देश की राजनीतिक बिसात पर वर्तमान में आदर्शवादी मूल्यों को तिलांजलि देकर केवल स्वार्थ सिद्धि और सिद्धांतों से समझौता करने का खेल चल रहा है। लेखक डॉ. रवीन्द्र अरजरिया के अनुसार, पार्टियों के मूल उद्देश्यों का किस्तों में कत्ल किया जा रहा है और राजनीतिक दलों में दल-बदल तथा जोड़-तोड़ की घटनाएं आम हो चुकी हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के दतिया और बिहार के बांकीपुर में हुआ उप-चुनावों का टिकट वितरण इसी सिद्धांतविहीन राजनीति का जीवंत उदाहरण है, जहां समर्पण, त्याग और सेवा के मूल्य समाप्त हो गए हैं और चाटुकारिता, निजी हित व वैभव संकलन की संभावनाएं ही योग्यता के नए मापदंड बन चुके हैं। इस गिरावट की समीक्षा के लिए विभिन्न दलों के इतिहास और उनके मूल सिद्धांतों को जानना आवश्यक है। स्कॉटलैंड के मोंट्रोस शहर में जन्मे ब्रिटिश अफसर एलन ऑक्टेवियन ह्यूम द्वारा 28 दिसंबर 1885 को स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मूल उद्देश्य शिक्षित भारतीयों की समस्याओं और मांगों को संवैधानिक ढंग से ब्रिटिश सरकार के सामने रखना था। 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान लाल-बाल-पाल (बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल) ने इसे जन-आंदोलन बनाया, जिसके बाद 1907 के सूरत अधिवेशन में यह गरम और नरम दल में विभाजित हो गई। इसके बाद 1920 के नागपुर अधिवेशन में महात्मा गांधी के आगमन के साथ कांग्रेस का चरित्र पूरी तरह बदल गया। दूसरी ओर, 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली के राघोमल आर्य कन्या उच्च विद्यालय में कलकत्ता में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वैचारिक समर्थन प्राप्त था। वर्ष 1975 से 1977 के आपातकाल के विरोध में सिताब दियारा (सारण, बिहार) में जन्मे जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में गठित जनता पार्टी में जनसंघ का विलय हुआ, लेकिन बाद में दोहरी सदस्यता विवाद के कारण 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेई और लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य एकात्म मानववाद पर आधारित सशक्त व आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना था। इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल के अरबालिया गांव में जन्मे नरेंद्र नाथ भट्टाचार्य (मानवेंद्र नाथ राय) ने वर्गहीन और शोषण-मुक्त समाज के लिए 17 अक्टूबर 1920 को तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की। इसके बाद 26 दिसंबर 1925 को कानपुर में उन्होंने अपनी पत्नी इवलिन ट्रेंट रॉय और अबानी मुखर्जी के साथ मिलकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया। महाराष्ट्र के पूना में जन्मे बाल केशव ठाकरे ने 19 जून 1966 को मुंबई में 'मराठी मानुष' के अधिकारों के लिए शिवसेना की स्थापना की, जो बाद में कट्टर हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख ताकत बनी। उत्तर प्रदेश के सैफई (इटावा) में जन्मे मुलायम सिंह यादव ने 4 अक्टूबर 1992 को डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों पर समाजवादी पार्टी बनाई। वहीं, पंजाब के खवासपुर (रूपनगर) में जन्मे कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को अंबेडकर जयंती पर बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की, जिसका लक्ष्य मनुवादी व्यवस्था को उखाड़कर राजनीतिक सत्ता की चाबी हासिल करना था। वर्तमान में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने इन मूल सिद्धांतों और नीतियों को पीछे छोड़ दिया है। चुनाव जीतने और सिंहासन तक पहुंचने के लिए आज साम, दाम, दंड, भेद के सभी तरीके अपनाए जा रहे हैं। सिद्धांतों के बिना चल रही राजनीति का यह बदलता चेहरा किसी भी स्थिति में राष्ट्रहित की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। ऐसे समय में आम जनता की राय बनाने में वर्तमान कार्य, राष्ट्रीय प्रगति और जन समस्याओं से मुक्ति दिलाने वाले कारक ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
देश की राजनीतिक बिसात पर वर्तमान में आदर्शवादी मूल्यों को तिलांजलि देकर केवल स्वार्थ सिद्धि और सिद्धांतों से समझौता करने का खेल चल रहा है। लेखक डॉ. रवीन्द्र अरजरिया के अनुसार, पार्टियों के मूल उद्देश्यों का किस्तों में कत्ल किया जा रहा है और राजनीतिक दलों में दल-बदल तथा जोड़-तोड़ की घटनाएं आम हो चुकी हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के दतिया और बिहार के बांकीपुर में हुआ उप-चुनावों का टिकट वितरण इसी सिद्धांतविहीन राजनीति का जीवंत उदाहरण है, जहां समर्पण, त्याग और सेवा के मूल्य समाप्त हो गए हैं और चाटुकारिता, निजी हित व वैभव संकलन की संभावनाएं ही योग्यता के नए मापदंड बन चुके हैं। इस गिरावट की समीक्षा के लिए विभिन्न दलों के इतिहास और उनके मूल सिद्धांतों को जानना आवश्यक है। स्कॉटलैंड के मोंट्रोस शहर में जन्मे ब्रिटिश अफसर एलन ऑक्टेवियन ह्यूम द्वारा 28 दिसंबर 1885 को स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मूल उद्देश्य शिक्षित भारतीयों की समस्याओं और मांगों को संवैधानिक ढंग से ब्रिटिश सरकार के सामने रखना था। 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान लाल-बाल-पाल (बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल) ने इसे जन-आंदोलन बनाया, जिसके बाद 1907 के सूरत अधिवेशन में यह गरम और नरम दल में विभाजित हो गई। इसके बाद 1920 के नागपुर अधिवेशन में महात्मा गांधी के आगमन के साथ कांग्रेस का चरित्र पूरी तरह बदल गया। दूसरी ओर, 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली के राघोमल आर्य कन्या उच्च विद्यालय में कलकत्ता में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वैचारिक समर्थन प्राप्त था। वर्ष 1975 से 1977 के आपातकाल के विरोध में सिताब दियारा (सारण, बिहार) में जन्मे जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में गठित जनता पार्टी में जनसंघ का विलय हुआ, लेकिन बाद में दोहरी सदस्यता विवाद के कारण 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेई और लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य एकात्म मानववाद पर आधारित सशक्त व आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना था। इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल के अरबालिया गांव में जन्मे नरेंद्र नाथ भट्टाचार्य (मानवेंद्र नाथ राय) ने वर्गहीन और शोषण-मुक्त समाज के लिए 17 अक्टूबर 1920 को तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की। इसके बाद 26 दिसंबर 1925 को कानपुर में उन्होंने अपनी पत्नी इवलिन ट्रेंट रॉय और अबानी मुखर्जी के साथ मिलकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया। महाराष्ट्र के पूना में जन्मे बाल केशव ठाकरे ने 19 जून 1966 को मुंबई में 'मराठी मानुष' के अधिकारों के लिए शिवसेना की स्थापना की, जो बाद में कट्टर हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख ताकत बनी। उत्तर प्रदेश के सैफई (इटावा) में जन्मे मुलायम सिंह यादव ने 4 अक्टूबर 1992 को डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों पर समाजवादी पार्टी बनाई। वहीं, पंजाब के खवासपुर (रूपनगर) में जन्मे कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को अंबेडकर जयंती पर बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की, जिसका लक्ष्य मनुवादी व्यवस्था को उखाड़कर राजनीतिक सत्ता की चाबी हासिल करना था। वर्तमान में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने इन मूल सिद्धांतों और नीतियों को पीछे छोड़ दिया है। चुनाव जीतने और सिंहासन तक पहुंचने के लिए आज साम, दाम, दंड, भेद के सभी तरीके अपनाए जा रहे हैं। सिद्धांतों के बिना चल रही राजनीति का यह बदलता चेहरा किसी भी स्थिति में राष्ट्रहित की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। ऐसे समय में आम जनता की राय बनाने में वर्तमान कार्य, राष्ट्रीय प्रगति और जन समस्याओं से मुक्ति दिलाने वाले कारक ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- कोरिया जिले के बहुचर्चित आदिवासी छात्रा आत्महत्या कांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी विनोद बैद को राजस्थान से लौटते समय अनूपपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ के लिए आरोपी को बैकुंठपुर स्थित आईसी मार्ट लेकर पहुंची, जहां मामले से जुड़े अहम साक्ष्यों और तथ्यों की जांच की गई। इस पूरे मामले का खुलासा कोरिया पुलिस अधीक्षक ने एसपी कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान किया। एसपी ने बताया कि इस प्रकरण में अब तक एक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और छापेमारी की जा रही है। फिलहाल, गिरफ्तार आरोपी विनोद बैद से गहन पूछताछ जारी है और उसके बयानों के आधार पर मामले के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस बहुचर्चित मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। जिले में इस कार्रवाई को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।1
- कोरिया के पटना नगर पंचायत में लगभग 70 से 80 वर्ष पुराने एक शासकीय विद्यालय को तोड़े जाने के बाद अब उसी भूमि पर निर्माण कार्य बेहद तेज़ी से जारी है। सबसे गंभीर बात यह है कि प्रशासन द्वारा इस निर्माण कार्य को रोकने के आदेश दिए जाने के बावजूद भी मौके पर काम लगातार चल रहा है, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में काफी रोष है। लोगों का सवाल है कि यदि प्रशासन ने निर्माण रोकने के निर्देश दिए हैं, तो फिर इस आदेश का पालन कौन कराएगा? आखिर किसके संरक्षण में सरकारी भूमि पर खुलेआम यह निर्माण कार्य जारी है? स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे यह संदेश जा रहा है कि प्रभावशाली लोगों के सामने प्रशासनिक आदेश भी बौने साबित हो रहे हैं। जिस भूमि पर वर्षों तक शासकीय विद्यालय संचालित होता रहा, आज वहां चल रहे निर्माण कार्य को लेकर मांग उठ रही है कि यदि यह वैध है तो संबंधित विभाग को इसके सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। वहीं, यदि यह निर्माण अवैध है तो इस पर तत्काल रोक लगाकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब जनता की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन अपने ही आदेश का पालन करा पाएगा या सरकारी जमीन पर कब्जे का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।1
- सूरजपुर के केतका स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सूरजपुर श्री थॉमस एक्का के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री आनंद प्रकाश वारियाल उपस्थित रहे। उन्होंने बढ़ती जनसंख्या और सीमित संसाधनों के बीच संतुलन स्थापित करने में शिक्षा को सबसे प्रभावी माध्यम बताया। श्री वारियाल ने विद्यार्थियों को न्यायिक व्यवस्था, सुनियोजित अपराध व पारिस्थितिक अपराध के बीच अंतर और उनसे संबंधित दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 तथा किशोर न्याय से संबंधित प्रमुख कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ बाल विवाह के दुष्परिणामों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। अपने छात्र जीवन से न्यायाधीश बनने तक के संघर्षों को साझा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवन जीने और उच्च लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग की सलाह दी और विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत मिलने वाली निःशुल्क विधिक सहायता व NALSA की टोल-फ्री हेल्पलाइन 15100 के बारे में बताया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री शशिकांत भारती, श्री दिनेश कुमार सिंह, मंच संचालक श्री उग्रसेन प्रसाद, समस्त शिक्षकगण और पैरा लीगल वॉलेंटियर्स भी मौजूद रहे।4
- छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरदर के बासापारा में 'मोर गांव मोर पानी' अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत लगभग 2,000 पौधों का सामूहिक वृक्षारोपण कर जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और जनभागीदारी का संदेश दिया गया। जनपद पंचायत खड़गवां द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण के तहत एक जन सम्मेलन भी हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि अधिक से अधिक पेड़ लगाने से भूजल स्तर में वृद्धि होगी और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा देकर साल में तीन फसल लेने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए गरीबों को पक्के मकान देने और रोजगार गारंटी योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को 125 दिनों के रोजगार के साथ प्रतिदिन 300 रुपये मजदूरी देने के प्रावधानों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान हुई हल्की बारिश को स्वास्थ्य मंत्री ने 'मेघदेव का आशीर्वाद' बताते हुए इसे अभियान की सफलता का प्रतीक और प्रकृति का शुभ संकेत करार दिया। कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों को जल व पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने हर नागरिक से अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने और जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की।1
- ये 2023 का मुद्दा है साथियो आज तक इसमें काम नहीं हुवा साथियो1
- सरगुजा के उदयपुर में मौसम की स्थिति को देखते हुए इस सप्ताह पानी नहीं आने की आशंका जताई जा रही है, जिससे किसान भाइयों को थोड़ी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। हालांकि अगले सप्ताह पानी आने की उम्मीद भी जताई जा रही है, लेकिन मौसम के मिजाज को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि दो-तीन सप्ताह तक पानी नहीं आएगा और किसानों को यह परेशानी उठानी पड़ेगी।1
- नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में देश के विकास, सुशासन, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और आगामी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने सभी सहयोगी दलों से जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और विकास की गति को और तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। इस बैठक के बाद देश के विकास की दिशा में पड़ने वाले प्रभावों को लेकर जनता से भी उनकी राय मांगी गई है।1
- सूरजपुर जिले के पर्यटन स्थल पिलखा पहाड़ स्थित मोरडी बांध में सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में कुछ युवकों द्वारा तेज रफ्तार कारों से खतरनाक स्टंट करने का मामला सामने आया है। रील बनाने के जुनून में ये युवक लापरवाही से वाहन दौड़ाकर खुलेआम मौत का खेल खेल रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह खतरनाक स्टंटबाजी उस जगह पर हो रही है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में परिवार, महिलाएं और बच्चे प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टंटबाजों की एक छोटी सी चूक कभी भी बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय मोरभंज गांव के ग्रामीणों ने बाहरी क्षेत्रों से आने वाले इन युवकों पर आए दिन गांव के लोगों से बहस, विवाद और अभद्रता करने का आरोप लगाया है। इससे क्षेत्र का माहौल लगातार बिगड़ रहा है और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इन स्टंटबाजों पर लगाम नहीं लगाई, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा या कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक तंत्र की होगी। ग्रामीणों ने पुलिस और जिला प्रशासन से मांग की है कि मोरडी बांध क्षेत्र में नियमित निगरानी बढ़ाई जाए, स्टंट करने वालों की पहचान कर उनके वाहनों को जब्त किया जाए और मोटर वाहन अधिनियम व अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि पर्यटन स्थल मनोरंजन के लिए हैं, न कि रील बनाने के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डालने के लिए।1