सहिया गाँव में झूमटा के दिन मटका फोड़ कार्यक्रम का हुआ आयोजन , बच्चों से लेकर युवाओं तक में दिखा उत्साह! वज़ीरगंज प्रखंड के सहिया गाँव में झूमटा के पावन अवसर पर पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। गाँव के चौक चौराहे पर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के लिए आँख बंद मटका और युवाओं के लिए ऊपर वाला मटका प्रतियोगिता रखी गई, जिसने पूरे माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया। सबसे पहले बच्चों के लिए आँखों पर पट्टी बाँधकर मटका फोड़ प्रतियोगिता कराई गई। ढोल नगाड़ो और तालियों की गूंज के बीच छोटे छोटे बच्चे जब डंडा लेकर मटके की ओर बढ़ते, तो पूरा गाँव उनका उत्साह बढ़ाता नजर आया। कई बार निशाना चूकने पर भी बच्चों का आत्मविश्वास देखने लायक था। जैसे ही किसी बच्चे ने मटका फोड़ा, तालियों की गड़गड़ाहट और खुशी की आवाज़ों से वातावरण गूंज उठा। इसके बाद युवाओं के लिए ऊँचाई पर बाँधे गए मटके को फोड़ने की चुनौती दी गई। युवाओं ने एकजुट होकर मानव पिरामिड बनाया और साहस व संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन किया। कड़ी मेहनत और टीम वर्क के बाद जब मटका टूटा तो रंग गुलाल और पानी की फुहारों के बीच खुशी का नजारा देखते ही बन रहा था।ईस दौरान सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला, कार्यक्रम में गाँव के बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस तरह के पारंपरिक कार्यक्रम न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना भी मजबूत करते हैं। झूमटा के इस अवसर पर लोगों ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल रंग और मस्ती का नाम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी ने मिलकर एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी। सहिया गाँव का यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि परंपरा और एकता की ताकत ही समाज की असली पहचान है। सहिया गाँव में झूमटा के दिन मटका फोड़ कार्यक्रम का हुआ आयोजन , बच्चों से लेकर युवाओं तक में दिखा उत्साह! वज़ीरगंज प्रखंड के सहिया गाँव में झूमटा के पावन अवसर पर पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। गाँव के चौक चौराहे पर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के लिए आँख बंद मटका और युवाओं के लिए ऊपर वाला मटका प्रतियोगिता रखी गई, जिसने पूरे माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया। सबसे पहले बच्चों के लिए आँखों पर पट्टी बाँधकर मटका फोड़ प्रतियोगिता कराई गई। ढोल नगाड़ो और तालियों की गूंज के बीच छोटे छोटे बच्चे जब डंडा लेकर मटके की ओर बढ़ते, तो पूरा गाँव उनका उत्साह बढ़ाता नजर आया। कई बार निशाना चूकने पर भी बच्चों का आत्मविश्वास देखने लायक था। जैसे ही किसी बच्चे ने मटका फोड़ा, तालियों की गड़गड़ाहट और खुशी की आवाज़ों से वातावरण गूंज उठा। इसके बाद युवाओं के लिए ऊँचाई पर बाँधे गए मटके को फोड़ने की चुनौती दी गई। युवाओं ने एकजुट होकर मानव पिरामिड बनाया और साहस व संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन किया। कड़ी मेहनत और टीम वर्क के बाद जब मटका टूटा तो रंग गुलाल और पानी की फुहारों के बीच खुशी का नजारा देखते ही बन रहा था।ईस दौरान सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला, कार्यक्रम में गाँव के बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस तरह के पारंपरिक कार्यक्रम न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना भी मजबूत करते हैं। झूमटा के इस अवसर पर लोगों ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल रंग और मस्ती का नाम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी ने मिलकर एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी। सहिया गाँव का यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि परंपरा और एकता की ताकत ही समाज की असली पहचान है।
सहिया गाँव में झूमटा के दिन मटका फोड़ कार्यक्रम का हुआ आयोजन , बच्चों से लेकर युवाओं तक में दिखा उत्साह! वज़ीरगंज प्रखंड के सहिया गाँव में झूमटा के पावन अवसर पर पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। गाँव के चौक चौराहे पर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के लिए आँख बंद मटका और युवाओं के लिए ऊपर वाला मटका प्रतियोगिता रखी गई, जिसने पूरे माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया। सबसे पहले बच्चों के लिए आँखों पर पट्टी बाँधकर मटका फोड़ प्रतियोगिता कराई गई। ढोल नगाड़ो और तालियों की गूंज के बीच छोटे छोटे बच्चे जब डंडा लेकर मटके की ओर बढ़ते, तो पूरा गाँव उनका उत्साह बढ़ाता नजर आया। कई बार निशाना चूकने पर भी बच्चों का आत्मविश्वास देखने लायक था। जैसे ही किसी बच्चे ने मटका फोड़ा, तालियों की गड़गड़ाहट और खुशी की आवाज़ों से वातावरण गूंज उठा। इसके बाद युवाओं के लिए ऊँचाई पर बाँधे गए मटके को फोड़ने की चुनौती दी गई। युवाओं ने एकजुट होकर मानव पिरामिड बनाया और साहस व संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन किया। कड़ी मेहनत और टीम वर्क के बाद जब मटका टूटा तो रंग गुलाल और पानी की फुहारों के बीच खुशी का नजारा देखते ही बन रहा था।ईस दौरान सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला, कार्यक्रम में गाँव के बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस तरह के पारंपरिक कार्यक्रम न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना भी मजबूत करते हैं। झूमटा के इस अवसर पर लोगों ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल रंग और मस्ती का नाम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी ने मिलकर एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी। सहिया गाँव का यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि परंपरा और एकता की ताकत ही समाज की असली पहचान है। सहिया गाँव में झूमटा के दिन मटका फोड़ कार्यक्रम का हुआ आयोजन , बच्चों से लेकर युवाओं तक में दिखा उत्साह! वज़ीरगंज प्रखंड के सहिया गाँव में झूमटा के पावन अवसर पर पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। गाँव के चौक चौराहे पर आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों के लिए आँख बंद मटका और युवाओं के लिए ऊपर वाला मटका प्रतियोगिता रखी गई, जिसने पूरे माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया। सबसे पहले बच्चों के लिए आँखों पर पट्टी बाँधकर मटका फोड़ प्रतियोगिता कराई गई। ढोल नगाड़ो और तालियों की गूंज के बीच छोटे छोटे बच्चे जब डंडा लेकर मटके की ओर बढ़ते, तो पूरा गाँव उनका उत्साह बढ़ाता नजर आया। कई बार निशाना चूकने पर भी बच्चों का आत्मविश्वास देखने लायक था। जैसे ही किसी बच्चे ने मटका फोड़ा, तालियों की गड़गड़ाहट और खुशी की आवाज़ों से वातावरण गूंज उठा। इसके बाद युवाओं के लिए ऊँचाई पर बाँधे गए मटके को फोड़ने की चुनौती दी गई। युवाओं ने एकजुट होकर मानव पिरामिड बनाया और साहस व संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन किया। कड़ी मेहनत और टीम वर्क के बाद जब मटका टूटा तो रंग गुलाल और पानी की फुहारों के बीच खुशी का नजारा देखते ही बन रहा था।ईस दौरान सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला, कार्यक्रम में गाँव के बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस तरह के पारंपरिक कार्यक्रम न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना भी मजबूत करते हैं। झूमटा के इस अवसर पर लोगों ने यह संदेश दिया कि त्योहार केवल रंग और मस्ती का नाम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को सम्मानित किया गया और सभी ने मिलकर एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी। सहिया गाँव का यह आयोजन एक बार फिर साबित कर गया कि परंपरा और एकता की ताकत ही समाज की असली पहचान है।
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- हिसुआ प्रखंड के शांति नगर गांव में बुढ़वा होली का पर्व पूरे उत्साह, उमंग और भाईचारे के साथ मनाया गया। गांव के लोगों ने पारंपरिक ढंग से एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और प्रेम व सौहार्द का संदेश दिया। सुबह से ही गांव में होली का माहौल देखने को मिला, जहां बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी रंग-गुलाल में सराबोर नजर आए।1