तीर्थ नगरी हरिद्वार में हरे-भरे वृक्षों का कत्लेआम! भीमगोडा से हर की पौड़ी मार्ग पर सैकड़ों पेड़ों पर चली आरी, पर्यावरण और श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट तीर्थ नगरी हरिद्वार में हरे-भरे वृक्षों का कत्लेआम! भीमगोडा से हर की पौड़ी मार्ग पर सैकड़ों पेड़ों पर चली आरी, पर्यावरण और श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट रिपोर्ट: स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ हरिद्वार। तीर्थ नगरी हरिद्वार, जहां कल-कल करती पावन गंगा की धारा न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि पर्यावरण की शुद्धता का भी आधार है। कहा जाता है—“गंगा है तो पर्यावरण है और पर्यावरण है तो मानव जीवन है।” लेकिन अब यही पवित्र नगरी धीरे-धीरे पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला दृश्य आज उस समय सामने आया जब ऐतिहासिक भीमगोडा कुंड से हर की पौड़ी जाने वाले मार्ग पर सैकड़ों हरे-भरे वृक्षों को बेरहमी से काटा जाता देखा गया। सड़क किनारे वर्षों से खड़े ये विशाल वृक्ष तीर्थ यात्रियों को गर्मी से राहत देने वाली छाया प्रदान करते थे, लेकिन आज उन पर आरी चलाकर उन्हें धराशायी कर दिया गया। छाया देने वाले वृक्षों को बेरहमी से काटा गया हरिद्वार आने वाले लाखों श्रद्धालु भीमगोडा से हर की पौड़ी की ओर जाते समय इन्हीं वृक्षों की छाया में चलकर गंगा स्नान के लिए पहुंचते थे। गर्मी के दिनों में यह मार्ग इन वृक्षों के कारण अपेक्षाकृत ठंडा और आरामदायक रहता था। लेकिन आज जब अचानक सैकड़ों वृक्षों को काटा गया, तो स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जिन वृक्षों ने दशकों तक तीर्थ यात्रियों को राहत दी, उन्हें एक ही दिन में खत्म कर दिया गया। ठेकेदार का दावा – रेलवे की अनुमति से हो रहा कटान जब मौके पर मौजूद पेड़ काटने वाले ठेकेदार से पूछा गया कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर वृक्षों का कटान किस आधार पर किया जा रहा है, तो उसने साफ कहा— “हमें रेलवे विभाग से अनुमति मिली है, उसी के आदेश पर पेड़ काटे जा रहे हैं।” यह जवाब सुनकर वहां मौजूद लोगों की जिज्ञासा और भी बढ़ गई। रेलवे अधिकारी बोले – वन विभाग से ली गई है अनुमति मौके पर मौजूद रेलवे विभाग के एक अधिकारी से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उनका कहना था कि— “वृक्षों के कटान के लिए वन विभाग से विधिवत अनुमति ली गई है और नियम के अनुसार एक पेड़ के बदले दो पेड़ लगाए जाएंगे।” लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या ये वृक्ष इसी स्थान पर लगाए जाएंगे, तो उन्होंने साफ कहा कि यहां वृक्षारोपण नहीं होगा बल्कि कहीं अन्य स्थान पर पेड़ लगाए जाएंगे। यही जवाब अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह कैसी पर्यावरण नीति? सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि— वृक्ष यहीं काटे गए, तापमान यहीं बढ़ेगा, श्रद्धालु यहीं धूप में चलेंगे, तो फिर वृक्षारोपण कहीं और क्यों किया जाएगा? क्या पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल कागजों में पौधे लगाना रह गया है? कोरोना काल की सीख भी भूले लोग कोरोना महामारी के समय पूरी दुनिया ने ऑक्सीजन की कमी का भयावह संकट देखा था। अस्पतालों के बाहर लोग एक-एक सांस के लिए तड़पते दिखाई दिए थे। उस दौर में समाज ने संकल्प लिया था कि अधिक से अधिक वृक्ष लगाए जाएंगे ताकि पर्यावरण संतुलित रहे। लेकिन अब लगता है कि वह संकल्प भी समय के साथ भुला दिया गया है। आज फिर हरे-भरे वृक्षों को काटकर पर्यावरण को और गर्म करने का काम किया जा रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यावरण दोनों पर दोहरी मार भीमगोडा से हर की पौड़ी जाने वाला मार्ग हरिद्वार का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ मार्ग है। यहां से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए गुजरते हैं। अब वृक्षों के कटने के बाद यह पूरा मार्ग तपती धूप का शिकार होगा। इससे— श्रद्धालुओं को भारी परेशानी होगी स्थानीय तापमान बढ़ेगा पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा जांच की मांग उठी इस पूरे मामले को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं— आखिर कितने वृक्षों को काटने की अनुमति दी गई थी? क्या वन विभाग की अनुमति वास्तव में उतनी ही थी जितने वृक्ष काटे गए? क्या वृक्षों को काटना वास्तव में आवश्यक था? और यदि कटान जरूरी था तो वृक्षारोपण उसी स्थान पर क्यों नहीं किया जा रहा? स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई तीर्थ नगरी हरिद्वार केवल एक शहर नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां पर्यावरण के साथ खिलवाड़ केवल प्रकृति ही नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी चोट है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि वृक्षों का कटान नियमों के विरुद्ध हुआ है या बिना पर्याप्त कारण के किया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर कौन देगा इस सवाल का जवाब? सबसे बड़ा सवाल यही है कि— क्या विकास के नाम पर हरियाली का बलिदान जरूरी है? और यदि विकास हो भी रहा है, तो क्या उसे प्रकृति और पर्यावरण की कीमत पर ही किया जाएगा? हरिद्वार की पवित्र भूमि आज यही प्रश्न प्रशासन और संबंधित विभागों से पूछ रही है।
तीर्थ नगरी हरिद्वार में हरे-भरे वृक्षों का कत्लेआम! भीमगोडा से हर की पौड़ी मार्ग पर सैकड़ों पेड़ों पर चली आरी, पर्यावरण और श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट तीर्थ नगरी हरिद्वार में हरे-भरे वृक्षों का कत्लेआम! भीमगोडा से हर की पौड़ी मार्ग पर सैकड़ों पेड़ों पर चली आरी, पर्यावरण और श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट रिपोर्ट: स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ हरिद्वार। तीर्थ नगरी हरिद्वार, जहां कल-कल करती पावन गंगा की धारा न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि पर्यावरण की शुद्धता का भी आधार है। कहा जाता है—“गंगा है तो पर्यावरण है और पर्यावरण है तो मानव जीवन है।” लेकिन अब यही पवित्र नगरी धीरे-धीरे पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला दृश्य आज उस समय सामने आया जब ऐतिहासिक भीमगोडा कुंड से हर की पौड़ी जाने वाले मार्ग पर सैकड़ों हरे-भरे वृक्षों को बेरहमी से काटा जाता देखा गया। सड़क किनारे वर्षों से खड़े ये विशाल वृक्ष तीर्थ यात्रियों को गर्मी से राहत देने वाली छाया प्रदान करते थे, लेकिन आज उन पर आरी चलाकर उन्हें धराशायी कर दिया गया। छाया देने वाले वृक्षों को बेरहमी से काटा गया हरिद्वार आने वाले लाखों श्रद्धालु भीमगोडा से हर की पौड़ी की ओर जाते समय इन्हीं वृक्षों की छाया में
चलकर गंगा स्नान के लिए पहुंचते थे। गर्मी के दिनों में यह मार्ग इन वृक्षों के कारण अपेक्षाकृत ठंडा और आरामदायक रहता था। लेकिन आज जब अचानक सैकड़ों वृक्षों को काटा गया, तो स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जिन वृक्षों ने दशकों तक तीर्थ यात्रियों को राहत दी, उन्हें एक ही दिन में खत्म कर दिया गया। ठेकेदार का दावा – रेलवे की अनुमति से हो रहा कटान जब मौके पर मौजूद पेड़ काटने वाले ठेकेदार से पूछा गया कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर वृक्षों का कटान किस आधार पर किया जा रहा है, तो उसने साफ कहा— “हमें रेलवे विभाग से अनुमति मिली है, उसी के आदेश पर पेड़ काटे जा रहे हैं।” यह जवाब सुनकर वहां मौजूद लोगों की जिज्ञासा और भी बढ़ गई। रेलवे अधिकारी बोले – वन विभाग से ली गई है अनुमति मौके पर मौजूद रेलवे विभाग के एक अधिकारी से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उनका कहना था कि— “वृक्षों के कटान के लिए वन विभाग से विधिवत अनुमति ली गई है और नियम के अनुसार एक पेड़ के बदले दो पेड़ लगाए जाएंगे।” लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या ये वृक्ष इसी स्थान पर लगाए
जाएंगे, तो उन्होंने साफ कहा कि यहां वृक्षारोपण नहीं होगा बल्कि कहीं अन्य स्थान पर पेड़ लगाए जाएंगे। यही जवाब अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह कैसी पर्यावरण नीति? सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि— वृक्ष यहीं काटे गए, तापमान यहीं बढ़ेगा, श्रद्धालु यहीं धूप में चलेंगे, तो फिर वृक्षारोपण कहीं और क्यों किया जाएगा? क्या पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल कागजों में पौधे लगाना रह गया है? कोरोना काल की सीख भी भूले लोग कोरोना महामारी के समय पूरी दुनिया ने ऑक्सीजन की कमी का भयावह संकट देखा था। अस्पतालों के बाहर लोग एक-एक सांस के लिए तड़पते दिखाई दिए थे। उस दौर में समाज ने संकल्प लिया था कि अधिक से अधिक वृक्ष लगाए जाएंगे ताकि पर्यावरण संतुलित रहे। लेकिन अब लगता है कि वह संकल्प भी समय के साथ भुला दिया गया है। आज फिर हरे-भरे वृक्षों को काटकर पर्यावरण को और गर्म करने का काम किया जा रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यावरण दोनों पर दोहरी मार भीमगोडा से हर की पौड़ी जाने वाला मार्ग हरिद्वार का सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ मार्ग है। यहां से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए गुजरते हैं। अब वृक्षों के कटने के बाद यह पूरा मार्ग तपती धूप का शिकार होगा। इससे— श्रद्धालुओं को भारी परेशानी होगी स्थानीय तापमान बढ़ेगा पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा जांच
की मांग उठी इस पूरे मामले को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं— आखिर कितने वृक्षों को काटने की अनुमति दी गई थी? क्या वन विभाग की अनुमति वास्तव में उतनी ही थी जितने वृक्ष काटे गए? क्या वृक्षों को काटना वास्तव में आवश्यक था? और यदि कटान जरूरी था तो वृक्षारोपण उसी स्थान पर क्यों नहीं किया जा रहा? स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई तीर्थ नगरी हरिद्वार केवल एक शहर नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां पर्यावरण के साथ खिलवाड़ केवल प्रकृति ही नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी चोट है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि वृक्षों का कटान नियमों के विरुद्ध हुआ है या बिना पर्याप्त कारण के किया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभागों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर कौन देगा इस सवाल का जवाब? सबसे बड़ा सवाल यही है कि— क्या विकास के नाम पर हरियाली का बलिदान जरूरी है? और यदि विकास हो भी रहा है, तो क्या उसे प्रकृति और पर्यावरण की कीमत पर ही किया जाएगा? हरिद्वार की पवित्र भूमि आज यही प्रश्न प्रशासन और संबंधित विभागों से पूछ रही है।
- दिनांक 12.04.2026 को वादी निवासी रोशनाबाद सिडकुल जनपद हरिद्वार की लिखित तहरीर पर वादी की नाबालिक पुत्री को बहला फुसलाकर भगा ले जाने के संबंध में थाना हाजा पर अभियोग पंजीकृत किया गया था। दिनांक 12.04.2026 को मुकदमा उपरोक्त के दीपक तोमर पुत्र विजेंद्र तोमर निवासी ग्राम बिजवाड़ा थाना बिनौली जनपद बागपत उत्तर प्रदेश को पकडा गया तथा मुकदमा उपरोक्त की पीड़िता को आरोपित के कब्जे से बरामद किया गया। अभियोग में पोक्सो एक्ट की बढ़ोतरी की गई है। *नाम व पता आरोपित* दीपक तोमर पुत्र विजेंद्र तोमर निवासी ग्राम बिजवाडा थाना बिनौली जनपद बागपत उत्तर प्रदेश। *पुलिस टीम* 1- अ0उ0नि0 हरिश्चंद्र शाह, 2- हेड कांस्टेबल कुलदीप बगासी 3- म0का0 रत्ना1
- दो भाइयों के बीच बंटवारे का विवाद इतना बढ़ गया कि मामला लाठी-डंडों तक पहुंच गया… और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया… लेकिन अब हरिद्वार पुलिस ने इस मामले में सख्त एक्शन लिया है। SSP नवनीत सिंह के निर्देश पर पुलिस ने इब्राहिमपुर पथरी लड़ाई मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है… जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। आपको बता दें कि इन तीनों आरोपियों पर एसएसपी हरिद्वार द्वारा ₹5000-₹5000 का इनाम भी घोषित किया गया था। “ऑपरेशन प्रहार” के तहत थाना पथरी पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। हरिद्वार पुलिस का साफ संदेश है — जो भी शांति व्यवस्था भंग करेगा, उसका ठिकाना अब सिर्फ सलाखों के पीछे होगा। 👉 जनता से अपील — किसी भी विवाद को कानून के दायरे में रहकर सुलझाएं, हिंसा का रास्ता केवल मुश्किलें बढ़ाता है।1
- Post by इलेक्ट्रीशियन सर्विस हरिद्वार1
- अमेरिका के उप राष्ट्रपति ने कर दिया बड़ा ऐलान पाकिस्तान में हुई वार्ता रही बेनतीजा1
- Post by Om tv haridwar1
- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज दिल्ली देहरादून इकानामिक कोरिडोर का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री सुबह हवाई मार्ग से देहरादून पहुंचे और फिर कोरीडोर के सड़क मार्ग से सहारनपुर के गणेश पुर पहुंच कर कोरोडोर का उद्घाटन किया।इस इकानामिक कोरीडोर के अस्तित्व में आने के बाद अब दिल्ली से देहरादून का सफर 6.5 घंटे से सिमटकर ढाई घंटे का रह जाएगा। 12,000 करोड़ रुपये की लागत के इस 213 किलोमीटर लंबे 'दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर' के निर्माण की शुरुआत 2021 में हुई थी।इस रास्ते से न केवल आम जनता का समय बचेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल के खर्च में भी कमी आएगी। लोगों का पहाड़ों पर घूमना अब पहले से ज्यादा आसान तो हो जाएगा, लेकिन इस सफर के साथ कई चुनौतियां भी सामने आई हैं।इस एक्सप्रेस वे के उद्घाटन से एक दिन पूर्व ही पांच वाहन इस मार्ग पर एक साथ दुर्घटना ग्रस्त हो गये। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि पहले से ही ट्रैफिक का बोझ झेल रही ये देवभूमि और उसके देहरादून मंसूरी हरिद्वार जैसे शहर क्या ऐसे फर्राटा मार्गों से एकसाथ उमड़ने वाली भीड़ का दबाव झेल पाएंगे। हालांकि इस मार्ग का एक पहलू यह भी है कि इसमें राजाजी पार्क क्षेत्र के ऊपर 12 किलोमीटर का गलियारा बनाया गया है। इससे जहां ट्रैफिक से वन्य जीव महफूज रहेंगे वहीं इस रास्ते से गुजरते हुए लोग वन्य जीवों के दीदार भी कर सकेंगे। इसके उद्घाटन के मौके पर लोगों में खूब उत्साह देखा गया और लोगों ने तिरंगे और भगवे लहराकर देहरादून सहारनपुर के बीच भारी संख्या में उमड़कर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। (-कुमार दुष्यंत)1
- The Aman Times 🚨 👉 दून पुलिस का “ऑपरेशन प्रहार” जारी 🍾 डोईवाला पुलिस ने लालतप्पड़ क्षेत्र में चेकिंग के दौरान शराब तस्कर को किया गिरफ्तार 📦 आरोपी के पास से 05 पेटी अवैध देशी शराब “माल्टा” बरामद 👤 गिरफ्तार आरोपी: कृष्णवीर (निवासी बिजनौर, हाल निवासी लालतप्पड़) ⚖️ पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर शुरू की कार्रवाई 👮♂️ पुलिस टीम की सतर्कता से अवैध शराब तस्करी पर लगा अंकुश1
- जनपद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर ऑपरेशन प्रहार के तहत कार्यवाही कर सख्ती से अनुपाल किये जाने हेतु आदेशित किया गया था। आदेश के अनुपालन मे प्रभारी निरीक्षक कोतवाली मंगलौर द्वारा वान्छित/ शातिर अभियुक्तो की गिरफ्तार हेतु अलग-अलग टीमो का गठन किया गया। तथा वांछित/शातिर अपराधियो की चुन-चुन कर गिरफ्तारी किये जाने हेतु अलग- अलग टास्क दिया गया है । कोतवाली मंगलौर पर माह नम्बर 2025 मे वादी वसीर अहमद द्वारा ई-एफआईआर के माध्यम से अपनी मोटर साईकिल को चोरी होने के सम्बन्ध मे दिनांक 25-11-26 को अभियोग पंजीकृत कराया गया। ऑपरेशन प्रहार के तहत आरोपित की गिरफ्तारी हेतु एक टीम को जो कि लगभग 06 माह से चोरी हुई मोटर साईकिल की बरामगी/ गिरफ्तारी आरोपित मे लगाया गया। जिसके फलस्वरुप मंगलौर पुलिस द्वारा आँपरेशन प्रहार के तहत निम्न आरोपित को मंगलौर से पकडा जिसके कब्जे से चोरी की गई मोटर साईकिल बरामद की गई। आँपरेशन प्रहार के तहत कार्यवाही लगातार जारी रहेगी। *नाम पता आरोपित* 1-शहबान उर्फ भाटू पुत्र अब्दुल्ला निवासी मलकपुरा कोत0 मंगलौर जिला हरिद्वार। *बरामदगी* मोटर साईकिल *पुलिस टीम* 1- उ0नि0 नितिन विष्ट 2- कानि0 विनोद 3- कानि0 मोहन पंवार1