*राजधानी भोपाल में कानून का टाइम अलग, रईसों का टाइम अलग* एक तरफ शहर में बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए अधिकारियों के सख्त आदेश जारी होते हैं दुकानें समय पर बंद हों, भीड़भाड़ ना लगे, अवैध गतिविधियों पर रोक लगे। दूसरी तरफ हकीकत यह है कि राजधानी के कुछ पब और बार मानो कानून की किताब पढ़ते ही नहीं। होशंगाबाद रोड स्थित *THE MID NIGHT FUDDLE* क्लब में देर रात करीब 2 बजे तक शराब पार्टियां चलने की बात सामने आई है। सवाल सीधा है जब आम चाय की दुकान पर सख्ती हो सकती है, तो आलीशान क्लबों पर नरमी क्यों एक ही शहर, एक ही विभाग, एक ही अधिकारी… फिर कार्रवाई के पैमाने अलग क्यों? सूत्रों के मुताबिक पार्टी में मौजूद लोगों से खुलेआम कहा गया पुलिस सेट है, देर रात की भी दिक्कत नहीं। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ बयान नहीं, कानून व्यवस्था पर तमाचा है। इन देर रात चलने वाले क्लबों और बारों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अक्सर ऐसी जगहों से झगड़े, मारपीट, नशे में हुड़दंग, सड़क हादसे और अपराध की नई पटकथाएँ लिखी जाती हैं। फिर भी सख्ती सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित क्यों दिखती है पुलिस आयुक्त के सख्त निर्देशों के बावजूद यदि आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है, तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा थाना स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं क्या राजधानी में नियम सिर्फ कमजोरों के लिए हैं और रसूखदारों के लिए रात अभी जवान है भोपाल की जनता अब जवाब चाहती है—कानून सबके लिए बराबर है, या फिर कुछ लोगों के लिए लेट नाइट पास जारी है
*राजधानी भोपाल में कानून का टाइम अलग, रईसों का टाइम अलग* एक तरफ शहर में बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए अधिकारियों के सख्त आदेश जारी होते हैं दुकानें समय पर बंद हों, भीड़भाड़ ना लगे, अवैध गतिविधियों पर रोक लगे। दूसरी तरफ हकीकत यह है कि राजधानी के कुछ पब और बार मानो कानून की किताब पढ़ते ही नहीं। होशंगाबाद रोड स्थित *THE MID NIGHT FUDDLE* क्लब में देर रात करीब 2 बजे तक शराब पार्टियां चलने की बात सामने आई है। सवाल सीधा है जब आम चाय की दुकान पर सख्ती हो सकती है, तो आलीशान क्लबों पर नरमी क्यों एक ही शहर, एक ही विभाग, एक ही अधिकारी… फिर कार्रवाई के पैमाने अलग क्यों? सूत्रों के मुताबिक पार्टी में मौजूद लोगों से खुलेआम कहा गया पुलिस सेट है, देर रात की भी दिक्कत नहीं। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ बयान नहीं, कानून व्यवस्था पर तमाचा है। इन देर रात चलने वाले क्लबों और बारों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अक्सर ऐसी जगहों से झगड़े, मारपीट, नशे में हुड़दंग, सड़क हादसे और अपराध की नई पटकथाएँ लिखी जाती हैं। फिर भी सख्ती सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित क्यों दिखती है पुलिस आयुक्त के सख्त निर्देशों के बावजूद यदि आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है, तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा थाना स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं क्या राजधानी में नियम सिर्फ कमजोरों के लिए हैं और रसूखदारों के लिए रात अभी जवान है भोपाल की जनता अब जवाब चाहती है—कानून सबके लिए बराबर है, या फिर कुछ लोगों के लिए लेट नाइट पास जारी है
- Post by Naved khan1
- भोपाल स्लग-- लेंसकार्ट कंपनी का विरोध लेंसकार्ट जो कि नजर के चश्मो के लिए जाना माना ब्रांड है उसके द्वारा अभी हाल ही में अपने स्टाफ को एक ड्रेस कोड को ले कर एक आदेश को लेकर विवाद में आ गई सोशल मीडिया पर कंपनी का एक आंतरिक दस्तावेज वायरल हुआ जिसमें कर्मचारियों के लिए नियम बताए गए थे इसमें हिजाब और पगड़ी जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों की अनुमति थी लेकिन बिंदी, तिलक, सिंदूर और कड़ा कलावा जैसे अन्य प्रतीकों पर रोक दिखाई गई जिसको ले कर आज भोपाल के न्यू मार्केट में लेंसकार्ट के शोरूम पर हिंदू उत्सव समिति के लोगो ने प्रदर्शन किया और लेंसकार्ट का बाय कार्ड करने की अपील की उनका कहना था कि जो सनातन के प्रतीकों और सनातन का विरोध करेगा वह हमारे किसी के काम का नही उंन्होने कहा कि वह वहां मौजूद स्टाफ को टिका भी लगाएगे और कलावा भी बाधेगे हालाकि वहां भारी पुलिस बल मौजूद था जिन्होंने उन्हें शोरूम के अंदर नही जाने दिया जिसके बाद हिंदू संगठन के लोगो ने शोरूम के गेट पर चंदन से ॐ और त्रिशूल का चिन्ह बना दिया और जम कर नारेबाजी की वही स्टाफ का कहना था कि हमे ऐसे किसी आदेश की जानकारी नही है बाइट--चंद्रशेखर तिवारी अध्यक्ष हिन्दू उत्सव समिति बाइट अनिला नंद जी महाराज बाइट--पूजा सिंगरोलिया स्टाफ लेंसकार्ट1
- Post by शाहिद खान रिपोर्टर1
- Post by D K G Pradesh Prasar6
- Post by Mahendra Rathore3
- Post by मो। शादाब पत्रकार1
- पीथमपुर में आग1
- Post by Naved khan1
- सामाजिक संदेश के साथ 24 अप्रैल को रिलीज होगी ‘ज़ख्मी परिंदा’ पाटीदार फिल्म प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी फिल्म ‘ज़ख्मी परिंदा’ 24 अप्रैल को मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है यह फिल्म एक सामाजिक मुद्दे पर आधारित है, जिसमें दर्शकों को हर मोड़ पर नया और रोमांचक अनुभव मिलेगा फिल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा UA 16 रेटिंग दी गई है, जिससे यह साफ है कि इसमें संवेदनशील विषयों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है फिल्म की खास बात इसकी दमदार स्टार कास्ट है। इसमें कल्पना साहनी, मोनू गुज्जर और रामेश्वर चौधरी जैसे कलाकार अपनी शानदार अभिनय क्षमता के साथ नजर आएंगे इन कलाकारों ने अपने किरदारों को जीवंत बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है, जो पर्दे पर साफ दिखाई देगी निर्माताओं के अनुसार, फिल्म को बनाने में 2.5 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है। बेहतर कहानी, मजबूत निर्देशन और बेहतरीन तकनीक के साथ यह फिल्म दर्शकों को एक गहरा संदेश देने का प्रयास करती है ‘ज़ख्मी परिंदा’ न सिर्फ मनोरंजन करेगी, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण पहलुओं पर सोचने के लिए भी मजबूर करेगी1