वारदातों को अंजाम देता था।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चांदी के कंगन, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सोने की नथ, मंगलसूत्र, चांदी की चेन, घड़ियां, पायल और अन्य कीमती सामान बरामद किया है।
सबसे बड़ी बात यह है कि एमएस पार्क पुलिस ने इस कार्रवाई से तीन मामलों का खुलासा करते हुए सिर्फ 4 घंटे में केस सुलझा दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले से 21 चोरी और हाउस ब्रेकिंग के मामलों में शामिल रहा है।
शाहदरा पुलिस की इस तेज
    user_भारत हिंदी खबर
    भारत हिंदी खबर
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    4 hrs ago
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