504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक* *504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक* *जमीन के रिकॉर्ड होंगे पारदर्शी, तहसीलों से यूएलबी तक तकनीक की पहुंच, किसानों की फसलों को नहीं होगा नुकसान* *350 तहसीलों में रोवर के जरिए काम शुरू, जंजीर-फीते से सेंटीमीटर की सटीकता तक आया बड़ा बदलाव* *143 रोवर से 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं को मिली रफ्तार, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनिंग पूरी हुई* *सहारनपुर से सीएम योगी ने शुरू किया था धारा-24 महा-अभियान, अब डिजिटल तकनीक से तेज होगा सीमांकन* *लखनऊ, 14 सितंबर।* उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया अब तकनीक की नई रफ्तार पकड़ रही है। योगी सरकार राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए जीएनएसएस रोवर तकनीक को बड़े स्तर पर जमीन पर उतार रही है। प्रदेश में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुंचाए जा चुके हैं और इनसे काम भी शुरू हो गया है। वहीं 143 रोवर 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हरदोई के केटीएस (चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र) में दो रोवर लगाए गए हैं, जबकि लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर से सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यह बदलाव जमीन की पैमाइश को पारंपरिक तरीकों से निकालकर अधिक तेज, सटीक और डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जा रहा है। *खेत-खलिहान से नक्शे तक, एक ही तकनीक से कई काम* राजस्व परिषद आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि जीएनएसएस रोवर की तैनाती केवल तहसीलों तक सीमित नहीं है। 350 रोवर सीधे तहसीलों में पहुंचने के बाद फील्ड सर्वेक्षण में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके साथ 143 रोवर 10 यूएलबी (शहरी स्थानीय निकाय) की नक्शा परियोजनाओं के लिए लगाए गए हैं। हरदोई के केटीएस को भी दो रोवर उपलब्ध कराए गए हैं। दूसरी ओर, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर का इस्तेमाल प्रशिक्षण में किया गया और सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यानी राजस्व विभाग में तकनीक के इस्तेमाल के साथ कर्मचारियों को इसके संचालन के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। *सीएम योगी ने सहारनपुर से रखी थी अभियान की नींव* कंचन वर्मा ने कहा कि भूमि की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए धारा-24 का विशेष महाअभियान 1 जुलाई से 15 अगस्त तक चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान को प्रभावी और एक समान तरीके से संचालित करने के लिए राजस्व विभाग ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी जारी की। अब इसी व्यवस्था को आधुनिक सर्वे तकनीक का सहारा मिलने से जमीन से जुड़े कामों में तकनीकी क्षमता बढ़ी है। *जीएनएसएस रोवर के कई फायदे* *सेंटीमीटर स्तर तक सटीक स्थिति बताता है रोवर* जीएनएसएस रोवर आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है, जो विभिन्न उपग्रह प्रणालियों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन पर किसी बिंदु की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह लगभग 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक जानकारी दे सकता है। सर्वेक्षक खेत या भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक (कोऑर्डिनेट्स) दर्ज करते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर की मदद से दूरी और क्षेत्रफल की गणना की जाती है व डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है। *जंजीर-फीते से डिजिटल पैमाइश की ओर बढ़ा कदम* जमीन की पैमाइश के पारंपरिक तरीकों में जंजीर और फीते के इस्तेमाल की तुलना में रोवर तकनीक सर्वेक्षण को अधिक वैज्ञानिक और डिजिटल बना रही है। फील्ड में जुटाए गए डिजिटल निर्देशांकों को जीआईएस और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे तैयार डेटा को सुरक्षित रखना, उसकी गुणवत्ता जांचना और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल करना आसान बन रहा है। *मानवीय चूक की संभावना होगी कम* रोवर के जरिए भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदु डिजिटल रूप में दर्ज किए जाते हैं। इससे दूरी और क्षेत्रफल की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम हो रहा है और गलतियों की संभावना घट रही है। बड़े क्षेत्र में सर्वेक्षण कम समय में पूरा किया जा रहा है और अपेक्षाकृत कम जनशक्ति की जरूरत पड़ रही है। बड़े भूमि सर्वेक्षण और नक्शा परियोजनाओं में इससे समय और लागत बचाने में भी मदद मिलने लगी है। *फसल को नुकसान पहुंचाए बिना जमीन की पैमाइश* कृषि भूमि की पैमाइश में फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। जीएनएसएस रोवर के इस्तेमाल से पारंपरिक तरीके से खेत में बार-बार आवाजाही और लंबी प्रक्रिया की जरूरत कम की जा रही है। सीमा के जरूरी बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक लेकर सर्वेक्षण किया जा रहा है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना पैमाइश करने की सुविधा मिल रही है। किसानों के लिए भी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती जा रही है। *डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता* रोवर से तैयार डिजिटल डेटा भूमि रिकॉर्ड और नक्शा प्रणालियों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर रहा है। रिकॉर्ड की गुणवत्ता जांचने और डेटा की ट्रेसबिलिटी बनाए रखने में भी सुविधा है। भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कडास्ट्रल मैपिंग, नक्शा परियोजनाओं और जीआईएस आधारित मैपिंग में इसका इस्तेमाल राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने में सहायता प्रदान कर रहा है।
504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक* *504 रोवर से बदल रहा जमीन की पैमाइश का तरीका, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक* *जमीन के रिकॉर्ड होंगे पारदर्शी, तहसीलों से यूएलबी तक तकनीक की पहुंच, किसानों की फसलों को नहीं होगा नुकसान* *350 तहसीलों में रोवर के जरिए काम शुरू, जंजीर-फीते से सेंटीमीटर की सटीकता तक आया बड़ा बदलाव* *143 रोवर से 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं को मिली रफ्तार, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों में ट्रेनिंग पूरी हुई* *सहारनपुर से सीएम योगी ने शुरू किया था धारा-24 महा-अभियान, अब डिजिटल तकनीक से तेज होगा सीमांकन* *लखनऊ, 14 सितंबर।* उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया अब तकनीक की नई रफ्तार पकड़ रही है। योगी सरकार राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए जीएनएसएस रोवर तकनीक को बड़े स्तर पर जमीन पर उतार रही है। प्रदेश में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुंचाए जा चुके हैं और इनसे काम भी शुरू हो गया है। वहीं 143 रोवर 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हरदोई के केटीएस (चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र) में दो रोवर लगाए गए हैं, जबकि लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर से सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यह बदलाव जमीन की पैमाइश को पारंपरिक तरीकों से निकालकर अधिक तेज, सटीक और डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जा रहा है। *खेत-खलिहान से नक्शे तक, एक ही तकनीक से कई काम* राजस्व परिषद आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि जीएनएसएस रोवर की तैनाती केवल तहसीलों तक सीमित नहीं है। 350 रोवर सीधे तहसीलों में पहुंचने के बाद फील्ड सर्वेक्षण में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके साथ 143 रोवर 10 यूएलबी (शहरी स्थानीय निकाय) की नक्शा परियोजनाओं के लिए लगाए गए हैं। हरदोई के केटीएस को भी दो रोवर उपलब्ध कराए गए हैं। दूसरी ओर, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर का इस्तेमाल प्रशिक्षण में किया गया और सभी प्रशिक्षण पूरे हो चुके हैं। यानी राजस्व विभाग में तकनीक के इस्तेमाल के साथ कर्मचारियों को इसके संचालन के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। *सीएम योगी ने सहारनपुर से रखी थी अभियान की नींव* कंचन वर्मा ने कहा कि भूमि की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए धारा-24 का विशेष महाअभियान 1 जुलाई से 15 अगस्त तक चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान को प्रभावी और एक समान तरीके से संचालित करने के लिए राजस्व विभाग ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी जारी की। अब इसी व्यवस्था को आधुनिक सर्वे तकनीक का सहारा मिलने से जमीन से जुड़े कामों में तकनीकी क्षमता बढ़ी है। *जीएनएसएस रोवर के कई फायदे* *सेंटीमीटर स्तर तक सटीक स्थिति बताता है रोवर* जीएनएसएस रोवर आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है, जो विभिन्न उपग्रह प्रणालियों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन पर किसी बिंदु की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह लगभग 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक जानकारी दे सकता है। सर्वेक्षक खेत या भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक (कोऑर्डिनेट्स) दर्ज करते हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर की मदद से दूरी और क्षेत्रफल की गणना की जाती है व डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है। *जंजीर-फीते से डिजिटल पैमाइश की ओर बढ़ा कदम* जमीन की पैमाइश के पारंपरिक तरीकों में जंजीर और फीते के इस्तेमाल की तुलना में रोवर तकनीक सर्वेक्षण को अधिक वैज्ञानिक और डिजिटल बना रही है। फील्ड में जुटाए गए डिजिटल निर्देशांकों को जीआईएस और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे तैयार डेटा को सुरक्षित रखना, उसकी गुणवत्ता जांचना और जरूरत के समय उसका इस्तेमाल करना आसान बन रहा है। *मानवीय चूक की संभावना होगी कम* रोवर के जरिए भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदु डिजिटल रूप में दर्ज किए जाते हैं। इससे दूरी और क्षेत्रफल की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम हो रहा है और गलतियों की संभावना घट रही है। बड़े क्षेत्र में सर्वेक्षण कम समय में पूरा किया जा रहा है और अपेक्षाकृत कम जनशक्ति की जरूरत पड़ रही है। बड़े भूमि सर्वेक्षण और नक्शा परियोजनाओं में इससे समय और लागत बचाने में भी मदद मिलने लगी है। *फसल को नुकसान पहुंचाए बिना जमीन की पैमाइश* कृषि भूमि की पैमाइश में फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। जीएनएसएस रोवर के इस्तेमाल से पारंपरिक तरीके से खेत में बार-बार आवाजाही और लंबी प्रक्रिया की जरूरत कम की जा रही है। सीमा के जरूरी बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक लेकर सर्वेक्षण किया जा रहा है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाए बिना पैमाइश करने की सुविधा मिल रही है। किसानों के लिए भी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती जा रही है। *डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता* रोवर से तैयार डिजिटल डेटा भूमि रिकॉर्ड और नक्शा प्रणालियों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर रहा है। रिकॉर्ड की गुणवत्ता जांचने और डेटा की ट्रेसबिलिटी बनाए रखने में भी सुविधा है। भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कडास्ट्रल मैपिंग, नक्शा परियोजनाओं और जीआईएस आधारित मैपिंग में इसका इस्तेमाल राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने में सहायता प्रदान कर रहा है।
- बालक नरेंद्र मोदी का वडनगर की तंग गलियों से उठकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर पूरी कहानी केशव की जुबानी में देखे बालक नरेंद्र मोदी का वडनगर की तंग गलियों से उठकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर कड़े संघर्ष, अटूट देशभक्ति और असाधारण नेतृत्व की एक प्रेरणादायक कहानी है। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के एक छोटे से कस्बे वडनगर में जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। उनके इस ऐतिहासिक सफर को हम कुछ मुख्य पड़ावों के माध्यम से समझ सकते हैं: 1. बचपन और संघर्ष के दिन (1950 - 1967) चाय की दुकान पर हाथ बंटाना: नरेंद्र मोदी का जन्म एक बेहद साधारण और सीमित साधनों वाले परिवार में हुआ था। उनके पिता दामोदरदास मोदी वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे, जहाँ बालक नरेंद्र भी स्कूल के बाद अपने पिता का हाथ बंटाते थे।1
- चांदमारी रिंग रोड चौराहा बना तालाब, राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता हरीशचंद्र पटेल वाराणसी1
- चंद्रशेखर आजाद के समर्थन में वाराणसी में प्रदर्शन, दोषियों पर कार्रवाई की मांग1
- योगी सरकार बुनकरों को उपलब्ध कराएगी सरकारी खरीद का बड़ा बाजार न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट लखनऊ, 15 सितंबर 2026। प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने और बुनकरों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड,तिलक मार्ग,लखनऊ स्थित सभाकक्ष में मंगलवार को खादी एवं ग्रामोद्योग,रेशम,हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में सरकारी अस्पतालों,मेडिकल कॉलेजों एवं अन्य चिकित्सा संस्थानों में हथकरघा निर्मित बेडशीट व गॉज बैंडेज की खरीद और आपूर्ति व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।मंत्री ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में आपूर्ति व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि 07 अगस्त 2026 को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों में बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में 01 सितंबर को भी मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी।प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से बेडशीट,तकिया कवर एवं गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति की जाएगी।इसके लिए प्रदेश के बुनकरों एवं बुनकर सहकारी समितियों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा।मंत्री राकेश सचान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सरकारी खरीद नहीं,बल्कि बुनकर परिवारों को निरंतर रोजगार,स्थायी बाजार और आर्थिक मजबूती प्रदान करना है।उन्होंने गुणवत्ता,निर्धारित मानक और समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष जोर दिया।बैठक में मांग प्राप्त करने,क्रय आदेश,भुगतान प्रक्रिया को स्पष्ट बनाने तथा नोडल अधिकारी नामित करने पर भी चर्चा हुई।बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल सागर,विशेष सचिव शेषमणि पांडेय,संयुक्त आयुक्त पी.सी. ठाकुर सहित चिकित्सा,स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।1
- योगी सरकार बुनकरों को उपलब्ध कराएगी सरकारी खरीद का बड़ा बाजार न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट लखनऊ, 15 सितंबर 2026। प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने और बुनकरों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड,तिलक मार्ग,लखनऊ स्थित सभाकक्ष में मंगलवार को खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम,हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में सरकारी अस्पतालों,मेडिकल कॉलेजों एवं अन्य चिकित्सा संस्थानों में हथकरघा निर्मित बेडशीट व गॉज बैंडेज की खरीद और आपूर्ति व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।मंत्री ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में आपूर्ति व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।उल्लेखनीय है कि 07 अगस्त 2026 को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों में बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में 01 सितंबर को भी मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी।प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से बेडशीट,तकिया कवर एवं गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति की जाएगी।इसके लिए प्रदेश के बुनकरों एवं बुनकर सहकारी समितियों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा।मंत्री राकेश सचान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सरकारी खरीद नहीं,बल्कि बुनकर परिवारों को निरंतर रोजगार,स्थायी बाजार और आर्थिक मजबूती प्रदान करना है।उन्होंने गुणवत्ता,निर्धारित मानक और समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष जोर दिया।बैठक में मांग प्राप्त करने,क्रय आदेश,भुगतान प्रक्रिया को स्पष्ट बनाने तथा नोडल अधिकारी नामित करने पर भी चर्चा हुई।बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल सागर,विशेष सचिव शेषमणि पांडेय,संयुक्त आयुक्त पी.सी.ठाकुर सहित चिकित्सा,स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।1
- समाजवादी नेता जीशान अंसारी ने लगाया नगर आयुक्त पर गंभीर आरोप वाराणसी से एक मामला सामने आया है और समाजवादी नेता जीशान अंसारी ने नगर आयुक्त पर गंभीर रूप से आरोप लगाया है कि जनता के टेक्स को अधिकारी बरबाद कर रहे हैं। Varanasi Breking News1
- वाराणसी ब्रेकिंग न्यूज़ *वाराणसी* *लंका थाने पर काफी संख्या में अधिवक्ताओं की भीड़* *वाराणसी* *लंका थाने पर काफी संख्या में अधिवक्ताओं की भीड़*1
- विकसित भारत जी राम जी योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाएं अधिकारी: उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट लखनऊ,15 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने आज ग्राम्य विकास विभाग के उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर विकसित भारत जी राम जी योजना के मुख्यालय एवं जिला स्तरीय क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की।उन्होंने योजना की प्रगति का ब्योरा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि डबल इंजन सरकार की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि योजना को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने तथा स्थानीय निकायों की भूमिका सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रत्येक जनपद में पंच सम्मेलन का आयोजन किया जाए। इन सम्मेलनों में सांसदों,विधायकों, जिला व क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए,जिससे विकास योजनाओं में जन-सहभागिता और पारदर्शिता बनी रहे।आगामी त्योहारों के दृष्टिगत उन्होंने निर्देश दिया कि ब्लॉक स्तर पर पंजीकृत कार्ड धारकों को तत्काल कार्य आवंटित किए जाएं। ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वयं निगरानी रखें ताकि किसी भी पात्र कार्ड धारक को कार्य प्राप्त करने एवं मजदूरी के भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो।योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही पर सख्त चेतावनी देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी स्तर पर ढिलाई,हीलाहवाली या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी राम जी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण,रोजगार का त्वरित सृजन और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। अधिकारियों को नियमित मैदानी निरीक्षण करने और प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं।1