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मध्य प्रदेश के पलेरा में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम में थाना तिराहे पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां उपस्थित लोगों ने फूलों की जोरदार बारिश की। यह आयोजन लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के सम्मान में किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
मध्य प्रदेश के पलेरा में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम में थाना तिराहे पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां उपस्थित लोगों ने फूलों की जोरदार बारिश की। यह आयोजन लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के सम्मान में किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
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- आज मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की तीसरी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवहन सेवाओं के विस्तार, आधारभूत संरचना को मजबूत करने और नागरिकों को आसान, सुरक्षित तथा बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।1
- नौगांव सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राजलक्ष्मी कुशवाहा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल के निरीक्षण के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मरीजों को यहाँ मूलभूत सुविधाएँ भी नहीं मिल पा रही हैं। कुशवाहा ने बताया कि निरीक्षण के समय अस्पताल के कई कमरों में ताले लगे मिले, जबकि मरीजों को पर्चा बनवाने के लिए भी भटकना पड़ रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर समय पर अस्पताल नहीं पहुँचते, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी असंतोषजनक पाई गई। इसके अतिरिक्त, राजलक्ष्मी कुशवाहा ने जानकारी दी कि अस्पताल में कई आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध नहीं थीं, जिसके कारण मरीजों को बाहर से दवाएँ खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास के नाम पर केवल भ्रष्टाचार हुआ है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। राजलक्ष्मी कुशवाहा ने जिला कलेक्टर और बीएमओ से अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने की माँग की है। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि मरीजों के पर्चे समय पर बनें, उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, बेहतर उपचार व्यवस्था हो और अस्पताल में आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो जनता के हित में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से अस्पताल की व्यवस्थाओं को पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की अपील की है।1
- सोमवार को छतरपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक ने अपने हाथ की नस काटने का प्रयास किया। इस घटना से परिसर में मौजूद पुलिसकर्मी, फरियादी और अधिकारी कुछ देर के लिए सकते में आ गए। घायल युवक शिव प्रसाद को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। अस्पताल के बिस्तर से युवक शिव प्रसाद ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना है कि पुलिस ने उस पर फर्जी मामला दर्ज किया, घर जाकर उसके परिवार को परेशान किया और लगातार उस पर मानसिक दबाव बनाया, जिससे तंग आकर उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। युवक ने यह भी दावा किया कि वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करवा रहा है और कई मामलों में बरी भी हो चुका है, लेकिन पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया उसके लिए किसी सरकारी प्रतियोगी परीक्षा से कम मुश्किल साबित नहीं हो रही है। इस बीच प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। तहसीलदार शशांक जैन ने अस्पताल पहुंचकर घायल युवक के बयान दर्ज किए। हालांकि, जब पत्रकारों ने तहसीलदार से युवक द्वारा नस काटने का कारण पूछा, तो अधिकारी मुस्कुराए और बिना स्पष्ट जवाब दिए आगे बढ़ गए, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर युवक के दर्द की वजह प्रशासनिक गलियारों में कहीं रास्ता क्यों भटक गई है। प्राथमिक जांच में युवक के हाथों पर पुराने कट के निशान भी पाए गए हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि वह पहले भी खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर चुका है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि युवक के आरोप सही हैं, तो उसकी सुनवाई क्यों नहीं हुई, और यदि गलत हैं, तो मामला एसपी कार्यालय में आत्मघाती कदम उठाने तक क्यों पहुंचा? जांच जारी है, जवाबों का इंतजार है, लेकिन छतरपुर की जनता यह सोचने पर मजबूर है कि यहां फाइलें ज्यादा तेज चलती हैं या अफवाहें, और अधिकारियों को पीड़ितों पर हंसना क्यों आ जाता है?1
- Post by Mukesh Gautam1
- छतरपुर की शिवनगर कॉलोनी में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहाँ 30 वर्षीय दीनदयाल कुशवाहा की कथित तौर पर उसकी पत्नी ने डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस दंपति के दो छोटे बच्चे बताए जा रहे हैं। घटना को अंजाम देने के बाद, पत्नी खुद सिविल लाइन थाने पहुंची और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।1
- मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने टीकमगढ़ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बल्देवगढ़ के प्रभारी तहसीलदार अनिल गुप्ता को तत्काल हटाने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनका स्थानांतरण और पटवारियों की अन्य मांगों पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जवाबदेही प्रशासन की होगी। संघ ने आरोप लगाया है कि दिनांक 29.04.2026 को बल्देवगढ़ तहसील के पटवारियों ने प्रभारी तहसीलदार अनिल गुप्ता को अपनी समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन उनके उदासीन रवैये के कारण पटवारियों को गांधीवादी तरीके से दंडवत होकर और जमीन पर नाक रगड़ कर समस्याओं के निराकरण का आग्रह करना पड़ा। इसके बावजूद, तहसीलदार ने उन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि उन्हें बुरा-भला कहने लगे, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था। संघ ने बताया कि दिनांक 27.05.2027 को अनुविभागीय अधिकारी बल्देवगढ़ द्वारा सात पटवारियों के समयमान वेतनमान स्वीकृत का आदेश जारी होने के बाद भी, प्रभारी अनिल गुप्ता ने 28.05.2027 को ईद के सार्वजनिक अवकाश के दिन पटवारियों को सीआर बनाने और आदेश करने के बहाने बल्देवगढ़ बुलाया। इस दौरान, उन्होंने सुनियोजित तरीके से दबाव और प्रभाव डालकर अधिकांश पटवारियों से एक जैसे वक्तव्य की वीडियो रिकॉर्डिंग बनवाई, जिसमें कथित तौर पर तहसीलदार बल्देवगढ़ को अच्छा कहा गया और पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष के विरुद्ध बंद कमरे में झूठ बुलवाकर अनर्गल बातें कहलाई गईं। टीकमगढ़ पटवारी संघ की बैठक में पटवारियों लक्ष्मीकांत शुक्ला, रामलाल सौर, रमेश सूत्रकार और विनोद अहिरवार ने स्पष्ट किया कि तहसीलदार अनिल गुप्ता ने उन्हें डरा-धमका कर, दबाव बनाकर और मानसिक रूप से प्रताड़ित करके ये वक्तव्य दिलवाए थे। एक अन्य पटवारी मन प्यारे को यह अनुचित लगा और वे बिना बयान दिए ही कमरे से बाहर चले गए थे। पटवारी संघ का आरोप है कि अनिल गुप्ता का पटवारियों के प्रति हमेशा विवादित और प्रताड़नात्मक रवैया रहा है, जिससे पटवारियों में गहरा भय व्याप्त है। संघ ने आशंका व्यक्त की है कि तहसीलदार साजिश के तहत पटवारियों को प्रताड़ित कर सकते हैं, क्योंकि वे पक्षपात पूर्ण व्यवहार करते हैं, पटवारियों के प्रति द्वेष भावना रखते हैं और संघ के अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर भी उन्होंने संवेदनहीनता दिखाई है। इन्हीं गंभीर शिकायतों के मद्देनज़र, पटवारी संघ मध्य प्रदेश ने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है कि यदि प्रभारी अनिल गुप्ता का अविलंब स्थानांतरण नहीं किया जाता है, तो वे एक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जवाबदेही प्रशासन की होगी।3
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में सामान्य नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू करने की बात कही है। उन्होंने इस विषय पर जो कुछ भी कहा है, उसे विस्तार से जानने के लिए इस वीडियो को देखने का आग्रह किया गया है।1
- सतना के कोतवाली थाना क्षेत्र में दो पुलिसकर्मी आपस में विवाद करते हुए कैमरे में कैद हुए हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों पुलिसकर्मी एक-दूसरे को गालियां देते हुए दिखाई दिए। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह पूरा मामला खूब चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, उनके बीच विवाद की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन मामले को लेकर विभागीय स्तर पर जांच की संभावना जताई जा रही है।1
- आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह को प्रयागराज के सर्किट हाउस में NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा करने से रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी पहुँचे। इन अधिकारियों को, जिन्हें मूल पोस्ट में 'जोगी जी के प्रशासन' का हिस्सा बताया गया है, संजय सिंह ने 'हिंदी में समझा' कर उल्टे पांव वापस लौटा दिया। इस घटना को लेकर पोस्ट में गहरा कटाक्ष किया गया है, जिसमें कहा गया है कि यह 'गजब का समय' आ गया है जब आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को 'समझदारी' दिखाते हुए वापस लौटना पड़ा। यह टिप्पणी देश में 'लोकतंत्र' की स्थिति पर सवाल उठाती है, व्यंग्यात्मक रूप से यह इंगित करते हुए कि यदि इस तरह की घटनाओं के बाद भी किसी को लगता है कि लोकतंत्र बचा है, तो उन्हें 'मैलोडी' खाकर मस्त रहना चाहिए।1