Shuru
Apke Nagar Ki App…
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रिफाइनरी आगजनी पर दुख जताते हुए कहा कि "रिफाइनरी हम सभी राजस्थानियों के लिए गर्व करने वाली परियोजना है। उद्घाटन से पहले इस तरह की घटना होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।" Ashok Gehlot
लोहागढ़ न्यूज़ टाइम्स (सच ख़बर
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रिफाइनरी आगजनी पर दुख जताते हुए कहा कि "रिफाइनरी हम सभी राजस्थानियों के लिए गर्व करने वाली परियोजना है। उद्घाटन से पहले इस तरह की घटना होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।" Ashok Gehlot
More news from राजस्थान and nearby areas
- Post by Rajesh Kumar1
- न्यूज फ्लैश/अपडेट मथुरा तहसील छाता क्षेत्र के गाँव विशंभरा में विटोरो में लगी आग, विटोरो में रखा था भूस जो जलकर हुआ राख। कृपया नजदीकी पत्रकार देख लीजिए। संपर्क सूत्र1
- वृंदावन में हाल ही में हुई नाव हादसे में 16 की मौत के बाद जिला प्रशासन की नींद खुल गई है जिन्होंने सोमवार को मथुरा कैसी घाट और वृंदावन पर नाव चलाने वाले नाभिकों का रजिस्ट्रेशन करना प्रारंभ कर दिया है अब बिना रजिस्ट्रेशन के यमुना में कोई भी नाम नहीं चल पाएगा साथ ही साथ नव की क्षमता और लोगों को बिठाने की संख्या भी निर्धारित की गई है1
- Post by Vinay_creator1121
- Post by Amardeep sain ripoter4
- राजस्थान: रिफाइनरी में लगी भीषण आग, मंगलवार को पीएम मोदी करने वाले थे उद्घाटन राजस्थान के बालोतरा के पचपदरा में स्थित भारत की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई है। ये रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार का एक साझा प्रोजेक्ट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 21 अप्रैल को इस रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। इससे ठीक एक दिन पहले यहां आग लग गई है। 2013 में रखी गई थी प्रोजेक्ट की नींव इस रिफाइनरी की नींव सबसे पहले 22 सितंबर, 2013 को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान रखी थी, जिसकी शुरुआती अनुमानित लागत 37,230 करोड़ रुपये थी। सरकार बदलने के बाद, पीएम मोदी ने 16 जनवरी, 2018 को इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू किया और इसकी लागत को संशोधित करके 43,129 करोड़ रुपये कर दिया गया। ईंधन उत्पादन के अलावा, इस रिफाइनरी से बड़ी मात्रा में डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन की भी उम्मीद है। ये उत्पाद इस क्षेत्र में आने वाली नए औद्योगिक मिशनों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल का काम करेंगे। रिफाइनरी से उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा यहां पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीइथाइलीन (HDPE/LLDPE), बेंजीन, टोल्यूनि और ब्यूटाडाइन जैसे उत्पादों पर आधारित उद्योगों के स्थापित होने की संभावना है, जिससे एक मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम का मार्ग खुलेगा। इन उत्पादों से प्लास्टिक फर्नीचर, कृषि पाइप, पैकेजिंग फिल्म, ऑटोमोबाइल पुर्जे, सिंथेटिक फाइबर, चिकित्सा उपकरण और पेंट व डिटर्जेंट जैसे रसायनों सहित कई प्रकार के सामानों का निर्माण किया जा सकेगा।1
- Post by Rajesh Kumar1
- सड़क निर्माण में खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल वायरल वीडियो____ मथुरा में राया ब्लाक के गांव नगला सहसू का बताया जा रहा है वायरल वीडियो1
- शहर में स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर शहर में उपभोक्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। बिल जमा होने के बावजूद बिजली कटने के आरोपों से नाराज़ लोगों ने प्रदर्शन करते हुए रोड जाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मसानी उपखंड कार्यालय पर बड़ी संख्या में पहुंचे उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि बिल जमा करने के बावजूद उनकी बिजली काट दी गई। लोगों का कहना है कि बिना किसी मैसेज या पूर्व सूचना के ही सप्लाई बंद कर दी गई, जिससे उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ी। प्रदर्शन कर रहे उपभोक्ताओं के अनुसार, पिछले दो दिनों से बिजली आपूर्ति ठप रही और वे लगातार बिजली घर के चक्कर काटते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इस दौरान गुस्साए स्थानीय लोगों और महिलाओं ने सोमवार के सुबह करीब 11:30 बजे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और कुछ समय के लिए जाम लगा दिया। मौके पर पहुंची गोविंद नगर थाना पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया और हालात को नियंत्रण में किया। उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय खुला होने के बावजूद कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। केवल बिल जमा करने के काउंटर खुले थे, जबकि शिकायत सुनने के लिए कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं था। आरोप यह भी है कि जब लोग शिकायत करने पहुंचे तो कार्यालय में ताला लगाकर कर्मचारी चले गए, जिसे बाद में पुलिस ने खुलवाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था उनकी परेशानी बढ़ा रही है और उन्होंने पुराने मीटर दोबारा लगाने की मांग की है। हालांकि इन सभी आरोपों पर अभी तक बिजली विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल मामला गरमाया हुआ है और उपभोक्ता जल्द से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।4