*त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र हैश्री गुरु शरण जी महाराज* *पण्डोखर धाम में श्रद्धा मंच पर आयोजित हुआ दिव्य दरबार* पंडोखर सरकार का दिव्य दरबार विज्ञान से चलने वाला दरबार है यहां विज्ञान पर पद्धति से समझाया भी जाता है कि त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। विज्ञान की पद्धति की तुम तक हमारा यह एक पेड़ तैयार करने में मुझे 35 वर्ष व्यतीत हो गए हैं तब जाकर श्री पंडोखर सरकार दरवार एक विशाल बट वृक्ष की तरह सारी दुनिया में चर्चित है। अगर कोई मेरे द्वारा लगाए गए इस वृक्ष रूपी दरवार को चोट पहुंचाएगा तो मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूं। मैं जवाब देना भी जानता हूं। उक्त विचार पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने श्रद्धा मंच में उपस्थित सभी भक्तों के समक्ष व्यक्त किए। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि जैसे कि मशीन है तो बिना लाइट से नहीं चलती है इसी तरह से यह माइक भी विज्ञान परंपरा से संचालित हो रहा है। इसी तरह त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार का दिव्य दरबार भी परमात्मा की कृपा से चल रहा है। त्रिकालदर्शी दिव्य दरबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया भी हमारे एक दूसरे के पूरक हैं जो वैज्ञानिक परम्परा से संचालित हैं। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि हम आपके बीच में 35 वर्षों से हैं अभी तक तो कोई भी भाग लेता आदमी दो महीने नहीं चल पाता है। किसी के साथ आदमी 2 साल 4 साल चल पाता है। आज हम त्रिकालदर्शी दिव्या दरबार के माध्यम से 35 साल से चल रहे हैं। और मैं आज लगभग 40 वर्ष से इस गद्दी का संचालन कर रहा हूं। दुनिया की कंपनियां, एजेंसी 4 से 5 महीने का एक्सपीरियंस माग़ती है मुझे 35 वर्ष हो गए हैं दरवार चलाते। पण्डोखर दरवार में लिखी पर्ची की पुष्टि कहीं भी करवा सकते हो। पंडोखर धाम से जाने वाला व्यक्ति दुनिया भर में घूम कर पंडोखर में ही आता है और स्वीकारता है कि हमारा पंडोखर धाम ही भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। प्रचार लिखने वालों को हमारा खुला चैलेंज है कि मुझे पता है कि अपने ही बाप से बाप कहा जा सकता है किसी दूसरे के बाप से बाप नहीं कहा जा सकता। अपने गुरु के मान को रखना मेरा धर्म बनता है कोई कुछ भी कहे मैं किसी की सुनने वाला नहीं। सिंधु एवं चंबल नदी किनारे बरहा धाम में मेरी जन्म भूमि है हमारी मातृ भूमि हमें बहुत पसंद है और हम जन्म भूमि से बहुत प्यार करते हैं। श्रद्धा मंच पर मौजूद अतिथि संतों विद्वानों की मौजूदगी में पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या में मंच में मौजूद सभी भक्तों की मनोकामनाओं को सुनते हुए कई भक्तों के पर्चा बना कर चकित किया। *त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र हैश्री गुरु शरण जी महाराज* *पण्डोखर धाम में श्रद्धा मंच पर आयोजित हुआ दिव्य दरबार* पंडोखर सरकार का दिव्य दरबार विज्ञान से चलने वाला दरबार है यहां विज्ञान पर पद्धति से समझाया भी जाता है कि त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। विज्ञान की पद्धति की तुम तक हमारा यह एक पेड़ तैयार करने में मुझे 35 वर्ष व्यतीत हो गए हैं तब जाकर श्री पंडोखर सरकार दरवार एक विशाल बट वृक्ष की तरह सारी दुनिया में चर्चित है। अगर कोई मेरे द्वारा लगाए गए इस वृक्ष रूपी दरवार को चोट पहुंचाएगा तो मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूं। मैं जवाब देना भी जानता हूं। उक्त विचार पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने श्रद्धा मंच में उपस्थित सभी भक्तों के समक्ष व्यक्त किए। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि जैसे कि मशीन है तो बिना लाइट से नहीं चलती है इसी तरह से यह माइक भी विज्ञान परंपरा से संचालित हो रहा है। इसी तरह त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार का दिव्य दरबार भी परमात्मा की कृपा से चल रहा है। त्रिकालदर्शी दिव्य दरबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया भी हमारे एक दूसरे के पूरक हैं जो वैज्ञानिक परम्परा से संचालित हैं। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि हम आपके बीच में 35 वर्षों से हैं अभी तक तो कोई भी भाग लेता आदमी दो महीने नहीं चल पाता है। किसी के साथ आदमी 2 साल 4 साल चल पाता है। आज हम त्रिकालदर्शी दिव्या दरबार के माध्यम से 35 साल से चल रहे हैं। और मैं आज लगभग 40 वर्ष से इस गद्दी का संचालन कर रहा हूं। दुनिया की कंपनियां, एजेंसी 4 से 5 महीने का एक्सपीरियंस माग़ती है मुझे 35 वर्ष हो गए हैं दरवार चलाते। पण्डोखर दरवार में लिखी पर्ची की पुष्टि कहीं भी करवा सकते हो। पंडोखर धाम से जाने वाला व्यक्ति दुनिया भर में घूम कर पंडोखर में ही आता है और स्वीकारता है कि हमारा पंडोखर धाम ही भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। प्रचार लिखने वालों को हमारा खुला चैलेंज है कि मुझे पता है कि अपने ही बाप से बाप कहा जा सकता है किसी दूसरे के बाप से बाप नहीं कहा जा सकता। अपने गुरु के मान को रखना मेरा धर्म बनता है कोई कुछ भी कहे मैं किसी की सुनने वाला नहीं। सिंधु एवं चंबल नदी किनारे बरहा धाम में मेरी जन्म भूमि है हमारी मातृ भूमि हमें बहुत पसंद है और हम जन्म भूमि से बहुत प्यार करते हैं। श्रद्धा मंच पर मौजूद अतिथि संतों विद्वानों की मौजूदगी में पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या में मंच में मौजूद सभी भक्तों की मनोकामनाओं को सुनते हुए कई भक्तों के पर्चा बना कर चकित किया।
*त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र हैश्री गुरु शरण जी महाराज* *पण्डोखर धाम में श्रद्धा मंच पर आयोजित हुआ दिव्य दरबार* पंडोखर सरकार का दिव्य दरबार विज्ञान से चलने वाला दरबार है यहां विज्ञान पर पद्धति से समझाया भी जाता है कि त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। विज्ञान की पद्धति की तुम तक हमारा यह एक पेड़ तैयार करने में मुझे 35 वर्ष व्यतीत हो गए हैं तब जाकर श्री पंडोखर सरकार दरवार एक विशाल बट वृक्ष की तरह सारी दुनिया में चर्चित है। अगर कोई मेरे द्वारा लगाए गए इस वृक्ष रूपी दरवार को चोट पहुंचाएगा तो मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूं। मैं जवाब देना भी जानता हूं। उक्त विचार पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने श्रद्धा मंच में उपस्थित सभी भक्तों के समक्ष व्यक्त किए। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि जैसे कि मशीन है तो बिना लाइट से नहीं चलती है इसी तरह से यह माइक भी विज्ञान परंपरा से संचालित हो रहा है। इसी तरह त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार का दिव्य दरबार भी परमात्मा की कृपा से चल रहा है। त्रिकालदर्शी दिव्य दरबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया भी हमारे एक दूसरे के पूरक हैं जो वैज्ञानिक परम्परा से संचालित हैं। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि हम आपके बीच में 35 वर्षों से हैं अभी तक तो कोई भी भाग लेता आदमी दो महीने नहीं चल पाता है। किसी के साथ आदमी 2 साल 4 साल चल पाता है। आज हम त्रिकालदर्शी दिव्या दरबार के माध्यम से 35 साल से चल रहे हैं। और मैं आज लगभग 40 वर्ष से इस गद्दी का संचालन कर रहा हूं। दुनिया की कंपनियां, एजेंसी 4 से 5 महीने का एक्सपीरियंस माग़ती है मुझे 35 वर्ष हो गए हैं दरवार चलाते। पण्डोखर दरवार में लिखी पर्ची की पुष्टि कहीं भी करवा सकते हो। पंडोखर धाम से जाने वाला व्यक्ति दुनिया भर में घूम कर पंडोखर में ही आता है और स्वीकारता है कि हमारा पंडोखर धाम ही भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। प्रचार लिखने वालों को हमारा खुला चैलेंज है कि मुझे पता है कि अपने ही बाप से बाप कहा जा सकता है किसी दूसरे के बाप से बाप नहीं कहा जा सकता। अपने गुरु के मान को रखना मेरा धर्म बनता है कोई कुछ भी कहे मैं किसी की सुनने वाला नहीं। सिंधु एवं चंबल नदी किनारे बरहा धाम में मेरी जन्म भूमि है हमारी मातृ भूमि हमें बहुत पसंद है और हम जन्म भूमि से बहुत प्यार करते हैं। श्रद्धा मंच पर मौजूद अतिथि संतों विद्वानों की मौजूदगी में पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या में मंच में मौजूद सभी भक्तों की मनोकामनाओं को सुनते हुए कई भक्तों के पर्चा बना कर चकित
किया। *त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र हैश्री गुरु शरण जी महाराज* *पण्डोखर धाम में श्रद्धा मंच पर आयोजित हुआ दिव्य दरबार* पंडोखर सरकार का दिव्य दरबार विज्ञान से चलने वाला दरबार है यहां विज्ञान पर पद्धति से समझाया भी जाता है कि त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार दिव्य दरबार भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। विज्ञान की पद्धति की तुम तक हमारा यह एक पेड़ तैयार करने में मुझे 35 वर्ष व्यतीत हो गए हैं तब जाकर श्री पंडोखर सरकार दरवार एक विशाल बट वृक्ष की तरह सारी दुनिया में चर्चित है। अगर कोई मेरे द्वारा लगाए गए इस वृक्ष रूपी दरवार को चोट पहुंचाएगा तो मैं शांत बैठने वालों में से नहीं हूं। मैं जवाब देना भी जानता हूं। उक्त विचार पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने श्रद्धा मंच में उपस्थित सभी भक्तों के समक्ष व्यक्त किए। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि जैसे कि मशीन है तो बिना लाइट से नहीं चलती है इसी तरह से यह माइक भी विज्ञान परंपरा से संचालित हो रहा है। इसी तरह त्रिकालदर्शी पण्डोखर सरकार का दिव्य दरबार भी परमात्मा की कृपा से चल रहा है। त्रिकालदर्शी दिव्य दरबार, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया भी हमारे एक दूसरे के पूरक हैं जो वैज्ञानिक परम्परा से संचालित हैं। श्री गुरु शरण जी महाराज ने कहा कि हम आपके बीच में 35 वर्षों से हैं अभी तक तो कोई भी भाग लेता आदमी दो महीने नहीं चल पाता है। किसी के साथ आदमी 2 साल 4 साल चल पाता है। आज हम त्रिकालदर्शी दिव्या दरबार के माध्यम से 35 साल से चल रहे हैं। और मैं आज लगभग 40 वर्ष से इस गद्दी का संचालन कर रहा हूं। दुनिया की कंपनियां, एजेंसी 4 से 5 महीने का एक्सपीरियंस माग़ती है मुझे 35 वर्ष हो गए हैं दरवार चलाते। पण्डोखर दरवार में लिखी पर्ची की पुष्टि कहीं भी करवा सकते हो। पंडोखर धाम से जाने वाला व्यक्ति दुनिया भर में घूम कर पंडोखर में ही आता है और स्वीकारता है कि हमारा पंडोखर धाम ही भूत भविष्य वर्तमान का केंद्र है। प्रचार लिखने वालों को हमारा खुला चैलेंज है कि मुझे पता है कि अपने ही बाप से बाप कहा जा सकता है किसी दूसरे के बाप से बाप नहीं कहा जा सकता। अपने गुरु के मान को रखना मेरा धर्म बनता है कोई कुछ भी कहे मैं किसी की सुनने वाला नहीं। सिंधु एवं चंबल नदी किनारे बरहा धाम में मेरी जन्म भूमि है हमारी मातृ भूमि हमें बहुत पसंद है और हम जन्म भूमि से बहुत प्यार करते हैं। श्रद्धा मंच पर मौजूद अतिथि संतों विद्वानों की मौजूदगी में पण्डोखर पीठाधीश्वर श्री गुरु शरण जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या में मंच में मौजूद सभी भक्तों की मनोकामनाओं को सुनते हुए कई भक्तों के पर्चा बना कर चकित किया।
- भांडेर नगर के जनपद पंचायत कार्यालय के सभागार में शासन की महत्वाकांक्षी योजना जनसुनवाई कलेक्टर के आदेश पर मंगलवार की सुबह 11 बजे से दोपहर 01 आयोजित हुई। जनसुनवाई में भांडेर एसडीएम सोनाली राजपूत ने आवेदकों की समस्याओं व शिकायतों को सुना और उनका निराकरण किया। कुछ प्रकरणों में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही एवं शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। एसडीएम ने बताया कि जनसुनवाई में बिजली के बिल की समस्या, सड़क की समस्या, जलभराव की समस्या के आवेदन पत्र सबसे ज्यादा आये है जिनको उचित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रेषित किए गए हैं। जल्दी ही उन सभी आवेदनों का निराकरण किया जाएगा।1
- ब्राह्मणों के ऐतिहासिक योगदान एवं दामोदर यादव को आइना दिखाया सूर्य मंदिर के पुजारी ने1
- दतिया में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध श्री पीताम्बरा पीठ मंदिर स्थित हरिद्रा सरोवर 31 हजार दीपों की रोशनी से भव्य रूप से जगमगा उठा। दीपों की अलौकिक आभा ने पूरे परिसर को दिव्य और आकर्षक बना दिया, जिसे देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस विशेष अवसर पर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी “एक दीप माई के नाम” प्रज्ज्वलित करने का अवसर मिला, जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े सपरिवार शामिल हुए और दीपदान कर मां के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। आयोजक डॉ. राजू त्यागी ने बताया कि 31 हजार दीपों का यह आयोजन पिछले 5 वर्षों से लगातार किया जा रहा है और यह परंपरा निरंतर जारी है। अक्षय तृतीया के मौके पर आयोजित इस दीपोत्सव ने न केवल धार्मिक माहौल को जीवंत किया, बल्कि श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और उत्साह का संचार भी किया।1
- मां बगलामुखी देवी की जयंती के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध तांत्रिक पीठ श्री पीतांबरा पीठ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी क्रम में कई वीआईपी भी मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन कर रहे हैं। मंगलवार सुबह आतंक विरोधी दस्ता के प्रमुख मनिंदरजीत सिंह बिट्टा मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना की। इस दौरान वे मां धूमावती की आरती में भी शामिल हुए और ध्यान लगाया। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित स्वामी जी महाराज की समाधि, अमृतसर महादेव एवं ध्यान हाल में जाकर दर्शन किए। साथ ही महाभारत कालीन वानखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक भी किया। करीब डेढ़ घंटे तक मंदिर में प्रवास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और पुलिस बल तैनात रहा।1
- दतिया। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर श्री पीताम्बरा पीठ स्थित हरिद्रा सरोवर भक्ति और आस्था की रोशनी से जगमगा उठा। यहां आयोजित भव्य दीपदान कार्यक्रम में 31 हजार दीपों की अलौकिक रोशनी ने पूरे सरोवर को स्वर्गिक आभा से भर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचे और उन्हें भी “एक दीप माई के नाम” प्रज्ज्वलित करने का अवसर मिला। दीपों की श्रृंखलाओं से सजा हरिद्रा सरोवर श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत केंद्र बन गया। कार्यक्रम में कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े भी सपरिवार शामिल हुए और विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजक डॉ. राजू त्यागी ने बताया कि यह दीपदान की परंपरा पिछले 5 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है और हर वर्ष इसमें श्रद्धालुओं की संख्या और उत्साह बढ़ता जा रहा है। अक्षय तृतीया के इस विशेष आयोजन ने दतिया को एक बार फिर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक भव्यता के केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया।1
- Post by Adiya dantre 99816018601
- Post by Abhishek Jain3
- पंडोखर धाम महोत्सव में छोटे गुरु जी की मनमोहक प्रस्तुति दतिया स्थित पंडोखर धाम में चल रहे भव्य महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक मंच पर छोटे गुरु जी पं. आयुष्मान बाजपेई की आकर्षक प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंच पर उनकी मधुर वाणी, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और धार्मिक प्रसंगों की सहज व्याख्या ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। उपस्थित श्रद्धालु उनकी प्रस्तुति में पूरी तरह डूबे नजर आए और तालियों की गूंज से मंच बार-बार गूंज उठा। छोटे गुरु जी ने अपने संबोधन में धर्म, संस्कार और भारतीय संस्कृति के महत्व को सरल भाषा में समझाया, जिससे हर वर्ग के लोग जुड़ सके। महोत्सव में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। आयोजन समिति के अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों से समाज में सकारात्मक संदेश और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रसार होता है।1